Arif Khan Advocate & Associate

Arif Khan Advocate & Associate As A Lawyer I have 15 Year experience in Civil, Criminal, Consumer matters, Family Dispute, Cheque

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31/08/2025

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28/08/2025
22/08/2025

“फोन पर कानूनी सलाह न दें – सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को स्पष्ट निर्देश दिए”

प्रस्तावना
वकील और मुवक्किल का रिश्ता विश्वास पर टिका होता है। मुवक्किल अपने सवाल, समस्याएँ और उलझनें वकील के सामने खुलकर रखता है। लेकिन यह संवाद कितना सुरक्षित है? सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में वकीलों को चेतावनी दी है कि फोन पर दी गई कानूनी सलाह भविष्य में सबूत के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है और इस कारण वकील स्वयं ट्रायल का सामना करने की स्थिति में आ सकता है।

🛑 फोन पर सलाह देने का खतरा
बातचीत रिकॉर्ड होकर अदालत में सबूत के तौर पर पेश की जा सकती है। आज के डिजिटल युग में लगभग हर मोबाइल में कॉल-रिकॉर्डिंग की सुविधा होती है। मुवक्किल या कोई तीसरा व्यक्ति भी वकील से हुई बातचीत रिकॉर्ड कर सकता है। बाद में यही बातचीत Evidence Act, 1872 की धारा 65B के तहत इलेक्ट्रॉनिक सबूत के रूप में अदालत में प्रस्तुत की जा सकती है। ऐसे में वकील द्वारा अनजाने में दी गई कोई भी सलाह उसके खिलाफ इस्तेमाल हो सकती है। इसलिए अपनी सुरक्षा के लिए फोन पर विस्तृत चर्चा से बचना आवश्यक है।

🛑 अपूर्ण जानकारी से गलत सलाह की संभावना
फोन पर मुवक्किल से सभी तथ्य, दस्तावेज़ या परिस्थिति समझना कठिन होता है। अधूरी जानकारी के आधार पर दी गई सलाह गलत साबित हो सकती है। मुवक्किल उस गलत सलाह पर अमल करके बड़े संकट में फँस सकता है, और उसकी जिम्मेदारी सीधे वकील पर आ सकती है। आमने-सामने मिलकर, दस्तावेज़ देखकर और पूरी परिस्थिति समझकर दी गई सलाह हमेशा अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय होती है।

🛑 Advocates Act व Bar Council Rules के तहत गोपनीयता का खतरा
Advocates Act, 1961 और Bar Council of India Rules के अनुसार, वकील का नैतिक और कानूनी दायित्व है कि वह अपने मुवक्किल की जानकारी और संवाद को गोपनीय रखे। फोन पर हुई बातचीत आसानी से रिकॉर्ड या फॉरवर्ड की जा सकती है…

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21/12/2023

_*Landmark Legislation: Bharatiya Nyaya, Nagarik Suraksha, and Sakshhya Acts Passed by Lok Sabha*_

*Key Highlights of New Criminal Law Bills in India 2023*

1. *Terrorist Act*: Defined as a separate offence under the *Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS)*, targeting threats to India's *unity, integrity, and security*.

2. *Sedition Omitted*: Replaced with provisions against acts undermining India's *unity and integrity*. The term 'Rajdroh' is updated to 'deshdroh'.

3. *Mob Lynching*: Now a distinct offence, carrying the severe penalty of *death*.

4. *Community Service*: Introduced as a reformative alternative for minor offences.

5. *Forensic Evidence*: Mandated collection in all investigations to bolster the *prosecution's case*.

6. *Rights of Sexual Violence Victims*: Obligatory *audio-video documentation* of victim statements to ensure accuracy and empathy.

7. *Independent Director of Prosecution*: Established in every district to guarantee *impartial decisions* in legal appeals.

8. *Enhanced Police Accountability*: New measures instated for responsible and victim-focused law enforcement.

9. *Zero FIR Registration*: Enables FIR filing at any police station, enhancing *access to justice*.

10. *Empowering Victims in Legal Processes*: Requires state consultation with victims before case withdrawal; mandates regular updates on case progress.

11. *Electronic Legal Proceedings*: Modernized approach allowing *digital inquiries and trials*.

12. *Robust Protection for Women and Children*: Introduces tougher penalties for offences against these vulnerable groups.

13. *Revised Hit and Run Laws*: Up to a decade of imprisonment, with potential leniency for assisting the victim post-incident.

14. *Medical Negligence Shield for Doctors*: Following the Indian Medical Association's appeal, specific exemptions have been introduced.

15. *Snatching as a Separate Offence*: Recognized independently with appropriate legal consequences.

16. *Grave Hurt Provision*: Special laws for cases resulting in brain death, proposing extended sentences.

17. *Timely FIR and Chargesheet Processing*: Fixed deadlines set for FIR registration and investigation completion.

18. *Trial in Absentia*: Enabled when an accused fails to appear in court within a stipulated 90-day period.

19. *Restrictions on Mercy Petitions*: Limited to convicts only, with a 30-day filing period post-Supreme Court decision.

20. *e-FIR and Digital Evidence*: Introduction of electronic FIR filing and validation of digital evidence.

21. *Unified Criminal Court System*: Nationwide standardization of the criminal court hierarchy.

Prepared by : *Adv Arif Khan

08/06/2021
16/07/2020

*राजस्व विभाग में प्रचलित प्रमुख शब्द और उनके अर्थ*

रकबा- क्षेत्रफल,
खसरा- भूमि क्रमांक,
पांचसाला- पिछले पांच' साल का खसरा
चांदा- सीमा चिन्ह,
मुनारा- सर्वेक्षण चिन्ह,
उपकर - अबवाब (मुख्य कर का उपकर)
मौसूली- वसूली प्राप्त करना,
नस्ती- खात्मा,
अलामत- छोटे-छोटे चिन्ह,
मसाहती ग्राम- जिसकी सीमा न हो
मीजान- कुल,
सकूनत- निवास
वाजिब-उल-अर्ज- निजी जमीन में सार्वजनिक उपयोग दर्शाने वाला रिकार्ड
गिरदावरी- खेतों व फसलों का निरीक्षण कर रिकार्ड करना,
तितम्मा मिलान- हल, बैल, कृषि यंत्र की गणना,
गोशवारा- महायोग,
रूढ़ अलामात- परंपरागत सीमा,
हलफनामा- शपथ पत्र,
बैनामा- विक्रय पत्र,
बयशुदा- खरीदी,
काबिज- कब्जा है,
दीगर- अन्य,
वारिसान- उत्तराधिकारी,
बख्शीश- उपहार या दान,
फौत - मौत,
रहन- गिरवी,
कैफियत- स्पष्टीकरण/विवरण
साकिन- निवासी
मौजा बेचिराग - बिना आबादी का गांव
फकुल रहन - गिरवी रखी भूमि को छुड़ा लेना
तबादला - भूमि के बदले भूमि लेना
बैय - जमीन बेच देना
मुसन्ना - असल रिकॉर्ड के स्थान पर बनाया जाने वाला रिकॉर्ड
फर्द - नक़ल
फर्द बदर - राजस्व रिकॉर्ड में होने वाली गलती को ठीक करना
मिन - भाग
साम्बिक - भूतपूर्व
पुख्ता औसत झाड़ - पैदावार के अनुसार पक्की फसल
फसल रबी - आसाढ़ की फसल
फसल खरीफ - सावनी की फसल
जिंसवार- फसलवार जिंस का जोड़
जलसाआम - जनसभा
बशनाखत - की पहचान पर
वल्दियत - पिता का नाम बतलाना
हमशीरा - बहन
हद - सीमा
हदूद - सीमाएं
सिहद्दा - तीन गांवों को एक स्थान पर मिलाने वाला सीमा पत्थर
बनाम - के नाम
मिन जानिब - की ओर से
बिला हिस्सा - जिसमें भाग न हो
नीलाम - खुली बोली द्वारा बेचना
दस्तक - मांग का अधिकार
तकाबी - फसल ऋण
कुर्की - किसी वस्तु को सरकारी अधिकार में लेना
बदस्तूर - हमेशा की तरह या पूर्ववत
हाल - वर्तमान
खाका - प्रारूप
कारगुजारी - प्रगति रिपोर्ट
झलार - नदी नाले से पानी देने का साधन
जमा - भूमिकर
तरमीम - बदल देना या सुधार देना
मालगुजारी - भूमिकर
जदीद - नया
खुर्द - छोटा
कलां - बड़ा
खुश हैसियत - अच्छी हालत
इकरारनामा - आपसी फैसला
गोरा देह भूमि – गांव के साथ लगी भूमि
दो फसली - वर्ष में दो फसलें उत्पन्न करने वाली भूमि
सकूनत - निवास स्थान
शजरा परचा - कपड़े पर बना खेतों का नक्शा
शजरा किस्तवार - ट्रेसिंग पेपर पर बना हुआ खेतों का नक्शा
मुसावी - मोटे कागज पर खेतों की सीमाएं दर्शाने वाला नक्शा
पैमाना पीतल - मसावी बनाने के पीतल का बना हुआ इंच
फरेरा - दूर झंडी देखने के लिए बांस पर बंधा तिकोना रंग-बिरंगा कपड़ा
झंडी - लाइन को सीधा रखने के लिए 12 फीट का बांस
क्रम - 66 इंच लम्बा जरीब का दसवां भाग
गट्ठा - 57.157 इंच, जरीब का दसवां भाग
अड्डा - जरीब की पड़ताल करने के लिए भूमि पर बनाया गया माप
गज - भूमि नापने का पैमाना
पैमाइश - भूमि का नापना
शजरा नसब - भूमिदारों की वंशावली
लाल किताब - गांव की भूमि से सम्बंधित पूर्ण जानकारी देने वाली पुस्तक
मिसल हकूकियत - बंदोबस्त के समय विस्तार साथ तैयार की गई जमाबंदी
जमाबंदी - भूमि की मिल्कियत और अधिकारों की पुस्तक
खसरा गिरदावरी -

हदबस्त - तहसीलवार गावों के नम्बर
मिनजुमला – मिला-जुला भाग
नवैयत या नौइयत- भू उपयोग
पिसर मुतबन्ना - दत्तक पुत्र
जोजे- पत्नी
बेवा - विधवा
वल्द - पिता
कौमियत - जाति
चाह आबनोशी- आबादी में पीने के उपयोग का कुआँ
चाह आब पाशी- सिंचाई के लिए कुआँ
साकिन -निवासी
साकिन देह - भू अभिलेख से संबंधित उसी गांव का निवासी
साकिन पाही - अन्य गांव का निवासी
मुतवल्ली - मुस्लिम धार्मिक संपत्ति का कर्ता
लगान - भूमिकर
हदबंदी - सीमांकन
बिलमुक्ता - इस खसरा नंबर के भूराजस्व मे अन्य नंबर का भूराजस्व जुड़ा हुआ है
बकसरत दरखतान- अनगिनत वृक्ष
मिन्हा - मिलाना
इन्तकाल →मलकियत की तबदीली का आदेश ।
जरीब →भूमि नापने की लम्बी लोहे की जंजीर ।
रकबा बरारी →नम्बर की चारों भुजाओं की लम्बाई व चौडाई क्षेत्रफल निकालना
रकबा→ खेत का क्षेत्रफल
गोशा →खेत का हिस्सा
बिसवा→ 20 बिसवांसी
बिघा →20 बिसवा
शर्क →पूर्व
गर्व→ पश्चिम
जनूब→ दक्षिण
शुमाल→ उत्तर
खेवट→ मलकियत का विवरण
खतौनी→ कशतकार का विवरण
पत्ती तरफ ठोला→ गॉंव में मालकों का समूह
गिरदावर→ पटवारी के कार्य का निरीक्षण करने वाला RI
दफ्तर कानूनगो →तहसील कार्यालय का कानूनगो
नायब दफतर कानूनगो→ सहायक दफतर कानूनगो
सदर कानूनगो→ जिला कार्यालय का कानूनगो ।
वासिल वाकी नवीस→
राजस्व विभाग की वसूली का लेखा रखने वाला कर्मचारी
मालिक→ भूमि का भू-स्वामी
कास्तकार→ भूमि को जोतने वाला एवं कास्त करने वाला ।
शामलात →सांझाी भूमि
शामलात देह→ गॉंव की शामलात भूमि
शामलात पाना →पाने की शामलात भूमि
शामलात पत्ती →पत्ती की शामलात भूमि
मुजारा→ भूमि को जोतने वाला जो मालिक को लगान देता हो ।
मौरूसी →बेदखल न होने वाला व लगान देने वाला मुजारा
गैर मौरूसी →बेदखल होने योग्य कास्तकार
नहरी →नहर के पानी से सिंचित भूमि ।
चाही नहरी→ नहर व कुएं द्वारा सिंचित भूमि
चाही →क्एं द्वारा सिंचित भूमि
चाही मुस्तार →खरीदे हुए पानी द्वारा सिंचित भूमि ।
बरानी→ वर्षा पर निर्भर भूमि ।
आबी →नहर व कुएं के अलावा अन्य साधनों से सिंचित भूमि ।
बंजर जदीद→ चार फसलों तक खाली भूमि ।
बंजर कदीम →आठ फसलों तक खाली पडी भूमि ।
गैर मुमकिन →कास्त के अयोग्य भूमि ।
नौतौड→ कास्त अयोग्य भूमि को कास्त योग्य बनाना ।
क्लर →शोरा या खार युक्त भूमि ।
चकौता →नकद लगान ।
सालाना →वार्षिक
बटाई →पैदावार का भाग ।
तिहाई →पैदावार का 1/3 भाग ।
निसफी→ पैदावार का 1/2 भाग ।
पंज दुवंजी→ पैदावार का 2/5 भाग ।
चहाराम →पैदावार का 1/4 भाग ।
तीन चहाराम→ पैदावार का 3/4 भाग ।
मुन्द्रजा→ पूर्वलिखित (उपरोक्त)
मजकूर→ चालू
राहिन →गिरवी देने वाला ।
मुर्तहिन →गिरवी लेने वाला ।
बाया →भूमि बेचने वाला ।
मुस्तरी →भूमि खरीदने वाला ।
वाहिब →उपहार देने वाला ।
मौहबईला →उपहार लेने वाला ।
देहिन्दा→ देने वाला ।
गेरिन्दा →लेने वाला ।
लगान→ मुजारे से मालिक को मिलने वाली राशी या जिंस
पैमाना हकीयत →शामलात भूमि में मालिक का अधिकारी ।
सरवर्क →आरम्भिक पृष्ठ ।
नक्शा कमीबेशी →पिछली जमाबन्दी के मुकाबले में क्षेत्रफल की कमी या वृद्वि
हिब्बा →उपहार ।
बैयहकशुफा →भूमि खरीदने का न्यायालय द्वारा अधिकार ।
रहन बाकब्जा →कब्जे सहित गिरवी ।
आड रहन →बिला कब्जा गिरवी ।
रहन दर रहन →मुर्तहिन द्वारा कम राशि में गिरवी रखना ।
तबादला →भूमि के बदले भूमि लेना ।
पडत सरकार →राजस्व रिकार्ड रूम में रखी जाने वाली प्रति ।
पडत पटवार→ रिकार्ड की पटवारी के पास रखी जाने वाली प्रति
फर्द बदर →राजस्व रिकार्ड में हुई गलती को ठीक करना ।
पुख्ता औसत झाड→ पैदावार के अनुसार पक्की फसल
साबिक→ पूर्व का या पुराना या पहले का
हाल →वर्तमान, मौजूदा ।
बिला हिस्सा →जिसमें भाग न हो ।
मिन जानिब →की ओर से ।
बशिनाखत →की पहचान पर ।
पिसर या वल्द →पुत्र
दुखतर→ सुपुत्री
वालिद→ पिता
वालदा →माता
महकूकी →काटकर दोबारा लिखना
मसकूकी →बिना काटे पहले लेख पर दोबारा लिखना
बुरजी→ सरवेरी सर्वेक्षण का पत्थर
चक तशखीश →बन्दोबस्त के दौरान भूमि की पैदावार के अनुसार तहसील की भूमि का निरधारण
दुफसली →वर्ष में दो फसलें उत्पन्न करने वाली भूमि
मेड़ →खेत की सीमा
गोरा देह भूमि →गॉंव के साथ लगती भूमि
हकदार→ मालिक भूमि
महाल →ग्राम
जदीद →नया
इन्तकाल →मलकियत की तबदीली का आदेश ।
जरीब →भूमि नापने की लम्बी लोहे की जंजीर ।
रकबा बरारी →नम्बर की चारों भुजाओं की लम्बाई व चौडाई क्षेत्रफल निकालना
रकबा→ खेत का क्षेत्रफल
गोशा →खेत का हिस्सा
बिसवा→ 20 बिसवांसी
बिघा →20 बिसवा
शर्क →पूर्व
गर्व→ पश्चिम
जनूब→ दक्षिण
शुमाल→ उत्तर
खेवट→ मलकियत का विवरण
खतौनी→ कशतकार का विवरण
पत्ती तरफ ठोला→ गॉंव में मालकों का समूह
गिरदावर→ पटवारी के कार्य का निरीक्षण करने वाला RI
दफ्तर कानूनगो →तहसील कार्यालय का कानूनगो
नायब दफतर कानूनगो→ सहायक दफतर कानूनगो
सदर कानूनगो→ जिला कार्यालय का कानूनगो ।
वासिल वाकी नवीस→
राजस्व विभाग की वसूली का लेखा रखने वाला कर्मचारी
मालिक→ भूमि का भू-स्वामी
कास्तकार→ भूमि को जोतने वाला एवं कास्त करने वाला ।
शामलात →सांझाी भूमि
शामलात देह→ गॉंव की शामलात भूमि
शामलात पाना →पाने की शामलात भूमि
शामलात पत्ती →पत्ती की शामलात भूमि
मुजारा→ भूमि को जोतने वाला जो मालिक को लगान देता हो ।
मौरूसी →बेदखल न होने वाला व लगान देने वाला मुजारा
गैर मौरूसी →बेदखल होने योग्य कास्तकार
नहरी →नहर के पानी से सिंचित भूमि ।
चाही नहरी→ नहर व कुएं द्वारा सिंचित भूमि
चाही →क्एं द्वारा सिंचित भूमि
चाही मुस्तार →खरीदे हुए पानी द्वारा सिंचित भूमि ।
बरानी→ वर्षा पर निर्भर भूमि ।
आबी →नहर व कुएं के अलावा अन्य साधनों से सिंचित भूमि ।
बंजर जदीद→ चार फसलों तक खाली भूमि ।
बंजर कदीम →आठ फसलों तक खाली पडी भूमि ।
गैर मुमकिन →कास्त के अयोग्य भूमि ।
नौतौड→ कास्त अयोग्य भूमि को कास्त योग्य बनाना ।
क्लर →शोरा या खार युक्त भूमि ।
चकौता →नकद लगान ।
सालाना →वार्षिक
बटाई →पैदावार का भाग ।
तिहाई →पैदावार का 1/3 भाग ।
निसफी→ पैदावार का 1/2 भाग ।
पंज दुवंजी→ पैदावार का 2/5 भाग ।
चहाराम →पैदावार का 1/4 भाग ।
तीन चहाराम→ पैदावार का 3/4 भाग ।
मुन्द्रजा→ पूर्वलिखित (उपरोक्त)
मजकूर→ चालू
राहिन →गिरवी देने वाला ।
मुर्तहिन →गिरवी लेने वाला ।
बाया →भूमि बेचने वाला ।
मुस्तरी →भूमि खरीदने वाला ।
वाहिब →उपहार देने वाला ।
मौहबईला →उपहार लेने वाला ।
देहिन्दा→ देने वाला ।
गेरिन्दा →लेने वाला ।
लगान→ मुजारे से मालिक को मिलने वाली राशी या जिंस
पैमाना हकीयत →शामलात भूमि में मालिक का अधिकारी ।
सरवर्क →आरम्भिक पृष्ठ ।
नक्शा कमीबेशी →पिछली जमाबन्दी के मुकाबले में क्षेत्रफल की कमी या वृद्वि
हिब्बा →उपहार ।
बैयहकशुफा →भूमि खरीदने का न्यायालय द्वारा अधिकार ।
रहन बाकब्जा →कब्जे सहित गिरवी ।
आड रहन →बिला कब्जा गिरवी ।
रहन दर रहन →मुर्तहिन द्वारा कम राशि में गिरवी रखना ।
तबादला →भूमि के बदले भूमि लेना ।
पडत सरकार →राजस्व रिकार्ड रूम में रखी जाने वाली प्रति ।
पडत पटवार→ रिकार्ड की पटवारी के पास रखी जाने वाली प्रति
फर्द बदर →राजस्व रिकार्ड में हुई गलती को ठीक करना ।
पुख्ता औसत झाड→ पैदावार के अनुसार पक्की फसल
साबिक→ पूर्व का या पुराना या पहले का
हाल →वर्तमान, मौजूदा ।
बिला हिस्सा →जिसमें भाग न हो ।
मिन जानिब →की ओर से ।
बशिनाखत →की पहचान पर ।
पिसर या वल्द →पुत्र
दुखतर→ सुपुत्री
वालिद→ पिता
वालदा →माता
महकूकी →काटकर दोबारा लिखना
मसकूकी →बिना काटे पहले लेख पर दोबारा लिखना
बुरजी→ सरवेरी सर्वेक्षण का पत्थर
चक तशखीश →बन्दोबस्त के दौरान भूमि की पैदावार के अनुसार तहसील की भूमि का निरधारण
दुफसली →वर्ष में दो फसलें उत्पन्न करने वाली भूमि
मेड़ →खेत की सीमा
गोरा देह भूमि →गॉंव के साथ लगती भूमि
हकदार→ मालिक भूमि
महाल →ग्राम
जदीद →नया
ढेकली --> तालाब या कुआं से पानी निकालने के लिए काम में आने वाले

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