21/10/2025
💔 हे प्रभु, ऐसा असहनीय दुख किसी माँ को मत देना…
हमारी आदरणीया वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमिला मिश्रा दीदी का इकलौता पुत्र — एक होनहार इंजीनियर, जो पानी के जहाज पर कार्यरत था — दो हफ्ते पहले अचानक हृदय गति रुकने से इस दुनिया को अलविदा कह गया।
परंतु सबसे दर्दनाक यह है कि आज तक उसका पार्थिव शरीर लखनऊ नहीं पहुँच सका।
सोचिए… एक माँ अपने बेटे के अंतिम दर्शन के लिए हर पल टकटकी लगाए इंतज़ार कर रही है, और समय जैसे थम-सा गया हो।
आज जब पूरा देश दीपों की रोशनी में नहा रहा है, दीदी के घर में अंधेरा, सन्नाटा और असहनीय वेदना पसरी हुई है।
किंतु मानवता आज भी ज़िंदा है — क्योंकि उनके पड़ोसी भी दीदी के दुख में सहभागी बनकर दीपावली सांकेतिक रूप से या बिल्कुल नहीं मना रहे हैं। यही है असली संवेदना, यही है इंसानियत का उजाला।
हम सब अधिवक्ता बंधुओं का यह नैतिक और मानवीय कर्तव्य है कि इस गहन दुख की घड़ी में दीदी के साथ मजबूती से खड़े रहें।
साथ ही सरकार से निवेदन है कि उनके पुत्र के पार्थिव शरीर को शीघ्र भारत लाने की पूरी व्यवस्था की जाए, ताकि माँ को अपने लाल के अंतिम दर्शन मिल सकें।
🕯️ ईश्वर उस दिवंगत आत्मा को चिरशांति प्रदान करें,
और शोकाकुल परिवार को यह असहनीय दुःख सहने की शक्ति दें…😥