आरम्भ नये युग का

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27/04/2026
अभी कल ही भारत को "नर्क का गड्ढा" बोलने वाले अमेरिका ने भारतीय सोलर पैनल पर 123 % का टैरिफ ठोक दिया। लेकिन हमें घबराने औ...
27/04/2026

अभी कल ही भारत को "नर्क का गड्ढा" बोलने वाले अमेरिका ने भारतीय सोलर पैनल पर 123 % का टैरिफ ठोक दिया। लेकिन हमें घबराने और डरने की बिलकुल जरुरत नहीं है महामानुष की आंखों से लेजर लाइट निकल रही है जिससे 2000 रील्स तैयार होगी और उसी की प्रभाव से अमेरिका भस्म हो जाएगा और वैसे भी इनके शरीर में गर्म सिंदूर भी दौड़ रहा है कौन बचेगा

1947 में देश के पास करीब 4–4.5 लाख सैनिक थे, और बंटवारे के बाद आधे संसाधन चले गए। वायुसेना और नौसेना तो नाम भर की थी। उस...
25/04/2026

1947 में देश के पास करीब 4–4.5 लाख सैनिक थे, और बंटवारे के बाद आधे संसाधन चले गए। वायुसेना और नौसेना तो नाम भर की थी। उस हालत से 2014 तक 13,25,000 एक्टिव सैनिक खड़े करना साथ में 11–12 लाख रिजर्व और पैरामिलिट्री फोर्स तैयार करना दशकों की प्लानिंग और फैसलों का नतीजा था।

नेहरू जी के टाइम 1958 में DRDO बना, जब देश में लोग खाने के लिए लाइन में खड़े थे तब रिसर्च की नींव रखी गई। 1961 में INS Vikrant आया, एशिया का पहला एयरक्राफ्ट कैरियर, उस दौर में जब कई देशों के पास ये सपना भी नहीं था।

1960 में BRO बना ताकि सीमा तक सड़कें पहुंचें, NDA और NDC बनाए गए ताकि सेना को प्रोफेशनल ट्रेनिंग मिले। ये वो नींव थी जिस पर आज तुम “सुपरपावर” का सपना देख रहे हो।

1962 में चीन से हार मिली, और वहीं से असली टर्निंग पॉइंट आया। रक्षा बजट 1.5–1.8% से बढ़ाकर 3%+ किया गया, सेना का विस्तार शुरू हुआ। 1965 के बाद शास्त्री ने सोवियत यूनियन से मजबूत डिफेंस टाई-अप किया, जिससे MiG जैसे फाइटर आने लगे।

इंदिरा गांधी के टाइम 1974 में परमाणु परीक्षण करके दुनिया को बताया कि ये देश सिर्फ भाषण नहीं देता। 1983 में IGMDP शुरू हुआ, जिससे अग्नि, पृथ्वी, आकाश, नाग, त्रिशूल जैसी मिसाइलें बनीं। आज जो तुम मिसाइलों पर छाती ठोकते हो, उसकी फैक्ट्री वहीं लगी थी।

विजयंत टैंक बना, INS Chakra जैसी परमाणु पनडुब्बी की शुरुआत हुई।

राजीव गांधी के समय मिराज 2000 खरीदे गए, जो कारगिल में दुश्मन के बंकर उड़ा रहे थे जब बाकी फाइटर जूझ रहे थे। 1986 में बोफोर्स तोप आई, जिसको तुम लोग सिर्फ घोटाला बोलकर भूल जाते हो, लेकिन उसी ने कारगिल में पहाड़ों पर दुश्मन को घुटनों पर ला दिया। उसी दौर में अग्नि और पृथ्वी के टेस्ट शुरू हुए।

नरसिम्हा राव के समय सुखोई-30 की डील शुरू हुई, जो आज भारतीय वायुसेना की रीढ़ है। ये कोई छोटा फैसला नहीं था, ये लॉन्ग-टर्म स्ट्रेटेजी थी।

मनमोहन सिंह के समय रक्षा का असली स्केल बढ़ा। 2004 में ₹77,000 करोड़ का बजट 2014 तक ₹2,24,000 करोड़ पहुंचा। INS Arihant आई, जिससे भारत न्यूक्लियर ट्रायड में शामिल हुआ। C-17 ग्लोबमास्टर और C-130J जैसे हैवी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट आए।

अग्नि-V टेस्ट हुआ, जो इंटरकॉन्टिनेंटल लेवल की मिसाइल है। राफेल डील की नींव भी इसी टाइम रखी गई।

आप ये मत भूलीए, HAL, BEL, MDL, 41 ऑर्डनेंस फैक्ट्री, ये सब उसी दौर में खड़े हुए। तेजस का प्रोजेक्ट 1980s में शुरू हुआ, DRDO ने मिसाइलें बनाई, रडार सिस्टम बनाए। मतलब “आत्मनिर्भरता” कोई 2014 के बाद का जुमला नहीं, ये 50 साल पुरानी मेहनत का रिजल्ट है

सैनिकों का घर सिर्फ “जय जवान” बोलने से नहीं चलता। उस टाइम 6 पे कमीशन लागू हुए, सैलरी 20–40% तक बढ़ी। MSP शुरू हुआ। ECHS से रिटायर्ड सैनिकों को इलाज मिला। CSD कैंटीन, फैमिली हाउसिंग (MAP), OROP की प्रक्रिया 2014 तक शुरू हो चुकी थी।

ये भक्त ब्रिगेड पर वही लोग हैं जो मोबाइल पर रील देखते-देखते इतिहास का पोस्टमार्टम कर देते हैं। इन्हें लगता है 2014 से पहले देश में बस अंधेरा था और फिर अचानक सूरज निकला।

असलियत ये है कि ये लोग उस घर में रह रहे हैं जिसकी नींव किसी और ने डाली, लेकिन क्रेडिट ऐसे लेते हैं जैसे खुद ईंट उठाई हो।

देश की रक्षा व्यवस्था कोई एक पार्टी का जादू नहीं है, ये 70 साल की मेहनत, गलत फैसले, सुधार और रिसर्च का कॉम्बिनेशन है। लेकिन तुम लोग उसे भी मिटाकर “पहले कुछ नहीं था” का ढोल पीटते हो, क्योंकि सच मान लिया तो तुम्हारी पूरी कहानी ढह जाएगी।

देशभक्ति का मतलब ये नहीं कि आंख बंद करके नारे लगाओ। असली देशभक्ति ये है कि जिसने काम किया, उसका नाम लो, चाहे वो तुम्हारे पसंदीदा खांचे में फिट बैठे या नहीं।

मोदी ने भीषण हुंकार किया, अपना स्वरूप-विस्तार किया,डगमग-डगमग दिग्गज डोले, प्रधान कुपित होकर बोलेकर सके प्रपंच, तो साध मु...
19/04/2026

मोदी ने भीषण हुंकार किया,
अपना स्वरूप-विस्तार किया,
डगमग-डगमग दिग्गज डोले,
प्रधान कुपित होकर बोले
कर सके प्रपंच, तो साध मुझे,
राहुल ओ राहुल ! बाँध मुझे।

यह देश सकल मुझमें लय है,
रेट यहां सबका तय है,
मुझमें विलीन सब न्यायमूर्ति,
मुझमें विलीन पै'केजपूर्ति
प्रमोशन खेलते है मुझमें,
कॅरियर डूबते है मुझमें।

गौतम मेरा है दीप्तभाल,
है अनिल मेरा वक्षस्थल विशाल,
भगत परिधि- वृंद घेरे हैं,
आईबी-ईडी पग मेरे हैं।
लाठी, टोपी, भगवे, निक्कर,
सब हैं मेरे बक्से अन्दर।

दृग हों तो दृश्य अकाण्ड देख,
मुझमें सारा ब्रह्माण्ड देख,
चर-अचर जीव, जग, क्षर-अक्षर,
नश्वर मनुष्य है पार्टी अमर।
शत कोटि बूथ, शत कोटि मत,
शत कोटि पैंतरे, जबरजस्त

शत कोटि रुपये, शत कोटि चाल,
शत कोटि रन्ध्र, सिस्टम के काल
हो सके अगर तो साध इन्हें,
राहुल ओ राहुल, बाँध इन्हें।

टीवी, मीडिया, समाचार देख,
ये झूठ भरे अखबार देख
यह देख, खबर का फेक सृजन,
ये देख विज्ञापन का अर्पण,
पेड़-न्यूज, से पटी भू है,
चल खोज, इसमें कहाँ तू है।

शक्लो में मुर्दन जाल देख,
जन के नीचे पाताल देख,
मुट्ठी में तीनों काल देख,
मेरा स्वरूप विकराल देख।
सब कष्ट मुझी से पाते हैं,
फिर लौट मुझी में आते हैं।

जिह्वा से कढ़ती ज्वाल सघन,
जेबों में भरा हुआ है धन
पड़ जाती मेरी दृष्टि जिधर,
सरकार बनी हर कीमत पर

मैं जभी खोलता हूँ लोचन,
प्रतिनिधि आते बिकने स्वयं
बाँधने मुझे तू आयी है,
प्रपंच बड़े क्या लाई है?

लड़ने की हिम्मत लायेगा,
क्या धूर्त बड़ी बन पाएगा??
जो मशीन साध न सकती है,
वो मुझे बांध क्या सकती है
तो ले, मैं अब जाता हूँ,
अन्तिम संकल्प सुनाता हूँ।

इलेक्शन नहीं, अब रण होगा,
और रिजल्ट मरण होगा।
फण शेषनाग का डोलेगा,
विकराल काल मुँह खोलेगा।
हिन्दू मुस्लिम कर लूटेंगे ,
विष-बाण बूँद-से छूटेंगे,
वायस-श्रृगाल सुख लूटेंगे,
सौभाग्य कर्नाटक के फूटेंगे।

आखिर तू भूशायी होगी,
कुर्सी की पर, दायी होगी।
कुर्सी की पर, दायी होगी

एक समय की बात है, एक राज्य में एक राजा रहता था। उसका नाम था  #रंगीलाल। वह बहुत ही  #तमाशे बाज  #राजा था—उसे शासन चलाने स...
17/04/2026

एक समय की बात है, एक राज्य में एक राजा रहता था। उसका नाम था #रंगीलाल। वह बहुत ही #तमाशे बाज #राजा था—उसे शासन चलाने से ज्यादा मज़ा नाच-गाने, खेल-तमाशे और दिखावे में आता था।
राजा हर दिन महल में नए-नए #मनोरंजन करवाता—कभी नाचने वाली बुलाता, कभी बाजीगरों के करतब, तो कभी नकली युद्ध का खेल। पूरा दरबार हँसी-ठिठोली में लगा रहता। लेकिन इस बीच राज्य की हालत धीरे-धीरे बिगड़ने लगी।
मंत्री कई बार समझाते, “महाराज, प्रजा #परेशान है। खेत सूख रहे हैं, लोग भूखे हैं, खजाना खाली हो रहा है।”
लेकिन राजा हँसकर कहता, “अरे! जिंदगी तमाशा है, इसे हँसते-हँसते जीना चाहिए!”
एक दिन राज्य में भयंकर #सूखा पड़ गया। नदियाँ सूख गईं, फसलें बर्बाद हो गईं। लोग भूखे-प्यासे महल के बाहर मदद के लिए आने लगे।
लेकिन राजा ने फिर भी तमाशा करवाया—इस बार “बारिश का नाटक”। नकली बादल, पानी के छिड़काव और ढोल-नगाड़ों के साथ दरबार में शो हुआ।
प्रजा यह देखकर गुस्से से भर गई।
उसी रात, एक बुजुर्ग किसान महल में घुस आया और बोला, “महाराज, हमें #तमाशा नहीं, #रोटी चाहिए। हमें दिखावा नहीं, सहारा चाहिए।”
उसकी बात सुनकर राजा पहली बार चुप हो गया।
अगले दिन उसने देखा—महल के बाहर हजारों लोग भूख से तड़प रहे हैं। तब उसे अपनी #गलती का एहसास हुआ।🤔

♦️ पीएम के काफिले में बार बार एंबुलेंस कैसे घुस जाती है ?SPG सुरक्षा प्रोटोकॉल इतने सख्त हैं कि पीएम के काफिले में कोई ब...
12/04/2026

♦️ पीएम के काफिले में बार बार एंबुलेंस कैसे घुस जाती है ?

SPG सुरक्षा प्रोटोकॉल इतने सख्त हैं कि पीएम के काफिले में कोई बाहरी एंबुलेंस तो छोड़ो, कोई परिंदा भी नहीं घुस सकता ! तो बार बार एम्बुलेंस ऐसे कैसे घुस जाती है ?

एम्बुलेंस में कुछ भी हो सकता है ? पुलवामा में ऐसे ही विस्फोटक से भरी कार ने दर्जनों जवानों की हत्या कर दी थी ! इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का उदाहरण भी हमारे सामने है ! मगर बाहरी एंबुलेंस घुसती है और पीएम उसे पास देते हैं, फोटो और वीडियो भी मिनटों में सामने आ जाती हैं और फिर मीडिया इसे बिग ब्रेकिंग न्यूज बता कर चलाती है !

पीएम के काफिले की सुरक्षा में लगी SPG दुनिया के सबसे सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल में से एक को फालो करती है ! पीएम जब कार से यात्रा करते हैं, तो सुरक्षा "Blue Book" नामक गाइडलाइंस पर आधारित होती है, जो गृहमंत्रालय द्वारा जारी की गई है !

इसके तहत यात्रा से 3 दिन पहले SPG Advance Security Liaison (ASL) मीटिंग आयोजित करता है ! इसमें Intelligence Bureau (IB), राज्य पुलिस और जिलाधिकारी आदि शामिल होते हैं ! जिस रूट से जाने वाले होते हैं उसे पूरी तरह सैनिटाइज किया जाता है, ब्रिज, नाले, भीड़भाड़ वाले इलाके आदि चेक होते हैं और रास्ते में पड़ने वाले हर घर, दुकान, भवन की तलाशी ली जाती है ! किसी अनहोनी को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक रूट, आपातकालीन योजना, प्रधानमंत्री के लिए सुरक्षित घर और अस्पताल पहले से तय होते हैं और यह एलर्ट मोड में रहते हैं !

घंटों पहले से बैरिकेटिंग करके रास्ते बंद कर दिए जाते हैं, चेतावनी देते हुए सायरन बजाती पायलट कार काफिले से 10-15 मिनट आगे चलती है ! राज्य पुलिस और लोकल फोर्स रूट क्लियर करती है और ट्रैफिक कंट्रोल करके Sterile Zone बनाया जाता है जिससे कोई अनधिकृत व्यक्ति/वाहन काफिले में नहीं आ सकता, भले ही एंबुलेंस हो !

1 किलोमीटर लंबे काफिले में दर्जनों Toyota Fortuner, Range Rover, BMW आदि वाहन में SPG कमांडो रहते हैं ! यहां तक कि NSG शार्पशूटर भी साथ होते हैं, जो किसी भी अनिधिकृत वाहन या व्यक्ति को पास आने की कोशिश में रोकते हैं या उड़ा देते हैं !

मगर इसकी ज़रूरत नहीं पड़ती क्योंकि कई लेयर की सिक्योरिटी होती है ! पहले तो Outer Security के तहत राज्य पुलिस और लोकल फोर्स ट्रैफिक कंट्रोल करते हैं और उस रूट पर किसी को नहीं जाने देते, रूट पर ट्रैफिक बैरियर लगाकर रास्ते ही बंद दिए जाते हैं ! और फिर पीछे से काफिले में घुस कर 1 किलोमीटर चल कर पीएम की कार तक पहुंचना असंभव है ! काफिले के पिछले सिरे से पीएम की गाड़ी तक कमांडो से भरी हुई कम से कम 20-25 गाड़ियां होती हैं, जिन्हें पार करना असंभव है !

लेकिन पता नहीं यह कौन सी एंबुलेंस है जो बिना सुरक्षा जांच और SPG की क्लियरेंस के काफिले में घुस भी जाती है और 20-25 कमांडो से भरी गाड़ियों को पार करके पीएम की गाड़ी तक बार बार पहुंच भी जाती है ! कोई भी सुरक्षाकर्मी, कमांडो एंबुलेंस को रोककर उसके ड्राइवर से कोई सवाल भी नहीं करते, कोई तलाशी भी नहीं लेते !

✋ यह तो सुरक्षा में गंभीर breach है !
ऐसा बार बार हो रहा है, इसकी तो उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार सुरक्षा अधिकारियों और कमांडोज को तुरंत बर्खास्त कर देना चाहिए !

✋ बार बार हो रही इस लापरवाही की वजह से लोगों को ऐसे ऐसे मीम बना बना कर मजाक उड़ाने का मौका भी मिल जाता है ... यह अच्छी बात नहीं है !

✋ इसलिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अति आवश्यक है !

गजब ही इत्तफाक होता है कि मोदी जी जब भी रोड पर काफिले सहित चलते है तो अचानक से उनकी गाड़ी को एक एंबुलेंस ओवरटेक करती हुई...
12/04/2026

गजब ही इत्तफाक होता है कि मोदी जी जब भी रोड पर काफिले सहित चलते है तो अचानक से उनकी गाड़ी को एक एंबुलेंस ओवरटेक करती हुई निकलती है , और तो और उसी ओवरटेक पर मीडिया कैमरामैन वही खड़े मिलते है और एकदम प्रॉपर वीडियो शूट होती है

वैसे ये पहली बार नहीं हुआ है जब भी राज्यों के चुनाव होते है ये एम्बुलेंस वाला सिस्टम जरूर होता है वैसे पीएम के काफिले में चिड़ी भी नहीं घुस सकती है पीएम क्या सीएम के लिए रोड जमा साफ कर दिया जाता है

ऐसे ऐसे इतिफाक और भी बहुत है जैसे कि हर रैली में कोई एक ऐसा कार्यकर्ता जरूर मिलेगा जिसके हाथ में मोदी जी की पेटिंग होगी और वाइब्रेशन करते शरीर के साथ रोकर पेटिंग को ऊपर की तरफ की जाएगी , फिर मोदी जी कहेंगे कि ये पेटिंग ले लो अगर इसपर तुम्हारा एड्रेस लिखा होगा तो मै तुमको चिट्ठी जरूर लिखूंगा

और जब भी मोदी जी विदेश जाते है जब जहाज से उतरते है तो तीन चार महिला रोती हुई जरूर मिलेगी और सेम डायलॉग होगा कि मुझे आज भगवान के दर्शन हो गए my living god नरेंद्र मोदी

राज्यों के चुनाव के दौरान हर राज्य से कोई ना कोई पुराना नाता रिश्ता जरूर बताएंगे , और फलाने समाज से मेरा पुराना नाता रहा है जरूर कहेंगे

और जब भी भाषण देंगे उस भाषण में एक बात बचपन की जरूर सुनाएंगे की मैने भी एक बार बचपन में ऐसा ऐसा किया था

सेम ही स्क्रिप्ट चल रही पिछले 12 सालों से ,मजा नहीं आ रहा मोदी जी कुछ चेंज करो यार 😁

🤣😂🙏🙏🙏✍️✍️✍️😁

भारत आज विश्व में अकेला है।पाकिस्तान ईरान और अमेरिका दोनों का चहेता हैऔर ये किसी एक युद्ध के कारण नहीं हुआ है।—मैं कोई ज...
12/04/2026

भारत आज विश्व में अकेला है।
पाकिस्तान ईरान और अमेरिका दोनों का चहेता है
और ये किसी एक युद्ध के कारण नहीं हुआ है।

मैं कोई जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट नहीं हूं,
पर 12 साल की विदेश नीति देखकर इतना समझ गया हूं —
नफरती राजनीत कूटनीति की सबसे बड़ी दुश्मन होती है।

• पड़ोसी देश
मालदीव — “India First” से “India Out”
बांग्लादेश — दोस्त से “घुसपैठिया”
नेपाल — अब नक्शा चुनौती देता है
श्रीलंका — जहाँ हमें होना था, वहाँ चीन है
भूटान — सबसे बड़ा समर्थक अब खामोश
म्यांमार — हुआ तो हम खामोश

• दुनिया का ताकतवर मंच
रूस — चीन के करीब
अमेरिका — बार बार धमकाता है
भारत…?
प्रचार में इतना उलझा कि प्रभाव ही खत्म हो गया

• सबसे बड़ा टेस्ट — Iran–Israel conflict
पाकिस्तान के दोयम दर्जे के नेता रोल निभा रहे हैं
शाहबाज समझौता करवा रहा है
मुनीर शांति करा रहा है
और विश्व गुरु ?
ना नेतृत्व
ना पहल
ना असर

यही फर्क है…
जो देश कभी पूरे विश्व को दिशा देता था,
आज म्यूट स्पेक्टेटर बन कर रह गया है

“विश्व गुरु” बोलने से कोई विश्व गुरु नहीं बनता
उसके लिए चाहिए —
गांधी की शांति
नेहरू का विजन
इंदिरा का साहस

नफरत से देश चल सकता है…
लेकिन दुनिया नहीं जीती जाती

भारत अब “वसुधैव कुटुम्बकम्” नहीं कहता,
बल्कि “देशद्रोही” और “घुसपैठिया” चिल्लाता है

भारत आज अकेला है और दुनिया सोच रही होगी
बुद्ध और गांधी का देश इतना बेबस कैसे हो गया
🙏🙏

#घोरकलजुग

विमान की सीटों पर बच्चों की फोटो और बैग-जूते रखकर पाकिस्तान पहुंचा ईरानी डेलिगेशन◆ स्पीकर कालिबाफ विमान के अंदर बच्चों क...
11/04/2026

विमान की सीटों पर बच्चों की फोटो और बैग-जूते रखकर पाकिस्तान पहुंचा ईरानी डेलिगेशन
◆ स्पीकर कालिबाफ विमान के अंदर बच्चों की तस्वीरें देखकर हुए भावुक
◆ अमेरिका के सितम का सबूत लेकर इस्लामाबाद पहुंचा ईरान
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