17/12/2020
FIR, NCR, और जीरो FIR क्या है और इनका प्रयोग किन परिस्थितियों में किया जाता है?
सीआरपीसी की धारा 154 के अनुसार, जब भी कोई सूचना संज्ञेय अपराध का कारण बनता है, तो एक एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है और Lalita kumari v. State of U. P के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2013 के वर्ष में इसे ही दोहराया गया था।
Crpc के तहत FIR को परिभाषित नहीं किया गया है, लेकिन इसे इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है:
• यह एक सूचना है जो एक पुलिस अधिकारी को दी जाती है
• सूचना को एक संज्ञेय अपराध का खुलासा करना चाहिए।
• सूचना जल्द से जल्द पुलिस अधिकारी को दी जानी चाहिए।
• और सूचना अपराध के लिए जांच का आधार होना चाहिए।
NCR का उल्लेख Crpc के धारा 155 में की गई है, जब भी कोई व्यक्ति पूलिस अधिकारी को किसी असंज्ञेय अपराध की सूचना देती है तो पूलिस अधिकारी उसे NCR (non cognizable report) रूप में दर्ज करती है।
असंज्ञेय मामले में पूलिस अधिकारी, मजिस्ट्रेट के आदेश बिना मामले की जांच नहीं कर सकती है।
अब यहां एक सवाल यह उठता है कि अगर अन्य पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में अपराध होने पर भी एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है?
हां, संज्ञेय अपराध के लिए एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है, भले ही पुलिस ने अधिकार क्षेत्र न हो। अब यदि एफआईआर क्षेत्राधिकार वाले पुलिस स्टेशन में दर्ज है तो उसे एक नियमित नंबर मिलेगा और यदि अन्य पुलिस स्टेशन में दर्ज है तो एफआईआर की क्रम संख्या शून्य (0) होगी। और एफआईआर क्षेत्राधिकार वाले पुलिस स्टेशन को भेज दी जाएगी, इसलिए इसे शून्य एफआईआर या Zero FIR कहा जाता है।
तो कभी भी अगर आपको समझ नही आए की हमें कहा FIR दर्ज कराना है तो जहाँ हो वहाँ के पूलिस स्टेशन में जाए और FIR लिखवाए। इसके बाद अगर पूलिस अधिकारी कहे की जहां अपराध घटित हुआ है उस क्षेत्र पर मेरा अधिकार नहीं है तो आप पूलिस अधिकारी से Zero FIR लिखने को कह सकते हैं और उसे लिखना पडे़गा।
धन्यवाद