Advocate Ravi Kumar

Advocate Ravi Kumar Judiciary preparation

03/03/2023

09/07/2022

Good Step & Decision by District Bar Association....

SC vs HC
23/06/2022

SC vs HC

14/06/2022
21/04/2022

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दंड प्रक्रिया पहचान विधेयक को मंजूरी दे दी है. जिसमें किसी अपराध के मामले में गिरफ्तार व्यक्तियों और दोषसिद्ध अपराधियों का रिकॉर्ड रखने के लिये अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग की अनुमति देने का प्रावधान किया गया है. यह कानून वर्ष 1920 के कैदियों की पहचान संबंधी कानून के स्थान पर लाया गया है. लोकसभा में यह विधेयक 4 अप्रैल को और राज्यसभा में 6 अप्रैल को पारित हुआ था.

पुलिस और मजिस्ट्रेट को दिए गए अधिकार
सरकार के राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, ‘‘संसद के निम्नलिखित कानून को 18 अप्रैल 2022 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई और इसे आम सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है . यह दंड प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम 2022 संख्या 11 है. ’’ इसमें दोषसिद्ध व्यक्तियों और आपराधिक मामलों में गिरफ्तार लोगों के शरीरिक एवं जैविक नमूने लेने के लिये पुलिस को कानूनी अनुमति दी गई है. इसके साथ ही मजिस्ट्रेट को किसी अपराध की जांच में मदद के लिये किसी व्यक्ति की तस्वीर लेने और माप करने का आदेश देने को सशक्त किया गया है. हालांकि व्यक्ति के दोष मुक्त होने या बरी किये जाने की स्थिति में सभी सामग्री को नष्ट किया जायेगा.

गृहमंत्री शाह ने विधेयक को लेकर दिया था जवाब
राज्यसभा में इस विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि राजनीतिक मामलों में हिरासत में लिये गए लोगों का बायोमेट्रिक डाटा नहीं लिया जायेगा और ब्रेन मैंपिंग और पॉलीग्राफ टेस्ट को प्रस्तावित कानून के दायरे में नहीं रखा जायेगा. उन्होंने कहा था कि यह विधेयक किसी डेटा के दुरुपयोग की मंशा से नहीं, बल्कि कानून के हिसाब से जीने वाले लोगों के अधिकारों की सुरक्षा करने एवं अपराधियों को दंडित करके कड़ा संदेश देने के लिए लाया गया है.

विपक्ष ने किया था विरोध
हालांकि चर्चा के दौरान कांग्रेस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के सदस्यों ने ब्रिटिश काल के बंदी शिनाख्त कानून की जगह केंद्र सरकार द्वारा लाये जा रहे नये कानून को ‘क्रूर’ और संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया था और दावा किया था कि सरकारी तंत्र द्वारा इसका दुरुपयोग किया जायेगा.

इसमें कहा गया है कि दंड प्रक्रिया पहचान विधेयक 2022 ऐसे व्यक्तियों का समुचित शरीरिक माप लेने का विधिक उपबंध करता है. यह अपराध की जांच को अधिक दक्ष बनायेगा और दोषसिद्धि दर में वृद्धि करने में सहायता करेगा. इस विधेयक में दोषियों और अपराध के मामले में गिरफ्तार लोगों का कई तरह का ब्योरा एकत्र करने की अनुमति देने की बात कही गई है जिसमें उंगली और हथेली की छाप या प्रिंट, पैरों की छाप, फोटो, आंखों की पुतली, रेटिना और लिखावट के नमूने आदि शामिल हैं.

10/04/2022

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