advocate aisha khan

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civil and criminal lawyer

03/10/2026

सहमति से घर छोड़ने के मामलों में घबराहट नहीं, सही कानूनी रणनीति ज़रूरी है।

उम्र की पुष्टि, पूरी टाइमलाइन, चैट/कॉल रिकॉर्ड, बयानों और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखना बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। कानून भावनाओं से नहीं, तथ्यों और साक्ष्यों से आगे बढ़ता है।

जानकारी रखें • सबूत सुरक्षित रखें कानूनी सलाह समय

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Advocate Aisha Khan

High Court, Lucknow Bench











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03/10/2026

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि बालिग को अपनी पसंद

का जीवन साथी चुनने व साथ रहने का अधिकार है। इसी के साथ गाजियाबाद की एक महिला को अपनी पसंद के पति के साथ रहने की अनुमति दे दी है, भले ही उसके पिता को यह रिश्ता स्वीकार्य नहीं है। हाई कोर्ट ने 8 सितंबर 2026 के आदेश के तहत राज्य सरकार को सोनिका चौहान (26) को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया था। गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने की पुलिस ने उसे अदालत में प्रस्तुत किया।

पिता पर धमकी का आरोप

हाई कोर्ट से बातचीत में सोनिका ने बताया कि उसने 28 अगस्त 2022 को अपनी मर्जी से, बिना किसी दबाव या डर के, अकबर खान से शादी की थी। उसने कहा कि वह अपने पति के साथ ही रहना चाहती है और अपने पिता की धमकियों तथा दबाव का सामना कर रही है। पति अकबर खान ने भी कोर्ट के सामने अपने वैवाहिक संबंध की पुष्टि की और पत्नी के साथ रहने की इच्छा जताई।

पिता ने बेटी को ब्लैकमेल करने का लगाया आरोप

वहीं, सोनिका के पिता लक्ष्मण सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि उन

02/10/2026

कानून सिर्फ किताबों में नहीं, हर नागरिक की आज़ादी की हिफ़ाज़त में ज़िंदा रहता है। ⚖️

किसी आरोपी पर दबाव बनाने के लिए उसके परिजन या किसी अन्य व्यक्ति को थाने में जबरन बैठाकर रखना क़ानूनन स्वीकार्य नहीं है।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान और क़ानूनी प्रक्रिया का पालन—दोनों अनिवार्य हैं।

⚖️ Know Your Rights. Respect the Law.
Advocate Aisha Khan | High Court Lucknow

02/10/2026

⚖️ मैं वकालत करती हूँ, समझौता नहीं।
मेरी पहचान मेरी दलील है,
मेरा हथियार मेरा क़ानून है,
और मेरा अंदाज़—बेबाक़।

जहाँ हक़ की बात होगी, वहाँ मेरी आवाज़ होगी। 🔥⚖️
— Advocate Aisha Khan | High Court Lucknow

02/10/2026

⚖️ क़ानून किताबों में पढ़ती हूँ,
लेकिन अपनी पहचान अपने उसूलों से बनाती हूँ।
Court में Argument करती हूँ,
और ज़िंदगी में अपने Rules पर चलती हूँ। 👑🖤

Advocate by Profession,
Royal by Attitude. ⚖️👑

01/10/2026

High court Lucknow bench ⚖️
Advocate Aisha Khan 🧑‍🎓

29/09/2026

हार्दिक आभार एवं धन्यवाद 🙏

अवध बार एसोसिएशन, हाईकोर्ट, लखनऊ के वार्षिक चुनाव 2026-27 में महासचिव पद हेतु मेरे सीनियर का नामांकन सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ। आप सभी आदरणीय वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अधिवक्ता बंधुओं से मिले स्नेह, आशीर्वाद और विश्वास के लिए हृदय से आभार। आपका विश्वास ही मेरी शक्ति है। अधिवक्ताओं के सम्मान, अधिकार एवं हितों के लिए निष्पक्षता, पारदर्शिता और पूर्ण समर्पण के साथ सदैव तत्पर रहूँगा। आइए, मिलकर अपनी बार को और सशक्त एवं गौरवशाली बनाएं। आपके अमूल्य समर्थन एवं आशीर्वाद के लिए कोटि-कोटि धन्यवाद। 🙏

Advocate Aisha Khan
High Court, Lucknow

28/09/2026

हम सिर्फ़ बातें नहीं करते, हर शब्द को कानून की भाषा में जवाब देना जानते हैं।

28/09/2026

498A केस में समझौते के बाद क्या हाईकोर्ट FIR/Criminal Proceedings रद्द कर सकता है?

कलकत्ता हाईकोर्ट ने Sri Prince Bansal v. State of West Bengal & Anr. में कहा कि यदि वैवाहिक विवाद का पक्षकारों के बीच पूरी तरह से समझौता हो चुका है और उसके बाद Hindu Marriage Act की Section 13-B के तहत Mutual Consent Divorce भी हो गया है, तो उपयुक्त परिस्थितियों में हाईकोर्ट CrPC की Section 482 के तहत अपनी inherent powers का इस्तेमाल करके IPC Section 498A की criminal proceedings को quash कर सकता है।

कोर्ट ने विशेष रूप से ध्यान दिया किः

पक्षकारों ने अपने वैवाहिक विवाद और संबंधित दावों का निपटारा कर लिया था।

दोनों ने Section 13-B HMA के तहत आपसी सहमति से तलाक प्राप्त किया।

पत्नी ने Family Court के समक्ष 498A proceedings वापस लेने का undertaking दिया था।

इसके बावजूद criminal proceedings जारी रहीं।

कोर्ट ने माना कि ऐसी परिस्थितियों में मुकदमा जारी रखना process of law के abuse का कारण बन सकता है।

महत्वपूर्ण कानूनी बिंदुः

IPC Section 498A एक non-compoundable offence है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट की Section 482 CrPC की inherent jurisdiction समाप्त हो जाती है। उपयुक्त मामलों में, न्या�

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