14/05/2026
जिम्मेदार कंधों का सहारा :— घर के बड़ों के ऊपर जिम्मेदारियों का इतना भारी बोझ होता है कि उनके पास अपने दुख को व्यक्त करने के लिए आंसू बहाने की भी जगह नहीं होती।
वे घर के उस मजबूत स्तंभ की तरह होते हैं, जिस पर पूरा परिवार टिका रहता है। अगर वह स्तंभ ही डगमगा जाए या वह खुद हार मानकर रो दे, तो बाकी सभी सदस्यों को ढाढस बंधाने वाला कोई नहीं बचेगा।
इसलिए, मन के भीतर गहरा दर्द होने के बावजूद उन्हें चेहरे पर धैर्य और साहस का मुखौटा पहनना पड़ता है।
अखिलेश यादव का अपनी भतीजी को चॉकलेट देकर चुप कराना इसी अटूट जिम्मेदारी और करुणा का एक हृदयस्पर्शी उदाहरण है।
अपने छोटे भाई को खो देने का गम शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता, लेकिन उस मासूम बच्ची के सामने वे एक टूटे हुए इंसान नहीं बल्कि एक सहारा बनकर खड़े हैं।
वह सिर्फ एक चॉकलेट नहीं, बल्कि उस बच्ची के गमगीन बचपन को फिर से मुस्कुराहट देने की एक छोटी सी कोशिश है।
जब घर का मुखिया अपने आंसुओं को पीकर दूसरों के चेहरे पर खुशी लाने की जद्दोजहद करता है, तभी वह वास्तव में ‘घर का बड़ा’ कहलाता है।