रामानुज मिश्र अधिवक्ता

रामानुज मिश्र अधिवक्ता I Have solution For All Your Legal Problems

25/08/2023

प्रतापगढ़ की जनता के बीच बेहतर कार्य करते हुए अपराध पर अंकुश लगाने के साथ ही जनसामान्य और पुलिस के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित कर खाकी वर्दी की बेहतर छवि स्थापित करने वाले बडे भाई विद्यासागर मिश्र जी को प्रमोशन की बहुत बहुत बधाई ।।।

17/08/2023

सुनने में आ रहा गद्दारों को
ग़दर पसंद नही आ रही!🤔
2

16/08/2023

कभी भी किसी की बात पर भरोसा मत करो
क्युकी सामने वाला वो कहानी कभी नही बताएगा जिसमे वो खुद गद्दार हो !

 #वसीयत
07/08/2023

#वसीयत

03/08/2023

जब मृत्यु का समय निकट आया तो पिता ने अपने एकमात्र पुत्र धर्मपाल को बुलाकर कहा कि,
बेटा मेरे पास धन-संपत्ति नहीं है कि मैं तुम्हें विरासत में दूं। पर मैंने जीवनभर सच्चाई और प्रामाणिकता से काम किया है।

तो मैं तुम्हें आशीर्वाद देता हूं कि, तुम जीवन में बहुत सुखी रहोगे और धूल को भी हाथ लगाओगे तो वह सोना बन जायेगी।
बेटे ने सिर झुकाकर पिताजी के पैर छुए। पिता ने सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और संतोष से अपने प्राण त्याग कर दिए।

अब घर का खर्च बेटे धर्मपाल को संभालना था। उसने एक छोटी सी ठेला गाड़ी पर अपना व्यापार शुरू किया।
धीरे धीरे व्यापार बढ़ने लगा। एक छोटी सी दुकान ले ली। व्यापार और बढ़ा।

अब नगर के संपन्न लोगों में उसकी गिनती होने लगी। उसको विश्वास था कि यह सब मेरे पिता के आशीर्वाद का ही फल है।

क्योंकि, उन्होंने जीवन में दु:ख उठाया, पर कभी धैर्य नहीं छोड़ा, श्रद्धा नहीं छोड़ी, प्रामाणिकता नहीं छोड़ी इसलिए उनकी वाणी में बल था। और उनके आशीर्वाद फलीभूत हुए। और मैं सुखी हुआ। उसके मुंह से बारबार यह बात निकलती थी।

एक दिन एक मित्र ने पूछा: तुम्हारे पिता में इतना बल था, तो वह स्वयं संपन्न क्यों नहीं हुए? सुखी क्यों नहीं हुए?
धर्मपाल ने कहा: मैं पिता की ताकत की बात नहीं कर रहा हूं। मैं उनके आशीर्वाद की ताकत की बात कर रहा हूं।

इस प्रकार वह बारबार अपने पिता के आशीर्वाद की बात करता, तो लोगों ने उसका नाम ही रख दिया बाप का आशीर्वाद! धर्मपाल को इससे बुरा नहीं लगता, वह कहता कि मैं अपने पिता के आशीर्वाद के काबिल निकलूं, यही चाहता हूं।

ऐसा करते हुए कई साल बीत गए। वह विदेशों में व्यापार करने लगा। जहां भी व्यापार करता, उससे बहुत लाभ होता। एक बार उसके मन में आया, कि मुझे लाभ ही लाभ होता है !! तो मैं एक बार नुकसान का अनुभव करूं।

तो उसने अपने एक मित्र से पूछा, कि ऐसा व्यापार बताओ कि जिसमें मुझे नुकसान हो।

मित्र को लगा कि इसको अपनी सफलता का और पैसों का घमंड आ गया है। इसका घमंड दूर करने के लिए इसको ऐसा धंधा बताऊं कि इसको नुकसान ही नुकसान हो।

तो उसने उसको बताया कि तुम भारत में लौंग खरीदो और जहाज में भरकर अफ्रीका के जंजीबार में जाकर बेचो। धर्मपाल को यह बात ठीक लगी।

जंजीबार तो लौंग का देश है। वहां से लौंग भारत में लाते हैं और यहां 10-12 गुना भाव पर बेचते हैं।
भारत में खरीद करके जंजीबार में बेचें, तो साफ नुकसान सामने दिख रहा है।परंतु धर्मपाल ने तय किया कि मैं भारत में लौंग खरीद कर, जंजीबार खुद लेकर जाऊंगा। देखूं कि पिता के आशीर्वाद कितना साथ देते हैं।

नुकसान का अनुभव लेने के लिए उसने भारत में लौंग खरीदे और जहाज में भरकर खुद उनके साथ जंजीबार द्वीप पहुंचा।जंजीबार में सुल्तान का राज्य था। धर्मपाल जहाज से उतरकर के और लंबे रेतीले रास्ते पर जा रहा था ! वहां के व्यापारियों से मिलने को।

उसे सामने से सुल्तान जैसा व्यक्ति पैदल सिपाहियों के साथ आता हुआ दिखाई दिया।

उसने किसी से पूछा कि, यह कौन है?
उन्होंने कहा: यह सुल्तान हैं।

सुल्तान ने उसको सामने देखकर उसका परिचय पूछा। उसने कहा: मैं भारत के गुजरात के खंभात का व्यापारी हूं। और यहां पर व्यापार करने आया हूं।

सुल्तान ने उसको व्यापारी समझ कर उसका आदर किया और उससे बात करने लगा।

धर्मपाल ने देखा कि सुल्तान के साथ सैकड़ों सिपाही हैं। परंतु उनके हाथ में तलवार, बंदूक आदि कुछ भी न होकर बड़ी-बड़ी छलनियां है।

उसको आश्चर्य हुआ। उसने विनम्रता पूर्वक सुल्तान से पूछा: आपके सैनिक इतनी छलनी लेकर के क्यों जा रहे हैं।

सुल्तान ने हंसकर कहा: बात यह है, कि आज सवेरे मैं समुद्र तट पर घूमने आया था। तब मेरी उंगली में से एक अंगूठी यहां कहीं निकल कर गिर गई।

अब रेत में अंगूठी कहां गिरी, पता नहीं। तो इसलिए मैं इन सैनिकों को साथ लेकर आया हूं। यह रेत छानकर मेरी अंगूठी उसमें से तलाश करेंगे।

धर्मपाल ने कहा: अंगूठी बहुत महंगी होगी।
सुल्तान ने कहा: नहीं! उससे बहुत अधिक कीमत वाली अनगिनत अंगूठी मेरे पास हैं। पर वह अंगूठी एक फकीर का आशीर्वाद है।

मैं मानता हूं कि मेरी सल्तनत इतनी मजबूत और सुखी उस फकीर के आशीर्वाद से है। इसलिए मेरे मन में उस अंगूठी का मूल्य सल्तनत से भी ज्यादा है।

इतना कह कर के सुल्तान ने फिर पूछा: बोलो सेठ,आप क्या माल ले कर आये हो।

धर्मपाल ने कहा कि: लौंग!

सुल्तान के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। यह तो लौंग का ही देश है सेठ। यहां लौंग बेचने आये हो? किसने आपको ऐसी सलाह दी।

जरूर वह कोई आपका दुश्मन होगा। यहां तो एक पैसे में मुट्ठी भर लोंग मिलते हैं। यहां लोंग को कौन खरीदेगा? और तुम क्या कमाओगे?

धर्मपाल ने कहा: मुझे यही देखना है, कि यहां भी मुनाफा होता है या नहीं।

मेरे पिता के आशीर्वाद से आज तक मैंने जो धंधा किया, उसमें मुनाफा ही मुनाफा हुआ। तो अब मैं देखना चाहता हूं कि उनके आशीर्वाद यहां भी फलते हैं या नहीं।

सुल्तान ने पूछा: पिता के आशीर्वाद? इसका क्या मतलब?

धर्मपाल ने कहा: मेरे पिता सारे जीवन ईमानदारी और प्रामाणिकता से काम करते रहे। परंतु धन नहीं कमा सकें।

उन्होंने मरते समय मुझे भगवान का नाम लेकर मेरे सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिए थे, कि तेरे हाथ में धूल भी सोना बन जाएगी।

ऐसा बोलते-बोलते धर्मपाल नीचे झुका और जमीन की रेत से एक मुट्ठी भरी और सम्राट सुल्तान के सामने मुट्ठी खोलकर उंगलियों के बीच में से रेत नीचे गिराई तो..

धर्मपाल और सुल्तान दोनों का आश्चर्य का पार नहीं रहा। उसके हाथ में एक हीरेजड़ित अंगूठी थी। यह वही सुल्तान की गुमी हुई अंगूठी थी।

अंगूठी देखकर सुल्तान बहुत प्रसन्न हो गया। बोला: वाह खुदा आप की करामात का पार नहीं। आप पिता के आशीर्वाद को सच्चा करते हो।

धर्मपाल ने कहा: फकीर के आशीर्वाद को भी वही परमात्मा सच्चा करता है।

सुल्तान और खुश हुआ। धर्मपाल को गले लगाया और कहा: मांग सेठ। आज तू जो मांगेगा मैं दूंगा।

धर्मपाल ने कहा: आप 100 वर्ष तक जीवित रहो और प्रजा का अच्छी तरह से पालन करो। प्रजा सुखी रहे। इसके अलावा मुझे कुछ नहीं चाहिए।

सुल्तान और अधिक प्रसन्न हो गया। उसने कहा: सेठ तुम्हारा सारा माल में आज खरीदता हूं और तुम्हारी मुंह मांगी कीमत दूंगा।

इस कहानी से शिक्षा मिलती है, कि पिता के आशीर्वाद हों, तो दुनिया की कोई ताकत कहीं भी तुम्हें पराजित नहीं होने देगी।

पिता और माता की सेवा का फल निश्चित रूप से मिलता है। आशीर्वाद जैसी और कोई संपत्ति नहीं।

बालक के मन को जानने वाली मां और भविष्य को संवारने वाले पिता यही दुनिया के दो महान ज्योतिषी है।

अपने बुजुर्गों का सम्मान करें! यही भगवान की सबसे बड़ी सेवा है।

जो खुद को control कर सकता है वो कुछ भी कर सकता है
03/08/2023

जो खुद को control कर सकता है
वो कुछ भी कर सकता है

03/08/2023

राखी भाई की ही दुकान से लें भाईजान की दुकान से नहीं
ये संदेश मेरी सभी माताओं और बहनों के लिए।

02/08/2023

अधिवक्ता एकता जिंदाबाद

25/02/2020

जानिए चेक बाउंस केस की पूरी प्रक्रिया

चेक बाउंस का प्रकरण अत्यंत साधारण प्रकरण होता है। इस प्रकरण की किसी भी कोर्ट में अत्यधिक भरमार है। वर्तमान समय में अधिकांश भुगतान चेक के माध्यम से किए जा रहे हैं। किसी भी व्यापारिक एवं पारिवारिक क्रम में लोगों द्वारा एक दूसरों को चेक दिए जा रहे हैं।

चेक के अनादर हो जाने के कारण चेक बाउंस जैसे मुकदमों की भरमार न्यायालय में हो रही है। नए अधिवक्ताओं के लिए चेक बाउंस का मुकदमा संस्थित करना और कार्यवाही करना रोचक होता है और स्कूल के समान होता है, जहां नए अधिवक्ता इस चेक बाउंस के प्रकरण को संस्थित करवाने में बहुत सारे विधि के प्रश्न और प्रक्रियाओं को समझते हैं। इस लेख के माध्यम से चेक बाउंस के केस को क्रमवार प्रक्रिया स्वरूप समझाया जा रहा है। यह लेख एक दस्तावेज की भांति है, जिसे नए अधिवक्ता सहज के रख सकते हैं। निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट 1881 की धारा 138 चेक बाउंस का केस निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट 1881 की धारा 138 के अंतर्गत संस्थित किया जाता है। जिस भी समय चेक प्राप्त करने वाला व्यक्ति खुद को भुगतान किए गए रुपए नकद या अपने बैंक खाते में प्राप्त करना चाहता है तो निर्धारित दिनांक को बैंक में चेक को भुनाने के लिए डालता है, परंतु कुछ कारणों से चेक बाउंस हो सकता है। जैसे बैंक से खाता बंद कर दिया जाना, अकाउंट में पैसा नहीं होना, या फिर चेक को खाते में लगने से रोक दिया जाना। जब भी चेक अनादर होता है तो ऐसे अनादर पर चेक को प्राप्त करने वाले व्यक्ति के पास चेक बाउंस का प्रकरण दर्ज कराने का अधिकार होता है। चेक बाउंस एक आपराधिक प्रकरण चेक बाउंस का प्रकरण एक आपराधिक प्रकरण होता है, जिसका कार्यवाही एक आपराधिक न्यायालय मजिस्ट्रेट के न्यायालय द्वारा संपन्न की जाती है। लेनदेन के मामले सिविल होते हैं, परंतु चेक बाउंस के प्रकरण को आपराधिक प्रकरण में रखा गया है। लीगल नोटिस चेक बाउंस के प्रकरण की शुरुआत लीगल नोटिस के माध्यम से की जाती है। जब चेक बाउंस होता है तो इसके बाउंस होने के 30 दिनों के भीतर चेक देने वाले व्यक्ति को एक लीगल नोटिस जिसे अधिकृत अधिवक्ता द्वारा भेजा जाता है। लीगल नोटिस में चेक बाउंस हो जाने के कारण और भुगतान नहीं हो पाने के कारण दिए जाते हैं तथा 15 दिवस के भीतर राशि चेक देने वाले व्यक्ति से वापस देने का निवेदन किया जाता है। कोई भी चेक बाउंस के प्रकरण में लीगल नोटिस भेजने की अवधि चेक बाउंस होने की दिनांक से 30 दिन के भीतर करना होती है। 30 दिन के बाद लीगल नोटिस भेजा जाता है तो न्यायालय में चेक बाउंस प्रकरण को संस्थित किए जाने का अधिकार चेक रखने वाला व्यक्ति खो देता है। जो 15 दिवस का समय भुगतान किए जाने के लिए या चेक बाउंस के संबंध में मध्यस्थता करने के लिए चेक देने वाले व्यक्ति को दिया जाता है। उस समय के बीत जाने के बाद 30 दिवस के भीतर न्यायालय में चेक बाउंस का प्रकरण दर्ज कर दिए जाने का अधिकार चेक प्राप्त करने वाले पक्षकार को प्राप्त हो जाता है। किसी युक्तियुक्त कारण से न्यायालय इस 30 दिन की अवधि को बढ़ा भी सकता है, लेकिन कारण युक्तियुक्त होना चाहिए। नोटिस कैसे दें लीगल नोटिस स्पीड पोस्ट या रजिस्टर एडी के माध्यम से भेजा जाता है तथा इससे जो रसीद प्राप्त होती है वह चेक बाउंस का प्रकरण लगाते समय दस्तावेज का काम करती है। चेक देने वाले व्यक्ति का पता सही होना चाहिए और उसे उसी पते पर लीगल नोटिस दिया जाना चाहिए। मजिस्ट्रेट के न्यायालय का निर्धारण जिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत वह बैंक होती है, जिस बैंक में चेक को भुनाने के लिए लगाया गया है और चेक बैंक में अनादर हो गया है, उस थाना क्षेत्र के मजिस्ट्रेट के न्यायालय में इस चेक बाउंस के प्रकरण को संस्थित किया जाता है। कोर्ट फ़ीस चेक बाउंस के प्रकरण में कोर्ट फीस महत्वपूर्ण चरण होता है। चेक बाउंस के प्रकरण में फीस के तीन स्तर दिए गए हैं। इन तीन स्तरों पर कोर्ट फीस का भुगतान स्टाम्प के माध्यम से किया जाता है। ये तीन स्तर निम्न हैं। ₹100000 राशि तक के चेक के लिए चेक में अंकित राशि की 5% कोर्ट फीस देना होती है। ₹100000 से ₹500000 तक के चेक के लिए राशि की 4% कोर्ट फीस देना होती है। ₹500000 से अधिक राशि के चेक के लिए राशि की 3% कोर्ट फीस देना होती है। दस्तावेज- परिवाद पत्र परिवाद पत्र महत्वपूर्ण होता है। चेक बाउंस के प्रकरण में परिवाद पत्र मजिस्ट्रेट के न्यायालय के नाम से तैयार किया जाता है। इस परिवाद पत्र में भुगतान के संबंध में कुल लेनदेन का जो व्यवहार हुआ है, उस व्यवहार से संबंधित सभी बिंदुओं पर मजिस्ट्रेट को संज्ञान दिया जाता है तथा इस परिवाद पत्र में परिवादी का शपथ पत्र भी होता है जो शपथ आयुक्त द्वारा रजिस्टर होता है। चेक की मूल प्रति अनादर रसीद लीगल नोटिस की प्रति लीगल नोटिस भेजे जाते समय एक रसीद प्राप्त होती है, जिसे सर्विस स्लिप कहा जाता है, जिसमें लीगल नोटिस भेजे जाने का दिनांक अंकित होता है। वह स्लिप दस्तावेजों में लगानी होती है। गवाहों की सूची अगर प्रकरण में कोई गवाह है तो गवाहों की सूची भी डाली जाएगी। प्रकरण रजिस्टर होना जब सारे दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए जाते हैं तो केस न्यायालय द्वारा रजिस्टर कर दिया जाता है और एक केस नंबर न्यायालय द्वारा अलॉट कर दिया जाता है। सम्मन प्रकरण के पक्षकारों को न्यायालय द्वारा सम्मन किया जाता है तथा न्यायालय में उपस्थित होने हेतु आदेश किया जाता है। पुनः सम्मन यदि आरोपी न्यायालय में उपस्थित होकर प्रकरण में अपने लिखित अभिकथन नहीं कर रहा है तो ऐसी परिस्थिति में पुनः सम्मन न्यायालय द्वारा भेजा जाता है। वारंट विदित रहे कि यह प्रकरण एक आपराधिक प्रकरण होता है, जिसे मजिस्ट्रेट के न्यायालय द्वारा सुना जाता है। इस प्रकरण में आरोपी को बुलाने के लिए वारंट भी किए जाते हैं। यदि आरोपी सम्मन के द्वारा न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रहा है तो न्यायालय अपने विवेक के अनुसार जमानत या गैर जमानती किसी भी भांति का वारंट आरोपी के नाम संबंधित थाना क्षेत्र को जारी कर सकता है। प्रति परीक्षण (Cross Examination) आरोपी जब न्यायालय में उपस्थित होता है तो वह निगोशिएबल एक्ट की धारा 145(2) का आवेदन देकर न्यायालय से क्रॉस प्रति परीक्षण (Cross Examination) करने का निवेदन करता है तथा न्यायालय द्वारा आरोपी पक्षकार का क्रॉस करने की अनुमति दी जाती है। उपधारणा करना इस प्रकरण में न्यायालय अवधारणा करता है कि चेक देने वाला व्यक्ति दोषी ही होगा अर्थात उसने चेक दिया ही है। चेक प्राप्त करने वाला व्यक्ति कहीं ना कहीं सही है। अब यहां पर आरोपी पक्षकार यह सिद्ध करेगा कि उसके द्वारा कोई चेक नहीं दिया गया है। यहां साबित करने का भार आरोपी पर होता है। समरी ट्रायल यह एक समरी ट्रायल होता है, जिसे न्यायालय द्वारा शीघ्र निपटाने का प्रयास किया जाता है। इसमें बचाव पक्ष को बचाव के लिए साक्ष्य का उतना अवसर नहीं होता है, जैसा कि अवसर सेशन ट्रायल में होता है। समझौता योग्य यह अपराध समझौता योग्य होता है। यदि दोनों पक्षकार आपस में समझौता कर न्यायालय से इस प्रकरण को खत्म करना चाहते हैं तो समझौता कर दिया जाता है तथा अपराध का शमन हो जाता है। 2018 में संशोधन किया गया है। यह संशोधन धारा 143 ए है जो नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की है। इस धारा के अंतर्गत परिवादी पक्षकार एक आवेदन के माध्यम से आरोपी से अपने संपूर्ण धनराशि जो चेक में अंकित की गई है उसका 20% हिस्सा न्यायालय द्वारा दिलवाए जाने के लिए निवेदन कर सकता है और न्यायालय अपने आदेश के माध्यम से आरोपी से ऐसी धनराशि परिवादी को दिलवा सकता है। अंतिम बहस यदि आरोपी प्रकरण में समझौता नहीं करता है और मुकदमे को आगे चलाना चाहता है। ऐसी परिस्थिति में न्यायालय द्वारा आरोप तय कर मामले को अंतिम बहस के लिए रख दिया जाता है तथा दोनों पक्षकारों द्वारा आपस में अंतिम बहस होती। निर्णय अंत में मामला निर्णय पर आता है तथा कोर्ट इस प्रकरण में दोषसिद्धि होने पर आरोपी को 2 वर्ष तक का सश्रम कारावास दे सकती है। जमानती अपराध यह एक जमानती अपराध है, जिसमें यदि आरोपी की दोषसिद्धि हो जाती है और उसे न्यायालय द्वारा कारावास कर दिया जाता है। ऐसी परिस्थिति में वह ऊपर के न्यायालय में अपील कर जमानत ले सकता है। इस अपराध में किसी भी स्तर पर समझौता किया जा सकता है।

25/02/2020

“धारा 125 के तहत मुकदमे में धारा 362 के प्रावधान को गौण रखा जा सकता है।”

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रामराजा सरकार सेड सी०आर०ओ०कोर्ट के सामने
Bela Pratapgarh

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