16/07/2026
तलाक के बाद भी पत्नी को मिलेगा 30% अंतरिम गुज़ारा-भत्ता?
दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला – जानिए पूरा मामला
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एक पति ने तलाक की डिक्री के बाद अपनी पूर्व पत्नी को मिलने वाले अंतरिम गुज़ारा-भत्ता को चुनौती दी। उसका कहना था कि तलाक के बाद अब उसकी कोई कानूनी जिम्मेदारी नहीं बनती।
लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कहा –
👉 "तलाक रिश्ता खत्म करता है, जिम्मेदारी नहीं!"
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🧾 कोर्ट का फैसला क्यों है खास?
हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही तलाक हो चुका हो, लेकिन अगर पत्नी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं है, तो पति की यह कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी बनी रहती है कि वह अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देता रहे।
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📚 सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले – जो बदलते हैं नजरिया
🔹 राजनेश बनाम नेहरा (2020)
पति की आय, पत्नी की ज़रूरतें और जीवन स्तर – इन तीनों के आधार पर ही गुज़ारा-भत्ता तय होगा। पत्नी को सम्मानजनक जीवन देना पति की जिम्मेदारी है।
🔹 शैलजा बनाम खजान सिंह (2018)
तलाक के बाद भी अगर पत्नी आत्मनिर्भर नहीं है, तो धारा 24 के तहत अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देना होगा।
🔹 एस.एस. भारद्वाज बनाम पूनम भारद्वाज (2014)
विवाह का रिश्ता खत्म होने से पति की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती, जब तक कि पत्नी खुद का भरण-पोषण करने में सक्षम न हो जाए।
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✅ इस फैसले से क्या सीख मिलती है?
· अगर पत्नी आर्थिक रूप से कमज़ोर है, तो तलाक के बाद भी वह गुज़ारा-भत्ता की हकदार है।
· कोर्ट हर मामले में पति की आय, पत्नी की ज़रूरतें और जीवन-स्तर को देखता है।
· अदालत का मुख्य उद्देश्य – न्याय और सम्मानजनक जीवन दोनों पक्षों के लिए।
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💬 आपकी राय क्या है?
क्या तलाक के बाद भी पति पर गुज़ारा-भत्ता देने की जिम्मेदारी होनी चाहिए?
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