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16/09/2021
09/08/2021

यह संसार एक रंगमंच है और हमें अपने अपने हिस्से का रोल प्ले करके जाना है प्रश्न यह है कि हमने अपना रोल कितने अच्छी तरह से प्ले किया और शायद हम अपना रोल अच्छे से प्ले करते भी हैं लेकिन मुश्किल तब खड़ी होती है जब मानव मन की कमजोरियां उस पर हावी होने लगती हैं और कमजोरी है हमारा भावनात्मक लगाव एक्टिंग करते करते हम यह भूल जाते हैं कि हम एक्टिंग कर रहे हैं हम उसे वास्तविक जीवन समझने लगते हैं और उस रिश्ते से मोह कर बैठते हैं मोह का यह बंधन हमारे दुखों का आरंभ है इसलिए जागृत होना जरूरी है जरूरी है यह समझना ये संसार एक रंगमंच है

09/08/2021

आपको कोई नहीं रोक रहा अगर कोई रोक रहा है तो आप खुद हैं अपने आप को रोकना बंद कीजिए अपने मन की बात को कहना अपने मन की बात को करना करना शुरू कीजिए इसको करने के लिए आपको कोई नहीं रोक रहा अगर कोई रोक रहा है वह आप स्वयं हैसमाज के इस मकड़जाल से खुद को मुक्त कीजिए कुछ पल अपने को भी दिजिए

09/08/2021

जीवन में हम हमेशा दूसरों के लिए जीते हैं कभी माता-पिता के लिए कभी भाई बहनों के लिए कभी पति के लिए कभी बच्चों के लिए कभी रिश्तेदारों के लिए कभी जीवन में हम यह नहीं सोचते हम अपने लिए कब जिये वैसे आरोप तो हम पर यह है कि हम दूसरों के बारे में नहीं सोचते लेकिन सच यह है कभी हम अपने बारे में नहीं सोचते हम अकेले आए थे और अकेले ही जाना है कभी इस विषय पर विचार नहीं करते कुछ देर अपने साथ बैठो कुछ देर अपने लिए भी जिओ कुछ पल अपने लिए भी निकालो दूसरों के शौक पूरा करते-करते हम अपने शौक भूल जाते हैं दूसरों से डर लगता है और हम उन्हीं से डरने लगते हैं जिनके लिए हम जीते हैं तो दोस्तों कुछ देर ही सही कुछ पल ही सही अपने लिए भी निकालो कभी अपने साथ भी बैठो

05/08/2021

इंसान जब अपने आप से प्यार करने लगता है तो वह हर उस चीज से प्यार करने लगता है जिसे वह वास्तव में चाहता है शायद दुनिया का सबसे बड़ा सच यही है कि इंसान खुद अपने आप से प्यार करें फिर संसार की सारी वर्जनाएं अपने आप टूट जाते हैं और वह अपने खुद के सच को स्वीकार करने लगता है कि हां मैं यही चाहता हूं और खुद से खुद का प्यार ही जीवन का आरंभ है

29/07/2021

आत्मा अजर है अमर है परमात्मा का अंश है यह समाज यह देश पर यह सब हमारे अपने बनाए हुए हैं उनसे सबसे ऊपर है आत्मा की सच्चाई और सच्चाई है इस सबसे ऊपर हैं हम जब कभी भी कोई काम करें अपनी आत्मा से पूछो हमें क्या करना है हमारा सच्चा मार्गदर्शक सबसे पहले हमारी अपनी आत्मा है सच्चा सच्चा साथी सच्चा मार्गदर्शक अगर कोई है तो वह है हमारी अंतरात्मा इसलिए सबसे पहले अपनी अंतरात्मा की सुनो जिस दिन आप अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने लगेंगे उसी दिन आपके जीवन की बहुत सारी मुश्किलें अपने आप दूर हो जाएंगे सच्चे जीवन का और शांत जीवन का यही आरंभ है

05/07/2021

भारत की प्राचीन संस्कृति महिलाओं को सम्मानित स्थान प्रदान करती रही है समय बदला परिस्थितियां बदली और धीरे-धीरे समाज का संपूर्ण परिवेश ही बदल गया महिलाएं एक बेचारी के रूप में उभर कर सामने आने लगी शारीरिक और मानसिक अत्याचार सहने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं बचा कानून बने सामाजिक संस्थाएं सामने आने लगी और उन्हें उनकी वर्तमान स्थिति से बाहर लाने का प्रयास शुरू हो गया सही मायने में अगर देखा जाए तो यह बदलाव बच्चे के पालन पोषण के समय ही होना चाहिए हर बच्चे का पालन पोषण एक पूर्ण व्यक्तित्व के रूप में होना चाहिए हर बच्चे को एक पूर्ण व्यक्तित्व के रूप में विकसित किया जाना चाहिए स्त्री और पुरुष के बीच प्रकृति ने ही कुछ अंतर पैदा किया है इसलिए जहां कोमलता लिए हुए हैं वहीं पुरुष कठोरता लिए हुए हैं यही कठोरता और कोमलता मिलकर एक पूर्णता को प्रदान करते हैं परंतु स्त्रियों के कोमलता के गुण को उनकी कमजोरियां समझा जाने लगा और स्त्रियों ने भी इसे अपनी कमजोरी स्वीकार कर लिया और यहीं से पुरुष द्वारा स्त्री पर शासन करने की प्रक्रिया शुरू हुई स्त्री की कोमलता प्रकृति प्रदत्त है क्योंकि वह मातृत्व प्रधान है परंतु आत्मबल और आत्मशक्ति दोनों में समान है अतः समानता के इस गुण को अपनाने की आवश्यकता है गुण और कमजोरी की बीच की सीमा रेखा को पहचानना होगा यही आरंभ है

26/06/2021

मन के हारे हार है मन के जीते जीत कहने का मतलब यह है अगर हमारा मन मजबूत है तो हम हर परिस्थिति का डटकर मुकाबला कर सकते हैं और अपनी हर खराब परिस्थिति से खुद को निकाल कर बाहर ला सकते हैं बस जरूरत है एक शुरुआत करने की

24/06/2021

हम विशेष रूप से महिलाओं से बात कर रहे हैं प्रकृति ने महिलाओं को बहुत सारे गुण दिए हैं जो वह गुण हमारे ऊपर हावी होने लगते हैं तो वह हमारी कमजोरी बनने लगते हैं मैं समस्त महिलाओं से यह कहना चाहती हूं कि गुणों को तब तक गुण रहने दे जब तक वह हमारी कमजोरी बन कर हमारे ऊपर हावी ना हो यदि आप समाज में रहकर किसी भी अत्याचार या अनाचार का सामना कर रही हैं तो फिर अपने उस छुपे हुए गुण को जो दुर्गा और काली में था उन्हें हो पर लाइए और समाज को यह बताइए कि आप छुईमुई गुड़िया नहीं हैं आप दुर्गा भी हो सकती हैं

23/06/2021

गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि अत्याचार सहना और अत्याचार करना दोनों ही अपराध है अगर आप किसी अत्याचार का शिकार हो रहे हैं तो उसका खुलकर विरोध करिए ईश्वर आपके साथ हैं हम आपके साथ हैं कानून आपके साथ हैं

23/06/2021

जीवन में अगर समस्याएं हैं तो समाधान भी हैं बस जरूरत है उस समाधान को तलाश करने की इच्छा को जागृत करने की

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