Juris Legal Associate

Juris Legal Associate Professional Advocate - Swati Jain

पत्नी को 'स्त्रीधन' से वंचित नहीं किया जा सकता, भले ही उसके पास कोई बिल या रसीद नहीं हो,:छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट।छत्तीसगढ़ हा...
07/08/2026

पत्नी को 'स्त्रीधन' से वंचित नहीं किया जा सकता, भले ही उसके पास कोई बिल या रसीद नहीं हो,:छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी को उसके स्त्रीधन (Stridhan) से केवल इस आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता कि उसके पास आभूषण या अन्य वस्तुओं के बिल या रसीदें उपलब्ध नहीं हैं।
स्त्रीधन पर पत्नी का पूर्ण स्वामित्व होता है।
पति या ससुराल पक्ष यदि स्त्रीधन लौटाने से इनकार करते हैं, तो पत्नी उसके लिए कानूनी राहत प्राप्त कर सकती है।
स्त्रीधन साबित करने के लिए केवल बिल ही आवश्यक साक्ष्य नहीं है; गवाहों के बयान, विवाह की तस्वीरें/वीडियो, उपहारों की सूची और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी न्यायालय द्वारा विचार किए जा सकते हैं।

05/08/2026

498a IPC का केस...पति-पत्नी के समझोते के बाद भी चल सकता है...??



जिम्मेदारी नहीं निभा सकते तो डॉक्टर कहलाने का हक नहीं:-सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद में एक मासूम बच्ची के दुष...
04/08/2026

जिम्मेदारी नहीं निभा सकते तो डॉक्टर कहलाने का हक नहीं:-सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद में एक मासूम बच्ची के दुष्कर्म के बाद हुई मौत से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अस्पतालों और डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की न्यायालय ने कहा कि यदि कोई डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा सकता, तो उसे डॉक्टर कहलाने का अधिकार नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी अस्पताल में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो मरीज को बिना देरी उचित अस्पताल भेजा जाना चाहिए केवल इलाज से इनकार करना स्वीकार्य नहीं है।

न्यायालय ने यह भी कहा कि गरीब होने के कारण किसी मरीज की अनदेखी नहीं की जा सकती यह मानवता के साथ विश्वासघात है अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में डॉक्टरों को अपने आचरण पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
#सुप्रीम_कोर्ट

शिक्षिका होने के साथ आय छिपाने पर अंतरिम भरण-पोषण का आवेदन निरस्तइंदौर की फैमिली कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की ध...
03/08/2026

शिक्षिका होने के साथ आय छिपाने पर अंतरिम भरण-पोषण का आवेदन निरस्त

इंदौर की फैमिली कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 24 के तहत दायर अंतरिम भरण-पोषण एवं वाद व्यय के आवेदन को निरस्त कर दिया।

अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम दृष्टया माना कि पत्नी शिक्षिका होने के साथ कृषि से भी आय अर्जित करती है, लेकिन उसने अपनी वास्तविक आय का पूरा खुलासा नहीं किया।

पति की ओर से यह तर्क दिया गया कि पत्नी आर्थिक रूप से सक्षम है और अपनी आय छिपाकर भरण-पोषण की मांग कर रही है।

अदालत ने यह भी पाया कि उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार आय-व्यय का शपथपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसे प्रतिकूल तथ्य माना गया।

पत्नी द्वारा दायर भरण-पोषण का एक अन्य दावा भी पहले खारिज हो चुका था उपलब्ध परिस्थितियों को देखते हुए फैमिली कोर्ट ने धारा 24 के तहत अंतरिम भरण-पोषण एवं वाद व्यय का आवेदन निरस्त कर दिया।

यह निर्णय इस सिद्धांत को रेखांकित करता है कि अंतरिम भरण-पोषण के मामलों में पक्षकारों द्वारा आय और आर्थिक स्थिति का सही एवं पूर्ण खुलासा करना आवश्यक है प्रत्येक मामले का निर्णय उसके अपने तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है।
#फैमिलीकोर्ट #भरणपोषण #धारा24 #हिंदूविवाहअधिनियम #इंदौर

👨‍⚖️⚖️🗣️👉दूसरी पत्नी भी पारिवारिक पेंशन की हकदार:-हिमाचल हाईकोर्ट हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने पारिवारिक पेंशन से जुड़े एक...
03/08/2026

👨‍⚖️⚖️🗣️👉दूसरी पत्नी भी पारिवारिक पेंशन की हकदार:-हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने पारिवारिक पेंशन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी महिला का विवाह ऐसे व्यक्ति से हुआ हो जिसकी पहली पत्नी जीवित थी, तो ऐसा विवाह कानून की दृष्टि में भले ही वैध न माना जाए, लेकिन केवल इसी आधार पर दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता।

खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि दूसरी पत्नी के साथ संबंध को अनैतिक नहीं कहा जा सकता। सामाजिक न्याय और संवेदनशीलता के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने माना कि ऐसी महिला को पारिवारिक पेंशन का लाभ देने से केवल तकनीकी आधार पर इनकार करना उचित नहीं है।

#हिमाचलप्रदेशहाईकोर्ट #पारिवारिकपेंशन #दूसरीपत्नी #हाईकोर्ट #सरकारीकर्मचारी

02/08/2026
"विवाह प्रमाण पत्र नहीं, फिर भी भरण-पोषण का हक" — इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसलाइलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि बिना शादी जन्...
01/08/2026

"विवाह प्रमाण पत्र नहीं, फिर भी भरण-पोषण का हक" — इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि बिना शादी जन्मी संतान और उसकी मां भी भरण-पोषण की हकदार हैं, और सिर्फ विवाह प्रमाण पत्र न होने के आधार पर उन्हें दर-दर भटकने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता।

न्यायमूर्ति अचल सचदेव ने कहा, पिता का कर्तव्य है कि वह अपनी वैध या अवैध हर संतान का पालन-पोषण करे। इसी टिप्पणी के साथ कोर्ट ने महाराजगंज परिवार न्यायालय के उस आदेश को आंशिक रूप से रद्द कर दिया, जिसमें एक महिला को सिर्फ इसलिए भरण-पोषण देने से इनकार किया गया था क्योंकि उसके पास वैध विवाह का कोई कागजी प्रमाण नहीं था।

मामले के मुताबिक, महिला ने गोरखपुर के एक डिग्री कॉलेज में तैनात लैब टेक्नीशियन से खुद के लिए पच्चीस हजार और बेटे के लिए पंद्रह हजार रुपये मासिक भरण-पोषण की मांग की थी। दोनों ने 21 सितंबर 2017 को कोर्ट मैरिज के लिए आवेदन किया था, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही साथ रहने लगे, जिसके बाद एक बेटे का जन्म भी हुआ।

बाद में दहेज की मांग को लेकर विवाद बढ़ा और 2019 में महिला को मारपीट कर घर से निकाल दिया गया। पति ने विवाह की वैधता से इनकार तो किया, लेकिन यह स्वीकार किया कि दोनों साथ रहे और उनके संबंध से बेटा हुआ।

हाईकोर्ट ने कहा, भरण-पोषण एक कल्याणकारी प्रावधान है, और विवाह की तकनीकी परिभाषाओं में उलझाकर किसी को इससे वंचित करना कानून की मूल भावना के खिलाफ है।

सास ससुर के साथ ना रहने वाली बेटियां ही अक्सर अपने पीहर में जाकर ज्ञान देती हैं...माता-पिता की सेवा करना चाहिए/घर में बड...
31/07/2026

सास ससुर के साथ ना रहने वाली बेटियां ही अक्सर अपने पीहर में जाकर ज्ञान देती हैं...माता-पिता की सेवा करना चाहिए/घर में बड़ों का होना सिर पर बडों आशीर्वाद होना बड़े ही सौभाग्य की बात होती है

वक्त बदलते देर नहीं लगती साहब, क्योंकि समय कभी एक जैसा नहीं रहता। आज जो परिस्थिति कठिन लग रही है, कल वही आपके अनुभव और स...
30/07/2026

वक्त बदलते देर नहीं लगती साहब, क्योंकि समय कभी एक जैसा नहीं रहता। आज जो परिस्थिति कठिन लग रही है, कल वही आपके अनुभव और सफलता की वजह बन सकती है। लेकिन जो इंसान हालातों के आगे हार नहीं मानता, बल्कि अपनी मेहनत, हिम्मत और सकारात्मक सोच से वक्त की दिशा बदल देता है, वही जिंदगी का असली सिकंदर कहलाता है। परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, मजबूत इरादों वाला व्यक्ति अपने कर्मों से अपनी पहचान बनाता है। याद रखिए, समय का इंतजार करने वाले बहुत होते हैं, लेकिन समय को अपनी मेहनत से बदलने वाले ही इतिहास बनाते हैं।
जय जिनेंद्र 🙏🙏

Address

E22 Ganpati Enclave
Bhopal
462042

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Juris Legal Associate posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share