Board of Revenue Ajmer advocate

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09/09/2025

जब तक भूमि उपयोग में परिवर्तन की अनुमति नहीं दी जाती है, तब तक कृषि भूमि पर निर्माण की अनुमति नहीं है।

2025(2) आरआरटी (एससी) 734

09/09/2025

मूर्ति मंदिर के खुदकाष्ट भूमि पर पुजारी या किसी भी व्यक्ति को कोई खाटेदारी अधिकार नहीं दिया जा सकता है।

राज्य बनाम कनिराम 2021(1) आरआरटी 206

15/01/2025

अपंजीकृत रिलीज़ डीड के आधार पर दावा डिग्री नहीं किया जा सकता है अपंजीकृत रिलीज़ डीड साक्ष्य में नहीं लिया जा सकता
RBJ 2024 Page 692
सुप्रभात आपका दिन मंगलमय हो

15/10/2024

आज ही के दिन 15 अक्टूबर 1955 को राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 को लागू कर खेतीहर किसानों को भू स्वामी घोषित किया गया था। इसी ऐतिहासिक दिन को राजस्व दिवस के रूप में मनाया जाता है।आज राजस्व दिवस की सभी राजस्व अधिकारियों व कार्मिकों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं एवं सभी किसान भाईयों को भू स्वामी के अधिकार मिलने की बधाई

05/09/2024

विक्रय पत्रों को शून्य घोषित करने का क्षेत्राधिकार राजस्व न्यायालय को है
RBJ 2024 पेज 459
सुप्रभात आपका दिन मंगलमय हो

05/09/2024

सार्वजनिक रास्ता की भूमि के लिए 136 LR एक्ट में रिकॉर्ड दुरुस्त और तरमीम नहीं हो सकती
RRT 2024 page 102
सुप्रभात आपका दिन मंगलमय हो

15/02/2024

शब्दकोष• अन्तिम प्रमाणीकरणः- ज़माबंदी पूर्ण होने के पश्चात राजस्व अधिकारी द्वारा दिया गया प्रमाणपत्र है। यह जमाबंदी परत सरकार के साथ पेश किया जाता है। यह फार्म पी.28 में तैयार किया जाता है
अर्ज इरसालः- पटवारी द्वारा हल्के में वसूल की गई रकम को जमा कराने हेतु भेजी जाने वाली रकम के लिए अर्ज इरसाल पी.34 तैयार करता है अर्ज इरसाल तीन परतों में तैयार किया जाता है और तहसील एकाउन्टेन्ट से पास करवाकर बैंक में जमा कराया जाता है एक परत पटवारी अपने पास रखता है एक बैंक में व एक तहसील एकान्टेन्ट के पास रहती है।
आवंटनः- सरकारी कृषि योग्य भूमि का भूमिहीन व्यक्तियों के कृषि हेतु राज्य सरकार द्वारा निःशुल्क आवंटन करना। यह भूमि ज़माबंदी के खाता नं.1 से आवंटित की जाती है, इसमें आवंटित व्यक्ति को सर्वप्रथम गैरखातेदारी अधिकार कुछ शर्तों के साथ प्राप्त होते हैं, निश्चित समय के पश्चात आवंटी द्वारा शर्तों का पालन करने के पश्चात खातेदारी अधिकार प्राप्त होते हैं
आई.एल.आर. क्षेत्रः- प्रत्येक तहसील में निरीक्षकों के हलके, प्रत्येक हलके में किये जाने वाले कार्य को देखकर राज्य सरकार की मंजूरी से डायरेक्टर लैण्ड रेकार्डस बनाता है। साधारणतः एक निरीक्षक के हलके में दस पटवार हल्के होंगे, परन्तु यदि निरीक्षित किया जाने वाला क्षेत्र बहुत बड़ा हो या कार्यभार अधिक हो तो यह संख्या छह परटारियों तक कम की जा सकती है
आंशिक नकलः- ज़माबंदी के किसी खाते की पूर्ण नकल न लेकर जब कोई काश्तकार इच्छित खसरे की ही नकल लेता है तो वह आंशिक नकल कहलाती है। नकल जारी करते समय पटवारी जारी होने वाली नकल पर आंशिक नकल लिखता है।
एक से अधिक बार बोया गया क्षेत्रफलः- किसी क्षेत्र पर एक फसल होने के पश्चात दूसरी फसल होना एक से अधिक बार बोया गया क्षेत्रफल कहलाता है। दो फसली क्षेत्र को ज्ञात करने के लिए प्रत्येक ऋतु जैसे सियालु, उन्हालु और विशेष उन्हालु में खेती किया गया क्षेत्रफल जोड़ा जाता है और तत्पश्चात खेती किया गया क्षेत्रफल घटाया जाता है बाकी निकाला गया परिणाम दो फसली रकबा होगा। दो फसली क्षेत्रफल के अधीन सिंचित क्षेत्रफल को मालूम करने के लिए प्रत्येक ऋतु में जोते गए क्षेत्रफल को जोड़ा जाता है और खेत के सिंचित क्षेत्रफल को घटाया जाता है
कस्टोडिन भूमिः- वह भूमि जो पूर्व में मुस्लिम समुदाय द्वारा छोडी गई थी तथा अब केन्द्रीय सरकार के कब्जे में है, कस्टोडियन भूमि कहलाती है। एक अलग से जमाबंदी इस तरह की भूमि की तैयार की जाती है। अलवर जिले में इस प्रकार की भूमि है।काश्तकारः- कृषि योग्य भूमि पर कृषि कार्य के बदले लगान या किराया देने के लिये उत्तरदायी व्यक्ति
किस्म भूमिः- भूमि की उपजाऊ किस्म व सिंचाई के साधन के आधार पर भूमि को कई प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है-1. चाही अव्वल
2बारानी
3. चाही4. चाही दोयम5. बंजड़ आदि इस प्रकार की कई किस्में उपलब्ध हैं।• किताः- इसका अर्थ कुल/योग है जैसे किसी खाते में 10 खसरा नम्बर है तो खातेवाईज गोश्वारे में खसरों का योग किता 10 लिखा जाता है।• खसरा नम्बरः- किसी भूमि की हद को निश्चित कर एक नया नाम दिया जाता है जिसे खसरा नम्बर कहते हैं। इसे किसी खातेदार को आवंटित किया जाता है। इस नम्बर को सेटलमेन्ट विभाग द्वारा दिया जाता है।• खरीफ़ः- वर्षा ऋतु में बाई जाने वाली फसलें जो वर्षा पर निर्भर करती हैं। इनकी गिरदावरी 16 सितम्बर से 15 अक्टूबर तक की जाती है।• खाता नम्बरः- किसी भी खातेदार को उसके नाम कई खसरों को एक जगह जमाबंदी में एकत्र करके जमाबंदी में एक खाता दिया जाता है जिसे खाता नम्बर कहते हैं।• खातेदारः- वह व्यक्ति जो सरकार या किसी भू-सम्पत्तिधारी से भूमि धारण करता हो तथा जो प्रकट या गर्भित अनुबंध नहीं होता तो अपने खाते का लगान भुगतान करने लिए जिम्मेदार है या होता है। वह किसी भूमि पर काश्त करने का हक रखता है तथा सरकार को उस काबिज भूमि का लगान अदा करता है। वह व्यकित उस भूमि पर मालिकाना हक रखता है।• खसरा गिरदावरीः- खसरा गिरदावरी गाँव के नक्शे में दर्ज प्रत्येक नम्बर शुदा प्लाट के लिए ऐसा रेकार्ड है जिसमें लगान तथा काश्तकारी अधिकारों के बारे में तफसील खेती के लिए आंकड़े हो व निर्धारित अवधि में सभी परिवर्तन दर्ज किए जाते हैं। यह हर चौथे साल के अन्त में प्रत्येक गांव के लिए पटवारी नये रूप में फार्म पी-13 में खसरा तैयार करता है।• खसरा परिवर्तनशीलः- फील्डबुक जिसमें अस्थाई प्रकार की या बदलते रहते लगान वाली कृषि का विस्तृत वर्णन हो। यह हर वर्ष तैयार किया जाता है। सकारी भूमियों पर होने वाले अतिक्रमण का विवरण इसमें होता है। यह फार्म पी.14 में तैयार किया जाता है।• खराबा या बीजमारः- सभी फसलें जो पकी हो या न पकी हो गिरदावरी चौसाला के फसल वाले कॉलम में दर्ज की जाएगी। यदि किसी प्राकृतिक कारण से फसल खराब हो जाती है तो पटवारी फसल के रकबे के तहत हर के रूप में लाल स्याही में नाकामयाब या खराबे को फसल के रकबे में इन्द्राज करेगा। • खसरा इन्डेक्सः- जमाबंदी में सबसे पहले यह इन्डक्स होता है जिससे यह पता चलता है कि कौनसा खसरा किस खाते में है व उस खाते का कुल रकबा कितना है इससे किसी खसरे को खाते में ढूँढने में आसानी रहती है।• खातावाइज गोश्वाराः- जमाबंदी में प्रथमखाता सिवायचक या सरकारी भूमि का, दूसरा खाता खातेदारों का, तीसरा खाता गैर खातेदारों का, चौथा खाता सरकारी संस्थाओं का व पाँचवा खाता चारागाह का होता है, प्रत्येक खाते के अन्त में उस खाते में दर्ज भूमि का योग होता है। जिसमें किस्म भूमि, लगान व खसरों का योग होता है। खातेदारों के खाते में भी प्रत्येक खाते का योग होता है तथा अन्त में सभी खातेदारों का इकजाई योग होता है इस तरह प्रत्येक खाते के योग को खातावाइज गोश्वारा कहते हैं।• गैरखातेदारः- किसी व्यक्ति को सरकार द्वारा किसी निश्चित समय के लिए निर्धारित मापदण्डों पर भूमि आवंटित की जाती है वह व्यक्ति उस भूमि पर काश्त करता है। ऐसा काश्तकार जिसे उसके द्वारा धारित भूमि को रहन या बेचान करने का अधिकार न हो। आवंटित भूमि पर प्रथमतः गैर खातेदारी अधिकार दिये जाते हैं। धारित को कुछ शर्तों पर यह अधिकार प्राप्त होते हैं।• गोश्वाराः- किसी भी गांव की जमाबंदी का पूरा विवरण होता है उसमें गाँव का कुल क्षेत्रफल, रकबा, भूमि के अनुसार राजस्व, किस्म जमीन आदि का योग होता है।• गोदनामा (गोद-पत्र)- वह लिखावट जिसके द्वारा कोई निःसंतान व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति की संतान को अपना उत्तराधिकारी घोषित करवाता है।• गौचर (चारागाह) - वह भूमि जो गांव के पशुओं को चराने के काम आती हो और इस हेतु राजस्व रिकार्ड में दर्ज हो। यह भूमि सरकार की होती है और इसका संचालन पंचायत द्वारा किया जाता है। जमाबंदी में इसका अलग से खाता होता है।• ग्रामसभाः- किसी ग्राम-पंचायत क्षेत्र के कुल मतदाताओं के 10 फीसदी मतदाताओं एवं पंचायत के निर्वाचित सदस्यों की उपस्थिति में ग्राम विकास एवं अन्य कार्य हेतु आयोजित बैठक। ग्राम पंचायत में पंच एवं सरपंच होते हैं हाल ही सरकार ने नामान्तरकरण तस्दीक करने के अधिकार ग्राम पंचायत को दिए हैं।• गैर मुमकिनः-वह भूमि जो काश्त के अयोग्य होती है अर्थात जिसमें कृषि नहीं की जा सकती है।• ग्राम सेवकः- प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक ग्राम सेवक की नियुक्ति होती है यह सरपंच के सचिव के रूप में कार्य करता है इसका अधिकारी विकास अधिकारी होता है पंचायत में होने वाले विकास कार्यों का हिसाब रखता है।• जमाबंदीः- कई खातेदारों को एक जगह एकत्र करके रिकार्ड तैयार किया जाता है जिसे जमाबंदी कहते हैं यह एक गांव के अनुसार होती है जिसमें उन सभी व्यक्तियों का नाम होगा जिन्हें लैण्ड रेवेन्यु लगान देना है एवं जो किसी जमीन पर काश्त करते हैं अथवा किसी अन्य प्रकार से उस पर काबिज है मय उनके भोगाधिकारों की किस्म और भूमि निहित हितों के। समाप्त होने के प्रत्येक चार वर्ष के बाद 31 अक्टूबर को ऑफिस कानूनगो के पास पेश की जानी है। चार साल में तैयार की जाती है। यह फार्म पी-26 में तैयार की जाती है।• जमाबंदी का वर्षः- हर गाँव की जमाबंदी चार साल में एक बार लिखी जाती है यही जमाबंदी का वर्ष कहलाता है। जैसे - सम्वत 2054-2057 व 2058-2061• जायद (विशेष उन्हालू)- मई-जून में बोई जाने वाली फसलें हैं। इनकी गिरदावरी 1 मई से 15 मई तक की जाती है। इसका लाल स्याही से खसरे में इन्द्राज होता है।• जायद (विशेष स्यालू)- कई जगह एक फसल ओर उगाई जाती है, खरीफ और रबी के बीच एक और गिरदावरी करनी पड़ती है यह गिरदावरी 1 जनवरी से प्रारम्भ होकर 15 जनवरी को समाप्त होती है। इसका लाल स्याही से खसरे में इन्द्राज होता है।• जमाबंदी परिवर्तनशीलः- अस्थिर निर्धारण और अस्थाई कृषि की जमाबंदी। यह खसरा परिवर्तनशील से तैयार की जाती है। जो व्यक्ति सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करता है उसकी रिपोर्ट खसरा परिवर्तनशील में तैयार होती है व बाद में खसरा परिवर्तनशील से ही इसे तैयार किया जाता है। प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर तक ऑफिस कानूनगो के पास पेश की जानी है। यह फार्म पी-25 में तैयार किया जाता है।• जिन्सवारः- किसी गांव का फसल वाइज योग होता है साल में तीन या चार फसल होती है हर फसल के लिए एक जिन्सवार तैयार होता है।• जिन्सवार स्यालूः- खरीफ में बोई गई फसलों का विवरण पत्र या फसलवार योग। निरीक्षक के पास 5 नवम्बर तक पेश किया जाना है। यह फार्म पी-16 में तैयार किया जाता है।• जिन्सवार उन्हालूः- रबी में बोई गई फसलों का विवरण पत्र या फसलवार योग। निरीक्षक के पास 20 मार्च तक पेश किया जाना है। यह फार्म पी-16 में तैयार किया जाता है।• जिन्सवार जायदः- जायद रबी में बोई गई फसलों का विवरण पत्र या फसलवार योग। निरीक्षक के पास 20 मई एवं जनवरी तक पेश किया जाना।• ज़रीबः- यह लोहे की जंजीरनुमा पैमाना है जो भूमि को नापने का यंत्र होता है यह अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नाप की होती है यह नाप जिले वाइज तय होती है। इसमें दस कडियां होती हैं इन कडियों की लम्बाई समान होती है।• तरमीमः- किसी गाँव के नक्शे में समस्त परिवर्तनों को दर्ज करना अर्थात किसी खसरा नम्बर के टुकडे़ होने पर उन्हें नक्शे में प्रदर्शित करना तरमीम कहलाता है।• दानः- अपनी सम्पत्ति को बिना प्रतिफल के किसी अन्य को सुपुर्द करना। यह रजिस्टर्ड होता है।• दुफसलीः- किसी भूमि के रकबे पर एक बार काश्त करने के बाद दुबारा उसी रकबे पर काश्त करने पर वह रकबा दुफसली कहलाता है जैसे कोई खसरा जिसका रकबा 4 बीघा का है तथा इस खसरे के एक बीघा पर बाजरा काश्त की तथा उसके बाद उसी रकबे पर गेहूँ काश्त की तो दुफसली रकबा एक बीघा हुआ। यह मिलान खसरे में प्रयोग होता है।• दिनचर्या बहीः- पटवारी के काम की दैनिक डायरी। एक वर्ष के पश्चात ऑफिस कानूनगो को 31 अक्टूबर तक पेश की जाती है। पटवारी प्रत्येक दिन किये जाने वाले कार्य का उल्लेख करता है व कोई भी घटना जो उसके हलके में होती है का इन्द्राज भी करता है। यह फार्म पी-3 में तैयार किया जाता है।• निर्देश पंजिकाः- निर्देशों सम्बन्धी पंजिका, यह पटवारियों से संबंधित स्थायी प्रपत्रों और निर्देशों की पंजिका है। मासिक मिटिंग में पटवारी अपने साथ लाता है तथा जो भी आदेश होते है वह इसमें इन्द्राज कर नीचे ऑफिस कानूनगो के हस्ताक्षर करवाता है। यह फार्म पी-5 में तैयार किया जाता है।• नजूल सम्पत्तिः- वह सम्पत्ति जो राज्य सरकार में निहित तथा केन्द्रीय सरकार के कब्जे की होती है नजूल सम्पत्तियां होती है।• नियमन- सरकारी कृषि योग्य भू्मि पर चले आ रहे पुराने अतिक्रमण को खातेदारी अधिकार में बदलना। खातेदारी अधिकार से पहले गैरखातेदारी अधिकार दिये जाते हैं।• न जोते गये क्षेत्रफल का ब्योराः- जिस क्षेत्र पर कोई जोत नहीं की गई हो। किसी काश्तकार द्वारा भूमि पर कोई काश्त नहीं की जाती है तो गिरदावरी में एक कॉलम होता है जिसमें इस न जोते गये क्षेत्रफल का ब्यौरा लिखा जाता है। इन्हें निम्न शीर्षकों के अन्तर्गत वर्गीकृत किया गाय है-न जोती गई भूमियाँ (अ) कृषि के लिए उपलब्ध। (ब) कृषि के लिए अनुपलब्ध।(अ) निम्न प्रकार की भूमियां कृषि के लिए उपलब्ध क्षेत्र के अन्तर्गत होंगी। (क) चालू पडत या एक साला (ख) दो से पांच वर्ष तक की पडती (ग) छह वर्ष से अधिक की पडती(ब) निम्न प्रकार की भूमियां कृषि के लिए अनुपलब्ध क्षेत्र के अन्तर्गत होगी। (क) भूमियां जो आरक्षित वन क्षेत्र के अन्तर्गत आती हैं। (ख) पहाडियां व चट्टानें (ग) जलमार्ग व तंगघाटी (घ) ऐसी भूमियां जो मकानों एवं आबादी के काम आ रही हैं। (च) चरागाह एवं बीड़• नामान्तरकरण रजिस्टरः- नामान्तरकरण दर्ज करने का एक रजिस्टर होता है जिसमें सेटलमैंट से आगामी होने वाले सेटलमैण्ट तक क्रमानुसार नम्बर जारी होते रहते हैं यह तहसील से पटवारी को पटवार हल्के के गांव के अनुसार जारी किया जाता है यह गांववाइज होता है। और दो परतों में होता है। नामान्तरकरण तस्दीक होने पर एक परत तहसील में जमा होती है व एक परत पटवारी के पास रहती है। यह फार्म पी.21 में तैयार किया जाता है।• नामान्तरकरणः- जमाबंदी में किसी भी खातेदार के नाम/खसरे में परिवर्तन या अन्य किसी भी प्रकार के खाते में परिवर्तन को एक प्रक्रिया के जरिये बदला जाता है वह नामान्तरकरण कहलाता है।• नामान्तरकरण शुल्कः- यह शुल्क निर्धारित होता है। नामान्तरकरण शुल्क कानूनन सिर्फ उन्ही व्यक्तियों से वसूल किया जाएगा जिनके पक्ष में नामान्तरण दर्ज किया गया है। अस्वीकृत नामान्तरकरण की दशा में तहसलीदार शुल्क को किन्ही विशेष कारणों से जो उसके द्वारा आज्ञा में निर्दिष्ट किये जायेंगे माफ कर सकेगा। यह शुल्क निम्न स्थिति में वसूल किया जायेगा- o विभाजन कार्यवाही में।o जमीन की अदला बदली में।o विरासत में।o रजिस्ट्री में।o तकासमा।निम्न से यह शुल्क नहीं वसूला जाएगा-o सरकार के हित में अवाप्त की गई जमीन के लिए सरकार के किसी भी कार्यालय से कोई भी वसूली नहीं होगी।o पहले के अधिकार अभिलेख में मामूली गलतियों की दरुस्ती में।o सरकार को जमीन रहन रखे जाने की दशा में।o मृत्यु उपरान्त पैदा शिशु के नाम इन्द्राज के लिए नामान्तरकरण शुल्क नहीं लिया जाएगा।• नजरी नक्शाः- मौका की जांच के अनुसार बिना पैमाने के मौके का मानचित्र बनाना नज़री नक्शा कहलाता है।• पटवार क्षेत्रः- पटवारियों की अपेक्षित संख्या तय करने में तथा पटवार क्षेत्र तय करने में खसरा नम्बर, कुल रकबा, काश्त का क्षेत्रफल, नर्धारित राजस्व और गांवों की संख्या का यथोचित ध्यान रखा जाता है। आमतौर से किसी भी पटवार क्षेत्र में लगभग 3000 खसरा, करीब 8000/-रु. लगान और करीब 7500 एकड़ क्षेत्रफल जमीन होगी जिसमें 2500 एकड़ काबिल काश्त भूम सम्मिलित होगी। कार्य की अधिकता होने से एक ही गाँव को अलग-अलग हलकों में बांटा जा सकता है।• पटवारी की महीने की मिटिंग का उद्देश्यः- पटवारी, पत्येक माह की उस तारीख को जो तहसीलदार निश्चित करे, तहसील में उपस्थित होगा। अपना वेतन लेगा व साथ ही अपने हलके से सम्बन्धित सूचनाएं जो तहसील द्वारा चाही जाएगी, देगा। हलके में की गई राजस्व वसूली जमा कराना, फैसलशुदा नामान्तरकरण, व अतिक्रमण की रिपोर्ट व अन्य जो सूचनाएं तहसीलदार द्वारा चाही गई हो, देगा।• परतीः- जिस भूमि पर काश्त न करके खाली छोड़ी गई होती है ये जितने साल के लिए खाली छोडी जाती है उतनी परती कहलाती है जैसे एक साला पड़ती, दोसाला पड़ती आदि।• पंजीयन शुल्कः- किसी भी भूमि के स्वामित्व के बदलने पर सरकार को एक निश्चित शुल्क अदा करना होता है या किसी भूमि/दस्तावेज को रजिस्टर्ड करने के लिए शुल्क अदा करना पड़ता है। यह शुल्क हर जगह के लिए निश्चित होता है। इसे ही पंजियन शुल्क कहते हैं।• पटवार पटवारः- जमाबंदी की दो परत तैयार होती हैं एक जो पटवारी के पास रहती है वह परत पटवार कहलाती है।• पड़त सरकारः- जमाबंदी की दूसरी वह परत जो तहसील में रहती है परत सरकार कहलाती है।• फर्द बदर(शुद्धिपत्र)- रेकार्ड में लिपिकीय अशुद्धियों की की दुरुस्ती के लिए आदेश फर्दबदर पर दिये जाते हैं। यह फार्म पी.27 में तैयार किया जाता है।• फसलों का प्रकारः- फसले तीन प्रकार की होती है खरीफ, रबी एवं जायद रबी, कहीं-कहीं जायद खरीफ भी होती है।• बेचानः- किसी सम्पत्तिधारक द्वारा निश्चित प्रतिफल के बदले संम्पत्ति का किसी अन्य को विक्रय करना। इसमें रजिस्ट्री शुल्क अदा कर रजिस्टर्ड करवाना होता है।• बदस्तूरः- पूर्ववत जारी रखना।• बटा नम्बरः- किसी खसरे के टुकडे होने पर उस नम्बर के हर के रूप में उस गांव के कुल खसरा के आखिरी नम्बर के बाद वाला नम्बर लिख देते हैं जैसे किसी गांव में 45 खसरा नम्बर हे व माना ख.न. 2 खसरे के टुकड़े हो गए तो जो नम्बर डलेगा वह 2/46 होगा।• बिलमुक्ताः- किसी खाते में स्थिति सभी खसरा नम्बरों का लगान खातेवार अंकित किया जाता है नाकि प्रत्येक खसरेवार तो वो खाता बिल मुक्ता कहलाता है।• बारानीः- असिंचित भूमि जिसमें सिंचाई नहीं होती है जो काबिल काश्त तो होती है परन्तु वर्षा के दिनों में ही खेती होती है।• बीघा/बिस्वा/बिस्वांसीः- यह क्षेत्रफल की इकाईयां है 1 बीघा में 2529 वर्गमीटर होते हैं।1 बीघा = 20 बिस्वा1 बिस्वा = 20 बिस्वांसी• भू-राजस्व की छूटः- किन्ही कारणवश सरकार द्वारा राजस्व में छूट दी जाती है। यही भू-राजस्व की छूट कहलाती है।• भूमि रूपान्तरणः- भूमि रूपान्तरण यानि भूमि के उपयोग में परिवर्तन। कोई भी काश्तकार अपनी खेती की भूमि पर कोई परिवर्तन करता है यानि मकान बनाता है, बाड़े या खेत के चारों ओर पक्की दीवार या कोई भी परिवर्तन जिसमें खेती न होकर वह अन्य कार्य में आवे तो उसकी इज़ाज़त तहसीलदार से नियमानुसार ली जावेगी। इसके लिए एक निर्धारित प्रारूप में आवेदन करना होगा तथा इसके लिए निर्धारित शुल्क राजकोष में अदा करना होगा। तथा तहसीलदार नियमानुसार इसकी इज़ाज़त जारी करेगा।• भू-राजस्व(लगान)- भूमि के उपयोग या उसमें निहित अधिकार के बदले वार्षिक मांग जो काश्तकार द्वारा राज्य सरकार को देय होती है।• भूमि वर्गीकरणः- भूमि के स्वामित्व के आधार पर वर्गीकृत किया गया हैः- 1. सरकारी भूमि2. खातेदार भूमि3. गैर खातेदार भूमि4. संस्थाओं की भूमि5. चरागाह की भूमि• मासिक सारांशः- यह पटवारी के काम की प्रगति की जांच के लिए तैयार होता है यह दिनचर्या बही से तैयार किया जाता है तथा तहसील की प्रत्येक मासिक मिटिंग में पटवारी को प्रस्तुत करना होता है।• मांगपत्रः- प्रत्येक भू-सम्पदाधारी या आसामी द्वारा देय राजस्व मांग की स्लिप। रशीद काटने से पहले आसामी को यह स्लिप दी जाकर राशि की मांग की जाती है। यह फार्म पी.31 में तैयार किया जाता है।• मुख्तियारनामाः- वह लिखित पत्र जिसमें किसी संपत्ति-धारक द्वारा अपनी संपत्ति के प्रबन्ध, संचालन एवं रख-रखाव का अधिकार किसी अन्य व्यक्ति को सपुर्द करना। यह रजिस्टर्ड होता है। लेकिन यह मालिकाना हक़ नहीं रखता है।• मिलान खसराः- वार्षिक क्षेत्र विवरण पत्र जिसमें उस गांव की एक वर्ष में हुई भौतिक परिवर्तन एवं फसलों के बारे में पूरा विवरण होता है। यह हर साल तैयार किया जाता है तथा हर वर्ष इसे तहसील में माह जून में प्रस्तुत किया जाता है। इसके लिए तीनों/चारों जिन्सवार होना आवश्यक है। यह फार्म पी.19 में तैयार किया जाता है।• मिसल बन्दोबस्तः- भू-प्रबन्ध के दौरान तैयार की गई किसी गांव की जमाबंदी मिसल बन्दोबस्त कहलाती है।• मुर्तहीन व राहिनः- जब कोई सम्पत्ति गिरवी या बन्धक, रहन रखी जाती है तो जिस व्यक्ति या संस्था के हक में रहन गिरवी रखी जाती है उसे मुर्तहीन कहते हैं जैसे किसी काश्तकार ने बैंक ऋण लेने पर अपनी भूमि बैंक के हक में रहन रखी तो यहां बैंक मुर्तहीन तथा खातेदार राहिन कहलाता है।• मिन नम्बरः- जब किसी खसरा नम्बर के टुकड़ें हो जाते है तो शेष रहे नम्बर के बटा नम्बर नहीं डालकर उसी मूल नम्बर को लिख दिया जाता है साथ में मिन लिख दिया जाता है इससे यह पता लग जाता है कि इस नम्बर के टुकडे हो चुके हैं वह उसका मिन नम्बर कहलाता है।• मुरब्बा नं./पत्थर नं./किला नं. – ये नहरी क्षेत्र में काम में लिए जाते हैं ये सभी खसरा नम्बर/प्लाट है एक पत्थर में कई मुरब्बे होते हैं एक मुरब्बे में 25 किले नम्बर होते हैं ये गंगानगर जिले में प्रचलित हैं। यहां खसरा नम्बर न होकर मुरब्बा नम्बर, पत्थर नम्बर व किला नम्बर प्रचलित है।• डिक्रीः – किसी वाद(मुकद्मा) के सम्बन्ध में सक्षम न्यायालय का सुनवाई के बाद दिया गया निर्णय आदेश।• ढालबाँछः- ऐसा रजिस्टर जिसमें प्रत्येक देइन्दा(लगान देने वाला) द्वारा देय मांग, बकाया व वसूली का ब्यौरा बताया गया है यह जमाबंदी, पुरानी ढालबाँछ, नामान्तरकरण फाइल व अन्य मांग लिस्ट जो तहसील से प्राप्त होती है, से तैयार होता है। यह फार्म पी.30 में तैयार किया जाता है।• रशीद बुकः- रशीदों की पुस्तक। यह तीन प्रतियों में होती है खातेदार द्वारा मांग राशि देने पर यह रशीद भरकर पटवारी अपने हस्ताक्षर कर एक प्रति खातेदार को देगा तथा मासिक मिटिंग में राशि जमा कराते समय दूसरी प्रति तहसील राजस्व लेखाकार को देगा व तीसरी प्रति अपने पास रखेगा जिसे वह एक वर्ष पश्चात 31 अक्टूबर तक ऑफिस कानूनगो को जमा कराएगा। यह फार्म पी.33 में तैयार किया जाता है।• रजिस्टर नकल निरीक्षण व पटवार रेकार्डसः- रजिस्टर जिसमें अभिलेख के उद्धरणों की नकल देने के लिए वसूल की गई फीस दर्ज की जावे। आगामी बन्दोबस्त तक पटवारी के पास रखा जाता है और बाद में ऑफिस कानूनगों को पेश किया जाता है। यह फार्म पी.35. में तैयार किया जाता है।• रदीफ़वारः- जमाबंदी के खाते काश्तकार के नाम अनुसार होते हैं उन्हें वर्णमाला के अक्षरों के क्रम में लिखे जाते हैं।• रहन(बंधक या गिरवी)- किसी सम्पत्ति-धारक द्वारा ऋण चुकाने की गारंटी के फलस्वरूप ऋण दाता के पक्ष में जमानत के रूप में संपत्ति को रखना। यह रजिस्टर्ड होता है।• रहन मुक्तः- ऋणी द्वारा ऋण की अदायगी के बाद जमानत के रूप में रखी संपत्ति को मुक्त करवाना।• राजस्व न्यायालयः- राजस्व मण्डल, राजस्व-अपील अधिकारी, संभागीय-आयुक्त, जिला कलेक्टर, अतिरिक्त-जिला कलेक्टर, उपखण्ड-अधिकारी, सहायक-कलेक्टर, तहसीलदार, नायब तहलीदार आदि के न्यायालय राजस्व न्यायालय की श्रेणी में आते हैं।• रबीः- शीत ऋतु में बोई जाने वाली फसलें। इनकी गिरदावरी 1 फरवरी से 5 मार्च तक की जाती है।• रकबाः- प्रत्येक खेत का क्षेत्रफल रकबा कहलाता है यह राज्य में प्रचलित स्टेण्डर्ड एकीकृत इकाई में होगा।• लगानः- समस्त भूमि सरकार की है और भूमि की किस्म के आधार पर सरकार लगान/टैक्स नियत करके किसी को भी निर्धारित मापदण्ड़ों के आधारपर काश्त के लिए भूमि आवंटित करती है बदले में लगान वसूल करती है। यह खसरे/भूमि किस्म वाइज होता है।• लगायतः- लगातार, जैसे कहीं 1 लगायत 4 लिखा है तो इसका मतलब 1 से लेकर 4 तक, होगा।• विरासतः- पैतृक संपत्ति का अधिकार। • वसीयतः- किसी व्यक्ति द्वारा उसकी मृत्यु के पश्चात उसकी स्व-अर्जित संपत्ति के प्रबन्ध एवं अधिकार के संबंध में उसके द्वारा मुत्यु पूर्व लिखा गया अन्तिम इच्छा-पत्र। एक से अधिक वसीयतनामे होने पर अन्तिम वसीयत ही मान्य होगी। यह रजिस्टर्ड होता है।• विभाजन/बंटवारा/तक़ासमाः- सहखातेदारों के मध्य उनके हिस्से के अनुसार सामुहिक जोत को पृथक-पृथक विभाजित करने की प्रक्रिया। यह एक प्रकार का नामान्तरकरण है। निश्चित स्टाम्प शुल्क पर यह तैयार होता है।• बशरह सदरः- इसका अर्थ, उपरोक्तानुसार, होता है कहीं-कहीं बशरह सदर खसरा नं..... भी लिखा होता है, जिसका मतलब लिखे खसरे के अनुसार होता है जैसे- बशरह सदर ख.नं.23, तो इसका मतलब होगा खसरा नं. 23 के अनुसार इन्द्राज।• सहवनः- इसका अर्थ भूलवश/त्रुटिवश होता है।• सिंचाई के साधनः- किसी भी खेत की सिंचाई होती है तो खसरा के सामने सिंचाई के साधन लिखे जाएंगे। उदाहरणार्थ खसरा नम्बर में कुआ या तालाब या नहर या नदी यथास्थिति इन्द्राज किए जायेंगे।• सीमांकन ज्ञानः- काश्तकारों के मध्य भूमि की सीमाओं के संबंध में हुए विवाद को पटवारी द्वारा सीमाज्ञान करा कर निपटाया जाता है इसके लिए एक निश्चित शुल्क तहसील में जमा कराकर तहसीलदार से आदेश लिए जाते हैं। इसमें काश्तकारों को विवादित स्थल की सीमाओं को नाप कर पटवारी द्वारा भूमी की हदों को बताया जाता है।• सिवायचक भूमिः- सरकारी कब्जे की भूमि है जिन पर मालिकाना हक सरकार का होता है। यह खाता नम्बर 1 में उपलब्ध होती है जो सरकारी भूमि का खाता होता है।1. जो कृषि के लिए उपलब्ध होती है (काबिल काश्त)2. जो कृषि के लिए अनुपलब्ध होती है (नाकाबिल काश्त)3. नदियां तथा नाले4. पहाडियां तथा गढ्ढे़
5. विभिन्न संस्थाओं की भूमियां
6. चारागाह
7. कब्रिस्तान व श्मशान
8. आबादी एवं बस्तियां
9. बाग
10. जलमग्न
11. मार्ग तथा रास्ते• सियाहाः- सियाहा वह रजिस्टर होता है जिसमें मांग की सभी वसूलियां जिनका इस प्रयोजन के लिए निर्धारित प्रपत्र यानि पी.32 में उल्लेख हुआ लेखबद्ध होती हैं।• सीमा-द्योतक तथा भू-माप सम्बन्धी चिन्हों की सूचीः- ऐसी सूची जिसमें हद बन्दी और भू-माप सम्बन्धी चिह्न उल्लिखित हों। खसरा गिरदावरी के साथ लगानी जाकर पेश की जाती है। यह फार्म पी.15 में तैयार किया जाता है।• शामिल नम्बरः- किसी बड़े खसरे में कई छोटे-छोटे खसरे शामिल होते हैं जिनका रकबा उसी बड़े खसरे में शामिल होता है गोश्वारे में सभी छोटे खसरा नं. के रकबे का योग बड़े खसरा नं. में शामिल किया जाता है जैसे- कोई खसरा नं.5 है जिसमें 17, 24, 45 अन्य शामिल नं. है गोश्वारे में किता-1 व रकबा........... होगा।• शजराः- इसे वंशावली भी कह सकते हैं, विरासत का नामान्तरकरण भरते समय पटवारी द्वारा नामान्तरकरण प्रपत्र की पुश्त पर फौती व्यक्ति से सम्बन्धित (जैसे-फौती व्यक्ति का पिता व उसके वारिसान पुत्र व पुत्री) शजरा बनाया जाता है।• क्षेत्रफल की इकाईः- क्षेत्रफल की इकाई बीघा-बिस्वा अथवा हैक्टेयर में होती है।• हदबन्दीः- किसी खेत/गांव की सीमाओं को नियत करना हदबन्दी कहलाता है यह प्रक्रिया सेटलमेंट विभाग द्वारा कायम की जाती है।• हक त्यागः- किसी संपत्तिधारक द्वारा अपनी संपत्ति को उसके स्वयं के रक्त संबंधी के पक्ष में त्याग करना।• हेक्टेयरः- यह क्षेत्रफल की इकाई है एक हैक्टेयर में 3 बीघा 19 बिस्वा होता है। यह मैट्रिक प्रणाली है।

17/01/2024

आदेश 7 नियम 11 दावे को आंशिक रूप से ख़ारिज नहीं किया जा सकता
RRT 2024 Page 1 SC
सुप्रभात

08/01/2024

रास्ते की ज़मीन का आवंटन नहीं हो सकता
RBJ 2023 page 607
सुप्रभात

07/01/2024

आदेश 7 नियम 11 CPC , RTA एक्ट की धारा 207 कृषि भूमि के विभाजन बाबत वाद दीवानी न्यायालय में नहीं चल सकता, जिस वाद में राजस्व न्यायालयों का क्षेत्राधिकार है वही अनुतोष दे सकती है उसे दीवानी न्यायालय द्वारा नहीं लिया जाना चाहिए जब तक राजस्व न्यायालय कृषि भूमि के अधिकारों बाबत निर्णय नहीं कर देता तब तक दीवानी न्यायालय द्वारा दस्तावेज़ को निरस्त करने बाबत निर्णय नहीं ले सकते है
RBJ 2023 page 604
सुप्रभात आपका दिन मंगलमय हो

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