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विनम्र आग्रहजिलाअधिवक्ता संघ जबलपुर एवं मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ जबलपुर तथा हाई कोर्ट एडवोकेट बार जबलपुर द...
16/02/2026

विनम्र आग्रह
जिलाअधिवक्ता संघ जबलपुर एवं मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ जबलपुर तथा हाई कोर्ट एडवोकेट बार जबलपुर द्वारा शिवपुरी में अधिवक्ता महोदय को यूनिफॉर्म में जब वह न्यायालय जा रहे थे गोली मार दी जबकि उनका किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं था वह केवल अपने पक्षकार की पैरवी कर अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे थे और विरोधी पक्ष के द्वारा उन्हें पैरवी करने से रोका गया और जब वह नहीं माने तो उन्हें रास्ते से अलग करने के लिए उन पर हमला कर उनकी हत्या की गई के विरोध में कल सोमवार दिनांक 16 फरवरी 2026 को न्यायालय कार्य से विरत रहते हुए अधिक से अधिक संख्या में जिला एवं सत्र न्यायालय जबलपुर के गेट नंबर 4 में सुबह 11:30 बजे सभी अधिवक्ता साथी आवश्यक रूप से उपस्थित रहकर उक्त घटना का विरोध प्रदर्शित करने में सहयोग प्रदान करें साथ ही अधिक से अधिक संख्या में चलकर माननीय कलेक्टर महोदय को ज्ञापन सौंप कर हमारे अधिवक्ता साथी जिनकी हत्या की गई है उनके परिवार को एक करोड रुपए की आर्थिक सहायता एवं परिवार में एक व्यक्ति को शासकीय नौकरी प्रदान की जावे साथ ही एडवोकेट प्रोडक्शन एक्ट अति शीघ्र लागू किया जाए की मांग बुलंद की जावे
जिलाअधिवक्ता संघ जबलपुर

भरण पोषण की बकाया राशि में एक साथ रिकवरी और गिरफ्तारी वारंट जारी करना अवैध है ।। मोहम्मद शहजाद बनाम उत्तर प्रदेश राज्य औ...
13/02/2026

भरण पोषण की बकाया राशि में एक साथ रिकवरी और गिरफ्तारी वारंट जारी करना अवैध है ।।

मोहम्मद शहजाद बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और 2 अन्य
Application no. 39747/2025
"अदालतों द्वारा भरण-पोषण के आदेशों को लागू करने में अत्यधिक उत्साह दिखाते हुए उनकी व्यक्तिगत गरिमा और स्वतंत्रता को कुचला नहीं जा सकता, भले ही वे इस निष्कर्ष पर पहुंचें कि न्यायालय के आदेश के अनुसार भरण-पोषण के बकाया का जानबूझकर भुगतान नहीं किया गया है।"

न्यायमूर्ति:- राजीव लोचन शुक्ला
इलाहाबाद उच्च न्यायालय

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला ने मोहम्मद शहजाद बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और 2 अन्य (2026) के मामले में अलीगढ़ परिवार न्यायालय के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें भरण-पोषण बकाया की वसूली के लिए याचिकाकर्ता के खिलाफ एक साथ वसूली और गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए थे, और इस नियमित प्रथा को अवैध और अमानवीय घोषित किया।

मामले की पृष्ठभूमि क्या थी?
मोहम्मद शहजाद ने परिवार न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए बीएनएसएस की धारा 528 के तहत याचिका दायर की थी।
अलीगढ़ स्थित परिवार न्यायालय के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश ने भरण-पोषण की बकाया राशि की वसूली के लिए याचिकाकर्ता के खिलाफ एक साथ वसूली और गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे ।
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि भरण-पोषण आदेशों को लागू किया जाना चाहिए, लेकिन प्रक्रिया राजनेश बनाम नेहा और अन्य (2021) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार विशिष्ट वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन नहीं कर सकती है।
राज्य की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता (एजीए) ने स्वीकार किया कि धारा 125(3) और 128 सीआरपीसी के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना भरण-पोषण के बकाया की वसूली के लिए कोई गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं किया जा सकता है।
हालांकि, एजीए ने यह तर्क दिया कि आवेदक ने पहले भी उच्च न्यायालय द्वारा निर्देशित भुगतान किश्तों का भुगतान करने में चूक की थी।

25/01/2026

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