Saurabh Pathak Advocate

Saurabh Pathak Advocate Practicing at Allahabad High Court

11/09/2024

'To Avoid Trial Process Itself Being The Punishment' : Supreme Court Grants Bail To Undertrial; Reaffirms Right To Speedy Trial
The Court also quoted the "poignant lines" written by author Oscar Wilde while under incarceration.

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शिकारी खुद शिकार हो गया 😊......
05/08/2024

शिकारी खुद शिकार हो गया 😊......

18/07/2024
04/07/2024

#धारा_69 "

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की यह धारा पुरुषों के लिए काल बनने वाली है। निश्चित तौर पर इसका व्यापक दुरुपयोग देखने को मिलेगा।

यह धारा कहती है-
"कोई भी, धोखे से या किसी महिला से शादी करने का वादा करके उसे पूरा करने के इरादे के बिना, उसके साथ संभोग करता है, ऐसा संभोग बलात्कार के अपराध की श्रेणी में नहीं आता है, उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है और वह जुर्माना भी दे सकता है।

स्पष्टीकरण: "धोखेबाज़ साधनों" में रोजगार या पदोन्नति का झूठा वादा, पहचान छुपाने के बाद प्रलोभन या धोखा देना शामिल होगा।

यह धारा स्पष्ट रूप से पुरुषों और महिलाओं के बीच भेदभाव करते हुए मानती है कि एक पुरुष ही किसी महिला से यौन संबंध बनाने के लिए झूठा वादा कर सकता है और महिला ऐसा कुछ भी गलत नहीं कर सकती है। आज के सामाजिक परिवेश को देखते हुए यह बहुत ही नासमझी भरा विचार है क्योंकि आधुनिक समाज में पुरुष और महिला दोनों में ऐसा करने की क्षमता और कौशल है। किसी भी अन्य कारण से रिश्ता टूटने पर बदले की भावना से यह धारा लगाई जा सकती है जिसका पुरुष के पास बचाव का सीमित विकल्प होगा क्योंकि उसके लिए यह सिद्ध कर पाना लगभग असंभव होगा कि उसके द्वारा किया गया शादी का वादा झूठा नहीं था। लिव इन में रहने वाले या शादी तय हो जाने पर ही मिलना-जुलना शुरू कर देने वाले लड़कों को ज्यादा खतरा होगा। इसमें नौकरी और प्रमोशन का वादा जोड़ के रही सही कसर भी पूरी कर दी गई है। लोगों का अपने सहकर्मियों के साथ काम करना मुश्किल हो जायेगा। यदि कोई महिला नौकरी या प्रमोशन के लिए ऐसा करती भी है तो यह उस महिला व पुरुष के मध्य एक अवैध करार होगा जिसके परिणामों/दुष्परिणामों के बारे में वह पूरी तरह से भिज्ञ होगी। ऐसी स्थिति में केवल पुरुष को दोषी मानना असंवैधानिक है।
यह धारा महिलाओं के लिए भी अत्यंत अपमानजनक है क्योंकि यह मानती है कि महिलाएँ नौकरी या प्रमोशन के लिए बेड पर जा सकती हैं।
पाँच सितारा AC कमरे में बैठे बेदिमाग इंसानों की उपज यह धारा आम जन मानस पर बहुत भारी पड़ेगी।

01/03/2024

With Deeeep Meaning!!!

"Tareekh Shah" 😊
20/11/2023

"Tareekh Shah" 😊

An independent platform for cutting-edge, progressive, legal, and political opinion.

18/11/2023

"This is one platform where your hard work, commitment and patience ultimately allow you to win the professional and ultimately allow you to win race and create your space... I am firm believer that it is not necessary that you should come with a special background or special status to succeed in the profession,"

- Hon'ble Justice Suryakant, SCI

26/07/2023

खुदा महफूज रखे आपको तीनों बलाओं

से!

वकीलों से, हकीमों से, हसीनों की

निगाहों से!!

-अकबर इलाहाबादी

21/07/2023

"All legal battles are worth fighting, but some are not worth winning,"

- Hon'ble Kerala High Court

 #अनुकरणीय_चरित्रमा० सुप्रीम कोर्ट के मा० जस्टिस वी राम सुब्रमण्यम की कोर्ट युवा वकीलों के लिए एक बेहतरीन जगह रही है। वो...
23/05/2023

#अनुकरणीय_चरित्र

मा० सुप्रीम कोर्ट के मा० जस्टिस वी राम सुब्रमण्यम की कोर्ट युवा वकीलों के लिए एक बेहतरीन जगह रही है। वो अपने लतीफों से कोर्ट रूम का माहौल हल्का रखकर युवाओं को सहज करते थे। युवा वकीलों के लिए सबसे पसंदीदा जज जस्टिस राम सुब्रमण्यम ही रहे। उनकी माँ उनको रोजाना ढाई रुपये देती थीं। इस पैसे में उनको अपने आने जाने का खर्च उठाने के साथ खाना भी खाना होता था। यानि मुश्किलें बहुत ज्यादा थीं। लेकिन जस्टिस राम सुब्रमण्यम ने दिखाया कि कड़ी मेहनत और लगन का कोई विकल्प नहीं है। उनके मन में कुछ बड़ा करने का सपना था और उन्होंने इसे करके भी दिखाया।

18/04/2023

नाबालिग बालक और नाबालिग बालिका के बीच आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनते हैं तो यह कैसे माना जाय कि दोषी केवल बालक ही है! आज के दौर में बालिका भी बालक को बरगला बहका सकती है। लेकिन पॉक्सो एक्ट के अनुसार इस प्रकार के हर मामले में केवल बालक ही दोषी है। इस प्रकार यह एक्ट संविधान द्वारा प्रदत्त विधि के समक्ष समानता के अधिकार का उल्लघंन कर रहा है।

इसी प्रकार अच्छी खासी पढ़ी लिखी समझदार महिला भी आपसी सहमति से संबंध बनाती है और आनंद उठाती है। कई मामलों में पुरुष से आर्थिक लाभ भी लेती है और फिर "शादी का झांसा देकर पुरुष ने बलात्कार किया" ऐसा आरोप लगा देती है। इसमें भी सुधार की आवश्यकता है। यह कानून उस विकृत महिलावादी सोच के दुष्परिणाम हैं जिसमें प्रत्येक पुरुष बलात्कारी घोषित कर दिया जाता है। कितने ही पुरुष झूठे बलात्कार/छेड़खानी के मामलों में बंद हैं जिनके परिवार जीवन सब बर्बाद हो गया है।

दुर्भाग्य से, पुरुष समाज चुपचाप यह अत्याचार सहन कर रहा है और हर दिन छद्म महिलावादियों के विभिन्न प्रयोगों का शिकार हो रहा है। इन कानूनों में बदलाव के लिए समस्त पुरुष समाज को आवाज उठानी चाहिए वरना वह समय दूर नहीं जब हर दूसरा व्यक्ति बलात्कार के आरोपों को झेल रहा होगा।

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