26/11/2020
26 नवंबर 1949 को आज ही के दिन देश ने भारतीय संविधान के मसौदे को अपनाया था। इसके बाद ही 26 जनवरी 1950 से इसे देशभर में लागू किया गया और तब से हम गणतंत्र दिवस मनाने लगे। यानी आज का दिन देश के गणतंत्र या कहें लोकतंत्र का बुनियादी दिन है। देश को कानून मिला था जिससे आज तक देश में शासन, प्रशासन और जनता चल रही है।
देश के संविधान को सर्वोपरि स्थान दिया गया है। न तो कोई सरकार, राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट और न ही प्रधानमंत्री इससे ऊपर हैं। सभी को इसके दायरे में रहकर ही काम करना होता है। भारतीय संविधान एक हस्तलिखित दस्तावेज है, इसे प्रिंटिंग मशीन में नहीं छापा गया है। इसको प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने अपने हाथों से इटैलिक स्टाइल में लिखा था। हां इसके बाद इसकी प्रिंटिंग कॉपी बनाई गई ताकि देश में कानून की पढ़ाई करने वाले से लेकर कानूनवेत्ता तक इसकी पढ़ाई करें या अनुपालन करने में सहारा लें।
भारतीय संविधान को विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान माना गया है। इसमें कुल 25 भाग हैं, जिसके अंतर्गत 448 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियां हैं। संविधान के इंग्लिश संस्करण में आपको कुल 117,369 शब्द मिल जाएंगे। इसको लिखने में प्रेम बिहारी जी को कुल 254 पेन निब्स का इस्तेमाल करना पड़ा था और 6 महीने का वक्त लगा था। यही नहीं उस दौर में लिखित संविधान बनाने पर लगभग ₹6.3 करोड़ रुपये खर्चे गए थे।
संविधान की प्रस्तावना...
"हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की और एकता अखंडता सुनिश्चित करनेवाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प हो कर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई० "मिति मार्ग शीर्ष शुक्ल सप्तमी, संवत दो हज़ार छह विक्रमी) को एतद संविधान को अंगीकृत, अधिनियिमत और आत्मार्पित करते हैं."
इसे विश्व का सबसे बड़ा संविधान माना जाता है...
सरकार ने 19 नवंबर, 2015 को राजपत्र अधिसूचना की सहायता से 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में घोषित किया था।