03/06/2026
भारतीय संविधान में कुल 5 प्रकार की रिट हैं, जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32) और उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226) जारी कर सकते हैं।
भारत में 5 प्रकार की रिट:
1. बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)
* अर्थ: “सशरीर प्रस्तुत करना।”
* विवरण: यह रिट किसी भी गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिए गए व्यक्ति को रिहा करने के लिए जारी की जाती है। न्यायालय हिरासत लेने वाले अधिकारी को आदेश देता है कि वह बंदी को निश्चित समय और स्थान पर अदालत के सामने पेश करे।
2. परमादेश (Mandamus)
* अर्थ: “हम आदेश देते हैं।”
* विवरण: यह रिट किसी सार्वजनिक अधिकारी, निगम, या निचली अदालत के लिए जारी की जाती है, जब वे अपने सार्वजनिक कर्तव्य (public duty) का पालन करने से इनकार करते हैं। इसके जरिए उन्हें अपना काम पूरा करने का आदेश दिया जाता है।
3. प्रतिषेध (Prohibition)
* अर्थ: “रोकना” या “मना करना।”
* विवरण: यह रिट किसी उच्च न्यायालय द्वारा निचली अदालतों या न्यायाधिकरणों (tribunals) को अपने न्यायिक क्षेत्राधिकार से बाहर काम करने या अपने अधिकारों का उल्लंघन करने से रोकने के लिए जारी की जाती है।
4. उत्प्रेषण (Certiorari)
* अर्थ: “प्रमाणित होना” या “मंगवा लेना।”
* विवरण: यह रिट उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निचली अदालत को लंबित मामले के रिकॉर्ड को उच्च न्यायालय में भेजने के लिए जारी की जाती है। यदि निचली अदालत ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कोई फैसला दिया है, तो यह रिट उसे रद्द कर सकती है।
5. अधिकार-पृच्छा (Quo-Warranto)
* अर्थ: “किस प्राधिकार से” या “किस अधिकार के द्वारा।”
* विवरण: जब कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक पद (public office) को अवैध रूप से हथिया लेता है, तब न्यायालय उस व्यक्ति से यह पूछता है कि वह किस अधिकार (authority) से उस पद पर कार्य कर रहा है। यदि वह उचित जवाब नहीं देता, तो उसे पद से हटा दिया जाता है