04/02/2026
⚖️ अग्रिम जमानत के लिए पहले सेशन कोर्ट जाना अनिवार्य नहीं
(Case Law के साथ विस्तृत जानकारी)
अक्सर यह गलतफहमी फैली होती है कि अग्रिम जमानत के लिए पहले सेशन कोर्ट जाना ज़रूरी है, और उसके बाद ही हाई कोर्ट जाया जा सकता है।
➡️ यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है।
📜 कानूनी प्रावधान – धारा 438 CrPC
धारा 438 दण्ड प्रक्रिया संहिता के अनुसार:
कोई भी व्यक्ति, जिसे अपनी गिरफ्तारी का युक्तियुक्त भय हो, वह हाई कोर्ट या सेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकता है।
👉 कानून में यह कहीं नहीं लिखा कि पहले सेशन कोर्ट जाना ही अनिवार्य है।
⚖️ महत्वपूर्ण Case Laws
🔹 Gurbaksh Singh Sibbia vs State of Punjab (1980) 2 SCC 565
➡️ माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:
अग्रिम जमानत एक मौलिक स्वतंत्रता से जुड़ा अधिकार है
इसे तकनीकी या संकीर्ण दृष्टिकोण से सीमित नहीं किया जा सकता
🔹 Siddharam Satlingappa Mhetre vs State of Maharashtra (2011) 1 SCC 694
➡️ सुप्रीम कोर्ट ने कहा:
व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि है
अग्रिम जमानत को सामान्य नियम के रूप में देखा जाना चाहिए, अपवाद नहीं
🔹 Sushila Aggarwal vs State (NCT of Delhi) (2020) 5 SCC 1
➡️ संविधान पीठ का निर्णय:
अग्रिम जमानत समय-सीमा से बंधी नहीं होती
कोर्ट परिस्थितियों के अनुसार शर्तें लगा सकती है
सीधे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने पर कोई कानूनी रोक नहीं
🔹 High Court Views (सार रूप में)
कई हाई कोर्टों ने यह माना है कि:
यदि मामला गंभीर है
या तत्काल गिरफ्तारी की आशंका है
या सेशन कोर्ट से प्रभावी राहत की संभावना नहीं है
तो सीधे हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत दाखिल की जा सकती है।
📝 अग्रिम जमानत कैसे लगाई जाती है (Procedure)
1️⃣ FIR दर्ज हो चुकी हो या गिरफ्तारी का वास्तविक भय हो
2️⃣ धारा 438 CrPC के अंतर्गत याचिका तैयार की जाती है
3️⃣ याचिका में ये बातें स्पष्ट की जाती हैं:
अपराध की प्रकृति
झूठे फँसाए जाने की आशंका
सहयोग करने की मंशा
फरार होने की संभावना नहीं
4️⃣ सेशन कोर्ट या सीधे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल
5️⃣ कोर्ट द्वारा नोटिस / अंतरिम संरक्षण / अंतिम आदेश
✅ निष्कर्ष (Conclusion)
✔ अग्रिम जमानत के लिए पहले सेशन कोर्ट जाना अनिवार्य नहीं
✔ आवेदक के पास सेशन कोर्ट या हाई कोर्ट – दोनों विकल्प हैं
✔ मामला, परिस्थिति और कानूनी रणनीति पर निर्भर करता है
✔ सही सलाह से तुरंत राहत संभव है
📢 अपने अधिकार जानिए — कानून है सबके लिए समान
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