advocate aisha khan

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civil and criminal lawyer

29/07/2026

क्या शादी में मिले गहनों पर सिर्फ पत्नी का अधिकार होता है?🧑‍🎓

हाँ। भारतीय कानून के अनुसार, शादी, उपहार या दहेज में पत्नी को मिले गहने, नकद और अन्य वस्तुएँ "स्त्रीधन (Stridhan)" कहलाती हैं, जिन पर पत्नी का पूर्ण कानूनी अधिकार होता है।🚨

Law is not just for lawyers-it's for every citizen.📚

सही कानूनी जानकारी आपको अपने अधिकारों की रक्षा करने की शक्ति देती है।✅

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Comment below: Did you already know about Stridhan⚖️

29/07/2026

दिल्ली उच्च न्यायालय ने राम को बरी कर दिया। चंदर को 2006 के एक कथित अपहरण और बलात्कार मामले में दोषी ठहराया गया था, और उसे संदेह का लाभ देते हुए न्याय के समक्ष पेश किया गया। न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की अध्यक्षता वाली एकल-न्यायाधीश पीठ ने आईपीसी की धारा 363 (अपहरण) और 376 (बलात्कार) के तहत 2008 के दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया, यह कहते हुए कि अभियोजन पक्ष आरोपी के अपराध को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।🚨

अपने फैसले में, न्यायालय ने गवाहों के बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभासों को नोट किया, जबकि आरोपी के खिलाफ फोरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्य भी निर्णायक नहीं थे। कार्यवाही के दौरान, यह सामने आया कि अपील लंबित रहने के दौरान, पीड़िता अदालत में पेश हुई और उसने कहा कि वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई थी और वह उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहती। इसके अलावा, अस्थि-निर्माण परीक्षण के आधार पर, न्यायालय ने पाया कि पीड़िता की उम्र में दो साल तक की त्रुटि �

26/07/2026

इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला...

मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली एवं जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने कहा कि यदि Single Judge का आदेश बिना कारण (Non-Speaking Order) के पारित किया गया है, तो उसके खिलाफ Special Appeal सुनवाई योग्य होगी, भले ही Rule 5 में रोक का प्रावधान हो।

कोर्ट ने Abhishek Gupta v. Dinesh Kumar और Kranti Associates के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कारणयुक्त आदेश देना प्राकृतिक न्याय का अनिवार्य सिद्धांत है।

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24/07/2026

सिर्फ संतान न होना तलाक का आधार नहीं है... रिश्ते का असली आधार है सम्मान, विश्वास और समझ

पटना हाईकोर्ट का अहम फैसला-मानसिक क्रूरता को माना गया विवाह विच्छेद का आधार।

34.76 लाख का स्थायी गुजारा भत्ता

EMI आय से घटाई नहीं जा सकती

दूसरी शादी से अपील खत्म नहीं होती

न्याय सिर्फ कानून नहीं, इंसाफ की सोच भी है।

Advocate Aisha Khan

High Court Lucknow Bench









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Court Decision LawFacts

23/07/2026

बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के फैसलों का विरोध करने वाले एक व्यक्ति के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई को रद्द करते हुए कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को सरकार का "गुलाम" नहीं बनाया जा सकता. अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल सरकार की नीतियों का विरोध करना या उसके खिलाफ नारे लगाना किसी व्यक्ति को शहर से बाहर (Externment) करने का कानूनी आधार नहीं हो सकता.

मामला सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी से जुड़ा था. मुंबई पुलिस ने उनके खिलाफ दर्ज पांच एफआईआर का हवाला देते हुए उन्हें एक साल के लिए शहर से बाहर करने का आदेश दिया था. इनमें अधिकांश मामले नागरिकता संशोधन कानून (CAA), ज्ञानवापी मस्जिद विवाद और केंद्र सरकार के अन्य फैसलों के विरोध में प्रदर्शन और नारेबाजी से जुड़े थे.

सुनवाई के दौरान जस्टिस माधव जामदार ने पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने मौखिक टिप्पणी में कहा, "यह क्या है? सभी नागरिकों को भारत सर�

23/07/2026

Court Marriage vs Registered Marriage

🏛️

22/07/2026

इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा बयान⚖️

कोर्ट के बाहर शरिया के अनुसार दिया गया तलाक़-ए-हसन कानूनी रूप से वैध माना गया है।📢

इसके लिए कोर्ट की मंजूरी ज़रूरी नहीं।✅

Advocate Aisha Khan

High Court, Lucknow Bench









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20/07/2026

Advocate Aisha Khan 🧑‍🎓 high court Lucknow bench ⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को किशोर-किशोरियों के आपसी प्रेम संबंधों📢

से जुड़े मामलों में POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) कानून के कथित दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने सवाल किया कि अगर कोई लड़का और लड़की अपनी मर्जी से घर चले जाए तो राज्य ऐसे मामलों को कैसे रोक सकता है? कोर्ट ने कहा कि 15 से 18 साल की उम्र भावनात्मक बदलाव की होती है, इसलिए हर ऐसे मामले को POCSO का मामला मानना उचित नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को किशोर किशोरियों की आपसी सहमति वाले रिश्तों में पॉक्सो (POCSO) कानून के कथित दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताई। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ किशोरों के निजता के अधिकार से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी।





Protection
🏛️

18/07/2026

Police FIR likhne se mana kare?❌

Toh yaad rakhiye - kanoon aapke saath hai📢

Apne adhikar janiye, Anyaay sehna band kijiye!⚖️

Advocate Aisha Khan🧑‍🎓

High Court Lucknow Bench"**











HighCourt

Justice

LegalHelp

LawIndia

RightsMatter

17/07/2026

Allahabad High Court ka bada faisla⚖️

Maintenance par ek strong clarity👉

←Sirf is baat par ki patni ko uske maayke se financial help mil rahi hai, pati apni zimmedari se mukti nahi pa sakta.✅

Court ne clear kiya:🧑‍🎓

Wife ka right to maintenance kabhi khatam nahi hota📢

Maayke ki income = wife ki income nahi maani jaayegi📢

Sirf allegations se haq khatam nahi hota, proof zaroori hai🚨

Payment na karne par recovery salary/pension se bhi ho sakti hai📢

Case Reference:📚

Alok Tiwari vs Sta

te of U.P. & Another (Criminal Revision No. 5768/2024)
Adv. Aisha Khan🧑‍🎓

High Court, Lucknow Bench🧑‍🎓

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