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11/12/2023
अधिवक्ता हित सर्वोपरिअधिवक्ता एकता जिंदाबादराष्ट्रीय संयुक्त अधिवक्ता मंच जिंदाबाद
29/12/2021

अधिवक्ता हित सर्वोपरि
अधिवक्ता एकता जिंदाबाद
राष्ट्रीय संयुक्त अधिवक्ता मंच जिंदाबाद

राष्ट्रीय संयुक्त अधिवक्ता मंच एक ऐसा संगठन हैं जो अधिवक्ता हित के लिए हमेशा प्रयासरत हैं |इसका स्लोगन ही  #अधिवक्ता_हित...
03/07/2021

राष्ट्रीय संयुक्त अधिवक्ता मंच एक ऐसा संगठन हैं जो अधिवक्ता हित के लिए हमेशा प्रयासरत हैं |
इसका स्लोगन ही #अधिवक्ता_हित #सर्वोपरि हैं |
👉यह संगठन ज़ब से अस्तित्व मे आया तब से ही पुरे देश मे ज्ञापन अभियान, हस्ताक्षर अभियान अधिवक्ताओ के माध्यम से कर चूका हैं|
👉विगत 27 मई 2021 को संगठन के तरफ से e-मोड द्वारा प्रधानमंत्री जी, मुख्यमंत्री जी, बार कॉन्सिल ऑफ़ इंडिया को 10 मांगे अधिवक्ता हित से संबंधित मांगी गयी थी | इसी का परिणाम हैं की
#बार_काउंसिल_ऑफ_इंडिया_की_सातसदस्यीय_समिति_ने_देश_के_अधिवक्ताओं_की_सुरक्षा_के_लिये_एडवोकेट्स #प्रोटेक्शन_एक्ट_संबंधी_रूपरेखा_व #ड्राफ्ट_बिल_तैयार_कर_लिया_है.
इस बात की जानकारी बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन व वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्र ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी है.
👉बार कॉन्सिल ऑफ़ इंडिया की सात सात सदस्यीय कमेटी मे निम्नलिखित सदस्य हैं -
1. बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया के वाईस चेयरमैन व वरिष्ठ अधिवक्ता एस प्रभाकरन, 2. बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया के सदस्य व वरिष्ठ अधिवक्ता देवी प्रसाद ढल
3. बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया के सदस्य अधिवक्ता सुरेश चंद्र श्रीमाली
4.बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया के सदस्य और प्रेस कॉउन्सिल ऑफ इंडिया के सदस्य अधिवक्ता शैलेन्द्र दुबे
5. बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया के कोआर्डिनेशन कमिटी के अध्यक्ष अधिवक्ता प्रशांत कुमार सिंह
6. बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया ट्रस्ट के अध्यक्ष अधिवक्ता ए रामी रेड्डी
7. बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया लीगल ऐड कमिटी के चेयरमैन श्रीनाथ त्रिपाठी ने मिलकर तैयार किया है.
👉 इस अधिनियम में कुल 16 धाराएँ बनाई गई है

👉प्रस्तावित बिल के अनुसार किसी भी अधिवक्ता या उसके परिवार को किसी प्रकार की क्षति या चोट पहुंचाने, धमकी देने, उसके मुवक्किल द्वारा दिये गए किसी प्रकार की सूचना का खुलासा करने के लिए पुलिस या किसी पदाधिकारी के द्वारा अनुचित दबाव देना या किसी वकील को किसी मुकदमे में पैरवी करने से रोकने का दबाव या वकील की संपत्ति को किसी रूप में नुकसान पहुंचाने या किसी भी वकील के बिरुद्ध अपशब्द या अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल इस कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आएगा.👉 ऐसे अपराधों के लिये सक्षम न्यायालय द्वारा 6 माह सर 2 वर्ष तक की सजा तथा 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

इसके साथ ही अधिवक्ता को हुए नुकसान की भरपाई के लिये अलग से जुर्माना भी सक्षम न्यायालय द्वारा लगाया जा सकता है. अधिवक्ताओं के बिरुद्ध उक्त अपराध गैर-जमानतीय एवम संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आएंगे जिसकी जांच पुलिस के उच्च अधिकारी द्वारा ही किया जाएगा.

👉बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया ने अधिवक्ताओं को जरूरत पड़ने पर पुलिस द्वारा समुचित सुरक्षा मुहैया कराने का प्रावधान प्रस्तावित किया है. इसके लिये संबंधित अधिवक्ता को अपने संबंधित कोर्ट में आवेदन देना होगा. संबंधित न्यायालय इस आवेदन पर संबंधित बार कॉउन्सिल या बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया से संबंधित अधिवक्ता के आचरण की जानकारी प्राप्त कर पुलिस प्रशासन को सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश देगा. अधिवक्ता को एक बार उपलब्ध कराई गई पुलिस सुरक्षा तब तक वापस नहीं होगी जब तक संबंधित कोर्ट उसे वापस लेने का निर्देश नही देता है.

अधिवक्ताओं के कर कर्त्तव्यों के निर्वहन में किसी प्रकार की त्रुटि होने पर अधिवक्ता जिम्मेदार नही ठहराया जाएगा. कोई भी पुलिस अधिकारी किसी भी अधिवक्ता को तब तक गिरफ्तार नहीं करेगा जब तक मुख्य दंडाधिकारी का स्पस्ट आदेश गिरफ्तार करने का नही हो.

👉ड्राफ्ट बिल में यह भी प्रस्तावित्त है कि किसी प्रकार के प्राकृतिक आपदा की स्थिति में राज्य व केन्द्र सरकार हर एक जरूरतमंद वकील को आवश्यकतानुसार कम से कम 15000 रुपया प्रति माह आर्थिक सहायता प्रदान करेगी. इसके साथ ही केन्द्र औऱ राज्य सरकार को अधिवक्ताओं के लिये बीमा, चिकित्सा सुविधा, समेत सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं को लागू करने का प्रावधान करने को कहा गया है.

श्री मिश्र ने बताया कि बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया का प्रयास होगा कि संसद से इस बिल को जल्द पास करा लिया जाय|
हरे राम पाण्डेय
अधिवक्ता
उच्च न्यायालय इलाहाबाद
युवा प्रदेश अध्यक्ष (उ. प्र.)
राष्ट्रीय संयुक्त अधिवक्ता मंच

👉सुचना का अधिकार (Right to information Act) R.T.I.भारत एक लोकतान्त्रिक देश है| इस देश में लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए स...
17/01/2021

👉सुचना का अधिकार (Right to information Act) R.T.I.

भारत एक लोकतान्त्रिक देश है| इस देश में लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए समय समय पर कानून बनाए और बदले जाते रहते है|
सूचना का अधिकार भी इसी तरह का एक कानून है, जिसके अंतर्गत देश का लोकतंत्र मजबूत होता है और प्रशासनिक कार्यों में सहभागिता बढ़ती हैं |

सूचना का अधिकार कानून हमारे देश में 2005 में लागू हुआ।
👉इस कानून को लाने का सबसे बड़ा उद्देश्य आम लोगों को सरकार से सवाल करने का हक़ देना था. इस कानून की सहायता से कोई भी आम व्यक्ति किसी भी सरकारी कार्यालय में अपना आरटीआई दर्ज करा कर किसी भी तरह की जानकारी प्राप्त कर सकता है. सरकार से सवाल पूछने का हक़ देश के हर नागरिक को है.

👉RTI से सम्बंधित अन्य जानकारी -

👉RTI से आप सरकार से कोई भी सवाल पूछकर सूचना ले सकते है।
👉RTI से आप सरकार के किसी भी दस्तावेज़ की जांच कर सकते है।
👉RTI से आप दस्तावेज़ की प्रमाणित कापी ले सकते है।
👉RTI से आप सरकारी कामकाज में इस्तेमाल सामग्री का नमूना ले सकते है।
👉RTI से आप किसी भी कामकाज का निरीक्षण कर सकते हैं।
👉RTI में कौन- कौन सी धारा हमारे काम की है।

👉धारा 6 (1) - RTI का आवेदन लिखने का धारा है।
👉धारा 6 (3) - अगर आपका आवेदन गलत विभाग में चला गया है। तो वह विभाग
इस को 6 (3) धारा के अंतर्गत सही विभाग मे 5 दिन के अंदर भेज देगा।
👉धारा 7(5) - इस धारा के अनुसार BPL कार्ड वालों को कोई आरटीआई शुल्क नही देना होता।
👉धारा 7 (6) - इस धारा के अनुसार अगर आरटीआई का जवाब 30 दिन में नहीं आता है
तो सूचना निशुल्क में दी जाएगी।
👉धारा 18 - अगर कोई अधिकारी जवाब नही देता तो उसकी शिकायत सूचना अधिकारी को दी जाए।
👉धारा 8 - इस के अनुसार वो सूचना RTI में नहीं दी जाएगी जो देश की अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा हो या विभाग की आंतरिक जांच को प्रभावित करती हो।
👉धारा 19 (1) - अगर आप
की RTI का जवाब 30 दिन में नहीं आता है।तो इस
धारा के अनुसार आप प्रथम अपील अधिकारी को प्रथम अपील कर सकते हो।
👉धारा 19 (3) - अगर आपकी प्रथम अपील का भी जवाब नही आता है तो आप इस धारा की मदद से 90 दिन के अंदर दूसरी
अपील अधिकारी को अपील कर सकते हो।

👉RTIकैसे लिखे?

इसके लिए आप एक सादा पेपर लें और उसमे 1 इंच की कोने से जगह छोड़े और नीचे दिए गए प्रारूप में अपने RTI लिख लें..................................

सूचना का अधिकार 2005 की धारा 6(1) और 6(3) के अंतर्गत आवेदन।

सेवा में,

अधिकारी का पद / जनसूचना अधिकारी
विभाग का नाम.............

विषय - RTI Act 2005 के अंतर्गत .................. से संबधित सूचनाऐं।

अपने सवाल यहाँ लिखें।

1-..............................
2-...............................
3-..............................
4-..............................

मैं आवेदन फीस के रूप में 10रू का पोस्टलऑर्डर ........ संख्या अलग से जमा कर रहा /रही हूं।
या
मैं बी.पी.एल. कार्डधारी हूं। इसलिए सभी देय शुल्कों से मुक्त हूं। मेरा बी.पी.एल.कार्ड नं..............है।
यदि मांगी गई सूचना आपके विभाग/कार्यालय से सम्बंधित
नहीं हो तो सूचना का अधिकार अधिनियम,2005 की धारा 6 (3) का संज्ञान लेते हुए मेरा आवेदन सम्बंधित लोकसूचना अधिकारी को पांच दिनों के
समयावधि के अन्तर्गत हस्तान्तरित करें। साथ ही अधिनियम के प्रावधानों के तहत
सूचना उपलब्ध् कराते समय प्रथम अपील अधिकारी का नाम व पता अवश्य बतायें।

भवदीय

नाम:....................
पता:.....................
फोन नं:..................

हस्ताक्षर...................

ये सब लिखने के बाद अपने हस्ताक्षर कर दें।
👉 केंद्र से सूचना मांगने के लिए आप 10 रु देते है और एक पेपर की कॉपी मांगने के 2 रु देते है।
👉हर राज्य का RTI शुल्क अगल अलग है जिस का पता आप कर सकते हैं।

 #किसान_विधेयक_मे_क्या_क्या_प्रावधान_है??  #क्या_यह_किसान_विरोधी_है? किसान देश का पालनहार और अन्नदाता  होता है| वह दिन र...
30/11/2020

#किसान_विधेयक_मे_क्या_क्या_प्रावधान_है?? #क्या_यह_किसान_विरोधी_है?

किसान देश का पालनहार और अन्नदाता होता है| वह दिन रात खेतो मे मेहनत करके पुरे देश का पेट भरता है |
आज वही किसान अपने खेतो को छोड़कर सड़को पर क़ृषि कानूनों के विरोध मे उतर आया है |
केंद्र सरकार ने लोकसभा मे तीन क़ृषि विधेयकों को पास किया है | सरकार के अनुसार यह क़ानून किसानो के हित मे है पर किसानो का मानना है कि इस क़ानून से पूंजीपतियों को लाभ पहुंचेगा |
👉वह तीन विधेयक कौन -2 से है तथा सरकार और किसानो का क्या मत है और किसानो को क्यू डर है??

👉1- #कृषक_उत्पाद_व्यापार_एवं_वाणिज्य #सम्बर्धन_एवं_सरलीकरण #विधेयक-2020
इस क़ानून का उद्देश्य किसानो को अपने उत्पाद तय मंडियों से बाहर बेचने कि छुट देना है | इसका लक्ष्य किसानो को उनकी उपज के लिए अन्य प्रतिस्पर्धी व्यापार माध्यमों से लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना है |
इस क़ानून के तहत किसानो से उनकी उपज कि बिक्री पर कोई फीस नहीं ली जाएगी |
#सरकार_का_क्या_कहना_है? यह क़ानून किसानो के लिए नए विकल्प उपलब्ध कराएगा, उनकी उपज पर आने वाले लागत को कम करेगा इससे जहा ज्यादा उत्पादन हुआ है उन क्षेत्रो के किसानो दूसरे प्रदेशो मे जहा उस विशेष फसल कि कमी होंगी वहां अपनी क़ृषि उपज बेचकर बेहतर दाम प्राप्त कर पाएंगे

#किसान_संगठन_का_क्या_कहना_है?
यदि किसान अपनी उपज को पंजीकृत क़ृषि उपज मंडी समिति के बाहर बेचते है तो राज्य को राजस्व का नुकसान होगा क्युकी वे मंडी शुल्क प्राप्त नहीं कर पाएंगे | यदि पूरा क़ृषि व्यापार मंडियों से बाहर चला जाता है तो कमीशन एजेंट बेहाल होंगे तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य आधारित खरीद प्रणाली का अंत हो सकता है और निजी कंपनियों द्वारा शोषण बढ सकता है |
हलाकि सरकार का कहना है कि एम.एस.पी. नियत रहेगी पर किसानो को इस बात पर भरोसा नहीं है उनका कहना है कि पहले भी किसान अपनी फसल बेचने के लिए स्वतंत्र थे और उन्हें राज्य के भीतर ही अच्छा दाम मिल रहा है तो बाहर क्यों जाए | उनका कहना है कि यह क़ानून पूंजीपतियों को ध्यान मे रख कर बनाया गया है |

👉2- #मूल्य_आश्वासन_और_क़ृषि_सेवा िसान_सशक्तिकरण_एवं_संरक्षण #अनुबंध_विधेयक-2020
प्रस्तावित क़ानून के तहत किसानो को उनके होने वाले क़ृषि उत्पादों को पहले से तय दाम पर बेचने के लिए क़ृषि व्यावसायी फर्मो निर्यातकों,थोक विक्रेताओं के साथ अनुबंध का अधिकार मिलेगा |
#सरकार_का_पक्ष_है -
किसान का अपनी फसल को लेकर जो जोखिम होता है वो उसके खरीददार के तरफ जायेगा जिसके साथ उसने अनुबंध किया है |उन्हें आधुनिक तकनीक और बेहतर इनपुट देने के अलावा उनकी लागत को कम करके उनकी आय को बढ़ाना है |

#किसानो_का_क्या_कहना_है?
इस क़ानून को भारतीय खाद्य और क़ृषि व्यवस्था पर हावी रहने वाले बड़े उद्योगपतियों के अनुरूप बनाया गया है और ये किसानो के मोल तोल कि शक्ति को भी कमजोर करेगा इसके अलावा बड़ी निजी कंपनियों, निर्यातकों को इससे क़ृषि मे बढ़त मिल सकती है और किसान अपनी इच्छानुसार फसलों का चुनाव नहीं कर पाएंगे बल्कि अनुबंध के अनुसार उनसे जुड़े व्यवसायिओं के अनुसार उनको फसलों का चुनाव करना पड़ेगा |

👉3- #आवश्यक_वस्तु_संसोधन_विधेयक -2020
यह क़ानून आवश्यक वस्तुओ कि सूची से अनाज, आलू, प्याज़, तिलहन जैसे उपज को युद्ध, अकाल, प्राकृतिक आपदा जैसी असाधारण परिस्थिति को छोड़कर सामान्य परिस्थिति मे हटाने का प्रस्ताव करता है और इस तरह कि वस्तुओ पर लागु भण्डारण कि सीमा भी समाप्त हो जाएगी यानि अब इन फसलों का लम्बे समय तक भण्डारण करना कानूनी रूप से वैध होगा |

#सरकार_का_पक्ष-
इससे क़ृषि क्षेत्र मे निजी निवेश, F.D.I को आकर्षित करने के साथ -2 मूल्य स्थिरता लाना है | ये विधेयक यह सुनिश्चित करने के लिए है कि किसानो को मंडियों के नियमों के अधिन हुए किसानो को उनकी उपज का बेहतर दाम मिले|

#किसानो_का_क्या_कहना_है?
इससे बड़ी कंपनियों को इन क़ृषि उत्पादों के भंडारण कि छुट मिल जाएगी जिससे वे किसानो पर अपनी मर्जी थोप सकेंगे और किसानो के फसलों के औने -पौने दाम पर खरीद कर उनका भण्डारण कर सकेंगे तथा ज़ब अनाज कि कमी आएगी तो उसी अनाज को निजी कंपनियां उच्चे दाम पे बेच सकेंगी इससे मॅहगाई बढ़ेगी |

हरे राम पाण्डेय
LL.M
अधिवक्ता
उच्च न्यायालय इलाहाबाद

 #छेड़छाड़_क्या_है?? अनुचित रूप से कोई बात कहना, अशिष्ट व्यवहार करना, तंग करना (जैसे—राह चलती लड़कियों से छेड़-खानी आदि छेड़छ...
04/11/2020

#छेड़छाड़_क्या_है??
अनुचित रूप से कोई बात कहना, अशिष्ट व्यवहार करना, तंग करना (जैसे—राह चलती लड़कियों से छेड़-खानी आदि छेड़छाड़ की परिभाषा के अंतर्गत आता है |
अक्सर हम समाज में महिलाओं के प्रति अपराधों को देखते हैं तथा स्कूल कॉलेज से लेकर कार्यस्थल तक महिलाओं से संबंधित ऐसे अपराध जिन्हें बहुत छोटा मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, वह घटित होते रहते हैं। कानून की जानकारी के अभाव में महिलाएं भी ऐसे अपराधों को नजरअंदाज करती रहती हैं इस तरह के अपराधों पर महिलाओं को सतर्क रहना चाहिए तथा इस प्रकार के अपराधियों के विरुद्ध खुलकर दांडिक कार्यवाही हेतु रिपोर्ट दर्ज करवायी जानी चाहिए। समाज में यदि इस तरह के अपराधियों को दंड दिए जाने लगे तो महिलाओं के विरुद्ध होने वाले विभिन्न विभत्स अपराध को रोका जा सकता है तथा बलात्कार जैसी घटनाएं जो आज समाज के लिए नासूर बन गयी हैं, उन्हें भी कम किया जा सकता है।
👉 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत महिलाओं का पीछा करना, उन्हें सेक्स अपील मानना , उनके सामने निर्वस्त्र होना, उन्हें अश्लील वस्तुएं जैसे अश्लील चित्र और पोर्न फ़िल्म भेजना तथा अश्लील पुस्तक पढ़ने के लिए देना या अश्लील कहानियां प्रेषित करना ऐसे समस्त कृत्य संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं तथा पुलिस इन अपराधों के अंतर्गत एफआईआर दर्ज करती है|
👉 भारतीय दंड संहिता की धारा 354 भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के अंतर्गत जो कोई किसी स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से यह संभाव्य जानते हुए की एतदद्वारा व उसकी लज्जा भंग करेगा, उस स्त्री पर हमला करेगा या आपराधिक बल का प्रयोग करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि 1 वर्ष से कम की नहीं होगी किंतु जो 5 वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडित होगा।
👉 भारतीय दंड संहिता की धारा 354 लज्जा भंग करने के आशय से स्त्री पर आपराधिक बल का प्रयोग करना यह हमला करने से संबंधित है जो कि एक दंडनीय अपराध है। इस अपराध में कम से कम 1 वर्ष का कारावास है जो अधिकतम 5 वर्ष तक का हो सकता है।
👉प्रमोद सिंह Vs स्टेट ऑफ जम्मू कश्मीर
का एक मामला है, इसमें अभियुक्त पर रीता कुमारी नामक एक 9 वर्षीय बालिका के साथ बलात्कार करने का आरोप था, लेकिन चिकित्सा एवं अन्य साक्ष्य से यह पाया गया कि इस बालिका का कौमार्य भंग नहीं हुआ था और न ही उसके शरीर और यौन अंगों पर क्षति अथवा चोट के कोई निशान नहीं थे। इसे बलात्कार नहीं मानकर स्त्री की लज्जा भंग का मामला माना गया। तथा इस मामले में किसी बालिका के कौमार्य का परीक्षण किया गया था। बाद के मुकदमों में बलात्कार जैसे संगीन अपराध के संबंध में कौमार्य के परीक्षण को मानव अधिकारों के विरुद्ध माना गया।
👉श्रीमती रूपम देवल बजाज Vs केपीएस गिल का मामला 1996 SC 309
धारा 354 के अंतर्गत चलने वाला यह प्रकरण सर्वाधिक प्रसिद्ध प्रकरण है। इस प्रकरण में स्त्री की लज्जा भंग के संबंध में श्रीमती रूपल देवल बजाज पंजाब कैडर की एक आईएएस अधिकारी है। घटना के समय वह पंजाब के फाइनेंस डिपार्टमेंट में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थीं। दिनांक 18 जुलाई 1988 को वह एसएल कपूर के यहां एक दावत में गयीं। उस दावत में पंजाब सरकार के कई वरिष्ठ महत्वपूर्ण अधिकारी भी थे। दावत में पंजाब के पुलिस महानिदेशक केपीएस गिल भी आमंत्रित थे। देवल का कहना था कि रात्रि के करीब 10:00 बजे होंगे, केपीएस गिल ने उन्हें पास आकर बैठने को कहा फिर उठने को कहा। जब वह उठीं तो गिल उनके कूल्हे पर हाथ मारा। देवल को यह बहुत बुरा लगा। उन्होंने गिल के विरुद्ध 29 जुलाई 1988 को भारतीय दंड सहिंता की धारा 341, 342, 352, 354 एवं 509 के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई। इस मामले में जब गिल के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्यवाही होने की संभावना नहीं लगी तो देवल ने उच्चतम न्यायालय में दस्तक दी। उच्चतम न्यायालय ने मामले के तत्वों को दृष्टिगत रखते हुए गिल के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 354ए एवं 509 के अंतर्गत प्रथम दृष्टया मामला बनना पाया तथा मजिस्ट्रेट को संज्ञान लेकर विचारण करने का निर्देश दिया। इस मामले में केपीएस गिल को 3 माह का कारावास हुआ था तथा 17 वर्ष का लंबा विचारण झेलना पड़ा।
👉एसपी मलिक Vs स्टेट ऑफ उड़ीसा इस मामले में निर्धारित किया गया कि किसी महिला के पेट पर हाथ रख देने मात्र को धारा 354 के अंतर्गत स्त्री की लज्जा भंग नहीं माना जा सकता। लज्जा भंग करने का आशय होना भी आवश्यक है। 👉पांडुरंग सीताराम भागवत Vs स्टेट ऑफ महाराष्ट्र AIR 2005 SC 643
के मामले में किसी स्त्री को पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लेना तथा उसकी छाती दबाने को उच्चतम न्यायालय ने स्त्री की लज्जा भंग माना है। न्यायालय ने कहा है कि स्त्री की लज्जा भंग का मामला अक्सर मिथ्या नहीं होता क्योंकि सामान्य तौर पर कोई भी महिला अपने चरित्र को दांव पर नहीं लगाना चाहती। कोई भी महिला पुलिस थाने तक तब ही जाती है जब उसके साथ कोई प्रतिष्ठा और गरिमा से संबंधित कोई बड़ी घटना घट जाती है। #आईपीसी_की_धारा_354_के_अंतर्गत #स्त्री_की_लज्जा_भंग_के_अपराध_के े_लिए_अभियुक्त_को_यह #जानकारी_होना_मात्र_पर्याप्त_है_कि #उसके_कृत्य_से_स्त्री_की_लज्जा_भंग #होना_संभव_है। ोना_सदैव #आवश्यक_नहीं_है_और_न_यह_ही #इसका_एकमात्र_मापदंड_है। कोई भी ऐसा कृत्य जिससे यह संभव है कि स्त्री की लज्जा भंग होगी वहां धारा 354 के अंतर्गत अपराध का गठन कर देता है। किसी महिला को खींचना और उसके साथ लैंगिक संभोग करने के आशय से कपड़े उतार देना स्त्री की लज्जा भंग का अपराध है।
👉 #धारा_354_A- भारतीय दंड संहिता की धारा 354ए के अंतर्गत किसी महिला को शारीरिक संपर्क और कुछ ऐसी क्रियाओं के माध्यम से जिस में लैंगिक संबंध बनाने संबंधी प्रस्ताव रखा जा रहा है, करता है, जिसे सेक्स के लिए डिमांड माना जाएगा। या किसी महिला को लैंगिक स्वीकृति अर्थात सेक्स करने के लिए कोई मांग अनुरोध करता है। या किसी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध अश्लील साहित्य दिखाता है या फिर अश्लील तस्वीरें भेजता है, पोर्न भेजता है ऐसी परिस्थिति में वह व्यक्ति कठोर कारावास से जिसकी #अवधि_3_वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से दोनों से दंडित किया जाएगा। आज सूचना प्रौद्योगिकी का समय है। ऐसे समय में व्हाट्सएप मैसेंजर जैसे इत्यादि सॉफ्टवेयर के माध्यम से महिलाओं को अश्लील तस्वीरें तथा अश्लील मैसेज भेज दिए जाते हैं जो कि उन्हें सेक्स करने की डिमांड जैसे होते हैं। यह एक संज्ञेय अपराध है
👉 #धारा_354_B -यदि कोई पुरुष किसी महिला को सार्वजनिक स्थान में निर्वस्त्र होने के लिए बाध्य करने के आशय से उस पर हमला करेगा या उसके प्रति आपराधिक बल का प्रयोग करेगा या ऐसा दुष्प्रेरण करेगा, दोनों में से किसी भांति के कारावास जिसकी अवधि े_कम_3_वर्ष तक की होगी तथा #अधिक_से_अधिक_7_वर्ष तक की हो सकती है और इसके साथ जुर्माना भी होगा से दंडनीय किया जाएगा।
यह एक संज्ञेय अपराध है। इस प्रकार के अपराध में पुलिस बगैर वारंट के गिरफ्तार करती है
👉 #धारा_354_C -जब कोई भी महिला अपने किसी प्राइवेट काम में लगी हुई है, जैसे कोई स्त्री कपड़े बदल रही है या नहा रही है या फिर कोई भी इस प्रकार का काम जिसे वह प्राइवेट करती है। इस तरह के काम करते हुए यदि कोई पुरुष उस स्त्री को एकटक देखेगा तथा उसकी तस्वीरें खींचेगा और उन तस्वीरों को प्रसारित कर देगा, इस प्रकार के पुरुष को #पहली_बार #दोष_सिद्ध_पर_कम_से_कम_1_वर्ष का कारावास और #अधिक_से_अधिक_3_वर्ष तक का कारावास हो सकता है। दूसरी बार इसी प्रकार के अपराध में दोषसिद्धि होने पर कम से कम 3 वर्ष का कारावास और अधिक से अधिक 7 वर्ष का कारावास दिया जा सकता है।
👉 #धारा_354_D- यह धारा महिलाओं का पीछा करने वाले अपराधियों के संबंध में दंड का प्रावधान करती है। आज समाज में देखने को मिलता है कि युवतियों के पीछे लफंगे लग जाते हैं तथा उनका स्कूल कॉलेज तक जाना दूभर कर देते हैं।
यह एक दंडनीय अपराध है जो संज्ञेय और गैर जमानती है। इस प्रकार के अपराध में पहली बार दोष सिद्ध होने पर #अधिकतम_3_वर्ष का कारावास और दूसरी बार दोषसिद्ध पर #अधिकतम_5_वर्ष तक के कारावास और जुर्माना दोनों का प्रावधान रखा गया है।
👉धारा 354 के अंतर्गत स्त्री की लज्जा भंग करना और (354डी) के अंतर्गत स्त्री के कपड़े फाड़ देना सबसे गंभीर अपराध है जिसमें #अधिकतम_7_वर्ष तक का कारावास हो सकता है और साथ में जुर्माना भी

 िहाद_क्या_है? लव जिहाद दो शब्दों से मिलकर बना है. अंग्रेजी भाषा का शब्द लव यानी प्यार, मोहब्बत, इश्क और अरबी भाषा का शब...
02/11/2020

िहाद_क्या_है?

लव जिहाद दो शब्दों से मिलकर बना है. अंग्रेजी भाषा का शब्द लव यानी प्यार, मोहब्बत, इश्क और अरबी भाषा का शब्द जिहाद. जिसका मतलब होता है किसी मकसद को पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देना. यानी जब एक धर्म विशेष को मानने वाले दूसरे धर्म की लड़कियों को अपने प्यार के जाल में फंसाकर उस लड़की का धर्म परिवर्तन करवा देते हैं तो इस पूरी प्रक्रिया को लव जिहाद कहा जाता है|

्द_भारत_के_सन्दर्भ_में_प्रयोग #किया_जाता_है_किन्तु_कथित_रूप_से #इसी_तरह_की_गतिविधियाँ_यूके_आदि #देशों_में_भी_हुई_हैं।
ामले_मे_सबसे_बदतर_स्थिति #पडोसी_देश_पाकिस्तान_की_है
#केरल_हाईकोर्ट_के_द्वारा_दिए_एक #निर्णय_में_लव_जेहाद_को_सत्य_पाया #है।
👉नवंबर 2009 में, पुलिस महानिदेशक जैकब पुन्नोज ने कहा कि कोई भी ऐसा संगठन नहीं है जिसके सदस्य केरल में लड़कियों को मुस्लिम बनाने के इरादे से प्यार करते थे।
👉दिसंबर 2009 में, न्यायमूर्ति के.टी. शंकरन ने पुन्नोज की रिपोर्ट को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और निष्कर्ष निकाला कि जबरदस्ती धर्मांतरण के संकेत हैं। अदालत ने "लव जिहाद" मामलों में दो अभियुक्तों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों में इस तरह के 3,000-4,000 सामने आये थे।

👉कर्नाटक सरकार ने 2010 में कहा था कि हालांकि कई महिलाओं ने इस्लाम में धर्म परिवर्तन किया है लेकिन ऐसा करने के लिए उन्हें मनाने का कोई संगठित प्रयास नहीं किया गया।

ारणा_पहली_बार_2009_में #केरल_और_कर्नाटक_में_व्यापक #धर्मांतरण_के_दावों_के_साथ_भारत_में #राष्ट्रीय_स्तर_पर_पर_आई।
लेकिन ऐसे दावे बाद में पूरे भारत, पाकिस्तान और यूनाइटेड किंगडम में फैल गए। 2009, 2010, 2011 और 2014 में #भारत_में_लव_जिहाद_के_आरोपों_ने #विभिन्न_हिन्दू_सिख_और_ईसाई #संगठनों_में_चिंता_जताई_जबकि #मुस्लिम_संगठनों_ने_आरोपों_से_इनकार_किया।

👉 अब तक लव जेहाद शब्द को कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं थी. लेकिन ुप्रीम_कोर्ट_ने_मान_लिया_है_कि_लव_जिहाद_होता_है_और_मुस्लिम #युवक_हिंदू_लड़कियों_को_अपने_प्यारके_जाल_में_फंसाकर_उनका_धर्म #परिवर्तन_करवाकर_लव_जेहाद_करते #हैं|

👉बर्मा की वर्तमान रोहिंग्या समस्या के पीछे भी लव जिहाद की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।
👉बौद्ध नेता अशीन विराथू का आरोप है कि मुस्लिम युवक उनकी लड़कियों को अपने प्रेमजाल में फँसाकर शादियाँ कर लेते हैं और ज्यादा बच्चे पैदा करके आबादी बढ़ाकर जनसंख्या संतुलन बिगाड़ रहे हैं। बौद्ध समाज को सारी दुनिया में सबसे अहिंसक और शान्त स्वभाव का माना जाता है
👉लव जिहाद अपने आप में सही शब्द नहीं है क्योंकि जहाँ जिहाद होता है वहाँ लव के लिये कोई जगह नहीं होती और जहाँ लव होता है वहां जिहाद की कोई जरूरत ही नहीं है।
👉इस्लामिक धारणा के अनुसार जिहाद पवित्र शब्द हो सकता है लेकिन वर्तमान में जिहाद का मतलब मासूम और निर्दोष महिलाओं, पुरूषों और बच्चों का शोषण-उत्पीडऩ तथा बर्बर हत्याएँ करना ही है। दुनिया भर में इस्लाम फैलाने के लिये दनदनाते घूम रहे आतंकवादी मासूम लोगों की हत्याएं जिहाद के नाम पर ही कर रहे हैं। अमेरिका में हुआ लोन वुल्फ हमला करने वाला आतंकवादी अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाकर मासूम बच्चों को अपने ट्रक से कुचल रहा था।

👉इसी जिहाद का एक हिस्सा है लव जिहाद। भारत में इसे हिंदू संगठनों का बेमतलब का हो हल्ला करार दिया जाता है जबकि सच यह है कि इससे कहीं पहले यूरोप में लड़कियों ने यह मामला उठाया है कि उन्हें गलत तरीके से फँसाकर शादियाँ की गई हैं और उसके बाद उनका जबरन धर्म-परिवर्तन किया गया है। अक्सर इसे हल्के में लिया जाता है और कहा जाता है कि ये कोरी बकवास है जबकि मेरा मानना है कि सच से आँखें चुराने से सच झूठ नहीं हो जाता है। लव-जिहाद एक ऐसा सच है जिससे इन्कार करना मूर्खता ही होगी लेकिन यह भी एक सच है कि हिंदू-मुस्लिम युवक और युवतियों के बीच होने वाले सारे प्रेम-विवाहों को लव-जिहाद का नाम नहीं दिया जा सकता।

👉👉👉इसकी शुरुआत तब हुई जब केरल हाईकोर्ट ने 25 मई को हिंदू महिला अखिला अशोकन की शादी को रद्द कर दिया था. अखिला अशोकन ने दिसंबर 2016 में मुस्लिम शख्स शफीन से निकाह किया था|
तब मुस्लिम पति द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक अपील दायर की गई थी, जहां अदालत ने लव जिहाद के पैटर्न की स्थापना के लिए सभी समान मामलों की जांच करने के लिए एनआईए को निर्देश दिया।

👉अभी कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने भी घोषणा की है की लव जिहाद पर जल्दी क़ानून बनेगा |
अब यही देखना है की कब तक इस समस्या से निजात मिलेगा???

 ाहरी_व्यक्ति_भी_जम्मू_और  #कश्मीर_मे_जमीन_खरीद_सकेंगे| #दुनिया_में_स्वर्ग_कहीं_है,  #तो_यहीं_हैं'           यह लाइन जम्...
28/10/2020

ाहरी_व्यक्ति_भी_जम्मू_और #कश्मीर_मे_जमीन_खरीद_सकेंगे|

#दुनिया_में_स्वर्ग_कहीं_है, #तो_यहीं_हैं'
यह लाइन जम्मू और कश्मीर के लिए हमेशा एक पहचान रही है। हालांकि, इस स्वर्ग में अपना मकान बनाना भारतवासियों के लिए आसान नहीं रहा है। लेकिन अब ऐसा नहीं है। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में भूमि स्वामित्व अधिनियम संबंधी कानूनों में संशोधन कर दिया है। #देश_का_कोई_भी #नागरिक_जम्मू- #कश्मीर_में_अब #फैक्ट्री, ा_दुकान_के_लिए #जमीन_खरीद_सकता_है।
इसके लिए उसे किसी भी तरह के स्थानीय निवासी होने का सबूत देने की जरूरत नहीं होगी।
#हालांकि_खेती_की #जमीन_को_लेकर_रोक_जारी_रहेगी।

#जम्मू- #कश्मीर_पुनर्गठन_अधिनियम2019

यह अधिनियम राज्य सभा द्वारा 5अगस्त 2019 तथा लोक सभा द्वारा 6 अगस्त 2019 को अधिनियमित हुआ तथा 9अगस्त 2019 को इस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर हुए |
यह अधिनियम कुछ इस प्रकार है
जम्मू -कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम-2019 भारत की संसद का एक अधिनियम है। ... इस अधिनियम में जम्मू और कश्मीर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में पुनर्गठित करने का प्रावधान है, (१) जम्मू और कश्मीर (२) लद्दाख। िनियम_के_प्रावधान३१ #अक्टूबर२०१९_से_लागू_होंगे, जो भारत के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती है।
भारतीय संविधान के सभी प्रावधान जम्मू और कश्मीर पर लागू होंगे साथ ही जम्मू और कश्मीर की पुराने रणबीर दंड संहिता को भंग करके भारतीय दंड संहिता लागु होगी।

एक बार फिर से गुपकार घोषणा का जिन्न  बाहर निकलने वाला है क्युकी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख  महबूबा मुफ़्ती अपने...
15/10/2020

एक बार फिर से गुपकार घोषणा का जिन्न बाहर निकलने वाला है क्युकी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ़्ती अपने 14महीने के हिरासत के बाद रिहा हो गयी है और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला ने उनसे मुलाकात भी की है |
#क्या_है_गुपकार_घोषणा?

जम्मू-कश्मीर राज्य के विशेष दर्जे की बहाली के लिए नेशनल कांफ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, कांग्रेस, पीपुल्स कांफ्रेंस, माकपा, अवामी नेशनल कांफ्रेंस ने चार अगस्त 2019 को नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के गुपकार आवास पर सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी। इन सभी दलों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर भी किया,
इस प्रस्ताव में कहा गया था कि दल सर्वसम्मति से घोषणा करते हैं कि जम्मू-कश्मीर की पहचान, स्वायत्तता और विशेष दर्जे की रक्षा के लिए वे एकजुट रहेंगे।
इसके एक दिन बाद पांच अगस्त को केंद्र ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने की घोषणा की थी।
#गुपकार_घोषणा_में_कहा_गया_था_कि #अनुच्छेद_35ए_और_अनुच्छेद_370_में_संशोधन_या_इन्हें_खत्म_करना #असंवैधानिक_होगा।
सीमांकन या राज्य का बंटवारा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के खिलाफ आक्रामकता होगा।
👉कांग्रेस ने यू-टर्न लेते हुए अनुच्छेद 370 और 35-ए की बात न करके लद्दाख को छोड़कर जम्मू-कश्मीर को ही पूर्ण राज्य का दर्जा और स्थानीय निवासियों की भूमि और नौकरियों के लिए संवैधानिक गारंटी की सुरक्षा के लिए अपने संघर्ष को जारी रखने का संकल्प दोहराया है।
पार्टी जम्मू-कश्मीर के स्थानीय लोगों के संवैधानिक अधिकार और पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की अपनी मांग पर कायम है। इसके अलावा संविधान की अनुसूची छठे के तहत लद्दाख क्षेत्र के लोगों द्वारा उनके अधिकारों की रक्षा करने का भी समर्थन करती है।

👉नेशनल कांफ्रेंस के माध्यम से जारी बयान में कहा गया कि अनुच्छेद 35-ए व 370 की बहाली, जम्मू-कश्मीर के संविधान व राज्य के दर्जे की बहाली के लिए वे संघर्ष करते रहेंगे। राज्य का बंटवारा किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं है। हम दोहराते हैं कि हमारे बिना कुछ नहीं है। पिछले वर्ष चार अगस्त को गुपकार घोषणा पर हस्ताक्षर करने वाले दलों के बीच बहुत कम संवाद हो सका, क्योंकि सरकार ने कई पाबंदियां और दंडात्मक रोक लगा रखी थी। इसका उद्देश्य सभी सामाजिक और राजनीतिक बातचीत व प्रक्रिया को रोकना था। संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर, पीपुल्स कांफ्रेंस अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन, माकपा नेता एमवाई तारिगामी और जम्मू-कश्मीर आवामी नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुजफ्फर शाह शामिल हैं।

#गुपकार_घोषणा_के_परिणाम - जम्मू-कश्मीर की शांतिप्रिय जनता के लिए पीड़ा का वक्त है। साथ ही साथ पूरा देश भी अशांत हो सकता है | यह घोषणा किसी भी स्थिति मे देश के लिए लाभदायक नहीं है |

#अनुच्छेद_370_और_35ए, #जो_जम्मू #कश्मीर_को_विशेष_राज्य_का_दर्जा #देता_था|

👉अनुच्छेद 370 को 17 अक्टूबर 1949 को भारत के संविधान में शामिल किया गया था. इसके तहत जम्मू कश्मीर को अपना एक अलग संविधान बनाने और भारतीय संविधान (अनुच्छेद 1 और अनुच्छेद 370 को छोड़कर) को लागू न करने की इजाजत दी गई है.

👉अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर के संबंध में संसद की विधायी शक्तियों को प्रतिबंधित करता है. #इंस्ट्रूमेंट_ऑफ_एक्सेशन’ ( #अधिमिलन #पत्र) में शामिल किए गए विषयों से संबंधित किसी केंद्रीय कानून को जम्मू कश्मीर में लागू करने के लिए राज्य सरकार का परामर्श लेना जरूरी होता है.

👉भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के बाद #इंस्ट्रूमेंट_ऑफ_एक्सेशन लाया गया था. इसके जरिये करीब 600 रियासतों को भारत या पाकिस्तान में शामिल होने का प्रस्ताव रखा गया. भारत में शामिल होने के लिए इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन के जरिये जम्मू कश्मीर समेत अन्य रियासतों ने नियम और शर्तें रखी थीं.

👉 #अनुच्छेद_35ए अनुच्छेद 370 से ही निकला है. साल 1954 में राष्ट्रपति के एक आदेश के माध्यम से इसे शामिल किया गया था. अनुच्छेद 35ए राज्य के स्थायी निवासियों का परिभाषित करने और उन्हें विशेष अधिकार और सुविधा प्रदान करने के लिए जम्मू कश्मीर विधायिका को अधिकार देता है.

👉 #अनुच्छेद_35ए के तहत राज्य में जमीन खरीदने से संबंधित कुछ विशेषाधिकार वहां के नागरिकों को दिए गए हैं.

👉इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर हस्ताक्षर करते वक्त जम्मू कश्मीर के लिए क्या शर्तें रखी गईं
जम्मू कश्मीर के लिए बने इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन में लिखा गया है कि संसद को जम्मू कश्मीर के संबंध में सिर्फ रक्षा, विदेश और संचार से संबंधित कानून बनाने का अधिकार है. जम्मू कश्मीर के तत्कालीन राजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर हस्ताक्षर किया और तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटेन ने 27 अक्टूबर 1947 को इसे स्वीकार किया.

👉भारत की उस समय की ये नीति थी कि जहां कहीं भी भारत में शामिल होने या न होने को लेकर विवाद है, वहां पर जनता के फैसले के आधार पर निर्णय किया जाएगा न कि किसी राजा द्वारा लिए गए एकतरफा निर्णय पर.

 #नारकोटिक्स_क्या_है? ारतीय  #संसद_का_इसे_रोकने_मे_क्या_योगदान?नारकोटिक्स ऐसे पदार्थो को कहा जाता है जो मनुष्य के तंत्रि...
13/10/2020

#नारकोटिक्स_क्या_है? ारतीय #संसद_का_इसे_रोकने_मे_क्या_योगदान?
नारकोटिक्स ऐसे पदार्थो को कहा जाता है जो मनुष्य के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते है अर्थात उस व्यक्ति मे सोचने समझने की शक्ति क्षीण हो जाती है|
कुछ ड्रग और पदार्थ ऐसे है जिनका उत्पादन और विक्रय ज़रूरी है, लेकिन उनका अनियमित उत्पादन तथा विक्रय नहीं किया जा सकता। उन पर सरकार का कड़ा प्रतिबंध होता है और रेगुलेशन है, क्योंकि ये पदार्थ अत्यधिक मात्रा में उपयोग में लाने से नशे में प्रयोग होने लगते हैं, जो मानव समाज के लिए बहुत बड़ी त्रासदी सिद्ध हो सकती है। ऐसी त्रासदी से बचने के लिए विश्व के लगभग सभी देशों द्वारा इस तरह के अधिनियम बनाए गए हैं।
भारतीय संसद ने इस दिशा मे पहला अधिनियम-डेंजरस ड्रग्स अधिनियम-1930 था|
बाद मे सभी अधिनियम को समाप्त कर एक अधिनियम बनाया गया, जिसका नाम एनडीपीएस एक्ट 1985 रखा गया।जिसका पूरा नाम #नारकोटिक्स_ड्रग्स #साइकोट्रोपिक_सब्सटेंस_एक्ट_1985 है।
👉नारकोटिक्स का अर्थ नींद से है और साइकोट्रोपिक का अर्थ उन पदार्थों से है जो मस्तिष्क के कार्यक्रम को परिवर्तित कर देता है। यह अधिनियम इन पदार्थ और ड्रग्स के संबंध में पूरी व्यवस्थित प्रकिया और दंड का उल्लेख करता है।

👉एनडीपीएस एक्ट में प्रतिबंधित ड्रग्स-

अधिनियम के द्वारा एक अनुसूची दी गयी है। उस अनुसूची में केंद्रीय सरकार उन ड्रग्स को सम्मलित करती है जो नशे में प्रयोग होकर मानव जीवन के लिए संकट हो सकते है। इन ड्रग्स का उपयोग जीवन बचाने हेतु दवाई और अन्य स्थानों पर होता है, परन्तु इनका अत्यधिक सेवन नशे में प्रयुक्त होता है, इसलिए इन्हें पूर्ण रूप से प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता परन्तु इनका नियमन अवश्य किया जा सकता है। कोका प्लांट्स, कैनाबिस, ओपियम पॉपी जैसे पौधे इसमे शामिल किए गए हैं।

👉मात्रा का महत्व

इस अधिनियम में मात्रा के द्वारा ही दंड का प्रावधान किया गया है। मात्रा को तीन भागों में बांटा गया है, जिसमे,अल्पमात्रा और वाणिज्यिक और इन दोनों के बीच की मात्रा है। दंड भी इन तीन स्तरों पर ही होगा।

1. अल्पमात्रा के लिए एक वर्ष तक का कारावास और जुर्माना जो दस हजार तक का हो सकेगा।

2. अल्पमात्रा और वाणिजियक मात्रा के बीच की मात्रा के लिए दस वर्ष तक का कारावास और जुर्माना जो एक लाख तक का हो सकेगा।

3. वाणिज्यिक मात्रा में बीस वर्ष तक का कारावास और कम से कम एक लाख तक का जुर्माना जो दो लाख तक का हो सकता है।

मात्रा का निर्धारण समय समय पर केंद्र द्वारा किया जाता रहता है। यहां अगर भारत के सीमा क्षेत्र के भीतर व्यक्ति के पास यदि एक ग्राम भी अफीम इस अधिनियम के अधीन बनाये नियम या दिए आदेश के अंतर्गत अनुज्ञप्ति के बगैर पायी जाती है तो भी वह दोषी होगा। ऐसे मामले में वह अल्पमात्रा का दोषी माना जाएगा। इन पदार्थों और ड्रग्स का लगभग हर रूप प्रतिबंधित किया गया है|

अधिनियम के अंतर्गत अनुसूची में डाले गए पदार्थो का निर्माण, मैन्यूफेक्चरिंग, कृषि, प्रकिया, क्रय, विक्रय, संग्रह, आयात, निर्यात, परिवाहन और यहां तक उपभोग भी प्रतिबंधित किया गया है। इस ही के साथ उपभोग पर भी दंड रखा गया है।

👉इस अधिनियम में है मृत्युदंड तक का प्रावधान

इस अधिनियम में मृत्युदंड का भी प्रावधान रखा गया है। अधिनियम की धारा 31 A के अंतर्गत एक बार सिद्धदोष ठहराए जाने के बाद पुनः उस तरह का अपराध किया जाता है तो मृत्युदंड भी दिया जा सकता है।

अधिनियम के अंतर्गत अपराधों का प्रयास, तैयारी,उत्प्रेरणा,षड़यंत्र, उपभोग और फाइनेंस को भी अपराध बनाया गया है।और इन सभी के लिए वही दंड है जो इन अपराधों के लिए दंड रखा गया है।

तीन प्रमुख पौधे

अधिनियम के अंतर्गत तीन प्रमुख पौधे हैं, जिनकी खेती, परिवहन, आयात, निर्यात, संग्रह, क्रय, विक्रय, उत्पादन, कब्ज़ा और उपभोग अनुज्ञप्ति और इस अधिनियम के अंतर्गत किसी आदेश के बगैर दंडनीय है।

#कोका_का_पौधा- इस पौधे से मुख्यता कोकेन प्राप्त की जाती है। कोकेन अत्यधिक नशीली होती है।

#कैनाबिस_का_पौधा- इसे सामान्यता भांग का पौधा भी कहा जाता है। इस ही पौधे की फूल,पत्तियों और तने को सुखाकर गांजा बनाया जाता है। भांग केवल पत्तियों से तैयार हो जाती है। इस पौधे की मादा प्रजाति से एक गोंद जैसा द्रव निकलता है जिससे चरस बनती है।

#पोस्त_का_पौधा- इसे अफीम के पौधे के नाम से जाना जाता है। इस पौधे की पत्तियां नशीली नहीं होती है। इसका एक फल होता है जिसे डोडा कहा जाता है। डोडा पर चाकू मारने से दूध जैसा द्रव निकलता है जो सूखने पर अफीम बनता है। डोडा के भीतर दाने होते है जिन्हें खस खस के दाने कहा जाता है वह नशीले नहीं होते हैं, उन्हें मेवों में इस्तेमाल किया जाता है, जो सूखा हुआ ऊपर खोल बचता है उसे डोडा चूरा कहा जाता है जो नशीला होता है लेकिन अफीम से कम।

👉इस ही पौधे से अत्यधिक आवश्यक औषधि मॉर्फिन प्राप्त की जाती है जो दर्द निवारक और नींद के लिए प्रयुक्त होती है।

#विशेष_न्यायालय

इस अधिनियम की धारा 36 के अंतर्गत विशेष न्यायालय से गठन किया गया है। उन ही न्यायालय द्वारा यह मामले विचारित किये जाते हैं। इस अधिनियम का उद्देश्य नशे के कारोबार पर सख्ती से अंकुश लगाना है और इसीलिए विशेष न्यायालय बनाए गए हैंं।

👉अपराधी परिवीक्षा का लाभ नहीं मिलना

अधिनियम के अंतर्गत सिद्धदोष व्यक्ति को अपराधी परिवीक्षा एवं दंड प्रकिया सहिंता 1973 की धारा 360 का लाभ नहीं मिलेगा।

👉तलाशी के लिए शर्तें

अधिनियम की धारा 50 के अंतर्गत तलाशी के लिए कुछ शर्तें रखी गयी हैं। इस धारा के निर्माण का उद्देश्य फ़र्ज़ी मुकदमे से जनसाधारण को सुरक्षित करना है। जब पुलिस या जांच अधिकारी किसी व्यक्ति से प्रतिबंधित स्वापक औषधि या मनः प्रभावी पदार्थ पाए जाने की शंका करता है तो उस निरुद्ध कर निकटवर्ती राजपत्रित अधिकारी या मजिस्ट्रेट के समक्ष लेकर जाएगा तथा उसके सामने तलाशी लेगा।

👉पंजाब राज्य Vs बलजिंदर सिंह के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजी तलाशी के दौरान एनडीपीएस अधिनियम की धारा 50 का पालन नहीं करने से वाहन से हुई बरामदगी अमान्य नहीं हो जाती। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी की निजी तलाशी के दौरान नशीला पदार्थ अधिनियम ‌(एनडीपीएस ) की धारा 50 का पालन नहीं करने के कारण वाहन से हुई बरामदगी अमान्य नहीं हो जाती है। न्यायमूर्ति यूयू ललित, इंदु मल्होत्रा और कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा कि एनडीपीएस अधिनियम की धारा 50 सिर्फ निजी तलाशी तक सीमित है न कि वाहन या किसी कंटेनर परिसर की।

👉आरिफ खान Vs उत्तरांचल सरकार (एससी) के मामले में धारा 50 की भाषा की सम्पूर्णता को नजरंदाज किया गया है। धारा 50 स्पष्ट शब्दों में लिखा गया है। जहां तक आरोपी को मजिस्ट्रेट या एक राजपत्रित अधिकारी के समक्ष तलाशी के विकल्प दिये जाने का प्रश्न है तो इस धारा में कोई भ्रम की स्थिति नहीं है।
धारा 50(i) और (ii) में इस्तेमाल भाषा ऐसे दृष्टांत बताती है, जहां संदिग्ध व्यक्ति मजिस्ट्रेट या राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में तलाशी न कराने की इच्छा व्यक्त करता है। धारा 50(i) 'यदि ऐसा व्यक्ति आवश्यक समझता है' मुहावरे का इस्तेमाल करती है जबकि 50(ii) में कहा गया है, 'यदि ऐसा अनुरोध किया जाता है।'

स्पष्ट रूप से, विधायिका ने मादक पदार्थों के संदिग्ध आरोपियों की तलाशी के दौरान किसी मजिस्ट्रेट या राजपत्रित अधिकारी की उपस्थिति अनिवार्य करने पर विचार नहीं किया।
#आरिफ_खान_मामले_में, आरोपी ने मजिस्ट्रेट या राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में तलाशी लिये जाने का अपना अधिकार छोड़ दिया था।

हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने पैरा संख्या 244 में बगैर कोई उचित कारण दिये खुद ही निष्कर्ष निकाल लिया कि चूंकि तलाशी संदिग्ध के शरीर की करनी थी, इसलिए, अभियोजन पक्ष के लिए यह साबित करना अनिवार्य है कि अपीलकर्ता की तलाशी और रिकवरी मजिस्ट्रेट या राजपत्रित अधिकारी की उपस्थिति में हुई थी।

👉 #सुशांत_सिंह की मौत के बाद बड़े पैमाने पर बॉलीवुड इंडस्ट्री मे ड्रग्स की खपत की खबरें आयी उसी कड़ी मे रिया चक्रवर्ती का नाम उभर कर आया रिया की चैट में और **A ड्रग्स का जिक्र है.
👉चैट में लिखा है- चाय या कॉफी में CBD Oil मिला के दो...कुछ मिनट बाद किक मिलेगा.
👉क्या आप जानते हैं कि CBD और M**A ड्रग क्या है?

👉 #कैनबिडिओल_(CBD) 1940 में खोजा गया एक phytocannabinoid है. ये 113 cannabinoids में से एक है, जिसे भांग और गांजा पौधों में पहचाना गया है.

👉2019 तक, सीबीडी पर क्लिनिकल रिसर्च में चिंता, मूवमेंट डिसऑर्डर और दर्द का अध्ययन शामिल था. लेकिन अभी भी ये नहीं कहा जा सकता कि ये इन स्थितियों में प्रभावकारी है या नहीं.

👉कैनबिडिओल को कई तरीकों से शरीर में ले जाया जा सकता है. इसे धुंए और भाप के जरिए, aerosol spray के जरिए और मुंह से लिया जा सकता है.

वहीं M**A ड्रग सेलिब्रिटीज हाई प्रोफाइल पार्टीज में M**A ड्रग्स बड़े पैमाने पर लिया जाता है. इसे पार्टी ड्रग्स भी कहते हैं. शॉर्ट फॉर्म में इसे MD भी कहते हैं.

👉 **A यानि मिथाइलीनडाइऑक्सी मेथाम्फेटामाइन को आमतौर पर एक्सटेसी भी कहा जाता है. ये उत्साहित करने, भ्रामक स्थितियां पैदा करने, शक्ति और सुकून महसूस कराने का काम करती है|

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