Sumit Sihag

Sumit Sihag Criminal, Civil, Service Matters , family matters Lawyer at Rajasthan High Court Jaipur.

चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग के ट्रान्स्फ़र आदेश पर रैट (R.C.S.A.T ) ने लगाई रोक ।
13/09/2022

चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग के ट्रान्स्फ़र आदेश पर रैट (R.C.S.A.T ) ने लगाई रोक ।

न्यायालय अपर सेशन न्यायाधीश , chirawa, ने 20/05/2022 को ज़मानत याचिका पर दिया आदेश । पिलानी थाने म दर्ज हुआ था मुक़दमा ,...
25/05/2022

न्यायालय अपर सेशन न्यायाधीश , chirawa, ने 20/05/2022 को ज़मानत याचिका पर दिया आदेश । पिलानी थाने म दर्ज हुआ था मुक़दमा , फ़र्ज़ी दस्तावेज पेश कर नगर पालिका पिलानी म पट्टा बनवाने का लगाया था आरोप ।

12/02/2022
Uttar pradesh barabanki civil judge passed historical order Civil judge sentenced Kotwal to three days and Naib Tehsilda...
14/09/2021

Uttar pradesh barabanki civil judge passed historical order

Civil judge sentenced Kotwal to three days and Naib Tehsildar sentenced to 3 months , case of contempt of court .

25/07/2021

#8123
राजस्थान हाईकोर्ट के फर्जी आदेश की जांच अब पुलिस कर रही है।

अदालत में सुनवाई ही नहीं हुई, लेकिन हाईकोर्ट की सील लगा आदेश जारी हो गया। इससे हाईकोर्ट में भी खलबली है।

याचिकाकर्ताओं के बयान भी जांच में शामिल हो एडवोकेट एके जैन।
=========
राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ के न्यायाधीश महेन्द्र गोयल की अदालत में रिट याचिकाओं पर सुनवाई ही नहीं हुई, लेकिन संबंधित पक्षकारों के पास हाईकोर्ट की सील लगा आदेश पहुंच गया। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार प्रवीण कुमार मिश्रा की शिकायत पर अब जयपुर के अशोक नगर थाने के सीआई सुरेन्द्र कुमार जांच कर रहे हैं। चूंकि यह मामला सीधे हाईकोर्ट से जुड़ा है, इसलिए जांच का काम बेहद सतर्कता के साथ हो रहा है। रजिस्ट्रार ने गत 16 जून को जो एफआईआर दर्ज करवाई है, उसमें बताया गया है कि विनोद कुमार, जबर सिंह, महेन्द्री, संजीव कुमार, मनेश, सुरेन्द्र, वीरेश आदि पक्षकारों का विवाद राजस्थान सरकार के साथ चल रहा है। इसको लेकर कई रिट याचिकाएं विचाराधीन है। लेकिन गत 14 जून 2021 को हाईकोर्ट के निजी सचिव दलपत सिंह के मोबाइल नम्बर 9413158130 पर एडवोकेट अरविंद भादू ने अपने वाट्सएप मोबाइल नम्बर 9079817636 से हाईकोर्ट के 1 अप्रैल 2021 के आदेश की प्रति भेजी। ये आदेश उक्त संबंधित पक्षकारों की याचिकाओं से जुड़ा है। दलपत सिंह सोलंकी की सूचना के आधार पर हाईकोर्ट में गहनता के साथ जांच की गई तो पता चला कि 1 अप्रैल को संबंधित रिट याचिकाएं हाईकोर्ट में सूचीबद्ध ही नहीं हुई और न ही सुनवाई हुई। ऐसे में कोर्ट से कोई आदेश पारित ही नहीं हुआ। एफआईआर में कहा गया कि हाईकोर्ट का तथाकथित आदेश कूटरचित और फर्जी है। हाईकोर्ट की इस शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 120बी के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। अशोक नगर के थानाधिकारी सुरेन्द्र कुमार ने जांच की पुष्टि करते हुए बताया कि इस मामले में एडवोकेट अरविंद भादू से जानकारी ली गई है कि भादू ने ही तथाकथित आदेश को वाट्सएप पर भेजा था। अब कड़ी से कड़ी मिलाई जा रही है ताकि फर्जी आदेश बनाने वाले तक पहुंचा जाए। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट से जुड़ा यह मामला गंभीर है। जांच में संबंधित याचिकाओं से जुड़े व्यक्तियों को लेकर हाईकोर्ट की जयपुर पीठ का माहौल गर्म है। हाईकोर्ट में बहुत सक कार्य विश्वास के साथ होते हैं। बार और बेंच एक दूसरे पर भरोसा करते हैं। कई बार मौखिक बात को भी महत्व दिया जाता है।
याचिका कर्ताओं के बयान भी जांच में शामिल हो:
हाईकोर्ट के मशहूर वकील एके जैन ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है। यदि हाईकोर्ट के आदेश ही फर्जी होने लगेंगे तो फिर आम जनता का भरोसा न्याय व्यवस्था से उठ जाएगा। जैन ने कहा कि इस मामले की जांच में संबंधित रिट याचिकाओं से जुड़े व्यक्तियों के बयान भी शामिल होने चाहिए। आखिर पक्षकारों के पास हाईकोर्ट का फर्जी आदेश कहां से आया? पुलिस की जांच अपनी जगह है, लेकिन मुख्य न्यायाधीश को अपने स्तर पर भी उच्च स्तरीय जांच करवानी चाहिए। आखिर यह मुद्दा हाईकोर्ट की प्रतिष्ठा से जुड़ा है। पुलिस में जो रिपोर्ट दर्ज करवाई है, वह एकतरफा है। पुलिस को रिट याचिकाओं के पक्षकारों के बयान दर्ज कर जांच करनी चाहिए। यदि याचिकाकर्ताओं के बयान दर्ज नहीं होते हैं तो ऐसी जांच कोई मायने नहीं रखती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार याचिकाकर्ताओं ने भी नोएडा (यूपी) के पुलिस आयुक्त को एक शिकायत दी है। इस शिकायत में राजस्थान हाईकोर्ट के तथाकथित आदेश के बारे में जानकारी दी गई है। शिकायत में गंभीर आरोप भी लगाए गए है। इस शिकायत से प्रतीत होता है कि यह मामला सिर्फ फर्जी आदेश तक ही सीमित नहीं है।

On July 18th 1947, the India Independence Act 1947 was given the royal assent and came into force. The India Independenc...
18/07/2021

On July 18th 1947, the India Independence Act 1947 was given the royal assent and came into force. The India Independence Act was a United Kingdom act of parliament which separated British India into two new dominions of India and Pakistan. ... The title of “Emperor of India” was to be dropped by the British Monarch.

Address

Pilani

Telephone

+918058800182

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Sumit Sihag posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to Sumit Sihag:

Share