Majdur Adhikar Manch

Majdur Adhikar Manch મજૂર અધિકાર મંચ અસંગઠિત ક્ષેત્રના મજૂરો માટે કામ કરતું સંગઠન છે, સાથે પજીકૃત યુનિયન પણ છે.

  | असंगठित श्रमिक एक्शन स्कूल 2025असंगठित क्षेत्र में जमीनी संगठन को मज़बूत करने की दिशा में एक कदम।सेंटर फॉर लेबर रिसर...
09/06/2025

| असंगठित श्रमिक एक्शन स्कूल 2025

असंगठित क्षेत्र में जमीनी संगठन को मज़बूत करने की दिशा में एक कदम।

सेंटर फॉर लेबर रिसर्च एंड एक्शन (CLRA), रोज़ा-लक्ज़मबर्ग स्टिफ्टंग साउथ एशिया के साथ साझेदारी में असंगठित श्रमिक एक्शन स्कूल का चौथा ओनलाइन प्रशिक्षण आयोजित कर रही है, जो 3 जुलाई 2025 से शुरू हो रहा है।

यह प्रशिक्षण उन सभी लोगों के लिए बनाया गया है जो ग्रामीण या शहरी परिवेश में, कृषि, निर्माण, ईंट भट्टा, घरेलू काम, सफाई, फैक्ट्री, गिग प्लेटफॉर्म, वेयरहाउस या अन्य उभरते हुए श्रम क्षेत्रों में मज़दूरों के अधिकार और गरिमा की लड़ाई में सक्रिय हैं।

यह कोर्स निम्नलिखित संगठनीय रणनीतियों को ठोस उदाहरणों और केस स्टडीज़ के ज़रिए समझाएगा:
• मज़दूर नेतृत्व की पहचान
• जमीनी संचार की संरचना तैयार करना
• वॉल चार्ट जैसे सहभागी उपकरणों का रणनीतिक उपयोग
• राज्य व्यवस्था और मज़दूर अधिकारों/हक़ों तक पहुँच बनाना

इस बार हम असंगठित क्षेत्र में आ रहे बदलावों पर भी चर्चा करेंगे—खासकर डिजिटलकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का श्रम पर प्रभाव—चाहे वह गिग वर्कर हों या पारंपरिक क्षेत्रों से जैसे ईंट भट्टा मज़दूर।**

🗓 तारीखें: हर गुरुवार, 3 जुलाई से 7 अगस्त 2025
🕔 समय: शाम 5:00 से 6:30 बजे तक
🌐 भाषा: हिंदी (अंग्रेज़ी में विवेचन/निर्वचन उपलब्ध रहेगा)
📌 पंजीकरण की अंतिम तिथि: 26 जून 2025

🔗 यहाँ पंजीकरण करें: https://forms.gle/jHuK3t4VrQisiyr57

हम संगठकों, कार्यकर्ताओं, शोधकर्ताओं, ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं, NGO कर्मियों और सामुदायिक नेताओं को, जो दक्षिण एशिया में असंगठित मज़दूरों के साथ काम कर रहे हैं, इस शिक्षण यात्रा में शामिल होने का आमंत्रण देते हैं।

आइए, एक मज़बूत और जुड़ा हुआ मज़दूर आंदोलन बनाने के लिए एकजुट हों।

चिलाकोटा गाँव में भीषण आग: 32 प्रवासी मजदूर परिवारों की बरसो की महेनत राख हुई5 मई 2025 को आई तेज़ बारिश और तूफानी हवाओं ...
20/05/2025

चिलाकोटा गाँव में भीषण आग: 32 प्रवासी मजदूर परिवारों की बरसो की महेनत राख हुई

5 मई 2025 को आई तेज़ बारिश और तूफानी हवाओं ने दाहोद जिले की लिमखेड़ा तहसील के चिलाकोटा गाँव के मेडा फलिया में तबाही मचा दी। बिजली का खंभा गिरा, शॉर्ट सर्किट हुआ और देखते ही देखते आग की चपेट में आकर 32 प्रवासी मजदूर परिवारों के आशियाने जलकर खाक हो गए।

इन परिवारों की पूरी कमाई, अनाज, कपड़े, बर्तन, पशु, चारा - सब कुछ आग में राख हो गया। 5 मवेशी जिंदा जल गए। कुछ भी नहीं बचा। इस चिलचिलाती गर्मी में गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे बेहद दयनीय स्थिति में हैं। ऊपर से बारिश और तेज़ हवाएं लगातार मुसीबत बढ़ा रही हैं।

आज मजदूर अधिकार मंच ने स्थानिक साथी धुला भाई के साथ गाँव का दौरा किया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की।

सरकार की ओर से नाममात्र की मदद आई है, थोड़ा अनाज, थोड़ा चारा और एक प्लास्टिक। गांव वालों का कहना है कि "MP (सांसद) ने तो चींटी के पैर जितनी मदद भेजी है।"

गांव के लोग मांग कर रहे हैं:

• राशन और कपड़ों की मदद
• खेत के लिए बीज
• बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए ज़रूरी राहत सामग्री

एक दीपक बुझा नहीं, मशाल बन गयासाथी रतनलाल भील को श्रद्धांजलि16 साल का एक लड़का, न्याय की अलख लेकर खेमराज जी के काफिले मे...
19/05/2025

एक दीपक बुझा नहीं, मशाल बन गया
साथी रतनलाल भील को श्रद्धांजलि

16 साल का एक लड़का, न्याय की अलख लेकर खेमराज जी के काफिले में जुड़ता है। यह लड़का मेवाड़ के मैदानी भाग में बसे भील गमेती समुदाय से था, एक ऐसा समुदाय जो राजस्थान के अन्य आदिवासी समाजों की तुलना में कहीं अधिक उपेक्षित रहा है। उस बच्चे ने अपने समाज की शोषित स्थिति को नज़दीक से देखा था, और बचपन में ही यह ठान लिया था कि वह इस अन्याय के खिलाफ खड़ा होगा, चाहे रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो।

उस लड़के का नाम था रतनलाल भील। एक ऐसा नाम जो आज भी भीलवाड़ा और दक्षिण राजस्थान के ईंट भट्ठा मालिकों के लिए केवल नाम नहीं बल्कि प्रतिरोध और संघर्ष का प्रतीक बन चुका है।

रतन जी का जीवन-संघर्ष उन्हें दक्षिण राजस्थान ईंट भट्ठा मज़दूर यूनियन तक ले आया। वहाँ उन्होंने देखा कि प्रवासी और स्थानीय आदिवासी मजदूर किस तरह की अमानवीय परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। दिवंगत साथी मदन जी के नेतृत्व में रतन जी ने इस अन्यायी व्यवस्था को सीधी चुनौती दी। उन्हें धमकाया गया, मारपीट की गई, जेल जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

कई वर्षों के अथक प्रयासों के बाद यूनियन को मालिकों की ओर से मान्यता मिली और हजारों मजदूरों को एक नई आशा मिली। रतन जी आगे जाकर यूनियन के सचिव बने और उन्होंने मजदूरों के हक की मशाल को पूरे समर्पण और निडरता के साथ जलाए रखा।

उन्होंने अपना पूरा जीवन श्रमिकों के संघर्ष के लिए समर्पित कर दिया। वे लगातार प्रवास करते रहे, दिन-रात मजदूरों के बीच रहे, अपने शरीर की कभी परवाह नहीं की। शायद यही जीवनशैली उनके स्वास्थ्य पर असर डाल गई। 17 मई 2025 को, केवल 37 वर्ष की आयु में, यह अलखधारी साथी हमें छोड़कर चला गया।

लेकिन साथियों, जो व्यक्ति जीवनभर मशाल लेकर चला, वह केवल देह से गया है। उसका विचार, उसका समर्पण और उसकी आग अब हम सबमें है। वह अब हर मज़दूर की मुट्ठी में, हर नारे में ज़िंदा रहेगा।

उनकी स्मृति में एक ऑनलाइन शोक सभा का आयोजन किया जा रहा है:

दिनांक: 19 मई 2025
समय: शाम 4 बजे
Zoom लिंक:
https://us02web.zoom.us/j/86177957839
Meeting ID: 861 7795 7839

हम सभी साथी इस सभा में शामिल होकर रतन जी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करें।
कृपया इस संदेश को अन्य संगठनों, यूनियन और नेटवर्क के साथियों तक भी पहुँचाएँ।

कुछ शब्द साथी रतन जी के नाम:

जो आग सीने में लिए चला
हर आँधियों से भिड़ गया
जिसने मजदूरों का दर्द समझा
खुद तपकर मशाल बन गया

हमारे बीच भले न हो अब वो आवाज
पर उसका प्रतिरोध अब हमारे भीतर गूंजता है
साथी रतन जी, आप नहीं गए
आप हर मज़दूर की मुट्ठी में, हर नारे में ज़िंदा हैं

लाल सलाम, साथी रतनलाल भील
संघर्ष की मशाल अब हम उठाएंगे

मज़दूर दिवस 2025 | डांग, गुजरातआज दिनांक 1 मई 2025 को मज़दूर दिवस के अवसर पर मजदूर अधिकार मंच, डांग इकाई द्वारा गन्ना कट...
01/05/2025

मज़दूर दिवस 2025 | डांग, गुजरात

आज दिनांक 1 मई 2025 को मज़दूर दिवस के अवसर पर मजदूर अधिकार मंच, डांग इकाई द्वारा गन्ना कटाई मज़दूरों और मुकरदमों की बैठक का आयोजन सबरी रिसॉर्ट में किया गया। इस बैठक में विभिन्न चीनी कारखानों के लगभग 100 से 150 मजदूरों ने हिस्सा लिया।

सर्वसम्मति से हर सुगर फैक्ट्री के लिए 11 सदस्यों की कमेटी का गठन किया गया। साथ ही मज़दूरों के अधिकारों की रक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किए गए:

1. हर सुगर द्वारा लकड़ी के लिए 5 रुपये प्रति बंडल मज़दूरों को देना होगा।

2. सभी सुगर ग्रुप्स में मज़दूरी भुगतान की वाउचर प्रणाली एक जैसी होगी।

3. किसी मज़दूर की कुदरती मौत होने पर उसके परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी।

4. कोई भी मुकरदम मज़दूर को ₹50,000 से अधिक एडवांस नहीं देगा।

5. एडवांस पर ब्याज की दर 25% से अधिक नहीं होगी।

6. एडवांस का पूरा हिसाब डायरी में पारदर्शिता के साथ दर्ज किया जाएगा।

यह भी तय किया गया कि आने वाले सीजन में इन सभी प्रस्तावों को कड़ाई से लागू किया जाएगा। इन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ मज़दूर क़ानूनों के तहत क़ानूनी कार्यवाही की जाएगी और उन्हें समाज से बहिष्कृत करने का निर्णय लिया गया।

उपस्थित साथी:
जयेश गामित (सचिव, डांग इकाई)
शांतिलाल मीणा (सेंट्रल कमेटी सदस्य)
डेनिश मेकवान (सेंट्रल कमेटी सदस्य)
अमूल पवार (डांग इकाई सदस्य)
योहन पवार (डांग इकाई सदस्य)

#मज़दूर_दिवस #गन्ना_मज़दूर #मज़दूर_अधिकार

आज मजदूर अधिकार मंच ने गांधी नगर सेक्टर 6 लेबर नाका पर मजदूर दिवस बड़े उत्साह और सम्मान के साथ मनाया। इस अवसर पर सचिव रम...
01/05/2025

आज मजदूर अधिकार मंच ने गांधी नगर सेक्टर 6 लेबर नाका पर मजदूर दिवस बड़े उत्साह और सम्मान के साथ मनाया। इस अवसर पर सचिव रमेश श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष बलवंत सिंह, समिति सदस्य दिनेश परमार, भूपत सोलंकी, मीना जादव, हिटेन्द्र राठोड, पूर्व GLO पी एस पटेल, भार्गव ओजा और रोहित चौहान मौजूद थे।

इस कार्यक्रम के दौरान हम सबने मजदूर दिवस के ऐतिहासिक महत्व को याद किया और शिकागो में 1886 में हुए उस ऐतिहासिक संघर्ष को सराहा, जब श्रमिकों ने अपने हक़ और अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई थी। यह आंदोलन आज भी दुनिया भर में मजदूरों के अधिकारों के संघर्ष की प्रेरणा बन चुका है।

कार्यक्रम में BOCW (बिल्डिंग और अन्य कंस्ट्रक्शन वर्कर्स) कल्याण योजनाओं की जानकारी दी गई, और एक रजिस्ट्रेशन कैंप का आयोजन किया गया, ताकि श्रमिक अपनी पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर सकें। हालांकि, वर्तमान BOCW योजनाओं में पेंशन और ESIC जैसी आवश्यक योजनाओं की भारी कमी है, जो श्रमिकों की जीवनभर की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

हमारा यह प्रयास हमेशा यही रहेगा कि श्रमिकों के अधिकारों और उनकी भलाई के लिए हम आवाज़ उठाते रहें और उनके साथ खड़े रहें। आइए, हम सब मिलकर मिलकर श्रमिकों के अधिकारों की इस लड़ाई को मजबूत बनाएं और उनके लिए बेहतर भविष्य की दिशा में काम करें।

#मजदूर_अधिकार #मजदूर_दिवस #श्रमिक_संघर्ष #मजदूर_संगठन

मजदूर दिवस से बाबासाहेब तक: श्रम, जाति और न्याय की संघर्षगाथामजदूर दिवस पर हमें यह याद रखना ज़रूरी है कि भारत में श्रमिक...
01/05/2025

मजदूर दिवस से बाबासाहेब तक: श्रम, जाति और न्याय की संघर्षगाथा

मजदूर दिवस पर हमें यह याद रखना ज़रूरी है कि भारत में श्रमिक अधिकारों की लड़ाई हमेशा जाति के ख़िलाफ़ संघर्ष से जुड़ी रही है।

डॉ. भीमराव अंबेडकर ने केवल राजनीतिक अधिकारों के लिए नहीं, बल्कि मज़दूरों को संगठित करने, ट्रेड यूनियन बनाने और सामाजिक सुरक्षा कानूनों की नींव रखने का काम भी किया। लेकिन जातीय भेदभाव ने मज़दूर आंदोलन को भी भीतर से खोखला कर दिया, दलित, आदिवासी और अन्य हाशिए पर रहने वाले समुदायों को इससे बाहर रखा गया।

आज भी भारत के 90% से ज़्यादा मज़दूर असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, और इनकी बड़ी संख्या SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक समुदायों से आती है। आज़ादी के 75 साल बाद भी वे असुरक्षित, अस्थायी और शोषणकारी मज़दूरी ढांचे का भार ढो रहे हैं।

नीचे दिए गए लेख में अंबेडकर की श्रमिक नीतियों से लेकर आज के मज़दूर वर्ग की हकीकत तक, जाति, श्रम और न्याय की जटिलताओं को समझने की एक कोशिश है:

पूरा लेख पढ़ें:
https://open.substack.com/pub/rohitclra/p/0c0?utm_source=share&utm_medium=android&r=59otzk

#मजदूरदिवस #अंबेडकर #श्रमिकअधिकार #जातिऔरश्रम #सामाजिकन्याय

आदिवासी क्षेत्र में होली का विशेष महत्व है। पारंपरिक रूप से, इसी समय फसल कटाई की जाती थी, और यह उत्सव बड़े उत्साह के साथ...
01/04/2025

आदिवासी क्षेत्र में होली का विशेष महत्व है। पारंपरिक रूप से, इसी समय फसल कटाई की जाती थी, और यह उत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता रहा है। हाल के वर्षों में, जब इस क्षेत्र के लोग रोज़गार की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन करने लगे, तब भी वे पूरे साल चाहे किसी भी परिस्थिति में रहें, लेकिन होली के अवसर पर अपने गांव लौटते हैं। यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप और पारिवारिक आयोजनों, विशेष रूप से शादियों, का भी महत्वपूर्ण समय बन जाता है।

इसी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में, 28 मार्च को दाहोद जिले के केंद्र लिमडी में एक मजदूर सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों (पुरुषों और महिलाओं) ने भाग लिया। यह सम्मेलन मजदूर अधिकार मंच की प्रदेश और दाहोद जिला कार्यकारिणी के नेतृत्व में आयोजित किया गया था।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि सवजी गुरुजी और सीएलआरए के निदेशक दिनेश परमार थे। इसके अलावा, मंच पर मानसिंह भाभौर (प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य) और रावजी तावियाड (दाहोद जिला कार्यकारिणी सचिव) ने भी उपस्थित मजदूरों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने और संघर्ष तेज़ करने का आह्वान किया।

सम्मेलन में इस बात पर बल दिया गया कि जब तक आदिवासी प्रवासी मजदूरों के मुद्दों को मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों द्वारा स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक इनके समाधान की उम्मीद नहीं की जा सकती। मंच ने मजदूरों की एकजुटता और संगठित संघर्ष को ही अपने हकों की प्राप्ति का सबसे प्रभावी रास्ता बताया।

શહેરી અનૌપચારિક શ્રમિકોની ગુજરાન અને સુરક્ષા પર મહત્વપૂર્ણ ચર્ચા10 માર્ચ 2025ના રોજ અમદાવાદ મેનેજમેન્ટ એસોસિયેશન (AMA) ખ...
12/03/2025

શહેરી અનૌપચારિક શ્રમિકોની ગુજરાન અને સુરક્ષા પર મહત્વપૂર્ણ ચર્ચા

10 માર્ચ 2025ના રોજ અમદાવાદ મેનેજમેન્ટ એસોસિયેશન (AMA) ખાતે અર્બન મેનેજમેન્ટ સેન્ટર (UMC) દ્વારા આયોજિત રાઉન્ડટેબલ વર્કશોપ માં મજૂર અધિકાર મંચ (MAM) એ ભાગ લીધો. આ મહત્વપૂર્ણ સંવાદમાં વિવિધ નિષ્ણાતો અને સંગઠનોએ શહેરોમાં કામ કરતા અનૌપચારિક શ્રમિકોની સમસ્યાઓ અને ઉકેલ વિશે ચર્ચા કરી. તેમાં ખાસ કરીને બાંધકામ, ઘરગથ્થુ કામદારો, કચરો વ્યવસ્થાપન, પરિવહન, અને ગિગ વર્કર્સ જેવા વર્ગોના મુદાઓને ઉઠાવવામાં આવ્યા.

પેનલ ચર્ચા દરમિયાન બાંધકામ શ્રમિકોની કામ કરવાની પરિસ્થિતિ, તેમના પગાર, સામાજિક સુરક્ષા અને શ્રમ અધિકારો જેવા મહત્વપૂર્ણ મુદ્દાઓ પર ધ્યાન આપ્યું ગયું. આ સંદર્ભમાં બાંધકામ શ્રમિક કલ્યાણ બોર્ડ (BOCW) ની ભૂમિકા પર પણ ચર્ચા થઈ, જેમાં તેની નીતિઓને વધુ અસરકારક બનાવવાની જરૂરિયાત જણાવવામાં આવી.

મજૂર અધિકાર મંચ (MAM) ના સચિવ રમેશ શ્રીવાસ્તવજી એ બાંધકામ શ્રમિકોની મુખ્ય ચિંતાઓ રજૂ કરી, જેમાં ન્યૂનતમ વેતન, સામાજિક સુરક્ષા યોજનાઓની પહોંચ, કામના સ્થળે સલામતી ઉપાયો અને શ્રમિકોની અનિશ્ચિત ગુજરાન જેવા મુદ્દાઓ પ્રસ્તુત કરવામાં આવ્યા. તેમણે ખાસ કરીને આ બાબત પર ભાર મૂક્યો કે BOCW બોર્ડ દ્વારા શ્રમિકોના નોંધણીની પ્રક્રિયા સરળ બનાવવી જોઈએ અને સરકારી યોજનાઓનો લાભ વધુ શ્રમિકો સુધી પહોંચે.

આ ચર્ચા હાલમાં શહેરી ગુજરાન મિશન (DAY-NULM) માંથી દીનદયાળ જન આજીવિકા યોજના (શહેરી) - DJAY(S) તરફ થતાં પરિવર્તનના સંદર્ભમાં પણ ખૂબ મહત્વની સાબિત થઈ. તેમાં એવી ભલામણ કરવામાં આવી કે નીતિ બનાવતી વખતે અનૌપચારિક શ્રમિકોની સમસ્યાઓને પ્રાથમિકતા અપાય અને તેમની સુરક્ષા માટે સક્રિય પગલાં લેવામાં આવે.

મજૂર અધિકાર મંચ (MAM) એ માને છે કે બાંધકામ તેમજ અન્ય અનૌપચારિક ક્ષેત્રમાં કામ કરતા શ્રમિકોને સંગઠિત કરવું અને તેમના હક્કો માટે લડત આપવી અત્યંત જરૂરી છે. શ્રમિકોના હક્ક અને જીવનશૈલી સુધારવા માટે અમારી લડત સતત ચાલુ રહેશે.

#શ્રમિકઅધિકાર #બાંધકામશ્રમિક #શહેરીગુજરાન #શ્રમિકનીતિ

शहरी अनौपचारिक श्रमिकों की सुरक्षा और अधिकारों पर अहम चर्चा

10 मार्च 2025 को अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन (AMA) में अर्बन मैनेजमेंट सेंटर (UMC) द्वारा राउंडटेबल वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसमें मजदूर अधिकार मंच (MAM) ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में विभिन्न विशेषज्ञों और संगठनों ने शहरी अनौपचारिक श्रमिकों—जैसे घरेलू कामगार, देखभाल करने वाले श्रमिक, गिग वर्कर्स, निर्माण श्रमिक, कचरा प्रबंधन और परिवहन क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों—की समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा की।

पैनल चर्चा के दौरान निर्माण श्रमिकों की कार्य स्थितियों, उनके वेतन, सामाजिक सुरक्षा और श्रम अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया। इस संदर्भ में निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड (BOCW) की भूमिका पर भी चर्चा हुई और इस पर जोर दिया गया कि बोर्ड की नीतियों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि श्रमिकों को उनके हक और लाभ मिल सकें।

मजदूर अधिकार मंच (MAM) के सचिव रमेश श्रीवास्तव जी ने पैनल चर्चा में भाग लेते हुए निर्माण श्रमिकों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों को रेखांकित किया, जिनमें न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पहुंच, कार्यस्थल पर सुरक्षा उपायों की कमी और श्रमिकों की अनिश्चित आजीविका शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि BOCW बोर्ड के माध्यम से श्रमिकों के पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और सरकारी योजनाओं का लाभ सभी पात्र श्रमिकों तक पहुँचे।

यह चर्चा मौजूदा शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM) से दीनदयाल जन आजीविका योजना (शहरी) - DJAY(S) में हो रहे बदलावों के संदर्भ में भी बेहद महत्वपूर्ण रही। इसमें इस बात पर बल दिया गया कि नयी नीति निर्माण में अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों की समस्याओं को प्राथमिकता दी जाए और उनके लिए प्रभावी सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं।

मजदूर अधिकार मंच (MAM) का मानना है कि निर्माण और अन्य अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को संगठित करने और उनकी मांगों को नीति-निर्माताओं तक पहुँचाने की प्रक्रिया को और मज़बूत किया जाना चाहिए। हमारा संघर्ष श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और उनके जीवन स्तर को सुधारने के लिए निरंतर जारी रहेगा।

#श्रमिकअधिकार #निर्माणश्रमिक #शहरीआजिविका #श्रमिकनीति

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242, Second Floor, Beronet Complex, Opp Sabarmati Police Station, Sabarmati
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