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05/08/2025

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04/08/2025

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सिद्धार्थ बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2021) - जमानत से जुड़ा महत्वपूर्ण सिद्धांतसुप्रीम कोर्ट ने सिद्धार्थ बनाम उत्तर प्रदे...
02/08/2025

सिद्धार्थ बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2021) - जमानत से जुड़ा महत्वपूर्ण सिद्धांत
सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धार्थ बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2021) मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है, जिसमें कहा गया है कि अगर आरोपी जांच में सहयोग कर रहा है, तो गिरफ्तारी जरूरी नहीं है।

मुख्य बिंदु
- *जमानत ही नियम है, गिरफ्तारी अपवाद है*: कोर्ट ने माना कि गिरफ्तारी कोई जरूरी औपचारिकता नहीं है, अगर व्यक्ति जांच में सहयोग कर रहा हो।
- *गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं*: यह धारणा गलत है कि चार्जशीट दाखिल करने से पहले गिरफ्तारी जरूरी है, अगर व्यक्ति अदालत में पेश होने के लिए तैयार है।
- *इंसाफ की भावना*: अनावश्यक गिरफ्तारी व्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत संरक्षित है।

निर्णय का महत्व
इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि जांच एजेंसियों को गिरफ्तारी के पहले व्यक्ति के सहयोग और अदालत में पेश होने की इच्छा को ध्यान में रखना चाहिए। इससे व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा होगी और अनावश्यक गिरफ्तारी से बचा जा सकेगा।

कानूनी प्रावधान
- *दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 170*: इस धारा के तहत पुलिस अधिकारी को आरोप पत्र दाखिल करने से पहले गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है, अगर व्यक्ति जांच में सहयोग कर रहा है और अदालत में पेश होने के लिए तैयार है।

इस निर्णय से कानूनी प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा मिलेगा, और व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा होगी।

Adv santosh kumar roy

पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि फैमिली कोर्ट में काउंसलर्स की नियुक्ति अ...
28/07/2025

पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि फैमिली कोर्ट में काउंसलर्स की नियुक्ति अनिवार्य है। अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो यह फैमिली कोर्ट्स एक्ट, 1984 की धारा 9 और इसके तहत बनाए गए नियमों का उल्लंघन होगा।

*मुख्य बिंदु:*

- *काउंसलर्स की अनिवार्य नियुक्ति*: कोर्ट ने जोर दिया है कि काउंसलर्स की नियुक्ति करना वैकल्पिक नहीं है, बल्कि यह एक वैधानिक आवश्यकता है जो फैमिली कोर्ट्स एक्ट की धारा 9 के तहत आती है।
- *काउंसलर्स की भूमिका*: काउंसलर्स पार्टियों के बीच समझौता और सुलह कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और पारिवारिक कल्याण को बढ़ावा देते हैं।
- *सुलह प्रक्रिया*: फैमिली कोर्ट्स (पटना हाईकोर्ट) नियम, 2000 सुलह प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार करते हैं, जिसमें पार्टियों को सुलह के लिए काउंसलर्स के पास भेजना और सामाजिक कल्याण और पारिवारिक कल्याण में लगे संस्थानों और व्यक्तियों की अलग-अलग सूचियां बनाए रखना शामिल है।
- *अनुपालन न करने के परिणाम*: काउंसलर्स की नियुक्ति और सुलह प्रक्रिया का पालन न करने से प्रतिकूल न्याय वितरण प्रणाली अनुपयुक्त हो जाएगी और कोर्ट लागत सहित आदेश पारित कर सकती है।

*संबंधित धाराएं:*

- *फैमिली कोर्ट्स एक्ट, 1984 की धारा 9*: फैमिली कोर्ट का समझौता कराने का कर्तव्य।
- *फैमिली कोर्ट्स (पटना हाईकोर्ट) नियम, 2000 के नियम 10 और 11*: समझौता और सुलह प्रक्रिया के लिए प्रक्रिया [1].

04/10/2024

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