12/08/2025
सुप्रीम कोर्ट (और उच्च न्यायालयों) ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आपातकालीन (Emergency) स्थिति में मरीज का इलाज किसी कारण से रोका या टाला नहीं जा सकता।
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क्या कहा गया है सुप्रीम कोर्ट ने?
1. Parmanand Katara बनाम Union of India (1989)
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से रुख अपनाया कि न Rocky injured अथवा गंभीर रूप से घायल मरीज को इलाज करने से मना नहीं किया जा सकता, चाहे उसके पास पैसे हों या न हों। डॉक्टर और अस्पताल की कानूनी जिम्मेदारी है कि वे तुरंत इमरजेंसी मेडिकल केयर उपलब्ध कराएं। यह कोर्ट ने भारतीय मेडिकल काउंसिल के प्रोफेशनल कंडक्ट रेगुलेशन के तहत भी कहा है ।
2. संवैधानिक अधिकार — अनुच्छेद 21 (जीने का अधिकार)
न्यायिक व्याख्या में यह माना गया है कि इमरजेंसी चिकित्सा देखभाल देरी के बिना प्रदान की जानी चाहिए, क्योंकि जीवन का संरक्षण संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मूलभूत अधिकार है। अगर किसी अस्पताल द्वारा इलाज से इंकार किया जाता है, तो वह सिर्फ नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि कानूनी तौर पर भी अवैध माना जाएगा। ऐसे में आप कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं ।
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सारांश (Summary):
कोई डॉक्टर या अस्पताल आपातस्थिति में इलाज करने से इंकार नहीं कर सकता, चाहे मरीज आर्थिक रूप से कमजोर हो—यह सुप्रीम कोर्ट की स्थायी स्थिति है।
यह न केवल एक नैतिक कर्तव्य है, बल्कि कानूनी रूप से बाध्यकारी भी है, और इसे सीधे जीने के अधिकार (Article 21) से जोड़ा गया है।
यदि कोई अस्पताल इलाज से इनकार करता है, तो आप कंज्यूमर फोरम में मामला दर्ज कर सकते हैं।