Adv Aayush L L B . L L M

Adv Aayush L L B . L L M बड़े सपने देखो, और भी ज्यादा मेहनत करो !

23/05/2026
29/04/2026

15 साल साथ रहे, बच्चा भी है। अब शादी नहीं हुई तो रेप का आरोप कैसे...? — सुप्रीम कोर्ट

मामले की पृष्ठभूमि:

एक महिला ने अपने लिव-इन पार्टनर (जो पहले से शादीशुदा था) पर शादी का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाने और रेप/यौन शोषण का आरोप लगाया! दोनों करीब 15 साल तक साथ रहे (लिव-इन रिलेशनशिप में) उनके बीच एक बच्चा (लगभग 7 साल का) भी है।

रिश्ता टूटने के बाद महिला ने पुलिस में FIR दर्ज कराई, जिसमें रेप, मारपीट आदि के आरोप लगाए गए।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पहले ही आरोपी के खिलाफ FIR को रद्द (quash) कर दिया था।

महिला ने सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ याचिका दायर की।

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियाँ (Justice B.V. Nagarathna की बेंच):

सहमति का सवाल: जब दोनों वयस्क थे और 15 साल तक आपसी सहमति से साथ रहे, तो अब रिश्ता टूटने पर उसे रेप कैसे माना जा सकता है? “Where is the question of offence when there is a consensual relationship?”

बच्चे का होना: अगर सहमति से बच्चा पैदा हुआ, तो 15 साल बाद “शादी नहीं हुई तो रेप” का आरोप लगाना तर्कसंगत नहीं।

समय का फैक्टर: 15 साल तक शादी की मांग क्यों नहीं की? इतने लंबे समय तक बिना शादी के साथ रहने का मतलब यह नहीं कि शुरू से ही “झूठा वादा” था।

लिव-इन रिलेशनशिप का जोखिम: कोर्ट ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप में शादी जैसी कानूनी सुरक्षा नहीं होती। यह एक जोखिम भरा रिश्ता है। अगर महिला बिना शादी के इतने साल साथ रही, तो बाद में इसे यौन शोषण कहना मुश्किल है।

कोर्ट ने महिला को नसीहत भी दी कि ऐसे मामलों में पीड़ित को ही शर्मिंदा न समझा जाए, लेकिन तथ्यों को देखना जरूरी है। high court #
✨ Adv Aayush Khan Alwar Adv Aayush L L B . L L M

28/04/2026

.aayush_khan_alwar

28/04/2026

⚖️ BNSS के तहत 25 महत्वपूर्ण कोर्ट एप्लिकेशन (Advocates के लिए जरूरी गाइड)

अगर आप वकालत करते हैं या लॉ स्टूडेंट हैं, तो ये लिस्ट आपके लिए बेहद जरूरी है 👇

📌 मुख्य एप्लिकेशन:

1. अग्रिम जमानत आवेदन (Sec. 482 BNSS)
2. नियमित जमानत आवेदन (Sec. 480/483 BNSS)
3. देरी माफी आवेदन (Limitation Act Sec. 5)
4. खारिज शिकायत की पुनर्स्थापना (Sec. 279 BNSS)
5. दस्तावेज/संपत्ति प्रस्तुत करने का आवेदन (Sec. 94 BNSS)
6. गवाह की जांच हेतु आयोग (Sec. 319 BNSS)
7. मेडिकल परीक्षण आवेदन (Sec. 53/54 BNSS)
8. संपत्ति अभिरक्षा आवेदन (Sec. 497 BNSS)
9. अपराध समझौता आवेदन (Sec. 359 BNSS)
10. अतिरिक्त आरोपी को तलब करना (Sec. 358 BNSS)
11. अभियोजन वापसी आवेदन (Sec. 360 BNSS)
12. अच्छे आचरण हेतु सुरक्षा (Sec. 126–129 BNSS)

📌 अन्य महत्वपूर्ण आवेदन:
13. पुलिस रिमांड आवेदन (Sec. 187 BNSS)
14. विधिक सहायता/वकील का अधिकार (Sec. 35 BNSS)
15. जब्त संपत्ति पर दावा (Sec. 86 BNSS)
16. केस ट्रांसफर आवेदन (Sec. 446/447/448 BNSS)
17. स्थगन (Adjournment) आवेदन (Sec. 346 BNSS)
18. जमानत रद्द आवेदन (Sec. 480(5) BNSS)
19. अंतरिम राहत आवेदन (Sec. 528 BNSS)
20. हाई कोर्ट को संदर्भ (Sec. 436 BNSS)
21. पुनरीक्षण याचिका (Sec. 438/442 BNSS)
22. डिस्चार्ज आवेदन (Sec. 250/263/274 BNSS)
23. लिपिकीय त्रुटि सुधार (Sec. 403 BNSS)
24. आरोप संशोधन/परिवर्तन (Sec. 239 BNSS)

💡 महत्वपूर्ण बात:
इन सभी आवेदनों का सही उपयोग न्याय प्रक्रिया को मजबूत बनाता है और मुवक्किल के अधिकारों की रक्षा करता है।

📢 इस पोस्ट को सेव करें और साथी वकीलों के साथ शेयर जरूर करें!

कमाने वाली पत्नी द्वारा महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाना सहानुभूति के योग्य नहीं: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भरण-पोषण आदेश रद्...
27/04/2026

कमाने वाली पत्नी द्वारा महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाना सहानुभूति के योग्य नहीं: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भरण-पोषण आदेश रद्द किया

Address

Alwar
Alwar

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Adv Aayush L L B . L L M posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share