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23/07/2026
19/07/2026

सुप्रीम कोर्ट ने युवा वकीलों के भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक पहल की है! ⚖️🔥

अब “यंग लॉयर्स प्रोफेशनल असिस्टेस फंड” देशभर में बनेगा। इसका मकसद पहली पीढ़ी के और आर्थिक रूप से कमजोर युवा वकीलों की मदद करना है।

कई प्रतिभाशाली वकील शुरुआती दिनों में आर्थिक तंगी के कारण वकालत छोड़ देते हैं, जिससे कानूनी पेशे में 'ब्रेन ड्रेन' होती है। इस योजना के तहत पात्र युवा वकीलों को शुरुआत में मासिक स्टाइपेंड दिया जाएगा, जो 6-7 सालों में धीरे-धीरे कम होकर खत्म हो जाएगा।

यह कदम न सिर्फ युवाओं को सहारा देगा, बल्कि न्यायपालिका को भी मजबूत करेगा! 👏

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સુપ્રીમ કોર્ટની કડક આંખ બાદ બાર કાઉન્સિલનો મોટો નિર્ણય!⚖️ વકીલો માટે સોશિયલ મીડિયા પર પ્રતિબંધ? ⚖️સુપ્રીમ કોર્ટમાં થયેલી...
19/07/2026

સુપ્રીમ કોર્ટની કડક આંખ બાદ બાર કાઉન્સિલનો મોટો નિર્ણય!

⚖️ વકીલો માટે સોશિયલ મીડિયા પર પ્રતિબંધ? ⚖️

સુપ્રીમ કોર્ટમાં થયેલી એક જનહિત યાચિકા (PIL) બાદ બાર કાઉન્સિલે વકીલો, કાયદાના વિદ્યાર્થીઓ અને ઇન્ટર્ન્સ માટે કડક આચારસંહિતા (Data Page Code of Conduct) જાહેર કરી છે.

નવા નિયમોમાં શું છે?
🚫 પ્રતિબંધ: વકીલો હવે સોશિયલ મીડિયા (Instagram, Facebook, YouTube) પર પ્રમોશનલ રીલ્સ, વીડિયો કે અન્ય કોઈ પણ ડિજિટલ માધ્યમ દ્વારા ક્લાયન્ટ્સ મેળવવાનો પ્રયાસ કરી શકશે નહીં.
🚫 કોર્ટના વીડિયો, કાળો કોટ પહેરીને પ્રમોશનલ સામગ્રી બનાવવા પર પણ સંપૂર્ણ પ્રતિબંધ છે.

કારણ શું?
કેટલાક વકીલો ડિજિટલ માધ્યમોનો દુરુપયોગ કરીને અયોગ્ય રીતે ગ્રાહકોને આકર્ષિત કરતા હતા અને વ્યવસાયિક ગેરવર્તણૂકના ગંભીર આક્ષેપો સામે આવ્યા હતા. સુપ્રીમ કોર્ટમાં આ મામલો ઉઠ્યા બાદ હવે બાર કાઉન્સિલે કડક પગલાં ભરવાનો નિર્ણય લીધો છે.

ચેતવણી:
જો કોઈ વકીલ સોશિયલ મીડિયા અથવા AI (આર્ટિફિશિયલ ઇન્ટેલિજન્સ) નો દુરુપયોગ કરતા જોવા મળશે તો તેની સામે કડક કાર્યવાહી કરવામાં આવશે.

તમારો અભિપ્રાય: શું આ નિયમ વકીલો માટે યોગ્ય છે કે ડિજિટલ યુગમાં તે પાછળ ધકેલવા જેવો છે? નીચે કોમેન્ટમાં જણાવો! 👇

LegalUpdate Ahmedabad Advocate

तलाक के बाद भी पत्नी को मिलेगा 30% अंतरिम गुज़ारा-भत्ता?दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला – जानिए पूरा मामला          ---⚖️--...
16/07/2026

तलाक के बाद भी पत्नी को मिलेगा 30% अंतरिम गुज़ारा-भत्ता?

दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला – जानिए पूरा मामला

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एक पति ने तलाक की डिक्री के बाद अपनी पूर्व पत्नी को मिलने वाले अंतरिम गुज़ारा-भत्ता को चुनौती दी। उसका कहना था कि तलाक के बाद अब उसकी कोई कानूनी जिम्मेदारी नहीं बनती।

लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कहा –
👉 "तलाक रिश्ता खत्म करता है, जिम्मेदारी नहीं!"

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🧾 कोर्ट का फैसला क्यों है खास?

हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही तलाक हो चुका हो, लेकिन अगर पत्नी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं है, तो पति की यह कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी बनी रहती है कि वह अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देता रहे।

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📚 सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले – जो बदलते हैं नजरिया

🔹 राजनेश बनाम नेहरा (2020)

पति की आय, पत्नी की ज़रूरतें और जीवन स्तर – इन तीनों के आधार पर ही गुज़ारा-भत्ता तय होगा। पत्नी को सम्मानजनक जीवन देना पति की जिम्मेदारी है।

🔹 शैलजा बनाम खजान सिंह (2018)

तलाक के बाद भी अगर पत्नी आत्मनिर्भर नहीं है, तो धारा 24 के तहत अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देना होगा।

🔹 एस.एस. भारद्वाज बनाम पूनम भारद्वाज (2014)

विवाह का रिश्ता खत्म होने से पति की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती, जब तक कि पत्नी खुद का भरण-पोषण करने में सक्षम न हो जाए।

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✅ इस फैसले से क्या सीख मिलती है?

· अगर पत्नी आर्थिक रूप से कमज़ोर है, तो तलाक के बाद भी वह गुज़ारा-भत्ता की हकदार है।
· कोर्ट हर मामले में पति की आय, पत्नी की ज़रूरतें और जीवन-स्तर को देखता है।
· अदालत का मुख्य उद्देश्य – न्याय और सम्मानजनक जीवन दोनों पक्षों के लिए।

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💬 आपकी राय क्या है?

क्या तलाक के बाद भी पति पर गुज़ारा-भत्ता देने की जिम्मेदारी होनी चाहिए?
कमेंट में बताएं! 👇
IndianJudiciary InterimMaintenance

15/07/2026

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Ahmedabad
382424

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