Ardh Sainik Legal Associates

Ardh Sainik Legal Associates Ardh Sainik Legal Associates (ASLA) is founded under the aegis of Ardh Sainik Welfare Trust (Regd.) The ASLA aims to support the entire Soldier’s Community.

सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ़ कर दिया है कि उसका 2025 का फ़ैसला, जिसमें हाई कोर्ट के रिटायर्ड चीफ़ जस्टिस और जजों को संशोधित ...
23/05/2026

सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ़ कर दिया है कि उसका 2025 का फ़ैसला, जिसमें हाई कोर्ट के रिटायर्ड चीफ़ जस्टिस और जजों को संशोधित पेंशन लाभ देने की बात कही गई थी, 9 अक्टूबर 2016 से लागू होगा।

यह फ़ैसला न्यायपालिका में "वन रैंक, वन पेंशन" के सिद्धांत को मज़बूत करता है और इसका मकसद रिटायर्ड जजों को, रिटायरमेंट की तारीख या नियुक्ति के स्रोत के आधार पर बिना किसी भेदभाव के, समान पेंशन लाभ सुनिश्चित करना है। इस स्पष्टीकरण से उच्च न्यायपालिका के कई रिटायर्ड सदस्यों को काफ़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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दशकों पुराना भोजशाला-कमल मौला विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है। मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फ़ैसले...
22/05/2026

दशकों पुराना भोजशाला-कमल मौला विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है। मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी है, जिसमें धार स्थित विवादित परिसर को एक मंदिर के रूप में मान्यता दी गई थी।

इस अपील से पूजा के अधिकारों, ASI की जाँच-पड़ताल और इस स्थल के धार्मिक स्वरूप से जुड़ी तीखी कानूनी और ऐतिहासिक बहसें फिर से शुरू होने की उम्मीद है, जिससे यह संवेदनशील मामला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन जाएगा।

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सुप्रीम कोर्ट ने पूरे भारत में आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे पर गहरी चिंता जताई है। यह चिंता तब सामने आई जब चौंकाने वाले आ...
21/05/2026

सुप्रीम कोर्ट ने पूरे भारत में आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे पर गहरी चिंता जताई है। यह चिंता तब सामने आई जब चौंकाने वाले आंकड़ों से पता चला कि 2026 के दौरान तमिलनाडु और कर्नाटक में कुत्तों के काटने के 2 लाख से ज़्यादा मामले सामने आए।

इस स्थिति को "खतरनाक" बताते हुए, कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि जनता की सुरक्षा—खासकर बच्चों और बुज़ुर्ग नागरिकों की—को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पूरे देश में टीकाकरण, नसबंदी और पशु नियंत्रण के उपायों को मज़बूत करें।

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सुप्रीम कोर्ट ने मदुरै हवाई अड्डे के विस्तार से जुड़ी बेदखली की कार्यवाही को चुनौती देने वाली एक याचिका पर तमिलनाडु सरका...
20/05/2026

सुप्रीम कोर्ट ने मदुरै हवाई अड्डे के विस्तार से जुड़ी बेदखली की कार्यवाही को चुनौती देने वाली एक याचिका पर तमिलनाडु सरकार से जवाब मांगा है।

यह मामला पुनर्वास, भूमि अधिकारों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं तथा प्रभावित निवासियों की सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण चिंताएं उठाता है। कोर्ट के हस्तक्षेप से अधिग्रहण प्रक्रिया की वैधता और निष्पक्षता की अधिक बारीकी से जांच होने की उम्मीद है।

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चुनावी कानूनी विवादों का तेज़ी से निपटारा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर, सुप्रीम कोर्ट ने दो नए 'चुना...
19/05/2026

चुनावी कानूनी विवादों का तेज़ी से निपटारा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर, सुप्रीम कोर्ट ने दो नए 'चुनाव ट्रिब्यूनल' (Election Tribunals) गठित किए हैं। ये ट्रिब्यूनल विशेष रूप से 'स्टेट बार काउंसिल' चुनावों से जुड़े मामलों को ही देखेंगे।

इस कदम से पारदर्शिता बढ़ने, लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों में कमी आने और पूरे देश में बार प्रशासन के कामकाज को और अधिक सुचारू बनाने की उम्मीद है। साथ ही, यह वकीलों के लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा।

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राजस्थान हाई कोर्ट ने 'आटा-साटा' विवाह की प्रथा की कड़ी आलोचना करते हुए इसे नैतिक और कानूनी रूप से अस्वीकार्य बताया। कोर...
18/05/2026

राजस्थान हाई कोर्ट ने 'आटा-साटा' विवाह की प्रथा की कड़ी आलोचना करते हुए इसे नैतिक और कानूनी रूप से अस्वीकार्य बताया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के अदला-बदली वाले विवाहों में बेटियों को सौदेबाजी के औजार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसी प्रथाएँ महिलाओं की गरिमा, स्वतंत्रता और अधिकारों का उल्लंघन करती हैं। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि किसी बच्ची के भविष्य और उसकी अपनी पहचान की कीमत पर विवाह को एक सौदा नहीं बनाया जा सकता।

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सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि किसी संपत्ति का सह-मालिक (co-owner) भी 'बॉम्बे किराया अधिनियम' (Bombay Rent Act) क...
16/05/2026

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि किसी संपत्ति का सह-मालिक (co-owner) भी 'बॉम्बे किराया अधिनियम' (Bombay Rent Act) के तहत एक "मकान मालिक" माना जाएगा, और वह अकेले ही बेदखली का मुकदमा दायर कर सकता है - भले ही उसके पास संपत्ति का एकमात्र स्वामित्व अधिकार न हो।

यह फैसला किरायेदारी से जुड़े विवादों में सह-मालिकों की कानूनी स्थिति को और मज़बूत करता है, और यह रेखांकित करता है कि किरायेदार केवल इस आधार पर बेदखली को चुनौती नहीं दे सकते कि संपत्ति का स्वामित्व साझा है।

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कर्नाटक सरकार ने आधिकारिक तौर पर 2022 के हिजाब प्रतिबंध आदेश को वापस ले लिया है, जिससे छात्रों को स्कूल की तय यूनिफॉर्म ...
14/05/2026

कर्नाटक सरकार ने आधिकारिक तौर पर 2022 के हिजाब प्रतिबंध आदेश को वापस ले लिया है, जिससे छात्रों को स्कूल की तय यूनिफॉर्म गाइडलाइंस का पालन करते हुए हिजाब, पगड़ी और रुद्राक्ष जैसे धार्मिक प्रतीक पहनने की अनुमति मिल गई है।

इस कदम ने पूरे भारत के शिक्षण संस्थानों में संवैधानिक स्वतंत्रता, समावेशिता और अनुशासन व व्यक्तिगत पहचान के बीच संतुलन को लेकर चर्चाओं को फिर से तेज़ कर दिया है।

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लैंगिक समानता पर एक कड़ा संदेश देते हुए, कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि अगर कोई पत्नी अपना प्रोफेशनल करियर बनाना चाहती है, तो...
13/05/2026

लैंगिक समानता पर एक कड़ा संदेश देते हुए, कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि अगर कोई पत्नी अपना प्रोफेशनल करियर बनाना चाहती है, तो उसे केवल इसलिए "क्रूरता" नहीं कहा जा सकता कि इससे उसके पति या ससुराल वालों की भावनाएँ आहत होती हैं।

कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि शादी से किसी महिला की अपनी पहचान, उसकी महत्वाकांक्षाएँ, या एक स्वतंत्र करियर बनाने और अपने बच्चे के लिए बेहतर भविष्य सुरक्षित करने का उसका अधिकार खत्म नहीं हो जाता। यह ऐतिहासिक फैसला आधुनिक रिश्तों में आपसी सम्मान और समानता के महत्व को और मज़बूत करता है।

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प्रक्रियात्मक निष्पक्षता के महत्व पर ज़ोर देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि अधिकारियों को हिरासत में लिए गए ...
04/05/2026

प्रक्रियात्मक निष्पक्षता के महत्व पर ज़ोर देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि अधिकारियों को हिरासत में लिए गए व्यक्ति के आवेदन पर बिना किसी देरी के विचार करना चाहिए; इसके साथ ही कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत जारी एक हिरासत आदेश को रद्द कर दिया।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसे आवेदनों की समीक्षा में होने वाली कोई भी अस्पष्ट देरी, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और उचित प्रक्रिया के मूल पर सीधा प्रहार करती है। कोर्ट ने इस बात को फिर से दोहराया कि निवारक हिरासत (Preventive Detention) संवैधानिक सुरक्षा उपायों को दरकिनार नहीं कर सकती। यह फैसला एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि प्रशासन द्वारा समय पर की गई कार्रवाई केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक कानूनी दायित्व है।

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इस स्थिति को "चौंकाने वाला" बताते हुए, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को कड़ी फटकार लगाई। यह फटकार ...
30/04/2026

इस स्थिति को "चौंकाने वाला" बताते हुए, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को कड़ी फटकार लगाई। यह फटकार उस मामले में दी गई, जिसमें एक विचाराधीन कैदी को ज़मानत देने से इनकार कर दिया गया था, जबकि वह बिना मुक़दमा पूरा हुए ही लगभग नौ साल जेल में बिता चुका था।

न्यायालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि समय पर न्याय मिले बिना लंबे समय तक जेल में रखना, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और उचित कानूनी प्रक्रिया के मूल सिद्धांतों पर सीधा प्रहार है। न्यायालय ने रेखांकित किया कि ज़मानत से जुड़े कानूनी सिद्धांत, प्रक्रियागत कठोरता के बजाय संवैधानिक सुरक्षा उपायों के अनुरूप होने चाहिए।

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