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25/10/2024

दीपावली के विशेष उपाय तंत्र प्रयोग

सनातन धर्मावलंबियों के प्रमुख त्योहारों में से एक पांच दिवसीय पर्व दीपावली भी है। इस पर्व के मुख्य दिन यानि दिवाली पर तंत्र और तांत्रिक वस्तुओं का महत्व कुछ खास ही माना जाता है।

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दिवाली की रात वैसे भी अमावस्या होती है। और अमावस्या को वैसे भी बहुत रहस्यमयी माना जाता है।

रहस्यमयी होती है अमावस्या!

शास्त्रों में अमावस्या तिथि का स्वामी पितृदेव को माना जाता है। हिन्दू-धर्म में पूर्णिमा, अमावस्या और ग्रहण के रहस्य को उजागर किया गया है। इसके अलावा वर्ष में ऐसे कई महत्वपूर्ण दिन और रात हैं, जिनका धरती और मानव मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
उनमें से ही हर माह में पड़ने वाले 2 दिन सबसे महत्वपूर्ण हैं- पूर्णिमा और अमावस्या। पूर्णिमा और अमावस्या के प्रति बहुत से लोगों में डर है। खासकर अमावस्या के प्रति ज्यादा डर है।

शाक्तों का पर्व दिवाली:

पांच दिवसीय दीपावली पर्व के तीसरे दिन यानि दिवाली की विशेष रात्रि को तांत्रिक विधि द्वारा सिद्धि प्राप्त करने की विशेष परंपरा रही है।

दिवाली का पर्व विशेष रूप से शाक्तों का पर्व है। शाक्त यानि तांत्रिक,ये वे होते हैं जो विभिन्न दस महाविद्याओं या महाशक्तियों में से किसी एक की उपासना करते हैं। ये दीपावली की रात को शाक्त शक्ति का विशेष रूप से आवाहन करते हैं, ताकि पूजा करके अपनी शक्तियों को बढ़ा सकें।

ये हैं दस महाविद्याएं या महाशक्तियां:
1. महाकाली 2. मां तारा 3. मां षोडशी 4. मां भुवनेश्वरी
5. मां छिन्नमस्तिका 6. मां त्रिपुर भैरवी 7. मां धूमावती 8. माता श्री बगलामुखी 9. मां मातंगी 10. मां कमला

माना जाता है कि इन महाविद्याओं की श्रृद्धापूर्वक साधना करने से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं। आत्म-ज्ञान बढ़ता है, अलौकिकता आती है।

ऐसे उपाय जिससे घर में कभी नहीं होगी धन की कमी :

दिवाली की रात करें ये टोने-टोटके और उपाय, साल भर बरसेगा धन...

1. दिवाली वाले दिन लक्ष्मी पूजन के बाद घर के सभी कमरों में शंख और घंटी बजाना चाहिए। इससे घर की सारी निगेटिविटी दूर हो जाएगी।
2. दीपावली पर तेल का दीपक जलाएं और दीपक में एक लौंग डालकर हनुमानजी की आरती करें।
3. दिवाली वाले दिन शिवलिंग पर अक्षत यानी चावल चढ़ाएं। ध्यान रहें सभी चावल पूर्ण होने चाहिए। खंडित चावल न हो। ये काम मंदिर में ही करें।
4. दिवाली पर महालक्ष्मी के पूजन में पीली कौड़ियां रखें। इससे धन संबंधी सभी परेशानी दूर होगी।
5. लक्ष्मी पूजन में हल्दी की गांठ जरूरी रखें और पूजा के बाद इसे अपने तिजोरी में रखें।
6. दीपावली के दिन झाड़ू अवश्य खरीदना चाहिए। पूरे घर की सफाई नई झाड़ू से करें। जब झाड़ू का काम न हो तो उसे छिपाकर रखें।
7. दीवाली के दिन किसी मंदिर में झाड़ू का दान करें। यदि आपके घर के आसपास कहीं महालक्ष्मी का मंदिर हो तो वहां गुलाब की सुगंध वाली अगरबत्ती का दान करें।
8. दिवाली अमावस्या के दिन पड़ती है। इसलिए इस दिन पीपल के पेड़ में जल जरूर दें। इससे शनि के दोष और कालसर्प दोष खत्म हो जाता है। साथ ही देर रात पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दीपक जलाएं। ध्यान रखें दीपक लगाकर चुपचाप अपने घर लौट आएं, पलटकर न देखें।
9. दीपावली पर पूजा में लक्ष्मी यंत्र, कुबेर यंत्र और श्रीयंत्र स्थापित करें। स्फटिक का श्रीयंत्र बेेहतर होगा।
10. दीपावली की रात लक्ष्मी पूजा करते समय एक थोड़ा बड़ा घी का दीपक जलाएं, जिसमें नौ बत्तियां लगाई जा सके। सभी 9 बत्तियां जलाएं और लक्ष्मी पूजा करें।
11. प्रथम पूज्य श्रीगणेश को दूर्वा अर्पित करें। दूर्वा की 21 गांठ गणेशजी को चढ़ाने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। दीपावली के शुभ दिन यह उपाय करने से गणेशजी के साथ महालक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है।
12. दीपावाली पर श्रीसूक्त एवं कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। गोपाल सहस्त्रनाम के 108पाठ एवम् रामरक्षा स्तोत्र या हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ भी किया जा सकता है।

मान्यता: ये हैं कुछ खास विधि...
1. घर में किसी प्रकार की बाधा हो तो दीपावली की रात में उल्लू पर विराजी या उल्लू के साथ मां लक्ष्मीजी की प्रतिमा के समक्ष लाल चंदन की माला से जाप करें। साथ ही माला के साथ इस नवग्रह शांति मंत्र को पढ़ें।
मंत्र : ॐ ह्रीं नवग्रह बाधा दूर कुरु कुरु स्वाहा।।
2. धन पाने के लिए दीपावली की कालरात्रि बहुत ही उपयोगी व सिद्धिदायिनी मानी गई है। इस दिन मंत्र जाप करने से निश्चित ही घर की दरिद्रता दूर कर मां लक्ष्मीजी मनोकामना की पूर्ति करती है।

ऐसे करें मंत्र का जाप –

सामने लक्ष्मी मां की ऐसी प्रतिमा या तस्वीर हो जिसमें वह उल्लू के साथ हों। जहां तक हो सके शंख की माला या कमलगट्टे की माला लेकर इस मंत्र का जाप करें।

मंत्र: ॐ नमो उलूकवाहनी विष्णु प्रिया भगवति लक्ष्मी दैव्ये मम ।।
दुर्भाग्यनाशाय नाशाय सौभाग्य-वृद्धि कुरु कुरु श्रां श्रं श्रै श्रौ फट् स्वाहा। या
इस अन्य उल्लू मंत्र का जाप करें: ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं ॐ फट् स्वाहा।

यह मंत्र लक्ष्मीजी का श्रेष्ठ मंत्र व अत्यंत सिद्धिदायक के साथ ही लाभप्रद माना गया है।
दिवाली की रात के टोने-टोटके और उपाय...
मान्यता के अनुसार महालक्ष्मी के महामंत्र

ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद् श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मयै नम:

का कमलगट्टे की माला से कम से कम 108 बार जप करेंगे तो आपके उपर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी।
यही नहीं आप चाहें तो लक्ष्मी पूजन में सुपारी रखें। सुपारी पर लाल धागा लपेटकर अक्षत, कुमकुम, पुष्प आदि पूजन सामग्री से पूजा करें और पूजन के बाद इस सुपारी को तिजोरी में रखें।

ऐसे समझें दिवाली रात को किए जाने वाले तंत्र प्रयोग को...

दिवाली पर तंत्र प्रयोग:

1) लक्ष्मी पूजन के वक्त चांदी के कुछ पुराने सिक्के लें। इन्हें अन्य सिक्कों और कौड़ियों के साथ पूजन में रखकर हल्दी और केसर से पूजा करें। फिर इन्हें अपने गल्ले या तिजोरी पर रख दें। माना जाता है ऐसा करने से कभी भी धन की कमी नहीं रहती।
2) धनतेरस यानि दीपावली पर्व के पहले दिन की सुबह जल्दी स्नान कर लक्ष्मी जी के मंदिर में जाएं। उन्हें कमल फूल और सफेद रंग की मिठाई अर्पित करें। वहीं इस दिन शुद्धता के साथ पूजा के वक्त पीले रंग के वस्त्र धारण कर किसी आसन पर उत्तर दिशा की ओर मुंह कर बैठ जाएं। यहां अपने सामने रखे महा लक्ष्मी यंत्र/ श्री कनकधारा यंत्र/ कुबेर यंत्र/ श्री मंगल यंत्र/ श्री यंत्र की अब विधि विधान से इनकी पूजा करें। वहीं दूसरे दिन उन्हें अपने पूजा स्थल पर स्थापित कर दें और प्रतिदिन धूप-दीप से उनकी पूजा करें। मान्यात के अनुसार ऐसाकरने से कभी भी धन की कमी नहीं पास आएगी।
3) छोटे आकार का श्रीफल (नारियल) लेकर दीपावली वाले दिन विधि-विधान से उसकी पूजा करें। अब इसे एक लाल रंग के कपड़े में बांधकर किसी की नजर ना पड़े ऐसी जगह पर रख दीजिए। माना जाता है ऐसा करने से मां लक्ष्मी आप पर अति प्रसन्न होगी।
4) दीपावली पर्व के तीसरे यानि दिवाली वाले दिन रात में लक्ष्मी पूजन के वक्त मोती शंख या दक्षिणावर्ती शंख की पूजा करें। इसके बाद दूसरे दिन उन्हें अपनी तिजोरी में रख दें। कहा जाता है कि यह टोटका धन वृद्धि के साथ साथ परिवार वालों के मध्य में प्रेम की वृद्धि करता है।
5) दिवाली वाले दिन पीपल के पेड़ के नीचे तेल का एक दीपक जलाएं । इसके बाद वहां से लौटते वक्त पीछे ना देखें। हर शनिवार इस प्रयोग को एक वर्ष तक नियमित करें। ऐसा करने धन की प्राप्ति होने की मान्यता है।
6) दिवाली वाली रात को लक्ष्मी पूजन के वक्त सफेद रंग की ग्यारह गूंजा लेकर इनकी पूजा करें। फिर अगले दिन स्नान के बाद इन्हें अपने गल्ले में रख दें। माना जाता है कि ऐसा करने से अटूट धन की प्राप्ति होती है।
7) लक्ष्मी पूजन में दिवाली वाले दिन बिना टूटे हुए एक चुटकी अक्षत और पांच कौड़ियां एक सफेद रंग के कपड़े में बांधकर रख लें, और फिर रात को इसकी पूजा करें। दूसरे दिन शुद्ध होकर इसे अपने गल्ले में रखें। माना जाता है ऐसा करने से भी कभी पैसे की कमी नहीं होती है।

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22/10/2024

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03/09/2024

> तुलसीदास जी कृत हनुमान चालीसा
> रमेश शर्मा

40 चौपाइयों में तुलसीदास जी ने हनुमान जी की स्तुति की है। इनमें हनुमान जी के स्वरुप के बारे में बताया है। कहा जाता है कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमान जी और रामजी के साक्षात दर्शन किए थे। उन्होने हनुमान जी के बालों से लेकर रंग-रुप तक के बारे में बताया है। इसके बाद उन्होंन हनुमान जी कृपा के बारे में बताया है कि उनकी कृपा से क्या-क्या मिल जाता है। तुलसीदास जी ने हनुमान जी की राम भक्ति को भी प्रणाम किया है। इसके साथ ही हनुमान जी के कई महान कामों के बारे में भी तुलसीदास जी ने बताया है।

जिसे पढ़ना बेहद प्रभावशाली माना जाता है। इसलिए, सभी लोग हनुमान चालीसा रोजाना पूरी भक्ति के साथ पढ़ते हैं। लेकिन जब इसे तुलसीदास ने लिखा था, तो उनके साथ कुछ अनोखी घटना होती थी।

दरअसल, जब तुलसीदास हनुमान चालीसा लिखते थे, तो वे लिखे हुए पत्रों को रात के समय संभालकर रख देते थे। लेकिन जब सुबह उठकर देखते थे, तो रात में उन्होंने जो कुछ भी लिखा होता था, वो सब मिटा हुआ होता था। कई दिनों के प्रयास के बाद भी रोज का परिणाम वही था।
अब सवाल ये उठता है की आखिर कैसे पूरी हुई हनुमान चालीसा?

तुलसीदास जी हनुमान चालीसा की शुरुआत निम्न चौपाई से करते थे

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा। ………..

तुलसीदास हनुमान चालीसा लिखते और रात के समय संभालकर रखते थे। लेकिन जब सुबह उठकर देखते वो सब मिटा हुआ होता तुलसीदास जी ने गंभीरता से सोचा आखिर ऐसा रोज क्यों होता है | जब कुछ भी समाधान नहीं मिला तो उन्होंने हनुमान जी की आराधना की। हनुमानजी प्रकट हुए, तो तुलसीदास ने उनसे पूछा कि 'मैं हनुमान चालीसा लिखता हूँ, तो वह रातोंरात क्यों मिट जाता है'।

इसपर हनुमानजी ने तुलसीदास को जवाब दिया कि उनकी स्तुति से पहले उनके प्रभु राम की स्तुति के बिना ये नहीं लिखी जा सकती।
'यदि प्रशंसा ही लिखनी है, तो मेरे प्रभु श्री राम की लिखो, मेरी नहीं'।

तो तुलसीदास ने हनुमान चालीसा की पहली पंक्ति लिखी

“ श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।“

हनुमान को गुरु बनाकर उन्होंने राम को पाने की शुरुआत की।
भावार्थ -
गुरु महाराज के चरण.कमलों की धूलि से अपने मन रुपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला हे।
फिर उन्होंने लिखा

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार।
बल-बुद्धि बिद्या देह मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

भावार्थ -
हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन करता हूं। आप तो जानते ही हैं कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सद्बुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुखों व दोषों का नाश कार दीजिए।

इस तरह हनुमान चालीसा हमारे समक्ष पहुंची

अगर आप सिर्फ हनुमान चालीसा पढ़ रहे हैं तो यह आपको भीतरी शक्ति तो दे रही है लेकिन अगर आप इसके अर्थ में छिपे जिंदगी के सूत्र समझ लें तो आपको जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिला सकते हैं।
हनुमान चालीसा सनातन परंपरा में लिखी गई पहली चालीसा है शेष सभी चालीसाएं इसके बाद ही लिखी गई।
हनुमान चालीसा की शुरुआत से अंत तक सफलता के कई सूत्र हैं।
हनुमान चालीसा की शुरुआत गुरु से हुई है…
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
अर्थ - अपने गुरु के चरणों की धूल से अपने मन के दर्पण को साफ करता हूं।
गुरु का महत्व चालीसा की पहले दोहे की पहली लाइन में लिखा गया है। जीवन में गुरु नहीं है तो आपको कोई आगे नहीं बढ़ा सकता। गुरु ही आपको सही रास्ता दिखा सकते हैं।
इसलिए तुलसीदास ने लिखा है कि गुरु के चरणों की धूल से मन के दर्पण को साफ करता हूं। आज के दौर में गुरु हमारा सलाहकार भी हो सकता है, अधिकारी भी। माता-पिता को पहला गुरु ही कहा गया है।
समझने वाली बात ये है कि गुरु यानी अपने से बड़ों का सम्मान करना जरूरी है। अगर तरक्की की राह पर आगे बढ़ना है तो विनम्रता के साथ बड़ों का सम्मान करें।
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BEFORE STARTING ANY BUSINESS OR TRADE - REGISTER YOUR TRADE MARK / NAME UNDER THE TRADEMARK ACT TO PROTECT IT A trademark is a vital asset for any company or business, as its name or brand primarily identifies it. Protecting this brand or name is tantamount to safeguarding the business itself.

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Mob. No. : 9250979528; 9968176068, 9599567327

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