Ad. Litem Law Associates

Ad. Litem Law Associates Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Ad. Litem Law Associates, Delhi.

Ad Litem Law Associates is formed to provide legal remedy and design to deal legal problems with solutions and also providing, online, telephonic,and by all other mode , consultancy and having serious concerns for those who availing services

26/08/2026

Wa ma arsalnaka illa rahmatan lil-alamin
और हमने आपको तमाम जहानों के लिए रहमत बना कर ही भेजा है।"
"Labbaik ya rasool allah"

15/07/2026

⚖️
#फौजदारी कानून में साक्ष्य (Evidence) के प्रमुख प्रकार
किसी भी आपराधिक मुकदमे में न्यायालय का निर्णय साक्ष्यों के आधार पर होता है। साक्ष्य न्यायालय को सत्य तक पहुँचने और न्याय प्रदान करने में सहायता करते हैं। आइए जानते हैं फौजदारी कानून में साक्ष्य के प्रमुख प्रकार—

1️⃣ #मौखिक साक्ष्य (Oral Evidence)
न्यायालय के समक्ष गवाह द्वारा दिया गया बयान मौखिक साक्ष्य कहलाता है। उदाहरण: प्रत्यक्षदर्शी गवाह, पीड़ित का बयान, विशेषज्ञ की गवाही।

2️⃣ #दस्तावेजी साक्ष्य (Documentary Evidence)
लिखित अथवा रिकॉर्ड किए गए दस्तावेज जो किसी तथ्य को सिद्ध करते हैं। उदाहरण: FIR, चार्जशीट, अनुबंध, मेडिकल रिपोर्ट, ई-मेल, CCTV रिकॉर्डिंग।

3️⃣ #प्रत्यक्ष साक्ष्य (Direct Evidence)
ऐसा साक्ष्य जो बिना किसी अनुमान के सीधे किसी तथ्य को सिद्ध करता है। उदाहरण: प्रत्यक्षदर्शी का घटना को अपनी आँखों से देखना।

4️⃣ #परिस्थितिजन्य साक्ष्य (Circumstantial Evidence)
ऐसा साक्ष्य जो विभिन्न परिस्थितियों और तथ्यों को जोड़कर अपराध की ओर संकेत करता है। उदाहरण: घटना स्थल पर उपस्थिति, आरोपी का व्यवहार, बरामदगी आदि।

5️⃣ #वास्तविक/भौतिक साक्ष्य (Real or Physical Evidence)
अपराध से संबंधित भौतिक वस्तुएँ जो न्यायालय में प्रस्तुत की जाती हैं। उदाहरण: हथियार, खून लगे कपड़े, फिंगरप्रिंट, डीएनए नमूने।

6️⃣ #इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (Electronic Evidence)
डिजिटल माध्यमों से प्राप्त साक्ष्य। उदाहरण: मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड, ई-मेल, CCTV फुटेज, GPS लोकेशन, व्हाट्सएप चैट।

7️⃣ #अनुश्रुत साक्ष्य (Hearsay Evidence)
किसी अन्य व्यक्ति से सुनी हुई बात पर आधारित साक्ष्य। सामान्यतः यह स्वीकार्य नहीं होता, किन्तु कानून में कुछ अपवाद हैं।

8️⃣ #विशेषज्ञ साक्ष्य (Expert Evidence)
विशेष ज्ञान या तकनीकी योग्यता रखने वाले विशेषज्ञ की राय। उदाहरण: डॉक्टर, फॉरेंसिक विशेषज्ञ, हस्तलेखन विशेषज्ञ, फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ।

9️⃣ #प्राथमिक एवं द्वितीयक साक्ष्य (Primary & Secondary Evidence)
प्राथमिक साक्ष्य: मूल दस्तावेज या मूल रिकॉर्ड।
द्वितीयक साक्ष्य: मूल दस्तावेज की प्रमाणित प्रति या कानूनन स्वीकार्य प्रतिलिपि।

🔟 #इकबालिया बयान एवं स्वीकृति (Confession & Admission)
इकबालिया बयान (Confession): जब आरोपी स्वयं अपराध स्वीकार करता है।
स्वीकृति (Admission): किसी तथ्य को स्वीकार करना, जो मुकदमे के लिए प्रासंगिक हो।

📌 नोट: प्रत्येक प्रकार के साक्ष्य की स्वीकार्यता एवं प्रमाणिकता का निर्धारण भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम के स्थान पर लागू भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/भारतीय साक्ष्य अधिनियम के समकक्ष नए कानून) तथा न्यायालय के सिद्धांतों के अनुसार किया जाता है।

📢 जानकारी अच्छी लगी हो तो पेज को Follow करें, Comment करें और Share करें, ताकि अधिक से अधिक लोग अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें।

#साक्ष्य
✍️⚖️👩‍🎓

14/07/2026

धारा 304A के मुकदमों में प्रभावी - ही बचाव की सबसे मजबूत नींव है।
सही सवाल गवाह की विश्वसनीयता, जांच की निष्पक्षता और अभियोजन की कहानी की सच्चाई को अदालत के सामने उजागर कर सकते हैं।
📚 #आज की कानूनी जानकारी:
IPC धारा 304A के मामलों में महत्वपूर्ण Cross-Examination Questions — प्रत्यक्षदर्शी, विवेचक (IO), पोस्टमार्टम डॉक्टर और मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) से पूछे जाने वाले आवश्यक प्रश्न।

304 A ke cross examination bhejiye ek follower ka sawal ❓

👇नीचे IPC धारा 304A (लापरवाही से मृत्यु कारित करना) के मामलों में बचाव पक्ष की ओर से उपयोग किए जा सकने वाले संभावित Cross-Examination Questions दिए जा रहे हैं। इन्हें मामले के तथ्यों के अनुसार संशोधित करना आवश्यक है।

A. #प्रत्यक्षदर्शी (PW – Eye Witness) – 30 प्रश्न
1.क्या आप घटना स्थल पर मौजूद थे?
2.घटना के समय आप कहाँ खड़े थे?
3.घटना स्थल से आपकी दूरी कितनी थी?
4.क्या आपको स्पष्ट रूप से घटना दिखाई दे रही थी?
5.क्या उस समय पर्याप्त प्रकाश था?
6.क्या कोई बाधा आपके और घटना के बीच थी?
7.आपने वाहन को पहली बार कब देखा?
8.क्या आप वाहन की गति बता सकते हैं?
9.क्या आपने स्पीडोमीटर देखा था?
10.क्या आपने वाहन को ज़िगज़ैग चलते देखा?
11.क्या चालक ने हॉर्न बजाया था?
12.क्या चालक ने ब्रेक लगाया था?
13.क्या सड़क सूखी थी या गीली?
14.क्या सड़क पर गड्ढे थे?
15.क्या सड़क पर भीड़ थी?
16.क्या मृतक अचानक सड़क पर आया था?
17.क्या मृतक ने सड़क पार करते समय दोनों ओर देखा था?
18.क्या ज़ेब्रा क्रॉसिंग उपलब्ध थी?
19.क्या मृतक मोबाइल फोन का उपयोग कर रहा था?
20.क्या मृतक नशे में था?
21.क्या आपने चालक को शराब पीते देखा?
22.क्या आपने पुलिस को तुरंत सूचना दी?
23.आपका बयान कब दर्ज हुआ?
24.क्या आपने अपना बयान पढ़कर हस्ताक्षर किए?
25.क्या आपके बयान में कोई परिवर्तन हुआ?
26.क्या आपकी मृतक से कोई रिश्तेदारी है?
27.क्या आपकी अभियुक्त से कोई दुश्मनी है?
28.क्या आपने घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग की?
29.क्या CCTV कैमरा वहाँ लगा था?
30.क्या आपने स्वयं पूरी घटना देखी या दूसरों से सुना?

B. #विवेचक (Investigating Officer – IO) – 30 प्रश्न
1.आपको घटना की सूचना कब मिली?
2.आप घटनास्थल पर कब पहुँचे?
3.क्या आपने साइट प्लान स्वयं बनाया?
4.क्या आपने स्वतंत्र गवाहों के बयान लिए?
5.क्या CCTV फुटेज जब्त की?
6.क्या फुटेज अदालत में प्रस्तुत की?
7.क्या सड़क की चौड़ाई नापी?
8.क्या ब्रेक मार्क्स मिले?
9.क्या स्किड मार्क्स का उल्लेख किया?
10.क्या वाहन की स्थिति का फोटो लिया?
11.क्या घटनास्थल की वीडियोग्राफी कराई?
12.क्या सड़क पर स्पीड लिमिट का बोर्ड था?
13.क्या चालक के लाइसेंस की जांच की?
14.क्या वाहन का बीमा वैध था?
15.क्या वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र वैध था?
16.क्या वाहन का मैकेनिकल निरीक्षण कराया?
17.क्या आपने चालक का मेडिकल कराया?
18.क्या शराब की जांच कराई?
19.क्या किसी स्वतंत्र व्यक्ति का बयान लिया?
20.क्या आपने मृतक के परिवार के अतिरिक्त अन्य गवाह खोजे?
21.क्या आपने ट्रैफिक सिग्नल की स्थिति देखी?
22.क्या सड़क पर स्ट्रीट लाइट कार्यरत थी?
23.क्या आपने मौसम का उल्लेख किया?
24.क्या आपने कॉल डिटेल मंगाई?
25.क्या चालक का मोबाइल जब्त किया?
26.क्या आपने सभी दस्तावेज केस डायरी में दर्ज किए?
27.क्या आपने किसी वैज्ञानिक साक्ष्य का सहारा लिया?
28.क्या कोई महत्वपूर्ण साक्ष्य छूट गया?
29.क्या आपने अभियुक्त के पक्ष के गवाहों के बयान लिए?
30.क्या आपने निष्पक्ष जांच की?

C. #पोस्टमार्टम डॉक्टर – 20 प्रश्न
1.मृत्यु का कारण क्या था?
2.क्या चोटें दुर्घटना से संभव हैं?
3.क्या अन्य कारण से भी ऐसी चोटें हो सकती हैं?
4.मृत्यु तत्काल हुई या बाद में?
5.क्या समय पर इलाज मिलने से जान बच सकती थी?
6.क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सभी चोटों का उल्लेख है?
7.क्या चोटें घातक थीं?
8.क्या मृतक नशे में था?
9.क्या आपने विसरा सुरक्षित किया?
10.क्या चोटें पुरानी भी हो सकती थीं?
11.क्या मृत्यु अत्यधिक रक्तस्राव से हुई?
12.क्या सिर की चोट मुख्य कारण थी?
13.क्या सीट बेल्ट या हेलमेट से चोट कम हो सकती थी?
14.क्या सभी चोटें एक ही दुर्घटना से हुईं?
15.क्या मृत्यु का समय अनुमानित है?
16.क्या रिपोर्ट में कोई संशोधन किया गया?
17.क्या आपने एक्स-रे देखा?
18.क्या इलाज के रिकॉर्ड देखे?
19.क्या मृत्यु उपचार में देरी से हुई?
20.क्या आपकी राय अंतिम और निश्चित है?

D. #मोटर वाहन निरीक्षक (Motor Vehicle Inspector) – 20 प्रश्न

1.आपने वाहन का निरीक्षण कब किया?
2.क्या वाहन की ब्रेक प्रणाली सही थी?
3.क्या स्टीयरिंग ठीक था?
4.क्या टायर सही स्थिति में थे?
5.क्या वाहन में कोई यांत्रिक खराबी थी?
6.क्या निरीक्षण घटना के तुरंत बाद हुआ?
7.क्या निरीक्षण रिपोर्ट आपने स्वयं तैयार की?
8.क्या रिपोर्ट में फोटो संलग्न हैं?
9.क्या वाहन सड़क योग्य था?
10. दुर्घटना यांत्रिक खराबी से हो सकती थी?
11.क्या ब्रेक फेल होने के संकेत मिले?
12.क्या वाहन की लाइटें कार्यरत थीं?
13.क्या हॉर्न कार्यरत था?
14.क्या रिपोर्ट में कोई अनुमान लगाया गया?
15.क्या आपने वाहन चलाकर परीक्षण किया?
16.क्या निरीक्षण के समय वाहन में बदलाव किया गया था?
17.क्या रिपोर्ट वैज्ञानिक परीक्षण पर आधारित है?
18.क्या आपकी राय अंतिम है?
19.क्या अन्य विशेषज्ञ अलग राय दे सकते हैं?
20.क्या आप निश्चित रूप से कह सकते हैं कि दुर्घटना केवल चालक की लापरवाही से हुई?

#ध्यान दें: प्रभावी जिरह हमेशा FIR, साइट प्लान, केस डायरी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मैकेनिकल इंस्पेक्शन रिपोर्ट और गवाहों के 161 CrPC/173 BNSS के बयानों के आधार पर तैयार की जाती है। सामान्य प्रश्नों की तुलना में तथ्य-आधारित जिरह अधिक प्रभावी होती है।



-306

14/07/2026

⚖️📚 .I.R. दर्ज होने पर #हाई कोर्ट से कौन-कौन सी कानूनी राहत मिल सकती है❓

यदि आपके विरुद्ध F.I.R. दर्ज हो गई है, तो घबराने के बजाय कानून द्वारा उपलब्ध उचित उपायों का सहारा लें। परिस्थितियों के अनुसार उच्च न्यायालय निम्नलिखित राहत प्रदान कर सकता है—

✅ 1. F.I.R. #निरस्तीकरण (Quashing of FIR)यदि F.I.R. दुर्भावनापूर्ण, झूठी, कानून के दुरुपयोग पर आधारित हो या प्रथम दृष्टया कोई अपराध न बनता हो, तो उच्च न्यायालय BNSS, 2023 की धारा 528 (पूर्व में CrPC धारा 482) के अंतर्गत F.I.R. निरस्त कर सकता है।

✅ 2. #गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण (Interim Protection)यदि तत्काल गिरफ्तारी की आशंका हो, तो उच्च न्यायालय मामले के तथ्यों के आधार पर अस्थायी संरक्षण प्रदान कर सकता है।

✅ 3. #अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail)गिरफ्तारी की आशंका होने पर संबंधित कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत अग्रिम जमानत का लाभ लिया जा सकता है।

✅ 4. #नियमित जमानत (Regular Bail)यदि अभियुक्त गिरफ्तार हो चुका है, तो उच्च न्यायालय से नियमित जमानत की मांग की जा सकती है।

✅ 5. #विवेचना का स्थानांतरण (Transfer of Investigation)यदि जांच निष्पक्ष न हो रही हो या पक्षपात की आशंका हो, तो जांच किसी अन्य अधिकारी या स्वतंत्र एजेंसी को स्थानांतरित कराने की प्रार्थना की जा सकती है।

✅ 6. #चार्जशीट को चुनौतीयदि बिना पर्याप्त साक्ष्य के चार्जशीट दाखिल की गई हो या विवेचना में गंभीर त्रुटियाँ हों, तो उसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।

✅ 7. #रिट याचिका (Article 226)यदि मौलिक अधिकारों का उल्लंघन, अवैध गिरफ्तारी, पुलिस उत्पीड़न या प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का हनन हुआ हो, तो संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत रिट याचिका दायर की जा सकती है।

⚖️ #महत्वपूर्ण निर्णय

📌 State of Haryana v. Bhajan Lal (1992) – F.I.R. Quashing के सिद्धांत निर्धारित किए।

📌 Satender Kumar Antil v. CBI (2022) – गिरफ्तारी एवं जमानत से संबंधित महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।

⚠️ #ध्यान रखें

• प्रत्येक F.I.R. स्वतः निरस्त नहीं की जा सकती।• हत्या, बलात्कार, NDPS एवं अन्य गंभीर अपराधों में उच्च न्यायालय सीमित हस्तक्षेप करता है।• प्रत्येक मामले के तथ्य अलग होते हैं, इसलिए उचित कानूनी सलाह लेकर ही आगे की रणनीति तय करें।

💬 कानून आपके अधिकारों की रक्षा करता है—समय पर सही कानूनी उपाय चुनना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

-306

09/07/2026

#क्रॉस-एग्जामिनेशन का उद्देश्य केवल प्रश्न पूछना नहीं, बल्कि अभियोजन की कहानी की विश्वसनीयता की परीक्षा लेना है।"

#यदि संभव हो तो कृपया 296 और 351 bnss के झूठे काउंटर केस के लिये defence की ओर से किया जाने वाला सटीक क्रॉस पोस्ट करे--
👩‍🎓ek follower ka sawal ❓

#यदि शिकायतकर्ता ने BNS की धारा 296 (अश्लील कृत्य/शब्द) तथा धारा 351 (आपराधिक भयादोहन/Criminal Intimidation) के अंतर्गत झूठा काउंटर केस दर्ज कराया है, तो डिफेंस की ओर से क्रॉस-एग्जामिनेशन का उद्देश्य आरोपों के आवश्यक तत्वों (ingredients) को तोड़ना होना चाहिए। धारा 296 के लिए सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य या शब्दों से अन्य लोगों को परेशानी होना आवश्यक है, जबकि धारा 351 के लिए ऐसा धमकीपूर्ण आचरण आवश्यक है जिससे वास्तविक भय उत्पन्न करने का आशय सिद्ध हो।

#डिफेंस की ओर से PW-1 (शिकायतकर्ता) का संभावित क्रॉस-एग्जामिनेशन:
🔹यह सही है कि घटना के समय आसपास कई लोग मौजूद थे?
🔹आपने किसी स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी का नाम अपनी शिकायत में नहीं लिखा?
🔹आपने जिन कथित अश्लील शब्दों का उल्लेख किया है, उन्हें शिकायत में शब्दशः नहीं लिखा है?
🔹आपने यह नहीं बताया कि कौन-सा शब्द या कृत्य अश्लील था?
🔹किसी भी स्वतंत्र व्यक्ति ने यह नहीं कहा कि उसे कथित शब्दों या कृत्य से आपत्ति हुई?
🔹घटना का कोई वीडियो, ऑडियो या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड आपके पास नहीं है?
🔹आपने पुलिस को कोई स्वतंत्र साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया?
🔹आपके और अभियुक्त के बीच पहले से विवाद/मुकदमेबाजी चल रही है?
🔹आपने यह मुकदमा उसी विवाद के बाद दर्ज कराया?
🔹आपने पहले अभियुक्त के विरुद्ध शिकायत नहीं की थी?
🔹आपने कथित धमकी के बाद किसी सुरक्षा की मांग नहीं की?
🔹आपने यह नहीं बताया कि धमकी सुनकर आपने कौन-सा कार्य भयवश किया या करने से रुके?
🔹आपने घटना के तुरंत बाद पुलिस को सूचना नहीं दी?
🔹शिकायत दर्ज कराने में विलंब हुआ, जिसका कोई लिखित कारण नहीं दिया?
🔹आपके कथन और पुलिस के समक्ष दिए गए बयान में अंतर है?
🔹किसी स्वतंत्र गवाह ने आपके आरोपों की पुष्टि नहीं की?
🔹यह सही है कि अभियुक्त ने आपको कोई शारीरिक चोट नहीं पहुँचाई?
🔹आपने किसी डॉक्टर से मानसिक भय या तनाव का उपचार नहीं कराया?
🔹आपके पास यह सिद्ध करने का कोई स्वतंत्र साक्ष्य नहीं है कि अभियुक्त ने आपको वास्तविक रूप से डराने के उद्देश्य से धमकी दी?
🔹यह सही है कि आपने अभियुक्त पर दबाव बनाने के लिए यह मुकदमा दर्ज कराया है?

08/07/2026

to Sell केवल कागज़ नहीं, बल्कि एक वैधानिक अधिकार है। यदि विक्रेता रजिस्ट्री से इंकार करे, तो खरीदार Specific Performance के माध्यम से न्यायालय से अपने अधिकार का प्रभावी संरक्षण प्राप्त कर सकता है।"

यदि विक्रेता (Seller) ने Sale Agreement/Agreement to Sell किया, लगभग ...% बिक्री मूल्य प्राप्त कर लिया, लेकिन अब Sale Deed (रजिस्ट्री) करने से इंकार कर रहा है, तो खरीदार (Buyer) के पास मजबूत कानूनी उपाय उपलब्ध हैं।

#खरीदार को क्या करना चाहिए?
1.Agreement to Sell और भुगतान के सभी साक्ष्य (रसीद, बैंक ट्रांजैक्शन, गवाह आदि) सुरक्षित रखें।
2.विक्रेता को Legal Notice भेजें, जिसमें रजिस्ट्री करने के लिए निश्चित समय दिया जाए।
3.यदि फिर भी रजिस्ट्री न करे, तो Specific Performance का वाद दायर करें।
🙏वाद में यह भी प्रार्थना करें कि मुकदमे के दौरान विक्रेता संपत्ति किसी तीसरे व्यक्ति को न बेच सके (अस्थायी निषेधाज्ञा/Temporary Injunction)।
#खरीदार का पक्ष कितना मजबूत होता है?
यदि खरीदार निम्न बातें सिद्ध कर दे, तो उसका पक्ष सामान्यतः काफी मजबूत माना जाता है—
1.वैध Agreement to Sell हुआ था।
2.....% या पर्याप्त भुगतान वास्तव में किया गया।
खरीदार हमेशा अनुबंध पूरा करने के लिए तैयार और इच्छुक (Ready and Willing) था।
3.विक्रेता ने बिना उचित कारण रजिस्ट्री करने से इंकार किया।
ऐसी स्थिति में न्यायालय विक्रेता को Sale Deed निष्पादित करने (Execute the Sale Deed) का आदेश दे सकता है। यदि विक्रेता आदेश का पालन न करे, तो न्यायालय के माध्यम से भी रजिस्ट्री कराई जा सकती है।
✍️किन परिस्थितियों में खरीदार का पक्ष कमजोर हो सकता है?
1.Agreement जाली या अप्रमाणित हो।
2.भुगतान का कोई विश्वसनीय प्रमाण न हो।
3.खरीदार स्वयं शेष राशि देने के लिए तैयार न रहा हो।
4.अनुबंध की आवश्यक शर्तों का पालन खरीदार ने न किया हो।
#महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय
Satish Kumar v. Karan Singh – खरीदार को अपनी readiness and willingness सिद्ध करनी होती है।
K. Narendra v. Riviera Apartments (P) Ltd. – Specific Performance न्यायालय का विवेकाधीन (discretionary) उपचार है, परंतु उचित मामलों में इसे प्रदान किया जाता है।

Relief Act, 1963 की धारा 10 (Section 10) ही वह प्रावधान है जो Specific Performance of Contract (अनुबंध के विशिष्ट पालन) से संबंधित है।
⏳संक्षेप में धारा 10 का अर्थ: यदि दो पक्षों के बीच कोई वैध अनुबंध (जैसे Agreement to Sell) हुआ है और एक पक्ष अपने वादे के अनुसार कार्य नहीं करता, तो दूसरा पक्ष न्यायालय से यह प्रार्थना कर सकता है कि केवल हर्जाना (Damages) देने के बजाय उस अनुबंध का वास्तविक पालन कराया जाए, जैसे विक्रेता को Sale Deed (रजिस्ट्री) करने का आदेश दिया जाए।

#भूमि विक्रय के मामलों में:
📍यदि Agreement to Sell वैध है,
📍खरीदार ने भुगतान किया है,
📍और वह शेष राशि देने के लिए हमेशा तैयार एवं इच्छुक (Ready and Willing) रहा है,
तो वह Specific Relief Act, 1963 की धारा 10 के अंतर्गत Specific Performance का वाद दायर कर सकता है।
#वर्तमान कानून के अनुसार:
Specific Relief Act, 1963 की धारा 10 के अंतर्गत Specific Performance का अधिकार दिया गया है।
📍मुकदमे में यह प्रार्थना की जाती है कि न्यायालय विक्रेता को Sale Deed (रजिस्ट्री) निष्पादित करने का आदेश दे।
📍यदि विक्रेता आदेश के बाद भी रजिस्ट्री नहीं करता, तो न्यायालय अपने अधिकारी के माध्यम से भी Sale Deed निष्पादित करा सकता है।
📍साथ ही वाद के साथ निम्न राहतें भी मांगी जाती हैं:
📍संपत्ति को किसी तीसरे व्यक्ति को बेचने से रोकने हेतु अस्थायी निषेधाज्ञा (Temporary Injunction)।
📍 आवश्यक हो तो स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent Injunction)।
#ध्यान दें: पहले Specific Performance एक विवेकाधीन (discretionary) राहत मानी जाती थी, लेकिन 2018 के संशोधन के बाद न्यायालय सामान्यतः वैध अनुबंधों को लागू कराने की ओर अधिक झुकाव रखते हैं, बशर्ते खरीदार यह सिद्ध करे कि वह हमेशा अनुबंध पूरा करने के लिए ready and willing था।

#वाद पत्र (PLAINT)प्रारूप
माननीय सिविल न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन), जनपद ____, उत्तर प्रदेश
नियमित मूल वाद संख्या : __ /20
वादी
श्री __ पुत्र __ निवासी __
बनाम
प्रतिवादी
श्री __ पुत्र __ निवासी __

#विशिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 की धारा 10 एवं अन्य लागू प्रावधानों के अंतर्गत विक्रय अनुबंध के विशिष्ट पालन (Specific Performance), विक्रय विलेख निष्पादन एवं स्थायी निषेधाज्ञा हेतु वाद

वाद मुलयाकन........
देय न्याय शुल्क........
#महोदय,
वादी निम्नलिखित निवेदन करता है—
1. यह कि प्रतिवादी विवादित संपत्ति का स्वामी एवं कब्जेदार है।
दिनांक //20__ को वादी एवं प्रतिवादी के मध्य उक्त संपत्ति के संबंध में लिखित विक्रय अनुबंध (Agreement to Sell) निष्पादित हुआ।
2.यह कि संपत्ति का कुल विक्रय मूल्य ₹__ निर्धारित हुआ, जिसमें से वादी ने ₹__ (लगभग 60%) प्रतिवादी को अग्रिम रूप से अदा किया। भुगतान की रसीद/बैंक अभिलेख/गवाह उपलब्ध हैं।
3.यह कि अनुबंध के अनुसार शेष धनराशि विक्रय विलेख के पंजीकरण के समय देय थी।
4.यह कि वादी सदैव अनुबंध का पालन करने, शेष धनराशि अदा करने तथा विक्रय विलेख पंजीकृत कराने के लिए तैयार एवं इच्छुक रहा है।
5.यह कि प्रतिवादी ने कई बार अनुरोध करने तथा विधिक नोटिस प्राप्त करने के बाद भी विक्रय विलेख निष्पादित नहीं किया।
प्रतिवादी अब संपत्ति को किसी तृतीय पक्ष के पक्ष में बेचने का प्रयास कर रहा है, जिससे वादी को अपूरणीय क्षति होने की संभावना है।
6.यह कि कारण-ए-वाद दिनांक //20__ को उत्पन्न हुआ तथा निरंतर जारी है। यह न्यायालय क्षेत्राधिकार एवं मूल्याधिकार दोनों दृष्टियों से सक्षम है।
#प्रार्थना/
अतः माननीय न्यायालय से निवेदन है कि—
A. प्रतिवादी को वादी के पक्ष में विवादित संपत्ति का विधिवत विक्रय विलेख निष्पादित एवं पंजीकृत करने का आदेश पारित किया जाए।

B.यदि प्रतिवादी आदेश का पालन न करे, तो न्यायालय अपने अधिकृत अधिकारी के माध्यम से विक्रय विलेख निष्पादित एवं पंजीकृत कराने का आदेश पारित करे।

C. वाद के अंतिम निर्णय तक प्रतिवादी को विवादित संपत्ति किसी तृतीय पक्ष को बेचने, गिरवी रखने, हस्तांतरित करने अथवा उस पर किसी प्रकार का तृतीय पक्ष अधिकार सृजित करने से रोका जाए।

D. वाद व्यय वादी को प्रदान किया जाए।
E. न्यायालय परिस्थितियों के अनुसार अन्य उपयुक्त राहत भी प्रदान करे।
स्थान : ____
दिनांक : //20__
वादी
(हस्ताक्षर)
अधिवक्ता
Ad-litem law associates
[email protected]

�⁠Plaint (वाद पत्र)
�⁠Order ###IX Rules 1 & 2 CPC के तहत Temporary Injunction Application
�⁠Affidavit �⁠List of Documents �⁠Vakalatnama
�⁠Verification�⁠Court Fee Valuation�⁠Legal Notice
✍️⚖️👩‍🎓@

07/07/2026

⚖️ #संज्ञेय (Cognizable) एवं #गैर-संज्ञेय (Non-Cognizable) अपराध –

#भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) ;BNSS के अनुसार अपराधों को मुख्यतः दो श्रेणियों में विभाजित किया गया था— संज्ञेय (Cognizable) एवं गैर-संज्ञेय (Non-Cognizable)। (वर्तमान में BNSS, 2023 लागू है, परंतु मूल अवधारणा समान है।)
1. #संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence)
परिभाषा: ऐसे अपराध जिनमें पुलिस मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति के बिना FIR दर्ज कर सकती है तथा बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है।
#प्रमुख विशेषताएँ
पुलिस स्वयं FIR दर्ज कर सकती है। (धारा 154 CrPC)
पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है। (धारा 41 CrPC)
पुलिस स्वयं जांच प्रारंभ कर सकती है।
अपराध सामान्यतः गंभीर प्रकृति के होते हैं।
#उदाहरण
हत्या
बलात्कार
डकैती
चोरी
अपहरण
दहेज मृत्यु
आगजनी
भ्रष्टाचार आदि।
#उद्देश्य
गंभीर अपराधों पर त्वरित कार्रवाई करना।
सार्वजनिक शांति एवं सुरक्षा बनाए रखना।
2. #गैर-संज्ञेय अपराध (Non-Cognizable Offence)
परिभाषा: ऐसे अपराध जिनमें पुलिस मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना FIR दर्ज नहीं कर सकती तथा बिना वारंट गिरफ्तारी नहीं कर सकती।
#प्रमुख विशेषताएँ
मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही FIR/जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। (धारा 155 CrPC)
पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी नहीं कर सकती।
मजिस्ट्रेट की अनुमति से ही जांच की जाती है।
अपराध सामान्यतः कम गंभीर एवं निजी प्रकृति के होते हैं।
#उदाहरण
मानहानि
साधारण मारपीट
धमकी
सार्वजनिक उपद्रव (हल्का)
शोर-शराबा आदि।
#उद्देश्य
व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करना।
छोटे एवं निजी विवादों में न्यायिक नियंत्रण बनाए रखना।
संज्ञेय एवं गैर-संज्ञेय अपराध में मुख्य अंतर
#आधार
संज्ञेय अपराध. गैर-संज्ञेय अपराध

पुलिस स्वयं दर्ज कर सकती है
मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद
#गिरफ्तारी
बिना वारंट
बिना वारंट नहीं
#जांच
पुलिस स्वयं कर सकती है
मजिस्ट्रेट की अनुमति से
#अपराध की प्रकृति
गंभीर
अपेक्षाकृत कम गंभीर
#उद्देश्य
सार्वजनिक सुरक्षा एवं त्वरित कार्रवाई
न्यायिक नियंत्रण एवं व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा
#निष्कर्ष
संज्ञेय अपराधों में पुलिस को अधिक शक्तियाँ प्राप्त होती हैं ताकि गंभीर अपराधों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके, जबकि गैर-संज्ञेय अपराधों में नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा हेतु न्यायालय का नियंत्रण आवश्यक माना गया है।
-litemlaw-associates ✍️🧑‍🎓⚖️

05/07/2026

#मजबूत बचाव की नींव, प्रभावी जिरह से ही रखी जाती है।
(I.O.) 👨‍✈️की सटीक, विधिसम्मत और प्रोफेशनल Cross-Examination ही निष्पक्ष विवेचना की वास्तविक परीक्षा है।"
Officer (IO) की Cross-Examination का Draft" तैयार किया है, जिसे आप आवश्यकतानुसार BNSS 2023 के मामलों में उपयोग कर सकते हैं।

#पुलिस विवेचक (I.O.) से #जिरह का प्रोफेशनल ड्राफ्ट
✍️भाग-1 : 🛣घटनास्थल (Spot Inspection)
1.क्या आप स्वयं घटनास्थल पर गए थे?
2.घटनास्थल पर पहुँचने का समय क्या था?
3.क्या घटनास्थल को सुरक्षित (Preserve) किया गया था?
4.क्या आपने घटनास्थल का निरीक्षण स्वयं किया?
5.क्या आपने स्थल योजना (Site Plan) स्वयं तैयार की?
6.क्या कोई स्वतंत्र व्यक्ति निरीक्षण के समय उपस्थित था?
7.क्या घटनास्थल की फोटो या वीडियो कराई गई?
8.क्या आपने पंचनामा तैयार किया?
9.क्या आपने गवाहों के बयान घटनास्थल पर ही दर्ज किए?
10.क्या निरीक्षण रिपोर्ट केस डायरी में अंकित है?

✍️भाग-2 : ➿गिरफ्तारी (Arrest)
1.अभियुक्त कहाँ मिला?
2.अभियुक्त की पहचान किस आधार पर हुई?
3.क्या गिरफ्तारी मेमो तैयार किया गया?
4.क्या गिरफ्तारी का समय दर्ज किया गया?
5.क्या अभियुक्त को गिरफ्तारी का कारण बताया गया?
6.क्या उसके किसी परिजन को सूचना दी गई?
7.क्या गिरफ्तारी के समय स्वतंत्र गवाह मौजूद थे?
8.क्या गिरफ्तारी के समय कोई बरामदगी हुई?

✍️भाग-3 : ⚖️धारा 180 BNSS (पूर्व धारा 161 CrPC)
1.क्या आपने गवाहों के बयान स्वयं दर्ज किए?
2.क्या सभी बयान एक ही दिन लिए गए?
3.क्या किसी गवाह ने अभियुक्त का नाम स्वयं बताया?
4.क्या किसी गवाह ने अभियुक्त की पहचान की?
5.क्या बयान में किसी प्रकार का सुधार या कटिंग है?
6.क्या आपने बयान पढ़कर सुनाया था?

✍️भाग-4 : 🕰🕰तलाशी एवं बरामदगी (Search & Seizure)
1.क्या तलाशी वारंट के आधार पर ली गई?
2.क्या तलाशी से पूर्व अपना परिचय दिया?
3.क्या दो स्वतंत्र गवाह बुलाए गए?
4.क्या तलाशी मेमो तैयार किया?
5.क्या बरामद वस्तु का विवरण मौके पर लिखा?
6.क्या बरामद वस्तु सील की गई?
7.सील किसकी थी?
8.सील सुरक्षित किसके पास रही?
9.क्या जब्ती सूची की प्रति अभियुक्त को दी गई?

✍️भाग-5 : धारा 103 BNSS (पूर्व धारा 100 CrPC)
1.क्या आपने धारा 103 BNSS का पालन किया?
2.क्या दो स्वतंत्र सम्मानित गवाह बुलाए?
यदि नहीं, तो कारण क्या था?
3.क्या तलाशी भीड़भाड़ वाले स्थान पर हुई?
4.क्या किसी स्थानीय व्यक्ति को शामिल किया?
5.क्या तलाशी विधि अनुसार हुई?

✍️भाग-6 : 👨‍🍳मेडिकल परीक्षण
1.क्या अभियुक्त का मेडिकल कराया गया?
2.मेडिकल कब कराया गया?
3.क्या कोई चोट पाई गई?
4.क्या मेडिकल रिपोर्ट केस डायरी में संलग्न है?
5.क्या चोटों का कारण दर्ज किया गया?

✍️भाग-7 : 🧐Test Identification Parade (TIP)
1.क्या TIP कराई गई?
2.किस मजिस्ट्रेट ने कराई?
3.क्या अभियुक्त पहले से गवाहों को दिखाया गया था?
4.क्या TIP रिपोर्ट रिकॉर्ड पर है?

✍️भाग-8 : 📋जब्त संपत्ति (Seized Property)
1.क्या जब्ती की सूचना तत्काल मजिस्ट्रेट को दी?
2.क्या संपत्ति मालखाने में जमा की?
3.जमा करने की तारीख क्या है?
4.क्या Chain of Custody सुरक्षित रखी गई?
5.क्या बिना आदेश के किसी ने संपत्ति का उपयोग किया?

✍️भाग-9 : ⏳विवेचना की निष्पक्षता
1.क्या आपने अभियुक्त के पक्ष के साक्ष्य भी एकत्र किए?
2.क्या सभी गवाहों से पूछताछ की?
3.क्या किसी CCTV की जाँच की?
4.क्या कॉल डिटेल या इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य एकत्र किए?
5.क्या किसी महत्वपूर्ण साक्ष्य की अनदेखी की?

✍️ भाग-10 : 📹📲💻इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य
1.क्या आपने CCTV फुटेज जब्त की?
2.क्या Call Detail Record मंगाई?
3.क्या मोबाइल की FSL जाँच कराई?
4.क्या कोई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अभियोजन के विपरीत था?

✍️भाग-10 : 📋केस डायरी
1.क्या प्रत्येक कार्यवाही उसी दिन केस डायरी में अंकित की?
2.क्या किसी दिन की केस डायरी बाद में लिखी गई?
3.क्या केस डायरी में कोई कटिंग या ओवरराइटिंग है?

#अन्तिम प्रश्न
1.क्या यह सही है कि स्वतंत्र गवाह न होने से बरामदगी की विश्वसनीयता प्रभावित होती है?
2.क्या यह सही है कि वैज्ञानिक साक्ष्य के बिना विवेचना केवल मौखिक साक्ष्य पर आधारित रह जाती है?
3.क्या यह सही है कि आपने निष्पक्ष विवेचना के सभी मानकों का पालन नहीं किया?
4.क्या यह सही है कि आपकी विवेचना में कई आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ?

#उद्देश्य
इन प्रश्नों का उद्देश्य यह स्थापित करना है कि:
📍विवेचना निष्पक्ष नहीं थी।
📍तलाशी एवं बरामदगी वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं हुई।
स्वतंत्र गवाहों का अभाव अभियोजन की कहानी को संदिग्ध बनाता है।
📍Chain of Custody और दस्तावेजी प्रक्रिया में कमियाँ हैं।
📍अभियोजन संदेह से परे अपराध सिद्ध करने में असफल है।

✍️⚖️👩‍🎓

28/06/2026

#अगर आपकी संपत्ति पर कोई और दावा कर रहा है, तो Declaration Suit आपके लिए सबसे असरदार कानूनी रास्ता है। इसमें आप कोर्ट से अपने अधिकार और मालिकाना हक की पुष्टि करवा सकते हैं। 💪⚖️ यह आपको कानूनी सुरक्षा देता है!
#जहाँ अधिकार पर विवाद हो, वहाँ Declaration Suit सबसे #प्रभावी कानूनी उपाय है।"

Suit (घोषणात्मक वाद) क्या होता है?

Suit वह वाद है जिसमें वादी (Plaintiff) न्यायालय से यह घोषणा (Declaration) मांगता है कि किसी संपत्ति, अधिकार, पद या कानूनी स्थिति पर उसका वैध अधिकार है।
#इसका मुख्य प्रावधान
Specific Relief Act, 1963 की Section 34 (Suit for Declaration)
#कब दायर किया जाता है?
Declaration Suit तब दायर किया जाता है जब किसी व्यक्ति के कानूनी अधिकार या संपत्ति के अधिकार पर विवाद या संदेह हो।
#उदाहरण:भूमि का वास्तविक मालिक कौन है, इसकी घोषणा कराने के लिए।
किसी विक्रय विलेख (Sale Deed), Gift Deed या Will को वैद्य य अवैध घोषित कराने के लिए।
📍किसी दस्तावेज़ के आधार पर दावा किए गए अधिकार को चुनौती देने के लिए।
📍किसी व्यक्ति के वैधानिक दर्जे या अधिकार की न्यायालय से घोषणा प्राप्त करने के लिए।
#न्यायालय क्या कर सकता है?
📍यदि वादी अपना अधिकार सिद्ध कर देता है, तो न्यायालय यह घोषणा कर सकता है कि:
वादी ही संपत्ति का वैध स्वामी है।
विवादित दस्तावेज़ से प्रतिवादी को कोई वैध अधिकार प्राप्त नहीं होता।
📍वादी का दावा कानूनी रूप से सही है।
#महत्वपूर्ण बात
यदि केवल घोषणा से पर्याप्त राहत नहीं मिले और वादी कब्जा (Possession) या स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent Injunction) जैसी अतिरिक्त राहत भी मांग सकता है, तो उसे वही राहत भी वाद में मांगनी चाहिए। केवल Declaration मांगकर अन्य आवश्यक राहत छोड़ देने पर वाद अस्वीकार किया जा सकता है।

#यदि वादी स्वयं संपत्ति के कब्जे में है और उसके पक्ष में Registered Will है, तो सामान्यतः विवाद हो ने Declaration + Permanent Injunction का वाद उपयुक्त होता है। #मांग सकते हैं कि:
आप ही वास्तविक मालिक हैं; और
प्रतिवादी के आधार पर किया गया दावा आपके अधिकारों को प्रभावित नहीं करता।
कब्जा माँगने (Possession Relief) की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि वादी पहले से कब्जे में है।

Suit ka draft नीचे दिया जा रहा है जैसे आप अपने अनुसार संशोधन कर सकते हैं 👇

माननीय सिविल न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन), ____
नियमित वाद (Original Suit). वर्ष
वादी : __
बनाम
प्रतिवादी : __
#वाद पत्र :धारा 34, Specific Relief Act, 1963 तथा स्थायी निषेधाज्ञा हेतु वाद
महोदय,
1.यह कि वादी विवादित संपत्ति का वैध एवं वास्तविक स्वामी तथा कब्जेदार है।
2. यह कि स्वर्गीय __ ने दिनांक //_ को अपनी स्वतंत्र इच्छा एवं स्वस्थ मानसिक स्थिति में वादी के पक्ष में एक विधिवत पंजीकृत वसीयत (Registered Will) निष्पादित की, जो उप-पंजीयक कार्यालय ____ में पंजीकृत है।
3. यह कि वसीयतकर्ता का दिनांक //_ को निधन हो गया, जिसके पश्चात उक्त वसीयत प्रभावी हो गई और वादी संपत्ति का स्वामी बन गया।
4. यह कि वादी तब से आज तक संपत्ति पर शांतिपूर्ण एवं निरंतर कब्जे में है तथा उसका उपयोग एवं देखभाल कर रहा है।
5. यह कि प्रतिवादी का संपत्ति पर कोई वैध अधिकार नहीं है, फिर भी वह वादी के स्वामित्व को चुनौती देकर कब्जे में हस्तक्षेप करने तथा तृतीय पक्ष का हित उत्पन्न करने की धमकी दे रहा है।

6. यह कि वाद का कारण दिनांक //20__ को उत्पन्न हुआ, जब प्रतिवादी ने वादी के पंजीकृत वसीयतनामे के आधार पर प्राप्त अधिकार एवं कब्जे का विरोध किया तथा संपत्ति में हस्तक्षेप करने एवं तृतीय पक्ष का हित उत्पन्न करने का प्रयास किया। यह Cause of Action निरंतर जारी है क्योंकि प्रतिवादी आज भी वादी के अधिकारों में अवैध हस्तक्षेप कर रहा है।

7. यह कि विवादित संपत्ति इस माननीय न्यायालय की स्थानीय अधिकारिता में स्थित है, इसलिए इस न्यायालय को वाद सुनने का अधिकार प्राप्त है।

8. यह कि कुल वाद मूल्यांकन (Valuation)____है। घोषणा (Declaration) की राहत का मूल्यांकन न्यायालय शुल्क ___एवं स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent Injunction) की राहत का मूल्यांकन ₹____ नियमानुसार न्यायालय शुल्क अदा किया गया है।
#प्रार्थना/
अतः माननीय न्यायालय से प्रार्थना है कि—
A. यह कि घोषणा किया जाए कि वादी दिनांक //_ की पंजीकृत वसीयत के आधार पर विवादित संपत्ति का वैध स्वामी है।
B. यह कि प्रतिवादी, उसके एजेंटों एवं सहयोगियों को वादी के शांतिपूर्ण कब्जे में हस्तक्षेप करने तथा संपत्ति में किसी प्रकार का अवैध दावा करने से स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent Injunction) द्वारा रोका जाए।
C. यह कि वाद व्यय वादी को प्रदान किया जाए।
D. यह कि न्यायालय परिस्थितियों के अनुसार अन्य उचित राहत भी प्रदान करे।
स्थान : ____
दिनांक : ____
वादी
(हस्ताक्षर)
अधिवक्ता
#महत्वपूर्ण: यदि प्रतिवादी यह कह रहा है कि Will फर्जी है, या उसने अपने नाम Mutation/नामांतरण करा लिया है, तो ड्राफ्ट में अतिरिक्त प्रार्थनाएँ और तथ्य जोड़े जाएंगे।
#संपत्ति का विवरण (Schedule of Property)
गाटा संख्या : ____
रकबा : ____
ग्राम : ____
परगना : ____
तहसील : ____
जनपद : ____
चारों सीमाएँ—
पूर्व : __
पश्चिम : __
उत्तर : __
दक्षिण : __
Verification (सत्यापन)
मैं, __, उपर्युक्त वादी, यह सत्यापित करता/करती हूँ कि वादपत्र के पैरा 1 से ___ तक के कथन मेरे व्यक्तिगत ज्ञान पर आधारित एवं सत्य हैं तथा शेष कथन अभिलेखों एवं प्राप्त जानकारी के आधार पर सत्य एवं विश्वास योग्य हैं। कोई भी तथ्य जानबूझकर नहीं छिपाया गया है।
स्थान : __
दिनांक : //20__
वादी
(हस्ताक्षर)

-litem law associates

28/06/2026

#हाँ" कह देना ही कानूनी सहमति (Consent) नहीं होता। यदि सहमति डर, धोखे, भ्रम, मानसिक अस्वस्थता, नशे या कम आयु के कारण दी गई है, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 28 उसे वैध सहमति नहीं मानती। इसलिए कानून हमेशा स्वतंत्र, स्वैच्छिक और समझदारी से दी गई सहमति को ही मान्यता देता है। ⚖️📚

⚖️ की धारा 28 – भय या भ्रम में दी गई सहमति (Consent)

#भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 28 यह स्पष्ट करती है कि किन परिस्थितियों में दी गई सहमति (Consent) वैध नहीं मानी जाएगी।

#सहमति अमान्य मानी जाएगी यदि—
(क) सहमति किसी व्यक्ति द्वारा चोट के #भय (Fear of Injury) या तथ्य के #भ्रम (Misconception of Fact) में दी गई हो और कार्य करने वाला व्यक्ति यह जानता हो या उसे विश्वास करने का कारण हो कि सहमति भय या भ्रम के कारण दी गई है।
(ख) सहमति देने वाला व्यक्ति #मानसिक अस्वस्थता (Unsoundness of Mind) या नशे (Intoxication) के कारण उस कार्य की प्रकृति और परिणाम समझने में असमर्थ हो।
(ग) सामान्यतः यदि सहमति देने वाला व्यक्ति 12 वर्ष से कम #आयु का है, तो उसकी सहमति वैध नहीं मानी जाएगी।
#सरल उदाहरण
यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को झूठा विवाह का विश्वास दिलाकर उसकी सहमति प्राप्त करता है, और यह साबित हो जाए कि सहमति भ्रम के कारण दी गई थी, तो ऐसी सहमति कानून की दृष्टि में वास्तविक सहमति नहीं मानी जा सकती।
IPC में समकक्ष प्रावधान
BNS की धारा 28 पूर्व IPC की धारा 90 के समान है।

#कानून केवल सहमति नहीं, बल्कि स्वतंत्र और समझदारी से दी गई सहमति को मान्यता देता है — भय, भ्रम या असमर्थता में दी गई सहमति, सहमति नहीं है।" ⚖️📚

-litem law associates #🧑‍🎓⚖️✍️

Address

Delhi

Opening Hours

Monday 10am - 7pm
Tuesday 10am - 7pm
Wednesday 10am - 7pm
Thursday 10am - 7pm
Friday 10am - 7pm
Saturday 10am - 7pm

Telephone

9811750070

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Ad. Litem Law Associates posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to Ad. Litem Law Associates:

Shortcuts

Share