The Sengar Legals

The Sengar Legals Provides legal services to victimised people In Allahabad High Court,as in Civil & Criminal cases.

21/12/2025

21/12/2025

The Supreme Court of India has held that pendency of criminal proceedings cannot be used to impose an indefinite bar on renewal of a passport, particularly where competent criminal courts have permitted such renewal while retaining control over any foreign travel.

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13/12/2025

31/01/2025

In the backdrop of divergent High Court views on the point, the Supreme Court is set to decide the issue as to whether Section 102 CrPC, which deals with police officer's power to seize certain property, shall apply to a criminal case registered under the Prevention of Corruption Act.
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31/01/2025

The Supreme Court today (January 28) reaffirmed that a child's legitimacy determines paternity, emphasizing that a child born during a valid marriage is presumed to be the legitimate offspring of parents who had access to each other at the time of conception.
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Vijay Vikram Singh Advocate High Court9415830004  सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की मोटर दुर्घटना दावों में विस्तृत भूमिका (...
31/01/2025

Vijay Vikram Singh Advocate High Court
9415830004

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की मोटर दुर्घटना दावों में विस्तृत भूमिका (भारत):

1. मोटर दुर्घटना दावों का कानूनी ढाँचा:**
- **मोटर वाहन अधिनियम, 1988** दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजे का कानूनी अधिकार देता है।
- **धारा 166**: पीड़ित या उसके आश्रित **मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT)** में दावा दायर कर सकते हैं।
- **धारा 163A**: "नो-फॉल्ट लायबिलिटी" के तहत त्वरित मुआवजा, जहाँ दोष सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं होती।
- **धारा 140**: "नो-फॉल्ट" के तहत न्यूनतम मुआवजे की गारंटी (मृत्यु या स्थायी विकलांगता के मामले में)।
- **न्यायिक सिद्धांत**: "पीड़ित-पक्षपात" (Victim-Centric Approach) को प्राथमिकता, जैसा कि **सुप्रीम कोर्ट ने ओरिएंटल इंश्योरेंस बनाम सुधा देवी (2020)** में कहा।

2. मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) का कार्य:**
- **स्थापना**: प्रत्येक जिले में MACT का गठन किया जाता है।
- **प्रक्रिया**:
- दावेदार आवेदन + समर्थक दस्तावेज (पोस्टमार्टम रिपोर्ट, FIR, मेडिकल बिल) जमा करते हैं।
- ट्रिब्यूनल बीमा कंपनी, वाहन मालिक, और चालक को नोटिस जारी करता है।
- साक्ष्य और सुनवाई के बाद मुआवजे का निर्धारण।
- **महत्व**: MACT का फैसला प्रारंभिक है, लेकिन यह अपीलीय अदालतों (हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट) के लिए आधार बनाता है।

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3. हाई कोर्ट की भूमिका और शक्तियाँ:**
- **अपील का अधिकार**: MACT के फैसले के विरुद्ध **धारा 173, MV अधिनियम** के तहत हाई कोर्ट में अपील।
- **समीक्षा के क्षेत्र**:
- **मुआवजे की राशि**: क्या यह तर्कसंगत और न्यायसंगत है?
- **दायित्व निर्धारण**: बीमा कंपनी, वाहन मालिक, या चालक में से कौन जिम्मेदार?
- **प्रक्रियात्मक त्रुटियाँ**: क्या साक्ष्य या कानूनी प्रक्रिया का सही पालन हुआ?
- **महत्वपूर्ण केस**:
- **दिल्ली हाई कोर्ट, नेशनल इंश्योरेंस बनाम सीमा देवी (2020)**: मुआवजे में "भविष्य की आय वृद्धि" (Future Prospects) को शामिल करने का निर्देश।
- **बॉम्बे हाई कोर्ट, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस बनाम सुनीता पाटिल (2019)**: असंगठित क्षेत्र के पीड़ितों की आय का आकलन करने के लिए मानकीकृत सूत्र।

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4. सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और मार्गदर्शक सिद्धांत:**
- **अंतिम न्यायिक प्राधिकार**: संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत विशेष अनुमति से अपील सुनता है।
- **कानून की एकरूपता**: सभी हाई कोर्ट्स और ट्रिब्यूनल्स के लिए बेंचमार्क निर्धारित करना।
- **लैंडमार्क निर्णय**:
- **सरला वर्मा बनाम DTC (2009)**: मुआवजे की गणना के लिए "मल्टीप्लायर" (Multiplier) और "वेतन वृद्धि" (Future Prospects) का सिद्धांत।
- **प्रणय सेठी बनाम नेशनल इंश्योरेंस (2017)**: मुआवजे में "भविष्य की आय" और "मुद्रास्फीति" को जोड़ने का आदेश।
- **नजीर मोहम्मद बनाम यूपी राज्य (2023)**: "साथी की हानि" (Loss of Consortium) को मान्यता और मुआवजे में वृद्धि।
- **न्यायिक दयालुता**: पीड़ितों के पक्ष में कानून की उदार व्याख्या, खासकर जब दस्तावेजी सबूत अपर्याप्त हों।

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5. मुआवजे के प्रकार और गणना:
-आर्थिक नुकसान
- चिकित्सा व्यय: अस्पताल बिल, दवाइयाँ, भविष्य के इलाज की लागत।
- आय की हानि: पीड़ित की वर्तमान और भविष्य की कमाई का नुकसान।
- *्वाहन की मरम्मत: दुर्घटना में हुए नुकसान की लागत।
- **गैर-आर्थिक नुकसान
- **दर्द और पीड़ा**: शारीरिक और मानसिक तकलीफ।
- **विकलांगता**: स्थायी या अस्थायी अक्षमता के आधार पर मुआवजा।
- **साथी की हानि**: पति/पत्नी या परिवार के सदस्य की कंपनी का नुकसान।
- **गणना के सूत्र**:
- **सरला वर्मा दिशानिर्देश**: आय × मल्टीप्लायर (उम्र के आधार पर) + भविष्य की आय वृद्धि (50% या 30%)।
- **प्रणय सेठी केस**: मुद्रास्फीति और जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए मुआवजे में 40% वृद्धि।

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6. बीमा कंपनियों और वाहन मालिकों की जिम्मेदारी:**
- **बीमा कंपनी की भूमिका**:
- वैध बीमा पॉलिसी होने पर कंपनी मुआवजा भरती है।
- यदि चालक का लाइसेंस अमान्य है या बीमा शर्तों का उल्लंघन हुआ है, तो कंपनी "पे एंड रिकवर" (Pay and Recover) के तहत मुआवजा दे सकती है।
- **वाहन मालिक की जिम्मेदारी**:
- यदि बीमा नहीं है या बीमा कवरेज से बाहर है, तो मालिक व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होता है।
- **सुप्रीम कोर्ट ने पूर्णिमा देवी बनाम ओरिएंटल इंश्योरेंस (2022)** में कहा: अस्थायी मालिक (Temporary Owner) भी बीमा दावे के लिए उत्तरदायी है।

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7. चुनौतियाँ और समाधान:**
- **दावों में देरी**: MACT में मामलों का लंबित होना।
- **समाधान**: सुप्रीम कोर्ट ने **लोक अदालतों** और **फास्ट-ट्रैक कोर्ट्स** को बढ़ावा दिया है।
- **मुआवजे की कमी**: बीमा कंपनियों द्वारा कम राशि का भुगतान।
- **समाधान**: हाई कोर्ट्स द्वारा नियमित समीक्षा और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश।
- **दस्तावेजीकरण**: ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल रिपोर्ट या FIR की कमी।
- **समाधान**: न्यायालयों द्वारा लचीले सबूत मानक (जैसे, गवाहों के बयान) स्वीकार करना।

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8. हाल के विकास और न्यायिक प्रवृत्तियाँ:**
- **डिजिटल साक्ष्य**: मोबाइल फुटेज या CCTV रिकॉर्डिंग को स्वीकार्यता।
- **पर्यावरणीय कारक**: दुर्घटना में सड़क दोष (जैसे, गड्ढे) के लिए सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही।
- **मानसिक स्वास्थ्य**: दुर्घटना के बाद PTSD (Post-Traumatic Stress Disorder) के लिए मुआवजा।

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निष्कर्ष:
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट मोटर दुर्घटना दावों में **न्याय की अंतिम पंक्ति** हैं। ये न्यायालय न केवल मुआवजे की राशि को न्यायसंगत बनाते हैं, बल्कि समाज के लिए **कानूनी मिसाल** भी स्थापित करते हैं। पीड़ितों को सलाह दी जाती है कि वे कानूनी सहायता लेकर अपने अधिकारों का प्रयोग करें और न्यायिक प्रक्रिया में सक्रिय भाग लें।

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**सन्दर्भ**: मोटर वाहन अधिनियम, 1988; सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्णय।

28/01/2025

The Allahabad High Court recently observed that live-in relationships have no social sanction. Still, the youth are attracted to such relations, and it is high time that we found some framework and solution to save moral values in society.
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28/01/2025

Observing that the right to claim a refund of stamp duty originates from the date of ex*****on of the cancellation deed, the Supreme Court on Friday (January 24) directed the refund of stamp duty to flat owners whose claim had been rejected on limitation grounds.
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28/01/2025

The Supreme Court (recently on January 22) observed that when the scope of an appeal before the High Court is limited to condonation of delay, it should not touch upon the merits of a matter. Elaborating, the Court said that once the delay is condoned, the case's merits can be examined by the appellate tribunal.
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Allahabad
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