06/04/2025
सागर की गहराइयों से हुआ दिव्य उद्घाटन
श्रीराम सेतु — वह पावन पुल जिसे भगवान श्रीराम के आदेश पर श्री हनुमान जी और उनकी वानर सेना ने लंका में माँ सीता की मुक्ति हेतु निर्मित किया था — अब समुद्र की गहराइयों से अद्भुत जल-चित्रों के माध्यम से सामने आया है!
वह साहसी स्कूबा गोताखोर बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने इन दृश्यों को संसार के समक्ष लाने का कार्य किया। यह केवल पुराण नहीं, यह हमारे इतिहास का पत्थरों में रचा-बसा अमिट सत्य है।
अब विश्व देखेगा कि रामायण कोई कथा नहीं, अपितु भारत का गौरवशाली अतीत है।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम – सनातन संस्कृति के शाश्वत आलोक
भगवान श्रीराम केवल एक राजा नहीं, अपितु सनातन धर्म की मूल आत्मा हैं। वे धर्म, कर्तव्य और मर्यादा के अद्वितीय प्रतीक हैं। उनका जीवन एक ऐसा आदर्श प्रस्तुत करता है जिसमें पुत्र, भ्राता, पति, मित्र, योद्धा और राजा सभी रूपों में उच्चतम आचरण की मर्यादा निभाई गई।
श्रीराम ने न केवल रावण जैसे अधर्मी का संहार किया, बल्कि रामराज्य की स्थापना कर यह सिद्ध किया कि धर्म और न्याय से शासित समाज ही सच्चा कल्याणकारी राज्य होता है। उनका जीवन शौर्य, करुणा, त्याग, समर्पण और सत्य का ऐसा दीप है, जो युगों-युगों तक मानवता का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा।
वाल्मीकि रामायण से लेकर गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस तक, श्रीराम की गाथा हर भारतीय के हृदय में रची-बसी है। वे केवल दिव्य अवतार नहीं, अपितु जीवन जीने की सर्वोत्तम विधि हैं। वे हमारे धर्म, संस्कृति और आत्मा के सबसे उज्ज्वल प्रतीक हैं।
आज जब अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर पुनः जागृत हुआ है, यह केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि भारत की आत्मा के पुनर्जागरण का उत्सव है।
जय श्रीराम!
हर हर महादेव!
वंदे रामं। वंदे सनातनम्।
दिल से