04/07/2024
#धारा_69 "
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की यह धारा पुरुषों के लिए काल बनने वाली है। निश्चित तौर पर इसका व्यापक दुरुपयोग देखने को मिलेगा।
यह धारा कहती है-
"कोई भी, धोखे से या किसी महिला से शादी करने का वादा करके उसे पूरा करने के इरादे के बिना, उसके साथ संभोग करता है, ऐसा संभोग बलात्कार के अपराध की श्रेणी में नहीं आता है, उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है और वह जुर्माना भी दे सकता है।
स्पष्टीकरण: "धोखेबाज़ साधनों" में रोजगार या पदोन्नति का झूठा वादा, पहचान छुपाने के बाद प्रलोभन या धोखा देना शामिल होगा।
यह धारा स्पष्ट रूप से पुरुषों और महिलाओं के बीच भेदभाव करते हुए मानती है कि एक पुरुष ही किसी महिला से यौन संबंध बनाने के लिए झूठा वादा कर सकता है और महिला ऐसा कुछ भी गलत नहीं कर सकती है। आज के सामाजिक परिवेश को देखते हुए यह बहुत ही नासमझी भरा विचार है क्योंकि आधुनिक समाज में पुरुष और महिला दोनों में ऐसा करने की क्षमता और कौशल है। किसी भी अन्य कारण से रिश्ता टूटने पर बदले की भावना से यह धारा लगाई जा सकती है जिसका पुरुष के पास बचाव का सीमित विकल्प होगा क्योंकि उसके लिए यह सिद्ध कर पाना लगभग असंभव होगा कि उसके द्वारा किया गया शादी का वादा झूठा नहीं था। लिव इन में रहने वाले या शादी तय हो जाने पर ही मिलना-जुलना शुरू कर देने वाले लड़कों को ज्यादा खतरा होगा। इसमें नौकरी और प्रमोशन का वादा जोड़ के रही सही कसर भी पूरी कर दी गई है। लोगों का अपने सहकर्मियों के साथ काम करना मुश्किल हो जायेगा। यदि कोई महिला नौकरी या प्रमोशन के लिए ऐसा करती भी है तो यह उस महिला व पुरुष के मध्य एक अवैध करार होगा जिसके परिणामों/दुष्परिणामों के बारे में वह पूरी तरह से भिज्ञ होगी। ऐसी स्थिति में केवल पुरुष को दोषी मानना असंवैधानिक है।
यह धारा महिलाओं के लिए भी अत्यंत अपमानजनक है क्योंकि यह मानती है कि महिलाएँ नौकरी या प्रमोशन के लिए बेड पर जा सकती हैं।
पाँच सितारा AC कमरे में बैठे बेदिमाग इंसानों की उपज यह धारा आम जन मानस पर बहुत भारी पड़ेगी।