26/12/2025
जमानत नियम है,जेल अपवाद
(मोतीराम का मामला)
⚖️सुधारात्मक दंड व्यस्था के दौर में या हम कह सकते है। आज के दौर में जेल को हमारे विधान ने एक अपवादिक दशा के रूप में परिभाषित किया है जिसमें प्रत्येक कानून का लक्ष्य अपराधियों को सिर्फ जेल में डालना न होकर उनको सुधारने पर है, दंड को सुधार के रूप में प्रयोग किया गया है। जिसका प्रबल उदाहरण है कि मृत्यु दंड के विषय में कानून शिथिल है जिस पर माननीय उच्चतम न्यायलय द्वारा अनेक मामलों में कहा गया कि मृत्यु दंड विरल से विरलतम मामलों में दिया जाए ( बच्चन सिंह का मामला ) यह हमे इस विषय को समझने में सार्थक बनाता है कि हमारी न्यायपालिका व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए, अपने जीवन के उत्थान के लिए एक अपराधी को जो दिशा से भटका हुआ है , उसे संपूर्ण सुलभ अवसर प्रदान करना है , जिससे वह अपने जीवन का पुनत्थान कर समाज के साथ चल सके।