Bunty LLB

Bunty LLB किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता के लिए संपर्क करें
न्याय आपका जन्मसिद्ध अधिकार है
डरे नहीं मैं हूं ना

03/11/2025
03/11/2025

आज हमारी शेरनियों ने दुनिया जीत ली! 🏆🔥
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने अपने दम, मेहनत और जुनून से विश्व कप पर कब्ज़ा कर लिया है। 💪💥
ये सिर्फ जीत नहीं… ये उस सोच की जीत है जो कहती है —
“बेटियाँ किसी से कम नहीं होतीं!” 👑
हर रन, हर विकेट और हर पल ने हमें गर्व से भर दिया।
भारत की बेटियाँ आज पूरे देश का सिर ऊँचा कर गईं! ❤️🇮🇳

Bunty LLB की ओर से
भारतीय महिला टीम को हार्दिक बधाई और सलाम! 🙏

28/10/2025
📢 महत्वपूर्ण सूचना — वकीलों के लिए ⚖️बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने निर्देश जारी किया है कि👉 उत्तर प्रदेश की सभी बार एसोसिएशनो...
26/10/2025

📢 महत्वपूर्ण सूचना — वकीलों के लिए ⚖️
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने निर्देश जारी किया है कि
👉 उत्तर प्रदेश की सभी बार एसोसिएशनों को 15 नवंबर 2025 से 15 फरवरी 2026 तक अपने चुनाव स्थगित रखने होंगे।
📄 यह निर्णय उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के आगामी चुनावों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए लिया गया है।
सभी बार एसोसिएशनों को यह आदेश अनिवार्य रूप से पालन करना होगा और अनुपालन रिपोर्ट भी देनी होगी।
🖋️ – Adv. Syed Shawez Firoz

💔 बचाओ एक मासूम ज़िंदगी — आपकी मदद से हो सकता है चमत्कार! 🙏मेदांता हॉस्पिटल, गुड़गांव में अधिवक्ता बहन अनीता गुप्ता जी क...
24/10/2025

💔 बचाओ एक मासूम ज़िंदगी — आपकी मदद से हो सकता है चमत्कार! 🙏
मेदांता हॉस्पिटल, गुड़गांव में अधिवक्ता बहन अनीता गुप्ता जी की 11 वर्षीय बेटी गंभीर अवस्था में भर्ती है।
बच्ची के खून में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा अत्यधिक बढ़ गई है, जिससे ऑक्सीजन की भारी कमी हो गई है।
डॉक्टरों के अनुसार, अब इलाज के लिए एक विशेष मशीन की आवश्यकता है, जिसकी कुल लागत लगभग ₹30 लाख बताई गई है।
परिवार द्वारा अब तक ₹18 लाख की व्यवस्था हो चुकी है, लेकिन अभी भी ₹12 लाख की तत्काल आवश्यकता है।
🙏 हम सभी से विनम्र निवेदन है —
इस नन्हीं बच्ची की ज़िंदगी बचाने के लिए जितना भी संभव हो, आर्थिक सहयोग करें।
आपकी थोड़ी-सी मदद भी एक मासूम की साँसों को लौटा सकती है। 💖
नीचे दिए गए QR कोड और पासबुक विवरण अनीता गुप्ता जी के पति गुरु प्रसाद गुप्ता जी के नाम पर हैं।
कृपया जो भी सहयोग संभव हो करें, और इस संदेश को अधिक से अधिक शेयर करें ताकि मदद जल्दी पहुँचे।
🙏 आपका एक कदम — एक ज़िंदगी की उम्मीद बन सकता है।
भगवान करे आपकी दया इस बच्ची को नया जीवन दे। 🌸

⚖️✨ “Bunty LLB” की ओर से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ! ✨⚖️जैसे दीपावली का हर दीप अंधकार मिटाकर प्रकाश फैलाता है,वैसे ही...
20/10/2025

⚖️✨ “Bunty LLB” की ओर से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ! ✨⚖️
जैसे दीपावली का हर दीप अंधकार मिटाकर प्रकाश फैलाता है,
वैसे ही न्याय का हर फैसला समाज में सच्चाई और उम्मीद की रोशनी जगाता है।
इस शुभ अवसर पर कामना है कि
आपके जीवन में न्याय, सफलता और खुशियों का उजाला सदा बना रहे।
🪔 न्याय के दीप जलाएँ –
सच्चाई, ईमानदारी और इंसाफ के मार्ग पर हमेशा अग्रसर रहें।
आप सभी को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ!

Syed Shawez Firoz
Advocate
— Bunty LLB (Advocate’s Voice for Justice) ⚖️

26/09/2025

⚖️ सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कहा:
Pocket Veto असंवैधानिक – गवर्नर किसी बिल को अनिश्चित समय तक रोककर नहीं रख सकते।
कार्रवाई ज़रूरी – गवर्नर को तय समय के भीतर ही यह निर्णय लेना होगा कि:
बिल को मंज़ूरी दें, या
राष्ट्रपति को भेजें, या
अस्वीकार करें (सीमित परिस्थितियों में)।
दोबारा पारित बिल पर बाध्यता – अगर विधानसभा किसी बिल को दोबारा पास करके गवर्नर को भेजती है, तो गवर्नर केवल और केवल मंज़ूरी देने के लिए बाध्य होंगे।
संवैधानिक मर्यादा – गवर्नर की भूमिका औपचारिक और संवैधानिक है, न कि राजनीतिक।
🔎 क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
यह फैसला कई कारणों से ऐतिहासिक है:
लोकतंत्र की रक्षा – गवर्नर अब राजनीतिक कारणों से बिलों को रोक नहीं पाएंगे।
राज्यों की शक्ति मज़बूत – राज्य की विधानसभाओं की भूमिका और अहमियत बढ़ गई।
केंद्र-राज्य संतुलन – अब गवर्नर केंद्र की कठपुतली बनकर नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रमुख बनकर काम करेंगे।
तेज़ विधायी प्रक्रिया – महत्वपूर्ण कानून बनाने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होगी।

📜 अनुच्छेद 200 और 201 की व्याख्या
अनुच्छेद 200: गवर्नर किसी राज्य विधानसभा से पारित बिल को मंज़ूरी, अस्वीकृति या राष्ट्रपति के पास भेज सकते हैं।
अनुच्छेद 201: अगर गवर्नर किसी बिल को राष्ट्रपति के पास भेजते हैं, तो राष्ट्रपति के निर्णय के बाद ही वह बिल आगे बढ़ेगा।
👉 लेकिन इनमें कहीं भी यह अधिकार नहीं है कि गवर्नर बिल को अनिश्चित काल तक रोककर रखें।
🧑‍⚖️ न्यायपालिका का संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि –
“भारत के लोकतंत्र में गवर्नर की भूमिका संवैधानिक औपचारिकता तक सीमित है। वे राजनीतिक अड़चन का साधन नहीं हो सकते।”
🌐 असर पूरे देश पर
अब देशभर के सभी राज्यों में गवर्नरों की कार्यप्रणाली स्पष्ट होगी।
यह फैसला आने वाले समय में गवर्नर बनाम राज्य सरकार विवादों का समाधान करेगा।
यह केंद्र और राज्यों के बीच सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना को मज़बूत करेगा।

✍️ निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लोकतंत्र की जड़ों को और गहराई देता है। अब विधायी संस्थाओं की मेहनत को गवर्नर की चुप्पी या देरी से बाधित नहीं किया जा सकेगा।
👉 कहा जा सकता है कि “Pocket Veto” की राजनीति अब इतिहास बन चुकी है

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