10/04/2023
अजानन् यो नरो ब्रूयात् अपराधं किं अतः परं।। यह श्लोक बृहद पराशर स्मृति में हमारे भारतीय प्राचीन पुस्तक में लिखा हुआ है और यह बताया गया है कि यह एक बहुत बड़ा अपराध होगा कि वगैर किसी दक्षता हासिल किये, आवश्यक ज्ञान प्राप्त किये कोई व्यक्ति ज्योतिष विज्ञान का अथवा अधिवक्ता का अथवा चिकित्सक का दायित्व निभाये।