kayda kanoon

kayda kanoon Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from kayda kanoon, Legal Service, Aligarh.

भरण-पोषण की बकाया राशि में एक साथ वसूली वारंट एवं गिरफ्तारी वारंट जारी करना अवैध – BNSS के अंतर्गत भी असंवैधानिक एवं अमा...
15/02/2026

भरण-पोषण की बकाया राशि में एक साथ वसूली वारंट एवं गिरफ्तारी वारंट जारी करना अवैध – BNSS के अंतर्गत भी असंवैधानिक एवं अमानवीय प्रक्रिया

📌 केस का नाम

मोहम्मद शहजाद बनाम राज्य उत्तर प्रदेश व अन्य

Application No. 39747/2025

माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय

न्यायमूर्ति: राजीव लोचन शुक्ला

🔷 नए कानून (BNSS) के अनुसार कानूनी स्थिति

पुराने कानून में:

धारा 125(3) CrPC – भरण-पोषण की वसूली

धारा 128 CrPC – आदेश के प्रवर्तन की प्रक्रिया

➡️ नए कानून में (BNSS, 2023 लागू होने के बाद):

धारा 528 BNSS – भरण-पोषण आदेश का प्रवर्तन

धारा 531 BNSS – न्यायालय के आदेशों की वसूली की प्रक्रिया

धारा 530 BNSS – रिकवरी की विधि (वसूली वारंट आदि)

🔷 संशोधित कानूनी सिद्धांत (Modified Legal Principle)

“भरण-पोषण की बकाया राशि की वसूली के लिए न्यायालय एक साथ वसूली वारंट (Recovery Warrant) और गिरफ्तारी वारंट (Arrest Warrant) जारी नहीं कर सकता।

BNSS की धारा 528 के अंतर्गत पहले वैधानिक प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य है। बिना चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाए सीधे गिरफ्तारी व्यक्ति की गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है।”

🔷 कोर्ट का संशोधित अवलोकन (Updated Observation)

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि:

✔️ भरण-पोषण का आदेश लागू किया जाना आवश्यक है,

❌ लेकिन BNSS के तहत निर्धारित प्रक्रिया को ताक पर रखकर एक साथ वसूली + गिरफ्तारी वारंट जारी करना अवैध, मनमाना एवं अमानवीय है।

🔷 नए कानून के तहत परिवार न्यायालय की त्रुटि

परिवार न्यायालय द्वारा की गई त्रुटियाँ:

❌ BNSS की धारा 528 के तहत पहले रिकवरी की वैधानिक प्रक्रिया नहीं अपनाई

❌ याचिकाकर्ता को भुगतान हेतु अवसर दिए बिना गिरफ्तारी वारंट जारी

❌ “राजनेश बनाम नेहा (2021)” में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों की अवहेलना

🔷 कानूनी निष्कर्ष (Legal Conclusion under BNSS)

👉 BNSS के तहत भी यह स्थापित कानून है कि:

पहले रिकवरी की प्रक्रिया अपनाई जाएगी

जानबूझकर अवहेलना साबित होने पर ही

गिरफ्तारी वारंट अंतिम उपाय (Last Resort) हो सकता है

एक साथ दोनों जारी करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है

🔷 आप इस केस लॉ का उपयोग कहाँ कर सकते हैं?

✅ फैमिली कोर्ट में दलील के रूप में

✅ गिरफ्तारी वारंट निरस्त कराने हेतु हाईकोर्ट याचिका

✅ पुलिस/मजिस्ट्रेट के समक्ष आपत्ति में

✅ यूट्यूब वीडियो में “भरण-पोषण कानून की सच्चाई” समझाने के लिए

✅ लीगल अवेयरनेस पोस्टर/रील/शॉर्ट्स कंटेंट

 

रामपुर में अधिवक्ता फारुख को गोली मारकर हत्या कर दी है एडवोकेट फारुख को जिला पंचायत सभागार मे  गोली मारीअधिवक्ता की पत्न...
11/02/2026

रामपुर में अधिवक्ता फारुख को गोली मारकर हत्या कर दी है
एडवोकेट फारुख को जिला पंचायत सभागार मे गोली मारी

अधिवक्ता की पत्नी जिला पंचायत में करती है नौकरी

पत्नी के साथ लंच करने जाते थे अधिवक्ता

, जिसके चलते अधिवक्ता को मारी गई गोली।

एक सरकारी बाबू के साथ विवाद में लाइसेंसी पिस्टल से वारदात ।

अधिवक्ता समाज के लिए यह अपमानजनक और दिल दहला देने वाली घटना है ।

हम मांग करते हैं - तुरंत दोषी पर सख्त कार्रवाई हो,
न्याय मिले !

सुप्रीमकोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी हाई कोर्ट पूछा कितनी जमानतें लंबित।🔸 जो जेल में लंबे समय से बंद उन्हें भव...
09/02/2026

सुप्रीमकोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी हाई कोर्ट पूछा कितनी जमानतें लंबित।
🔸 जो जेल में लंबे समय से बंद उन्हें भविष्य की जानकारी नही जमानत उनका अधिकार।


jailisexception pendencyofcases
advocateanuragagrahariallahabadhighcourt
nonfollowersviewers nonfollowerseveryone reelsfacebook advocates TheConstitution WhatsApp SocialSites trending highlights
BreakingNews LegalAwareness FreeLegalAid litigation JusticeForVictims
fairtrial freedom

♦️ मुफ्त कानूनी सहायता ♦️⚖️🔸वकील का खर्च नहीं उठा सकते?⚖️ तो भी न्याय से वंचित नहीं होंगे!🔸सुप्रीम कोर्ट का साफ निर्देश ...
09/02/2026

♦️ मुफ्त कानूनी सहायता ♦️⚖️

🔸वकील का खर्च नहीं उठा सकते?
⚖️ तो भी न्याय से वंचित नहीं होंगे!
🔸सुप्रीम कोर्ट का साफ निर्देश —
अगर आरोपी आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है,
तो कोर्ट को कानूनी सहायता उपलब्ध करानी होगी।
न्याय सिर्फ पैसे वालों का अधिकार नहीं,
🔸ये हर नागरिक का हक़ है।


nonfollowerseveryone JusticeForAll
KnowYourRights nonfollowersviewers
LegalAwareness pendencyofcases
IndianLaw advocates TheConstitution
advocateanuragagrahari Article39A
lawyers BreakingNews justice TheConstitutionOfIndia
CourtNews litigation
advocateanuragagrahariallahabadhighcourt

21/12/2025
एससी एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में लगाया पीड़िता व आरोपियों पर जुर्माना
07/11/2025

एससी एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में लगाया पीड़िता व आरोपियों पर जुर्माना

30/10/2025

आज सुबह 11 बजे न्यायालय परिसर अलीगढ़ से 15से 20 पुलिस वाले अधिवक्ता जब अपने मुवक्किल को कोर्ट में सरेंडर करने जा रहे थे तो पुलिस वालों ने जोर जबरदस्ती करके मुवक्किल खींच तान कर ले गये... ......
कानूनन पुलिस वकील सहाब के घर या सीट व न्यायालय परिसर से गिरफ्तारी नहीं कर सकती

24/10/2025

(BNS + POCSO) में जमानत कैसे मिलेगी या नही

---

❓ प्रश्न

Sections 75(2), 78(2), 351(2), 352 BNS और POCSO Act की Section 7/8 में अगर अभियुक्त पर केस हो तो क्या उसे जमानत (Bail) मिल सकती है?

---

✅ उत्तर

🔹 Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की धाराएँ

1. Section 75(2) BNS – Sexual Harassment (यौन उत्पीड़न)

सज़ा: 3 साल तक + जुर्माना।

जमानती (Bailable) अपराध → जमानत आसानी से मिल सकती है।

2. Section 78(2) BNS – Stalking (पीछा करना)

पहली बार → सामान्यतः जमानती।

पुनरावृत्ति (repeat offence) → जमानत कठिन हो सकती है।

3. Section 351(2) BNS – Criminal Intimidation (आपराधिक धमकी)

सज़ा: 2 साल तक + जुर्माना।

जमानती अपराध → जमानत मिल जाती है।

4. Section 352 BNS – Intentional Insult (अपमान जिससे शांति भंग हो)

सज़ा: 2 साल तक + जुर्माना।

जमानती अपराध → जमानत संभव।

---

🔹 POCSO Act – Sections 7/8

Section 7: Sexual Assault (अशोभनीय/यौन स्पर्श)।

Section 8: सज़ा 3–5 साल + जुर्माना।

यह अपराध गैर-जमानती (Non-bailable) है।

👉 लेकिन अदालत (Sessions Court/High Court) परिस्थितियों के आधार पर विवेकाधीन शक्ति से जमानत दे सकती है, जैसे:

FIR में आरोप झूठे या अतिरंजित हों,

मेडिकल/प्राथमिक साक्ष्य मज़बूत न हों,

आरोपी जाँच में सहयोग कर रहा हो,

विशेष परिस्थितियाँ (कम उम्र, पहली बार अपराध, आदि)।

---

⚖️ प्रमुख जमानत संबंधी केस लॉ

1. Arnesh Kumar v. State of Bihar (2014) 8 SCC 273
👉 सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 7 साल से कम की सज़ा वाले अपराधों में गिरफ्तारी और जमानत को लेकर पुलिस और कोर्ट को सतर्क रहना चाहिए।

2. Satender Kumar Antil v. CBI (2022) 10 SCC 51
👉 सुप्रीम कोर्ट ने जमानत को रूल और जेल को एक्सेप्शन बताया, विशेषकर जब ट्रायल लंबा खिंच रहा हो।

3. Dataram Singh v. State of UP (2018) 3 SCC 22
👉 “जमानत नियम है, जेल अपवाद” — आरोपी को ट्रायल से पहले अनावश्यक हिरासत में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।

4. POCSO Cases – Supreme Court (2023, Manoj v. State of MP)
👉 कोर्ट ने माना कि POCSO मामलों में जमानत देना कठिन है, लेकिन यदि FIR और मेडिकल रिपोर्ट मेल न खाती हो, तो आरोपी को जमानत दी जा सकती है।

---

📌 निष्कर्ष

BNS की धाराएँ (75, 78, 351, 352) → सामान्यतः जमानती, जमानत मिलना आसान।

POCSO Act की धारा 7/8 → Non-bailable, लेकिन अदालत साक्ष्य व परिस्थितियों के आधार पर जमानत दे सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार कहा है कि “Bail is the Rule, Jail is the Exception.”

---

📚

Address

Aligarh

Telephone

+919997049791

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when kayda kanoon posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to kayda kanoon:

Share

Category