13/05/2026
#चार्जशीट क्या होती है?
चार्जशीट (Charge Sheet) वह रिपोर्ट होती है जो पुलिस जांच पूरी होने के बाद अदालत में दाखिल करती है।
#इसमें बताया जाता है कि:
आरोपी कौन है
उसके खिलाफ क्या आरोप हैं
कौन-कौन से सबूत मिले हैं
गवाह कौन हैं
#पुलिस क्यों मानती है कि आरोपी पर मुकदमा चलना चाहिए
चार्जशीट किस धारा में दाखिल होती है?
पहले यह प्रावधान CrPC की धारा 173(2) में था।
अब नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 में यह प्रावधान धारा 193(2) के अंतर्गत आता है।
#चार्जशीट दाखिल करने की समय सीमा
1. सामान्य अपराध
जिन अपराधों में सजा 10 वर्ष तक है:
पुलिस को 60 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होती है।
उदाहरण:
मारपीट, चोरी, घरेलू हिंसा, धोखाधड़ी आदि।
2. गंभीर अपराध
जिन अपराधों में सजा:
10 वर्ष से अधिक,
उम्रकैद, या
मृत्युदंड हो सकता है,
उनमें पुलिस को 90 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होती है।
#उदाहरण:
हत्या, बलात्कार, डकैती, आतंकवाद आदि।
अगर समय पर चार्जशीट दाखिल न हो तो?
यदि आरोपी जेल में है और 60/90 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं होती, तो आरोपी को:
डिफॉल्ट बेल (Default Bail)
मांगने का अधिकार मिल जाता है।
चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया
Step 1: दर्ज होना
पुलिस थाने में FIR दर्ज होती है।
Step 2: #जांच (Investigation)
पुलिस:
गवाहों के बयान लेती है
सबूत जुटाती है
मेडिकल/फॉरेंसिक रिपोर्ट लेती है
आरोपी से पूछताछ करती है
Step 3: #गिरफ्तारी (यदि आवश्यक)
जरूरत होने पर आरोपी को गिरफ्तार किया जाता है।
Step 4: #चार्जशीट तैयार करना
पुलिस सभी सबूत और रिपोर्ट के आधार पर चार्जशीट बनाती है।
Step 5: #कोर्ट में दाखिल
चार्जशीट मजिस्ट्रेट/कोर्ट में जमा की जाती है।
Step 6: #कोर्ट द्वारा संज्ञान
कोर्ट चार्जशीट देखकर तय करती है कि मुकदमा चलाने योग्य मामला है या नहीं।
Step 7: #आरोप तय होना
कोर्ट आरोपी पर आरोप तय करती है।
Step 8: #ट्रायल शुरू
इसके बाद गवाह, सबूत और बहस के आधार पर मुकदमा चलता है।
#महत्वपूर्ण बात
चार्जशीट दाखिल होना = आरोपी दोषी साबित होना नहीं है।
#अंतिम फैसला केवल कोर्ट देती है।
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