Maya Legal Consultancy

Maya Legal Consultancy Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Maya Legal Consultancy, Lawyer & Law Firm, CHAMBER:/388 A 8 NEAR C. J. M Court, District and Session Court ALIGARH, Aligarh.

Here ,To Solve all Your Legal Disputes Related to Crime, Civil, Revenue For Commissionary or Board of Revenue Lucknow and G.S.T & Provide You, the best WINS over your Legal Dispute.....NO Disappointments at All............

01/02/2026

RTI मे भी FIR दर्ज हो सकती है अगर सही कानूनी प्रकिया अपनाये तो।

काफी साथियो के आग्रह पर आपके लिए प्रस्तुत

FIR / शिकायत – RTI उल्लंघन और धमकी

प्रेषक / शिकायतकर्ता:
नाम: [आपका नाम]
पता: [आपका पूरा पता]
संपर्क: [मोबाइल / ईमेल]
प्रति:
थाना अधिकारी,
[पुलिस स्टेशन का नाम],
[शहर / जिला], [राज्य]

विषय: लोक सूचना अधिकारी / प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा RTI अधिनियम का उल्लंघन एवं धमकी के संबंध में शिकायत

महोदय,
मैं, [आपका नाम], यह शिकायत/एफआईआर लोक सूचना अधिकारी / प्रथम अपीलीय अधिकारी के खिलाफ प्रस्तुत कर रहा हूँ। विवरण निम्नानुसार है:

1. सूचना न देने का उल्लंघन
दिनांक [DD/MM/YYYY] को RTI आवेदन संख्या [RTI नंबर] प्रस्तुत किया गया।
लोक सूचना अधिकारी ने समय पर या उचित जानकारी नहीं दी।
यह RTI Act धारा 7(2) का उल्लंघन है।
संबंधित BNS धारा 198 (Public servant disobeying law) के तहत एफआईआर दर्ज की जाए।

2. झूठी / भ्रामक जानकारी देने की स्थिति
लोक सूचना अधिकारी ने जानबूझकर झूठी / अधूरी जानकारी प्रदान की।
इसके लिए BNS धाराएँ 199, 201, 318, 336, 340 लागू की जाएँ।

3. प्रथम अपीलीय अधिकारी का निर्णय न करना
दिनांक [DD/MM/YYYY] को प्रथम अपीलीय अपील दायर की गई।
अधिकारी ने समय पर निर्णय नहीं दिया।
BNS धारा 198 के तहत एफआईआर दर्ज करवाई जाए।

4. गैरहाजिरी / सूचना देने से मना करना
सुनवाई के दौरान या बाद में प्रथम अपीलीय अधिकारी ने सूचना उपलब्ध नहीं कराई।
इसके लिए BNS धारा 198 / 199 लागू हो।

5. निर्णय के बावजूद सूचना न देना
निर्णय के बाद भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
BNS धारा 198 / 318 के तहत कार्रवाई की जाए।

6. धमकी / उत्पीड़न
लोक सूचना अधिकारी / प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा आवेदक को धमकाया गया।
संबंधित अपराध के लिए BNS Threat / Intimidation clauses के तहत एफआईआर दर्ज कराई जाए।

7. न्यायिक प्रमाण और हवाले
Bombay High Court: Vivek Vishnupant Kulkarni vs State of Maharashtra – RTI जवाब न देने पर FIR दर्ज करने के निर्देश।

Madhya Pradesh State Information Commission: सूचना न देने वाले अधिकारी पर ₹15,000 जुर्माना।

Uttar Pradesh Case: तहसीलदार पर ₹25,000 जुर्माना।

Delhi High Court: RTI दंडात्मक कार्रवाई केवल सूचना आयोग द्वारा।
Supreme Court: सूचना आयोगों में रिक्त पद भरना अनिवार्य।

संलग्नक
RTI आवेदन की प्रतिलिपि
प्रथम अपीलीय अपील की प्रतिलिपि
प्राप्त / नहीं मिली जानकारी का प्रमाण
धमकी / नोटिस का कोई भी साक्ष्य
दिनांक: [DD/MM/YYYY]
स्थान: [शहर / जिला]
शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर: ___________________
नाम: [आपका नाम]
अधिक जानकारी के लिए जुड़े

20/01/2026
31/08/2025

>> दीवानी और आपराधिक मुकदमों में अपनी पैरवी खुद कैसे करें

19/08/2025

~ बैंकों को 15 दिन में मृत्यु दावा का निराकरण (डेथ क्लेम सेटलमेंट) करना होगा, देरी करने वाले बैंक पर लगेगा ₹5,000 रोज जुर्माना ~

​भारतीय रिजर्व बैंक ने 'सेटलमेंट ऑफ क्लेम इन रेस्पेक्ट ऑफ डिसीस्ड कस्टमर ऑफ बैंक डायरेक्शन, 2025' जारी किया है।
1 जनवरी 2026 से लागू होने वाले इन दिशा निर्देशों के तहत मृत ग्राहकों के बैंक खातों और लॉकर से संबंधित दावों के निपटान की प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाया गया है।

इन दिशानिर्देशों के तहत, बैंकों को नॉमिनी वाले खातों के दावों का निपटान 15 दिनों के भीतर करना होगा और यदि कोई नॉमिनी नहीं है, तो 30 दिनों के भीतर करना होगा।
यदि बैंक इस समय सीमा में देरी करते हैं, तो उन्हें जमा राशि पर बैंक रेट के साथ 4% वार्षिक ब्याज और लॉकर या सेफ कस्टडी के मामले में ₹5,000 प्रतिदिन का जुर्माना देना होगा।

लाकर में रखी चीजों के हस्तांतरण के लिए बैंक को ग्राहकों के नॉमिनी/ वारिसों से पत्राचार करना होगा।
यदि मृतक ने जीवित रहते नामिनी नहीं बनाया है तो भी 15 लाख रु. तक के दावों की प्रक्रिया आसान होगी। इसके लिए सिर्फ उत्तराधिकारी को अनापत्ति प्रमाण पत्र पेश करना होगा।
15 लाख रु. से अधिक के दावों के लिए ही उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जरूरी होगा।

वसीयत विवादित है तो प्रोबेट आफ विल, लेटर आफ एडमिनिस्ट्रेशन और कोर्ट डिग्री की जरूरत होगी।

डिपॉजिट संबंधी दावों के निपटान के लिए बैंक को प्रचलित दर ( वर्तमान में 5.75% ) + 4 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
लाकर और सेफ कस्टडी के दावों पर रोज ₹5,000 जुर्माना देना होगा।

* बैंक दावा फॉर्म और प्रक्रिया की जानकारी सभी शाखाओं में उपलब्ध कराएंगे।
बैंकों को अपनी वेबसाइट पर भी जानकारी देनी होगी।
आवेदन के बाद एक यूनिक नंबर जनरेट होगा। इससे क्लेम की डिजिटल ट्रैकिंग कर सकेंगे।
बैंकों को नॉमिनेशन और सरवाइवर क्लाज को बढ़ाना होगा।

* ​ये नियम 1 जनवरी, 2026 से लागू होंगे। इनका उद्देश्य बैंक के मृतक खातेदारों के परिजनों के लिए दावा निपटान प्रक्रिया को आसान बनाना है, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानी न हो।

12/07/2025

गिरफ्तारी को ले कर – सुप्रीम कोर्ट के 11 निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा –
गिरफ्तारी में व्यक्ति के अधिकारों का पालन जरूरी है।
कोर्ट ने 11 निर्देश दिए –

1️⃣ गिरफ्तारी करने वाले पुलिस अधिकारी की पहचान साफ होनी चाहिए।
2️⃣ गिरफ्तारी का मेमो बनेगा, गवाह और गिरफ्तार व्यक्ति के हस्ताक्षर होंगे।
3️⃣ परिवार या मित्र को तुरंत सूचना देना अनिवार्य है।
4️⃣ गिरफ्तारी की सूचना रिकॉर्ड में दर्ज होगी।
5️⃣ गिरफ्तार व्यक्ति को मेडिकल जांच का अधिकार होगा।
6️⃣ हर 48 घंटे में मेडिकल परीक्षण अनिवार्य होगा।
7️⃣ गिरफ्तारी के स्थान की जानकारी स्थानीय पुलिस कंट्रोल रूम को दी जाएगी।
8️⃣ गिरफ्तार व्यक्ति को वकील से मिलने का अधिकार होगा।
9️⃣ गिरफ्तारी की सूचना जिला और राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम में भेजी जाएगी।
🔟 केस डायरी में हर जानकारी दर्ज होगी।
1️⃣1️⃣ मैजिस्ट्रेट को सभी नियमों के पालन की पुष्टि करनी होगी।

फैसले में कहा गया –
“इन अधिकारों का उल्लंघन नागरिक की स्वतंत्रता पर हमला होगा।

29/06/2025

गिरफ्तारी को ले कर – सुप्रीम कोर्ट के 11 निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा –
गिरफ्तारी में व्यक्ति के अधिकारों का पालन जरूरी है।
कोर्ट ने 11 निर्देश दिए –

1️⃣ गिरफ्तारी करने वाले पुलिस अधिकारी की पहचान साफ होनी चाहिए।
2️⃣ गिरफ्तारी का मेमो बनेगा, गवाह और गिरफ्तार व्यक्ति के हस्ताक्षर होंगे।
3️⃣ परिवार या मित्र को तुरंत सूचना देना अनिवार्य है।
4️⃣ गिरफ्तारी की सूचना रिकॉर्ड में दर्ज होगी।
5️⃣ गिरफ्तार व्यक्ति को मेडिकल जांच का अधिकार होगा।
6️⃣ हर 48 घंटे में मेडिकल परीक्षण अनिवार्य होगा।
7️⃣ गिरफ्तारी के स्थान की जानकारी स्थानीय पुलिस कंट्रोल रूम को दी जाएगी।
8️⃣ गिरफ्तार व्यक्ति को वकील से मिलने का अधिकार होगा।
9️⃣ गिरफ्तारी की सूचना जिला और राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम में भेजी जाएगी।
🔟 केस डायरी में हर जानकारी दर्ज होगी।
1️⃣1️⃣ मैजिस्ट्रेट को सभी नियमों के पालन की पुष्टि करनी होगी।

फैसले में कहा गया –
“इन अधिकारों का उल्लंघन नागरिक की स्वतंत्रता पर हमला होगा।”

कानूनी सलाहकार
D.K. Basu बनाम State of West Bengal, Writ Petition (Crl.) No. 592/1987

FIR दर्ज नहीं करना मानवाधिकार और मौलिक अधिकार का उल्लंघन है - सुप्रीम कोर्ट (30.4.25)
25/06/2025

FIR दर्ज नहीं करना मानवाधिकार और मौलिक अधिकार का उल्लंघन है - सुप्रीम कोर्ट (30.4.25)

28/05/2025

Address

CHAMBER:/388 A 8 NEAR C. J. M Court, District And Session Court ALIGARH
Aligarh
202001

Opening Hours

Monday 9am - 5pm
Tuesday 9am - 5pm
Wednesday 9am - 5pm
Thursday 9am - 5pm
Friday 9am - 5pm
Saturday 9am - 5pm

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Maya Legal Consultancy posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share