30/05/2026
#ब्लैक_वारंट (Black Warrant), जिसे कानूनी भाषा में 'डेथ वारंट' (Death Warrant) या 'फांसी का आदेश' भी कहा जाता है, एक ऐसा कानूनी दस्तावेज है जो किसी दोषी को फांसी की सजा देने के लिए अदालत द्वारा जारी किया जाता है।
भारतीय कानून में इसका विवरण भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के फॉर्म नंबर 42 (पहले यह क्रिमिनल प्रोसीजर कोड यानी CrPC के फॉर्म नंबर 42 में था) में दिया गया है।
ब्लैक वारंट के बारे में मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
1. यह कब जारी किया जाता है?
यह वारंट तब जारी किया जाता है जब किसी अपराधी की मौत की सजा (Capital Punishment) पूरी तरह तय हो जाती है। इसका मतलब है कि:
निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा हो।
दोषी की पुनर्विचार याचिका (Review Petition) खारिज हो चुकी हो।
राष्ट्रपति के पास भेजी गई दया याचिका (Mercy Petition) भी खारिज हो चुकी हो।
जब सारे कानूनी रास्ते बंद हो जाते हैं, तब संबंधित अदालत यह वारंट जारी करती है।
2. इसमें क्या लिखा होता है?
ब्लैक वारंट सीधे जेल अधीक्षक (Jail Superintendent) के नाम जारी किया जाता है। इसमें स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि:
दोषी को किस दिन फांसी दी जाएगी।
फांसी का सही समय क्या होगा।
फांसी किस जगह (जेल) में दी जाएगी।
3. इसे 'ब्लैक वारंट' क्यों कहते हैं?
इसके नाम के पीछे कोई गहरा रहस्य नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध इसके स्वरूप से है। इस वारंट के चारों तरफ काले रंग का बॉर्डर (Black Border) होता है, जो मृत्यु या शोक का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से इसे आम बोलचाल में 'ब्लैक वारंट' कहा जाता है।
Suman jaiswal Advocate Civil Court Azamgarh Mo.No.70074 52646