Advocate Shailendra Kumar-Munna

Advocate Shailendra Kumar-Munna Income tax return, GST returns and registration, Accounting and Other civil cases

18/08/2024
We have firm belief that you are fully aware of your legal, moral and social responsibility of filling Annual Income Tax...
21/07/2021

We have firm belief that you are fully aware of your legal, moral and social responsibility of filling Annual Income Tax Returns as applicable on individuals, AOPs and Companies. Failing the compliance of this responsibility will attract certain monetary penalties which are defined in law. We also wish to mention here that we are starting to receive input for Filing of Income Tax Returns. It is therefore requested to kindly forward your respective data* to us so that we can process their returns seamlessly.

* List of documents are listed below:

i) Salary certificate from the employer for the year ended 30th June 2021

ii) Details of property income along-with copy of rent agreement and tax deduction certificates (if any)

iii) Details of business income earned during the year along-with supporting documents

iv) Details of income earned under the head capital gain (i.e., gain on disposal of securities, immoveable property)

v) Details of income earned under the “Other sources” like pension income, agricultural income, dividend, profit on debt, Prizes and winnings, commission, gift received etc.

vi) Documentary evidence in respect of taxes paid or advance tax collected or deducted (i.e., Salary, rent, dividend, provincial income tax in case of agricultural property, profit on debt, withholding on cash withdrawal, advance tax on sale or purchase or transfer of immoveable property, advance tax on purchase of air ticket, telephone, advance tax on private motor vehicles etc.)

vii) Details of local taxes and other expenses paid in respect of rental income

viii) Copy of bank statements of all bank accounts for the period April 01, 2020 to March 31, 2021

ix) Proof of donation (if any) paid for claim of tax credit u/s 61 of the Ordinance

x) Proof of any investment in new shares/mutual funds units/life insurance premium paid for claim of tax credit u/s 62 of the Ordinance

xi) Proof of any health insurance premium paid for claim of tax credit u/s 62A of the Ordinance

xii) Proof of any contribution paid to an Approved Pension Fund for claim of tax credit u/s 63 of the Ordinance

xiii) Proof of Zakat (If any) paid or deducted by the banks for claim as a deduction

xiv) Proof of any loan obtained along-with schedule by the individual for the construction of a new house or the acquisition of house for claim as deductible allowance u/s 60C of the Ordinance.

xv) Any increase/decrease (i.e. purchase/sale) during the year in assets and liabilities along with documentary evidence.

xvi) Estimated household expenses including foreign trips (official/private), children education expenses, utilities expenses etc.


In case of any query, please do not hesitate to contact me.

*माल की खरीद पर आयकर टीडीएस का नया प्रावधान – धारा 194Qदिनांक 1 जुलाई 2021 से 'माल' की खरीद पर एक टीडीएस का नया प्रावधान...
14/06/2021

*माल की खरीद पर आयकर टीडीएस का नया प्रावधान – धारा 194Q
दिनांक 1 जुलाई 2021 से 'माल' की खरीद पर एक टीडीएस का नया प्रावधान लागू हो रहा है जिसके तहत माल के क्रेता को अपने विक्रेता से माल की खरीद पर एक निश्चित प्रतिशत से टीडीएस की कटौती करनी है. आपको याद होगा कि पिछले वर्ष माल की बिक्री पर टीसीएस के प्रावधान धारा 206(C)(1H) के द्वारा आये थे और 194 Q के टीडीएस के प्रावधान इन्ही टीसीएस के प्रावधानों से बहुत कुछ मिलते जुलते भी हैं.
माल की खरीद पर आयकर टीडीएस का नया प्रावधान

*194 Q – एक जुलाई 2021 से लागू टीडीएस प्रावधान की सरल भाषा में व्याख्या**
दिनांक 1 जुलाई 2021 से ‘माल’ की खरीद पर एक टीडीएस का नया प्रावधान लागू हो रहा है जिसके तहत माल के क्रेता को अपने विक्रेता से माल की खरीद पर एक निश्चित प्रतिशत से टीडीएस की कटौती करनी है. आपको याद होगा कि पिछले वर्ष माल की बिक्री पर टीसीएस के प्रावधान धारा 206(C)(1H) के द्वारा आये थे और 194 Q के टीडीएस के प्रावधान इन्ही टीसीएस के प्रावधानों से बहुत कुछ मिलते जुलते भी हैं.

आइये 1 जुलाई 2021 से लागू इन प्रावधानों का अध्ययन करें और साथ में यह देखें कि ये नए प्रावधान क्या है और पिछले वर्ष ही लागू की गई धारा 206(C)((1H) से इन प्रावधानों का कोई सम्बन्ध भी है या केवल कुछ ही समानता है जिसका कोई व्यवहारिक महत्त्व नहीं है लेकिन ये दोनों एक से प्रावधान आपस में एक भ्रम तो पैदा कर ही रहें है. आइये सरल भाषा में समझें कि इस समय 1 जुलाई 2021 से लागू होने वाले माल की खरीद पर धारा 194Q के टीडीएस के प्रावधान क्या है ताकि इसका सही ढंग से पालन हो सके.

1. धारा 194 Q किन खरीददारों पर लागू है :-
जिन खरीददारों का बीते हुए वर्ष में टर्नओवर, सकल प्राप्तिया बिक्री 10 करोड़ रूपये से अधिक था यह टीडीएस की धारा 194Q सिर्फ उन्ही खरीददारों पर ही लागू है . तो इस प्रकार 31 मार्च 2021 को जो वर्ष समाप्त हुआ है उस वर्ष में जिन क्रेताओं का टर्नओवर 10 करोड़ रूपये से अधिक था उन्ही को अपने निवासी विक्रेता से एक वितीय वर्ष में 50 लाख रूपये से ऊपर की खरीद होने पर से टीडीएस काटना है. यह टीडीएस पहले 50 लाख रूपये की रकम छोड़ते शेष रकम पर काटा जाना है .

इसलिए यदि किसी क्रेता का टर्नओवर 31 मार्च 2021 को समाप्त वर्ष में 10 करोड़ रूपये से कम है उन्हें इस प्रावधान का पालन नहीं करना है इस प्रकार बहुत बड़ी संख्या में खरीददार करदाता टीडीएस के इस प्रावधान के बाहर ही रहेंगे

इस प्रकार के क्रेता जो कि धारा 194Q के टीडीएस काटने के उत्तरदायी है उन्हें हम आगे इस लेख में सुविधा के लिए “विशिष्ट क्रेता” या “क्रेता” कहेंगे यहाँ फिर से आपको याद दिला दें जिन क्रेता का 31 मार्च 2021 को समाप्त वर्ष को टर्नओवर 10 करोड़ रूपये से अधिक था वे ही इस धारा 194Q के तहत टीडीएस काटने के उत्तरदायी होंगे .
2. किन विक्रेताओं से टीडीएस काटना है :-

किसी एक वित्तीय वर्ष में यदि जिस भी एक विक्रेता से “विशिष्ट क्रेता”ने जिस पर धारा 194Q लागू होता है 50 लाख रूपये से अधिक का माल खरीदा है उसमें से 50 लाख रूपये से अधिक की राशि पर 0.1 % की दर से टीडीएस काटना है . यहाँ ध्यान रखें कि यह विक्रेता आयकर प्रावधानों के अनुसार भारत का निवासी अर्थात रेजिडेंट होना चाहिए
3. किस रकम पर टीडीएस काटना है :-

यह टीडीएस एक वित्तीय वर्ष में 50 लाख रूपये से ऊपर की रकम पर ही कटना है अर्थात यदि खरीद 67 लाख रूपये की है तो “विशिष्ट क्रेता” को टीडीएस सिर्फ 50 लाख रूपये के ऊपर की रकम पर अर्थात 17 लाख रूपये पर ही काटना है . यहाँ ध्यान रखे हर वर्ष यदि टीडीएस इस धारा के तहत काटना बनता है तो हर वर्ष पहले हर विक्रेता का 50 लाख रूपये को छोड़कर ही काटना होगा .

उदाहरण के लिए यदि एक क्रेता ने एक विक्रेता से 4 बार में प्रत्येक बार 70 लाख रूपये का माल खरीदता है तो इस प्रकार एक वित्तीय वर्ष में मान लीजिये उसने कुल 280.00 लाख का माल खरीदा तो अब उसे इसमें से 50 लाख रूपये घटा कर कुल 230.00 लाख रूपयेपर ही टीडीएस काटना है .

अब एक बात और ध्यान रखें कि यह 50 लाख रूपये की सीमा एक वित्तीय वर्ष के लिए है इसलिए अब जब यह प्रावधान 1 जुलाई 2021 से लागू हो रहा है तो टीडीएस तो आपको 1 जुलाई 2021 के बाद की खरीद पर ही काटना है लेकिन 50 लाख की सीमा मालुम करते समय 1अप्रैल 2021 से खरीद को भी गणना में लेना होगा.

1.उदाहरण :-
X एंड कंपनी ने Y एंड कंपनी से 1 अप्रैल 2021 से 30 जून तक खरीद 40 लाख रूपये की की है और अब 1 जुलाई 2021 को एक और खरीद इसी कम्पनी से 30 लाख रूपये की की है तो अब इस खरीद पर 30 लाख रूपये में से 10 लाख रूपये घटा कर 20 लाख रूपये पर टीडीएस काटना है. एक वित्तीय वर्ष की सीमा प्रति विक्रेता 50 लाख रूपये है तो X एंड कंपनी ने 30 जून से पूर्व ही इस सीमा में से 40 लाख रूपये की खरीद कर ली है तो अब 50 लाख रूपये की सीमा में से 10 लाख रूपये ही बचे है इसलिए यही राशि 1 जुलाई 2021 को की गई खरीद में से घटाई जाएगी .

2.उदाहरण :-

X एंड कंपनी ने Y एंड कंपनी से 1 अप्रैल 2021 से 30 जून तक खरीद 70 लाख रूपये की की है और अब 1 जुलाई 2021 को एक और खरीद इसी कम्पनी से 30 लाख रूपये की की है तो अब इस खरीद पर 30 लाख रूपये पर ही टीडीएस काटना है. एक वित्तीय वर्ष

की सीमा प्रति विक्रेता 50 लाख रूपये है तो X एंड कंपनी ने 30 जून से पूर्व ही यह सीमा समाप्त हो गई है .

क्या जीएसटी जोड़ते हुए टीडीएस काटा जाना है :-

आप यह ध्यान रखें कि यह विवाद क्यों सामने आया है ? इसका कारण भी धारा 206 (C) (1H) के तहत काटा जाने वाला टीसीएस ही है जहां केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने यह स्पष्टीकरण दिया था कि टीसीएस जीएसटी सहित प्राप्त पूरी रकम पर ही काटा जाना है . 206 (C) (1H) माल की बिक्री से सम्बंधित तो है लेकिन इस पर टीसीएस की गणना पूर्ण रूप से “भुगतान प्राप्ती” के आधार पर होती है इसलिए वहां सर्कुलर नम्बर 17/2020 दिनांक 29 सितम्बर 2020 के द्वारा यह स्पष्टीकरण जारी किया है कि टीसीएस की गणना करते समय जीएसटी को शामिल किया जाएगा.

लेकिन धारा 194Q के तहत टीडीएस के साथ ऐसा नहीं है इसलिए टीडीएस के सम्बन्ध में बोर्ड का एक सर्कुलर23/2017दिनांक 19 जुलाई 2017 जो कि सर्विसेज के बारे में हैं जहां यह कहा गया है कि “टीडीएस जीएसटी छोड़ते हुए काटा जाना चाहिए”ही लागू होना चाहिए . लेकिन यहाँ ध्यान में रखें कि माल के सम्बन्ध में ऐसा कोई स्पष्टीकरण अभी जारी नहीं हुआ है .

भ्रम और विवाद समाप्ति के लिए स्पष्टीकरण जारी होना चाहिए

यदि सरकार की मंशा कुछ और है अर्थात वह इस टीडीएस को जीएसटी की राशी पर भी कटवाना चाहती है तो इस सम्बन्ध में निर्देश 1 जुलाई 2021 से पूर्व सर्कुलर जारी कर दिए जाना चाहिए ताकि यह विवाद भी समाप्त हो.

4. किस समय टीडीएस काटना है :-

यदि इस धारा 194Q में दी हुई सभी शर्तें पूरी होती है तो यह टीडीएस उस समय काटना है जिस समय यह राशि विक्रेता के खाते में जमा अर्थात क्रेडिट की जाती है या उसे भुगतान की जाती है, में से जो घटना पहले हो अर्थात जब क्रेता द्वारा माल के खरीद की प्रविष्टी करते समय माल खाते को डेबिट कर विक्रेता के खाते को क्रेडिट किया जाता है उस समय टीडीस काटना है लेकिन इस सम्बन्ध में विक्रेता को भुगतान पहले ही या एडवांस के रूप में हो गया है तो भुगतान के समय ही टीडीएस काटना है. इसे आप आसान शब्दों में समझ लें आपने यदि एडवांस राशि का भुगतान नहीं किया है तो आपको माल की खरीद के समय ही आपको यह टीडीएस काटना है और यदि आपने एडवांस भुगतान किया है तो एडवांस भुगतान के समय ही आपको यह टीडीएस काटना है. यहाँ आप ध्यान रखें कि जितनी राशि एडवांस दी है उसपर से एडवांस देते समय और शेष राशि माल खरीदते समय यह टीडीएस काटा जाना है .

5. टीडीएस की दर क्या होगी :-

टीडीएस की दर 0.1% होगी अर्थात व्यवहारिक रूप से टीडीएस काटने के योग्य प्रत्येक एक लाख रूपये पर यह राशि 100 रूपये होगी. जितनी रकम जिस पर टीडीएस काटा जाना हैं उसकी गणना आप कर लें यहाँ सिर्फ एक अनुमान के लिए 1 लाख रूपये का उदाहरण दिया गया है राशि की गणना निश्चित रकम के पर 0.1% की दर से करनी है,

उदाहरण -1

जैसे यदि क्रेता द्वारा एक वित्तीय वर्ष में कुल 52,34,400.00 है और यह सारी खरीद 1 जुलाई 2021 के बाद ही है इसमें से 50 लाख रूपये घटाने 2,34,400.00 बचते है तो इस पर टीडीएस की राशि 234.00 रूपये होगी .

उदहारण-2 :-

यदि एक क्रेता ने अपने विक्रेता से 70 लाख रूपये का माल खरीदा है तो उसे टीडीएस के रूप में पहले 50 लाख रूपये छोड़ते हुए शेष 20 लाख रूपये 0.1% 2000.00 रूपये टीडीएस काटना है.

पेन नंबर नहीं देने पर टीडीएस की दर 5 %- धारा 206AA

यहाँ यह ध्यान रखे कि यदि विक्रेता अपना पेन नंबर नहीं देता है तो टीडीएस की यह दर 5 % होगी लेकिन आप स्वयं कल्पना कर सकते है कि यह एक बहुत ही लगभग दुर्लभ स्तिथी है क्यों कि इस समय पेन नंबर तो लगभग सभी डीलर्स के पास होते ही है लेकिन यदि किसी क्रेता के पास विक्रेता के पेन नंबर नहीं है तो फिर इस टीडीएस की दर 0.1% की जगह 5 प्रतिशत हो जायेगी.सामान्य स्तिथी में जहाँ जिस व्यक्ति का टीडीएस काटा जाना है उसके पेन नंबर नहीं देने पर 20 प्रतिशत टीडीएस काटने का प्रावधान है लेकिन धारा 194Q के तहत पेन नम्बर नहीं देने पर यह दर 5 प्रतिशत होगी.

रिटर्न फाइल नहीं करने वालों के लिए टीडीएस की दर :- 206AB

1 जुलाई 2021 से जिन व्यक्तियों का टीडीएस काटा जाना है उनकी एक नई श्रेणी बताई गई है जिनके लिए टीडीएस सामान्य दर से नहीं काटा जाकर नियमित दर का दुगना या 5 प्रतिशत ,जो भी अधिक हो , से काटा जाएगा . यह प्रावधान आयकर कानून की धारा 206AB के तहत दी गयी है . आइये देखें, इन विशिष्ट व्यक्तियों की नई श्रेणी को, जिनका टीडीएस अधिक दर से काटा जाना है वह कैसे निर्धारित होगी. इस श्रेणी में जाने के लिए जो शर्तें धारा 206AB दी गई है वे निम्नप्रकार है :-

1. 31मार्च 2019 एवं 31 मार्च 2020 को समाप्त वर्ष के दौरान प्रत्येक वर्ष में जिनका टीडीएस एवं टीसीएस मिला कर 50 हजार रूपये से अधिक था

एवम

2. इन करदाताओं ने इन दो वर्षो अर्थात 31मार्च 2019 एवं 31 मार्च 2020 दोनों ही वर्षों के आयकर रिटर्न नहीं भरा है अर्थात वह व्यक्ति लगातार दो वर्षों के रिटर्न नहीं भरे है . ध्यान रखें यदि इन दो वर्षों में से किसी एक वर्ष का रिटर्न भी भर दिया है तो आपको उस विक्रेता का टीडीएस सामान्य दर अर्थात 0.1% प्रतिशत से ही काटना है .

आइये इस प्रावधान में निर्धारण वर्ष 2021-22 अर्थात 31 मार्च 2021 को समाप्त होने वाला वर्ष के रिटर्न से कब सम्बन्ध होगा तो याद रखें कि जिस दिन इस रिटर्न की धारा 139 (1) के तहत निर्धारित तिथी समाप्त हो जायेगी तब 31 मार्च 2020 और 31 मार्च 2021 वर्ष के रिटर्न और उसमें इन व्यक्तियों पर कटे टीडीएस/टीसीएस से विशिष्ट व्यक्ति का निर्धारण किया जाएगा और 31 मार्च 2019 के वर्ष को उस समय इस गणना से छोड़ दिया जाएगा.

अब हम 31 मार्च 2021 को समाप्त वर्ष के रिटर्न के बारे में बात करें तो इस रिटर्न के भरने की 139 (1) में दी हुई तारीख तक तो आपको इस वर्ष के रिटर्न के बारे में नहीं सोचना है लेकिन जब मान लीजिये 30 नवम्बर 2021 जो ऑडिट रिटर्न्स की निर्धारित तिथी है तक रिटर्न नहीं भरा है तो 30 नवम्बर 2021 से टीडीएस की बढ़ी हुई दर लागू हो जायेगी यदि इस व्यक्ति ने वितीय वर्ष 19-20 का रिटर्न भी नहीं भरा है लेकिन जैसे ही वह निर्धारिती वितीय वर्ष 2020-21 का अपना रिटर्न भर देगा जो कि वह निर्धारित तिथी के बाद भरेगा तब फिर से टीडीएस की सामान्य दर लागू हो जायेगी . ऑडिट के अलावा अन्य रिटर्न्स की निर्धारित तिथी जो भी धारा 139 (1) में दी गई है उनके मामलों में वह तिथी काम आएगी.

यही प्रावधान अब धारा 194 Q के टीडीएस पर भी लागू होगा और इन परिस्तिथियों में कर की दर 0.1% की जगह 5% प्रतिशत हो जायेगी.

6. टीडीएस कब जमा करना है :-

यह टीडीएस माह समाप्त होने के 7 वें दिन तक जमा करना है. 1 जुलाई 2021 से यह प्रावधान लागू हो रहा है तो इस प्रकार जुलाई 2021 कापहला एकत्र कर 7 अगस्त 2021 तक जमा कराना हैऔर इसके बाद हर माह की समाप्ति के अगले माह के 7 वें दिन तक जमा करना है. यहाँ एक बात याद रखें कि मार्च माह का टीडीएस 30 अप्रैल तक जमा करना है .ऐसा नहीं होने पर नियमानुसार ब्याज का भुगतान करना होगा जैसा कि देरी से जमा कराये गए टीडीएस के साथ होता है.

7. रिटर्न कब भरना है :-

टीडीएस का रिटर्न 26Q टीडीएस रिटर्न्स में भरना है और इसे तिमाही आधार पर भरना है .

आइये देखें कि इस टीडीएस रिटर्न की निर्धारित तिथी क्या है :-

तिमाही समाप्ति निर्धारित तिथी
जून 31 जुलाई
सितम्बर 31 अक्तूबर
दिसंबर 31 जनवरी
मार्च 31 मई
8. टीडीएस नहीं काटने/जमा कराने का क्या परिणाम होगा :-

आयकर कानूनों की धारा 40(ia) के अनुसारकिसी निवासी को एक ऐसी रकम का भुगतान किया गया है जिस टीडीएस काटना है लेकिन काटा नहीं गया है और यदि काटा गया है और आयकर रिटर्न भरने के लिए जो धारा 139(1) में समय दिया गया है उस तक जमा नहीं कराया गया है तो जिस “रकम” पर टीडीएस काटना और जमा कराना है उस रकम के 30% उस व्यक्ति की आय में जोड़ दिया जाएगा . यह प्रावधान टीडीएस की धारा 194Q के तहत आने वाले टीडीएस पर भी लागू होगा इसलिए जहां भी टीडीएस के प्रावधान लागू होते हैं वहां टीडीएस अवश्य जमा कराना चाहिए क्यों कि माल के खरीद की रकम हमेशा बहुत ज्यादा होती है और उसका 30 प्रतिशत यदि अस्वीकार/अमान्य कर आय में जोड़ दिया जाए तो कर का काफी अधिक नुक्सान हो सकता है और फिर जब एक नियत तिथी , जो कि आयकर रिटर्न भरने की धारा 139 (1) में दी हुई तिथी होती है , के बाद आप टीडीएस जमा भी कराएँ और उस वर्ष, जिसमें आपने टीडीएस जमा कराया है , में आपको इतनी बड़ी रकम की छूट मिले तो भी उसका कोई महत्त्व नहीं होता है .

9. टीडीएस कब नहीं काटना है :-

इस सम्बन्ध में ऊपर लिखी सभी शर्तें पूरी होकर यदि टीडीएस काटने का दायित्व क्रेता का बनता है तो भी उसे यह टीडीएस नहीं काटना है और ऐसी दो स्तिथियाँ बनती है:-

(i).जब कि आयकर कानून के तहत किसी अन्य प्रावधान के तहत इस खरीद के व्यवहार पर टीडीएस काटा जाना हो .

(ii).जब कि उस व्यवहार पर विक्रेता द्वारा 206C (माल के विक्रय पर लागू टीसीएस प्रावधान धारा 206 (C) (1H) को छोड़ते हुए ) के तहत टीसीएस काटने के योग्य है तो वहां टीडीएस के प्रावधान लागू नहीं होते हैं.

यहाँ यह ध्यान रखे कि धारा 206C में टीसीएस के जितने भी प्रावधान है उनमें से 206 (C) (1H) को छोड़ते हुए किसी में भी टीसीएस काटा जाना है तो फिर इस धारा के तहत टीडीएस नहीं काटा जाना है . लेकिन इस अपवाद से माल की बिक्री पर काटे जाने वाले टीसीएस को बाहर रखा गया है जो कि धारा 206C (1H) में है और यहीं धारा 194 Q और धारा 206C(1H) का सम्बन्ध शुरू होता है जिसे मैंने आगे एक उदहारण के माध्यम से समझाया है लेकिन यहाँ यह ध्यान रखे कि यदि कोई व्यवहार माल के क्रय पर टीडीएस धारा 194 Q के तहत आता हो और साथ ही धारा 206 (C) (1H) के तहत भी आता हो तो उस पर क्रेता ही टीडीएस काटेगा और यदि उसने टीडीएस काट लिया है तो ऐसे व्यवहार पर विक्रेता धारा 206 (C) (1H) को टीसीएस काटने की आवश्यकता नहीं है .- धारा 206 (C) (1H) का SecondProviso एवं बजट मेमोरेंडम वित्त विधयक 2021 पेज 76.

आइये अब कुछ उदहारण देखें

आइये अब कुछ ऐसे उदाहरण देखें जिन में माल की खरीद पर टीडीएस धारा 194Qमाल की बिक्री पर टीसीएस 206 (C) (1H) और एक ही व्यवहार पर दोनों ही प्रावधान लागू होते है.

उदाहरण -1

X एक क्रेता है जो Y नामक एक विक्रेता से 70 लाख रूपये का माल खरीदता है.X (क्रेता) का 31 मार्च 2021 को समाप्त वर्ष में वार्षिक टर्नओवर 15 करोड़ रुपये है लेकिन Y (विक्रेता) का वार्षिक टर्नओवर इसी अवधि में केवल 5 करोड़ रूपये है. माल का भुगतान माल प्राप्त होने के बाद किया जाता है .

इस व्यवहार पर केवल धारा 194 Q लागू होता है और X को इस व्यवहार में 70 लाख रूपये में से 50 लाख घटा कर 0.1% टीडीएस काटना है . इसके बाद 31 मार्च 2022 तक Y से होने वाली हर खरीद पर जितने रकम की भी खरीद हो उस पूरी रकम पर 0.1% टीडीएस काटना है .

उदहारण-2

X एक क्रेता है जो Y नामक एक विक्रेता से 70 लाख रूपये का माल खरीदता है. X (क्रेता) का 31 मार्च 2021 को समाप्त वर्ष में वार्षिक टर्नओवर 5 करोड़ रुपये है लेकिन Y (विक्रेता) का वार्षिक टर्नओवर इसी अवधि में केवल 15 करोड़ रूपये है. माल का भुगतान माल प्राप्त होने के बाद किया जाता है.

इस व्यवहार पर 194 Q लागू नहीं होगा क्यों कि यहाँ क्रेता का टर्नओवर 31 मार्च 2021 को समाप्त वर्ष के लिए 10 करोड़ रूपये से अधिक नहीं है लेकिन चूँकि विक्रेता का टर्नओवर इस अवधि के दौरान 10 करोड़ से अधिक था जो कि धारा 206 C(1H) की सीमा भी है इसलिए इस व्यवहार पर इस धारा के तहत 70 लाख रूपये के भुगतान के समय विक्रेता 50 लाख रूपये को घटाकर 20 लाख रूपये पर 0.1% की दर से धारा 206 C(1H) के तहत टीसीएस एकत्र कर जमा करायेगा.

उदाहरण -3

X एक क्रेता है जो Y नामक एक विक्रेता से 70 लाख रूपये का माल खरीदता है. X (क्रेता) का 31 मार्च 2021 को समाप्त वर्ष में वार्षिक टर्नओवर 15 करोड़ रुपये है और Y (विक्रेता) का वार्षिक टर्नओवर भी इसी अवधि में 20 करोड़ रूपये है. माल का भुगतान माल प्राप्त होने के बाद किया जाता है.

यही एक ऐसा उदाहरण है जिसके तहत धारा 194Q और धारा 206 C(1H) दोनों की शर्ते पूरी होती है क्यों कि क्रेता और विक्रेता दोनों का ही टर्नओवर 31 मार्च 2021 को समाप्त हुए वर्ष के दौरान 10 करोड़ रूपये से अधिक था और माल की खरीद / भुगतान की राशिभी 50 लाख रूपये से अधिक है . लेकिन यहाँ ध्यान रखे कि इस तरह के व्यवहार पर केवल टीडीएस ही काटा जाएगा जो कि क्रेता द्वारा माल की खरीद के समय काटा जाना है . जहाँ क्रेता पर टीडीएस के प्रावधान लागू होते है और टीडीएस काटा भीजाता है वहां धारा 206C(1H) के तहत माल की बिक्री पर लागू होने वाला टीसीएस लागू नहीं होता है .

नोट :- 1 जुलाई 2021 से टीडीएस का नया प्रावधान लागू हो रहा है उस पर किये गए अध्ययन के बाद एक आलेख आपको भेज रहें है . इस लेख को लिखते समय पूरी सावधानी रखी गई है लेकिन चूँकि विषय नया है इसलिए अभी भी इसमें त्रुटी रहने की संभावना है. आपसे अनुरोध है कि इस आलेख को पढ़ें और इसमें सुधार के लिए सुझाव भेजने का कष्ट करें.

सरकार ने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल नहीं करने वालों के लिए नियम सख्त किया है। इसके तहत अब ITR फाइल नहीं करने पर दोगुना...
06/06/2021

सरकार ने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल नहीं करने वालों के लिए नियम सख्त किया है। इसके तहत अब ITR फाइल नहीं करने पर दोगुना TDS देना होगा। नए नियमों के मुताबिक, जिन लोगों ने ITR फाइल नहीं किया है, उन पर टैक्स कलेक्शन ऐट सोर्स (TCS) भी ज्यादा लगेगा। नए नियमों के मुताबिक 1 जुलाई 2021 से पीनल TDS और TCS दरें 10-20% होंगी जो कि आमतौर पर 5-10% होती हैं।

इस हिसाब से देना होगा TDS
नए TDS नियमों के मुताबिक इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 206AB के तहत आयकर कानून के मौजूदा प्रावधानों के दोगुना या प्रचलित दर के दोगुने में या फिर 5% में से जो भी ज्यादा होगा उस हिसाब से टीडीएस लग सकता है। TCS के लिए भी मौजूदा प्रावधानों के मुताबिक प्रचलित दर या 5% में से जो भी ज्यादा होगा उसके हिसाब से यह देय होगा।

इन पर लागू नहीं होगा यह नियम
आयकर कानून का यह (सेक्शन 206AB) नियम सैलरी, कर्मचारियों के बकाये के भुगतान, क्रॉस वर्ड और लॉटरी में जीती गई रकम, हॉर्स रेस पर जीती गई रकम, सिक्योरिटाइजेशन ट्रस्ट में निवेश से हासिल आय और कैश विड्रॉल पर लागू नहीं होगा। सेक्शन 206AB के तहत भारत में स्थायी प्रतिष्ठान न रखने वाले नॉन रेजिडेंट टैक्सपेयर पर भी यह लागू नहीं होगा।

अगर दोनों सेक्शन 206AA (पैन न रहने की स्थिति में ज्यादा टीडीएस रेट) और 206AB लागू होता है तो टीडीएस रेट ऊपर बताई दरों से ज्यादा होगी। वहीं सेक्शन 206CC और 206CCA के तहत ज्यादा TCS लागू होगा।

अब 30 सितंबर तक भर सकेंगे ITR
वित्त वर्ष 2020-21 के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 30 सितंबर कर दी गई है। कोरोना संक्रमण के चलते सरकार ने टैक्स फाइल करने से संबंधित तारीखों को बढ़ाने का फैसला लिया है।

क्या है TDS?
अगर किसी की कोई आय होती है तो उस आय से टैक्स काटकर अगर व्यक्ति को बाकी रकम दी जाए तो टैक्स के रूप में काटी गई रकम को टीडीएस कहते हैं। सरकार टीडीएस के जरिए टैक्स जुटाती है। यह अलग-अलग तरह के आय स्रोतों पर काटा जाता है जैसे सैलरी, किसी निवेश पर मिले ब्याज या कमीशन आदि पर। कोई भी संस्थान (जो टीडीएस के दायरे में आता है) जो भुगतान कर रहा है, वह एक निश्चित रकम टीडीएस के रूप में काटता है।

क्या है TCS?
TCS टैक्स कलेक्टेड ऐट सोर्स होता है। इसका मतलब स्रोत पर एकत्रित टैक्स (इनकम से इकट्ठा किया गया टैक्स) होता है। TCS का भुगतान सेलर, डीलर, वेंडर, दुकानदार की तरफ से किया जाता है। हालांकि, वह कोई भी सामान बेचते हुए खरीदार या ग्राहक से वो वसूलता है। वसूलने के बाद इसे जमा करने का काम सेलर या दुकानदार का ही होता है।

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 206C में इसे कंट्रोल किया जाता है। कुछ खास तरह की वस्‍तुओं के विक्रेता ही इसे कलेक्‍ट करते हैं। इन वस्‍तुओं में टिंबर वुड, स्‍क्रैप, मिनरल, तेंदु पत्‍ते शामिल हैं। इस तरह का टैक्‍स तभी काटा जाता है जब पेमेंट एक सीमा से ज्‍यादा होता है।

Income Tax Returns Update (Issued in Public Interest, Income Tax Assessee and Tax Payer).                               ...
14/05/2021

Income Tax Returns Update (Issued in Public Interest, Income Tax Assessee and Tax Payer). Financial Year . 2019-20 (Ass.Yr 2020-21) की Income Tax Returns File करने की आखिरी तारीख़ 31.03.2021 थी, देश के मौजूदा हालात को देखते हुए एक बार फिर से बढ़ाकर 31.05.2021 कर दी गई है। जो भी करदाता किसी कारणवश अपनी Income Tax Return File नहीं कर पाए हैं, उन लोगों के लिये यह एक आखिरी और सुनहरी मौका है। अगर आपकी आय 2.5 लाख है , तो आप बिना किसी Late Fee और अगर आपकी आय 2.5 लाख से अधिक है तो आप Rs 1000/- Late Fee देकर अपनी Income Tax Return File कर सकते है। Income Tax Returns File करने के लाभ : - 1) अगर आप का किसी प्रकार से TDS कटा है जैसे की Bank के Fixed Deposit पर, Company द्वारा आपकी Salary or Commission पर, Contractor द्वारा आपके Contract Income पर इत्यादि। 2) यदि आपने किसी भी Bank से Home Loan, Business Loan, Personal Loan, Car Loan etc लेना हैं तो इसके लिए कम से कम दो साल का Income Tax Return होना आवश्यक है। 3) अगर अपने कोई Property Sale or Purchase करनी है। 4) अगर आपने कोई बड़ी Insurance Policy लेनी है या Mutual Funds या कहीं और निवेश करना है। 5) अगर आपने क्रेडिट कार्ड लेना है। 6) अगर अपने Foreign Travel, Immigration या Visa ke लिए apply करना है। ऊपर दिये गए सभी तत्थों के अलावा Income Tax Return आपके लिये कई कारणों से सहायक है। इस लिए आप अपनी Income Tax Return समय पर File करें । आप चाहें भारत के किसी भी गाँव, शहर, क़स्बा इत्यादी से तालुख रखते हों। आप अपने घर से ही आपने Mobile Phone से SMS, Whats up, email के द्वारा हमसे सम्पर्क करें ओर अपने घर पर ही अपनी Income Tax Return File करवा कर अपनी Acknowledgement प्राप्त करें।
Please Contact. Shailendra kumar (munna jee) Advocate
Mobile 7004217560, 8051517097
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राज्य कर उपायुक्त एवं हमारे पथ प्रदर्षक श्री राजीव कुमार झा जी के हाथों से जी . एस . टी . सम्मान समारोह मे सम्मानित होते...
26/01/2020

राज्य कर उपायुक्त एवं हमारे पथ प्रदर्षक श्री राजीव कुमार झा जी के हाथों से जी . एस . टी . सम्मान समारोह मे सम्मानित होते हुए

30/08/2019

**```*नया मोटर व्हीकल एक्ट- हेलमेट नहीं लगाने पर अब रद्द होगा लाइसेंस, जानिए ट्रैफिक के नए 19 रूल्स*```*
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) ने मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2019 (motor vehicles amendment bill 2019) को इस महीने की शुरुआत में दे दी. इसमें ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने जैसे नियमों को सख्त और यातायात नियमों के उल्लंघन पर अधिक जुर्माने का प्रस्ताव किया गया है. संसद ने इस हफ्ते की शुरुआत में इस विधेयक को मंजूरी दे दी थी. एक आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया है कि मोटर वाहन संशोधन विधेयक 2019 को नौ अगस्त 2019 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है. बता दें कि ट्रैफिक नियम तोड़ने पर सख्त सजा होगी. इस बिल में प्रावधान है कि कोई नाबालिग वाहन चलाते हुए एक्सीडेंट करता है, तो उसके पेरेंट्स को 3 साल तक जेल होगी. वाहन रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर दिया जाएगा. जुर्माने की रकम भी कई गुना बढ़ाई गई है.
नए कानून के तहत , आपातकालीन वाहनों को रास्ता नहीं देने और अयोग्य होने के बावजूद गाड़ी चलाने के लिए 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा.

बिना सीट बेल्ट के लगेगा भारी जुर्माना नीचे देखें पूरी लिस्ट
ड्राइविंग लाइसेंस नियमों का उल्लंघन करने वाले एग्रीगेटर्स पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा. तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने पर 1,000 से 2,000 रुपये का जुर्माना लगेगा.

मोटर व्हीकल (संशोधित) बिल 2019 के तहत लागू हुए ये नए कानून*
(1) धारा 178 के तहत अब बिना टिकट यात्रा करने पर 500 रुपये जुर्माना देना होगा.
(2) धारा 179 के तहत ऑथोरिटीज के आदेश नहीं मानने पर अब 2000 रुपये जुर्माना देना होगा.
(3) धारा 181 के तहत बिना लाइसेंस के वाहन चलाने पर 5000 रुपये जुर्माना देना होगा.
(4) धारा 182 के तहत अयोग्य होने के बाद भी वाहन चलाने पर 10,000 रुपये जुर्माना देना होगा.
(5) धारा 183 के तह अब ओवरस्पीडिंग (तय गति सीमा से ज्यादा तेज वाहन चलाने पर) 1000 रुपये जुर्माना LMV के लिए वहीं, 2000 रुपये जुर्माना MPV के लिए देना होगा.
(6) धारा 184 के तहत खतरनाक तरीके से वाहन चलाने पर अब 5000 रुपये तक का जुर्माना देना होगा.
(7) धारा 185 के तहत अब शराब पीकर वाहन चलाने पर 10,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है.
(8) धारा 189 के तहत अब स्पीडिंग/रेसिंग पर 5000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है.
(9) धारा 1921 A के तहत अब बिना परमिट वाला वाहन चलाने पर 10,000 रुपये तक के जुर्माना देना होगा.
(10) धारा 193 के तहत लाइसेंस नियमों को तोड़ने पर 25,000 से 1 लाख रु तक के जुर्माने का प्रावधान है.
(11) धारा 194 के तहत ओवरलोडिंग (तय सीमा से ज्यादा सामान होने पर) 2000 रुपये और प्रति टन 1000 रु अतिरिक्त 20,000 रु और प्रति टन 2000 रु अतिरिक्त के जुर्माने का प्रावधान है.
(12) धारा 194 A के तहत अब ओवरलोडिंग (क्षमता से ज्यादा यात्री होने पर) 1000 रु प्रति एक्स्ट्रा पैसेंजर
(13) धारा 194B के तहत अब सीट बेल्ट नहीं लगाने पर 1000 रुपये का जुर्माना देना होगा.
(14) धारा 194C के तहत अब स्कूटर और बाइक पर ओवरलोडिंग यानी दो से अधिक लोग होने पर 2000 रु तक का जुर्माना और 3 महीने के लिए लाइसेंस रद्द हो सकता है.
(15) धारा 194D के तहत अब बिना हेलमेट के 1000 रु तक का जुर्माना और 3 महीने के लिए लाइसेंस रद्द हो सकता है.
(16) धारा 194E के तहत अब एंबुलेंस जैसे इमरजेंसी वाहनों को रास्ता ना देने पर 10,000 रुपए तक का जुर्माना लग सकता है.
(17) धारा 196 के तहत अब बिना बीमा (इंश्योरेंस) वाला वाहन चलाने पर 2000 रुपये का जुर्माना देना होगा.
(18) धारा 199 के तहत अब नाबालिगों के अपराध के मामले में अभिभावक / मालिक को दोषी माना जाएगा. 3 साल तक की सजा का प्रावधान है. नाबालिग पर जुवेलाइन एक्ट के तहत केस चलेगा, वाहन का रजिस्ट्रेशन भी कैंसल किया जाएगा
(19) अधिकारियों को मिले अधिकार धारा 183, 184, 185, 189, 190, 194C, 194D, 194E के तहत ड्राइविंग लायसेंस सस्पेंड करने का अधिकार

29/08/2019

~*```Holding valid PAN but not filed return of income may invite income tax notice as per new*```
Holding valid PAN but not filed return of income may invite income tax notice as per new ITBA software functionality of ITD for non/stop filers
Income Tax Department has Rolled out a comprehensive functionality to view List of Income Tax Returns Non-Filers/Stop filers for issue of notice under section 142(1) calling for return of income from such stop/non filers and also initiation of ex-parte proceedings under section 144 against persons who had not complied with 142(1) notice screen.

Now the Assessing Officers can generate the List of Non-filers/Stop filers based on the defined criteria for Non filers and Stop filers in Income Tax Business Application (ITBA).

Criteria for generation of non filers:
Any person holding valid PAN who has not filed the return for the relevant AY as well as for preceding three A.Y.s.

Criteria for generation of stop filers:
Any person holding valid PAN who has not filed the return for the concerned Assessment Year but had filed the return for any of the preceding three A.Y.s.
Issue of Notice:
(a) for the purpose of issue of notice, the list displays the last communication address which can however be edited with a new communication address. By default, 15 days time is allowed for compliance which can be changed for any other period for compliance.

(b) The AO has been given option to generate a clarification letter instead of statutory notice u/s 142(1) on first hand.

(c) The Notice so generated will go to e-filing account and email of tax payer. The assessee can respond to the notice by

(i) filing return
(ii) intimating the fact that filing of return is not required.

Once return is filed, the proceedings u/s. 142(1) will be closed and case will automatically be removed from the list of stop filer/non filer.
(d) If the AO is satisfied from the response of assessee that no return is required to be filed, proceeding u/s 142(1) so initiated can be closed.

(e) Where notice is issued but no return is filed against any PAN, the Assessing Officer shall have 2 options:

(i) Initiating Best judgment Assessment u/s 144
(ii) Initiating Proposal u/s 147 for reopening of the case.

(f) In case return is filed after due date then either AO can accept the return as valid or mark the return as invalid

(g) The AO also have the facility for uploading manually issued Notice u/s 142(1)(i) in the ITBA.

Address

Beena Road, Ward No 24 , Near Drive Vishwaranjan Das
Supaul
852131

Opening Hours

Monday 9am - 5pm
Tuesday 9am - 5pm
Wednesday 9am - 5pm
Thursday 9am - 5pm
Friday 9am - 5pm
Saturday 9am - 5pm

Telephone

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