12/02/2026
कान में जनेऊ लगाकर खुद को धर्म और ज्ञान का प्रतीक बताना बहुत आसान है। लेकिन अगर वही लोग तिरंगे के निशान का अपमान करें, तो ये सिर्फ गलत नहीं है - शर्मनाक है।
धर्म हमें क्या सिखाता है? संयम, सम्मान और मर्यादा।
अगर हमारे काम ही इन बातों के खिलाफ हों, तो फिर सिर्फ धागा पहन लेने से कोई धार्मिक या ज्ञानी नहीं बन जाता।
तिरंगा कोई साधारण चिन्ह नहीं है। वो हमारे देश की पहचान है, हमारे सैनिकों के बलिदान की याद है, हमारी आज़ादी का प्रतीक है। उसका अपमान करना मतलब उन भावनाओं का अपमान करना जो हर भारतीय के दिल में हैं।
असहमति रखना सबका हक है। गुस्सा भी हो सकता है। लेकिन अपनी नाराज़गी दिखाने के लिए देश के प्रतीक को निशाना बनाना सही रास्ता नहीं है।
देशभक्ति सिर्फ शब्दों से नहीं दिखती। धर्म सिर्फ दिखावे से साबित नहीं होता। सच्चाई हमारे व्यवहार में दिखती है — हम क्या करते हैं, कैसे बोलते हैं और किसका सम्मान करते हैं।
अगर सच में संस्कार हैं, तो वो हर काम में दिखाई देंगे।
और अगर देश से प्यार है, तो उसके तिरंगे का सम्मान सबसे पहले होगा। 🇮🇳