02/06/2026
📖 शीर्षक: वो अधूरी चाय और तुम... ☕❤️
शाम के ठीक 6:00 बज रहे थे। गोड्डा के उस छोटे से, सजे-धजे कैफे में हल्की-हल्की बारिश की बूंदों की आवाज आ रही थी।
राहुल हमेशा की तरह खिड़की वाली सीट पर बैठा अपनी डायरी में कुछ लिख रहा था। तभी कैफे का दरवाजा खुला और हवा के एक झोंके के साथ वो अंदर आई। बिखरे हुए बाल, बारिश की बूंदों से भीगा हुआ उसका चेहरा, और आंखों में एक अजीब सी हड़बड़ी।
कैफे पूरा भरा हुआ था। उसने चारों तरफ देखा, और फिर झिझकते हुए राहुल की टेबल के पास आकर रुकी।
"Excuse me... क्या मैं यहाँ बैठ सकती हूँ? और कहीं जगह नहीं है," उसकी आवाज में एक खनक थी।
"ओह, श्योर! प्लीज बैठिए," राहुल ने मुस्कुराते हुए अपनी डायरी बंद कर दी।
उसने इलायची वाली चाय ऑर्डर की, और राहुल की टेबल पर पहले से ही ब्लैक कॉफी रखी थी। दोनों चुप थे, बस बैकग्राउंड में धीमा सा म्यूज़िक बज रहा था।
"वैसे... ब्लैक कॉफी काफी कड़वी होती है, लाइफ की तरह," उसने अचानक राहुल की कॉफी देखकर कहा और मुस्कुरा दी।
"शायद... लेकिन अगर सही इंसान साथ हो, तो कड़वाहट भी अच्छी लगने लगती है," राहुल ने उसकी आँखों में देखते हुए जवाब दिया।
बातें शुरू हुईं... और फिर थमी ही नहीं। पता ही नहीं चला कि कब उसकी इलायची वाली चाय ठंडी हो गई और कब राहुल की कड़वी कॉफी में बातों की मिठास घुल गई। दोनों को लगा जैसे वो एक-दूसरे को बरसों से जानते हों। नाम पूछने की जल्दी किसी को नहीं थी, दोनों बस उस पल को जी रहे थे।
करीब एक घंटे बाद बारिश रुक गई। उसने अपनी घड़ी देखी और चौंक कर उठी—"ओह गॉड! मुझे निकलना होगा, मेरी सहेली बाहर इंतजार कर रही है।"
वो तेजी से बाहर जाने लगी। राहुल अपनी सीट पर ही थमा रह गया। उसने मुड़कर देखा, एक प्यारी सी मुस्कान दी और कहा—"चाय अधूरी रह गई, पर मुलाकात बहुत खूबसूरत थी।" और वो चली गई।
राहुल ने टेबल पर देखा... वो अपना ब्रेसलेट वहीं भूल गई थी। राहुल मुस्कुराया और दिल में एक उम्मीद जाग उठी। कहानी अधूरी थी, लेकिन शुरुआत बेहद खूबसूरत हो चुकी थी।
कहते हैं न, कुछ अधूरी मुलाकातें जिंदगी को पूरा कर जाती हैं। ❤️✨