The Law Chember-Adv. Devendra

The Law Chember-Adv. Devendra ''Advocate at district& session court singrauli m.p.''Expertise in Civil, criminal, Family & Property disputes. Professional legal services with integrity.''

05/09/2025

#विवाह_विच्छेद" का अर्थ है — पति और पत्नी के बीच वैवाहिक संबंध का कानूनी रूप से अंत (डिवोर्स / Divorce)।

विवाह विच्छेद से जुड़ी मुख्य बातें:

1. कानूनी आधार (Grounds for Divorce)
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act, 1955) की धारा 13 में विवाह विच्छेद के आधार बताए गए हैं, जैसे:

व्यभिचार (Adultery)

क्रूरता (Cruelty)

त्याग / परित्याग (Desertion)

धर्म परिवर्तन (Conversion of religion)

मानसिक रोग (Mental disorder)

संन्यास लेना (Renunciation)

सात वर्षों से अधिक समय तक पति/पत्नी का जीवित न होना (Presumption of death)

2. विवाह विच्छेद के प्रकार

आपसी सहमति से तलाक (Mutual Consent Divorce) – जब पति-पत्नी दोनों सहमत हों।

एक पक्षीय तलाक (Contested Divorce) – जब एक पक्ष तलाक चाहता हो और दूसरा नहीं।

3. विवाह विच्छेद की प्रक्रिया

पारिवारिक न्यायालय (Family Court) या जिला न्यायालय में याचिका दाखिल करना।

दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाता है।

सबूत और तर्क प्रस्तुत किए जाते हैं।

न्यायालय द्वारा आदेश पारित कर विवाह विच्छेद का निर्णय दिया जाता है।

4. अन्य महत्वपूर्ण बातें

तलाक के साथ-साथ भरण-पोषण (Alimony / Maintenance), बच्चों की अभिरक्षा (Child Custody) और संपत्ति के अधिकारों का भी निर्णय होता है।

आपसी सहमति वाले तलाक में आम तौर पर 6 महीने की अवधि (Cooling Period) दी जाती है, जिसे कुछ परिस्थितियों में कोर्ट माफ भी कर सकता है।

Adv Aarti Malik
Adv Jaya Kushwaha
High Court of Sindh Karachi
Meena Highcourt
LIVE LEGAL DESK

03/09/2025

वह आर्थिक सहायता (पैसा) है जो तलाक या अलगाव (divorce या separation) के बाद पति या पत्नी में से कोई एक, दूसरे को उसकी जीवन-यापन (maintenance) के लिए देता है।

मुख्य बिंदु (Alimony के बारे में):

1. कौन ले सकता है?

तलाक के बाद पत्नी या पति (जो खुद का भरण-पोषण करने में सक्षम न हो) अलिमोनी मांग सकता/सकती है।

अक्सर यह पत्नी को दी जाती है, लेकिन कुछ मामलों में पति भी मांग सकता है।

2. कब मिलती है?

जब पति-पत्नी अलग हो जाते हैं और पत्नी/पति के पास अपनी जीविका चलाने के लिए पर्याप्त साधन न हों।

कोर्ट यह देखकर तय करता है कि किसे, कितनी राशि और कितने समय तक देनी है।

3. कितनी राशि मिलती है?

यह कोर्ट तय करता है, पति/पत्नी की आय, संपत्ति, जीवनशैली, और दूसरे जिम्मेदारियों को देखकर।

4. कानून में प्रावधान:

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (धारा 24 और 25)

दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (धारा 125)

अन्य पर्सनल लॉ (मुस्लिम, ईसाई आदि) में भी प्रावधान है।
Adv Aarti Malik
Adv Jaya Kushwaha
RS Bais Adv
Adv Baijnath Baisy
Adv Manish Katre
Adv Rajesh Kumar Saket

Address

Sarai Singrauli
Singrauli
486481

Telephone

+917581935624

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when The Law Chember-Adv. Devendra posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to The Law Chember-Adv. Devendra:

Share